उग्रवादियों का उदय अथवा अतिवादी राजनीति

🥀19वीं शताब्दी के अंतिम और बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में एक नए और तरुण दल का उदय हुआ था
🥀यह नया दिन पुराने नेताओं के आदर्श और ढंगो का कड़ा आलोचक का था
🥀ये क्रूद्ध तरुण लोगचाहते थे कि कांग्रेस का ध्येय स्वराज्यहोना चाहिए
🥀जिसे वे आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरतासे प्राप्त करें
🥀इस कारण इस दल को पुराने उदारवादी की तुलना में उग्रवादी दल कहा गया और इस काल को उग्रवादियों का कालकहा गया
🥀कांग्रेस में फूट की प्रक्रिया उस समय प्रारंभ हो गई थी
🥀जब लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का समाज सुधार के प्रश्न पर उग्रवादी दल अथवा सुधारकोंसे झगड़ा हुआ था
🥀जुलाई 1895 में तिलक और उसके सहयोगियों ने पूना सार्वजनिक सभा में रानाडे और गोखले के अधिकारों को चुनौती देकर उसे समाप्त कर दिया
🥀इस कारण गोपाल कृष्ण गोखलेने एक और पृथक राजनीतिक संगठन दक्कन सभा स्थापित कर ली
🥀बाल गंगाधर तिलक ने गोपाल कृष्ण गोखले के राष्ट्रीय राजनीति में क्षमा याचना के प्रश्न पर एक कच्चा नरकट कहकरबदनाम किया
🥀स्वतंत्रता संघर्ष के इस द्वितीय चरण में एक और उग्रवादी और दूसरी और क्रांतिकारी आंदोलन चलाया गया
🥀दोनों का उद्देश्य ब्रिटिश राज्य से मुक्ति और पूर्ण स्वराज्यकी प्राप्ति था
🥀एक तरफ उग्रवादी विचारधारा के लोग बहिष्कार आंदोलनको आधार बनाकर लड़ रहे थे
🥀 इसके विपरीत दूसरी ओर क्रांतिकारी विचारधारा के लोग बम और बंदूकों के उपयोगसे स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते थे
🥀जहां एक और उग्रवादी शांतिपूर्ण सक्रिय राजनीति आंदोलन में विश्वास करते थे
🥀वही क्रांतिकारी अंग्रेजों को भारत से भगाने में शक्ति और हिंसा के उपयोगमें विश्वास करते थे

🌸🌳🌸बाल गंगाधर तिलक🌸🌳🌸 
💐बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1956 को महाराष्ट्र में स्थित रत्नागिरी जिले के चीखली गांव में हुआ था
💐इन का बचपन का नाम केशव था
💐इनका पूरा नाम लोकमान्य श्री बाल गंगाधर तिलकथा
💐इन्हें लोकमान्य की उपाधिदी गई थी
💐यह विद्वान ,गणितज्ञ ,दार्शनिक और उग्र राष्ट्रवादीव्यक्ति थे
💐इन्होंने भारत की स्वतंत्रता की नींवरखने में सहायता की थी
💐इन्होंने इंडियन होम रूल लीग की स्थापना 1916(पुना)में की और इसके अध्यक्षभी रहे

💐1916 में मोहम्मद अली जिन्ना के साथ लखनऊ समझोताकिया
💐लखनऊ समझौते के तहत आजादी के संघर्ष में हिंदू मुस्लिम एकताका प्रावधान था

💐बाल गंगाधर तिलक नें मराठा दर्पण और केसरी नाम के दो समाचार पत्रशुरू किए थे

💐केसरी समाचार पत्र के छपने वाले लेखों के कारण इन्हें कई बार जेल भेजागया था

💐बाल गंगाधर तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसमें भी शामिल हुए थे
💐लेकिन बाद में 1907 में सूरत अधिवेशन के बाद इन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को छोड़ दिया और इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दो भागोंमें विभाजित हो गया
गरम दल और नरम दल में

💐बाल गंगाधर तिलक गरम दल के नेता थे
💐इस दल में लाला लाजपत राय और विपिन चंद्र पालभी शामिल हुए थे
💐लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल के इस दल में शामिल होने के बाद यह तीनों लाल-बाल-पाल के नाम से जाने जाने लगे
💐उन्होंने सब से पहले ब्रिटिश राज के दौरान पूर्ण स्वराज्य की मांग उठाई थी
💐बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु 1 अगस्त 1920 को मुंबईमें हुई थी
💐इनकी मृत्यु पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इंहें आधुनिक भारत का निर्माता कहा था

💐हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इंहें भारतीय क्रांति के जनककी उपाधि दी थी

💐इन्होंने एक नारा दिया था➖ *स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा यह नारा आगे चलकर बहुत ही प्रसिद्ध हुआ

💐बाल गंगाधर तिलक ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठानेवाले वह महाराष्ट्रीयन नेता थे जो भारतीय संस्कृति और परंपरा में पूरी तरह से विश्वास करते थे

