ऊर्दू – क़वायद(व्याकरण)

🌟फ़ेल(क्रिया)– फ़ेल वो है जिस से किसी सह(काम) करना या होना मालूम हो,
⚡जैसे- तमाशा शुरू हुवा
– इस ने ख़त लिखा वगेरा(आदि) I
👉🏻 तमाम अल्फ़ाज मसदर से निकलता है और इस के आखिर में “ना” आता है I
⚡जैसे– खाना, जाना, सोना, वगेरा

👉🏻 मसदर का “ना” हटा ने पर जो बचता है वो “मदा” कहलाता है
⚡जैसे– जा, खा, वगेरा

🌟 तोरे मारूफ/ फ़ेल मारूफ़🌟
वो फ़ेल जिस में फाइल(कर्ता) यानी काम करने वाला  मालुम हो
⚡जैसे- राशीद आया
– हामिद पढ़ रहा है
– ख़ालिद लिखता है वगेरा

🌟 तोरे मजहुल/ फेल मजहूल 🌟
फेल मजहूल इस फेल को कहते है जिस में फ़ेल मालुम ना हो
⚡ जैसे-  कपड़े धूल गये
–  आटा पीस गया
– दरवाजा खोला
– मकान बन गया

✨ अक्सामी फ़ेल(मायने के ऐतबार से ✨
⚡ (1) फ़ेल लाजिम
⚡ (2) फ़ेल मताहदी
⚡ (3) फ़ेल नाकस

🌟(1) फ़ेल लाजिम– जिस में फ़ेल का असर सिर्फ़ फ़ाइल(काम करने वाला) तक रहे, लेकिन वो फ़ाइल के साथ मील कर पूरा होता है
⚡ जैसे- साजीद आया
– राशिद जायेगा

🌟(2) फ़ेल मतादी– वह जिस में फ़ेल का असर फ़ाइल से गुजर कर मफूल (जिस और काम किया जाता है) तक पहुँचे
⚡ जैसे- अहमद ने ख़त लिखा
– राशिद ने दरवाजा खोला
– माजिद किताब पढ़ता है

🌟(3)फ़ेल नाकस- वह जिस में किसी फ़ेल का करना ना बल्के होना पाया जाता है, लेकिन ये फ़ेल किसी पर अशर ना डाले बल्के असर को शाबित करे
⚡ जैसे- अहमद बीमार है
– ख़ालिद काला है

इस का कोई फ़ाइल नही है, बल्के इस का ईस्म फ़ाइल के बजाय मबतदा कहलाता है और जुमले का बाकि हिसा जो हालत या किसी तरह के ख़बर देता है ख़बर कहलाता है
⚡ जैसे-
हामीद         बीमार            था
⬇                    ⬇
मबतदा        खबर

🌟 फ़ाइल 🌟
जिस जरिय से कोई काम हुवा फाइल कहलाता है मतलब की जो काम करता है फाइल कहलाता है या ये कहे जिस के जरिये से कोई काम का होना नही बल्के सहना पाया जाता है
⚡ जैसे- वो बीमार है
– वो मर गया

🌟 मफूल 🌟
वह है जिस पर किसी काम का असर ज़ाहिर हो
⚡ जैसे- अख़्तर ने किताब पढ़ी
– इस में पढ़ने का अशर किताब पर पड़ रहां है

🔮 जुमले और उस के अकसाम 🔮
▪ वो अल्फ़ाज का मजमुआ जिस को सुनने के बाद पूरा मफुम समझ में आजाए और इस वदहत के लिए कोई जरूरत ना हो I

▫जैसे ▫ तुम कल आना I
▫ आम मीठा है I
▫ ख़ालिद इस्कूल गया I

जुमलों के किए कम से कम दो कलमे होना जरूरी है I

▪मरकब जुमलों में सभी मरकब जुमले बराबर की हैसीयत रखते है और मायने और मफुम के ऐतबार से एक दूसरे के मुतजात(विलोम)  तो ऐसे जुमलों को “मुतालिक” जुमला कहा जाता है I
▫ जैसे ▫ हम खेल रहे थे और बच्चे खेल रहे है I


▪जबके कुछ जुमले ऎसे भी होते है जीन में एक जुमला तो असल होता है लेकिन बाक़ी जुमला इस की ताबहे होता है ऐसे जुमलों को “ताबाह” जुमले कहते है I
▫ जैसे- ▫ वो क़िताब जो आपने मगवाई वो में ले आया हूँ I

👆🏻 इस में असल जुमला वो क़िताब में लाया हूँ जबकि इस का ताबह जुमला है जो आप ने मगवाई थी I

♻अहतियाय / बनावट के एतबार से जुमलों की “दो” किसमे होती है I ♻
✴ (1)मुफरीद जुमला ✴
▪ ऐसे जुमले जिस में सिर्फ़ एक फ़ेल हो मुफ़िरद जुमला कहलाते है I
▫ जैसे ▫ अरशद आया I
▫ अय्यूब ने खाना खाया I

✴ (2) मरकब जुमले ✴ (REET-2015 Level L-1)
▪ जब दो या दो से ज्यदा जुमले मील कर किसी मफुम या दो जुमलों को मिलाने वाले जुमले मरकब जुमले कहलाते है
▫ जैसे- साबके(उपसर्ग) और लाबके(प्रत्