💐यह देश का विकास धार्मिक और सामाजिक विकासके साथ-साथ करना चाहते थे

💐इन्होंने देश में हिंदुओं को एक सूत्र में बांधने और अंग्रेजो की फूट डालो राज करो की नीतिको असफल  करने के लिए 1893 में गणपति उत्सव की शुरुआत की और 1895 में शिवाजी महोत्सव की शुरुआत कि गयी

💐शिवाजी महोत्सव के द्वारा सोए हुए भारतीयों को उनकी क्षत्रियता को याद दिलाने के लिए की गई
💐बाल गंगाधर तिलक द्वारा महाराष्ट्र में गणेश गणेश उत्सव और शिवाजी महोत्सव की शुरुआत सामाजिक तौरपर व्यवस्थित रूप से प्रारंभ की

💐 इस परंपरा को प्रारंभ करने का उद्देश्य आजादी के संदेश को देश के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए एक मंच उपलब्ध करवाना था

💐इस परंपरा के द्वारा भारतीयों के मन में राष्ट्रीय देशप्रेम और आजादी की भावनाओं को जागृत करना था

💐राष्ट्रीय जागृति और मनोबल में वृद्धि करने के उद्देश्यसे इन्होंने गोवध विरोधी समितियों, अखाड़ों और लाठी क्लबों की स्थापनाकी

💐भारतीय संस्कृति परंपरा और इतिहास पर लिखेइनके लिखो से भारत के लोगों में स्वाभिमान की भावना जागृत हुई, अंग्रेजी शासन की क्रूरता और भारतीय संस्कृति के प्रति हीन भावना की आलोचनाए की गई
💐1916 में एनी बेसेंट और मोहम्मद अली जिन्ना के साथ अखिल भारतीय होम रूल लीगऔर अधिक सक्रिय हो गया

💐इन्होंने 1905 में बंग-भंग आंदोलन का पूर्ण जोर-शोर से विरोधकिया था  💐वास्तव में तिलक समकालीन कांग्रेसी नेताओं के भिन्न मिट्टी के बने हुए थे
💐वह सरकार की आलोचना में बहुत स्पष्ट वक्ता और अपने विचारों के लिए बलिदान करने को उद्यत थे
💐तिलक पहले कांग्रेसी नेता थे जिन्हें देश के लिए कई बार जेल यात्रापर जाना पड़ा था
💐तिलक 1882 में पत्रकारिता के कारण जेल गए थे
💐1882 में इन्हें यह सजा कोल्हापुर के महाराजा शिवाजीराव के प्रति दुर्व्यवहार पूर्ण लेख अपने पत्र केसरीमें लिखने के कारण चार माह की सजा हुई थी
💐1896-97 में इन्होंने संपूर्ण महाराष्ट्र में कर ना देने का आंदोलन चलाया था
💐इसी दौरान जनता द्वारा  इन्हे लोकमान्य की उपाधिदी गई थी

💐1897 में इन्हें अपने पत्र केसरी में रैण्ड एंव एयर्स्ट की हत्याको उचित ठहराने  के कारण इन पर राजद्रोह का आरोप लगाकर इन्हें 18 माह की सजा दी गई थी
💐दिसंबर 1897 में अमरावती में हुए कांग्रेस अधिवेशन में तिलक के सहयोगियो ने एक प्रस्ताव पारित करने का प्रयास किया था
💐 इस प्रस्ताव में तिलक की मुक्ति की मांग की गई थी

💐उदारवादी दल के लोगों ने इस प्रस्ताव को अनुमति नहीं दी
💐इस कारण मद्रास अधिवेशन दिसंबर 1898 में तिलक की श्लाघा करनेका प्रस्ताव भी उदारवादी दल वालों ने पारित नहीं होने दिया
💐अगले वर्ष लखनऊ अधिवेशन में जब तिलक ने मुंबई के गवर्नर की निंदा का प्रस्ताव रखा तो वह भी उदारवादी दल वालों ने पारित नहीं होने दिया

💐इससे स्पष्ट हो गया था कि उदारवादी दल वाले लोग तिलक और उसके सहयोगियों को कांग्रेस में सभी पूर्ण पदों से दूर रखना चाहते थे
💐कांग्रेस के इतिहास में बाल गंगाधर तिलक की एक ऐसे नेता थे जिनको कांग्रेस का अध्यक्ष बनने का अवसर नहीं दिया गया था
💐24 जून 1908 को तिलक को फिर से गिरफ्तारकिया गया और उन पर केसरी में प्रकाशित लेखों के आधार पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर 6 वर्ष की सजा दे दी गई
💐इन्हें मांडले जेल (बर्मा)में रखा गया था
💐मांडले प्रवास के दौरानही इन्होंने अपनी पुस्तक गीता रहस्य लिखी थी
💐तिलक की सजा के विरोध में मुंबई के कपड़ा मिल मजदूरों ने पहली राजनीतिक हड़ताल 1908 में की थी
💐लंदन टाइम्स के संवाददाता और इंडियन अनरेस्ट के लेखक वैलेंटाइन चिरोल ने इन्हें भारतीय अशांति का जन्मदाताकहा था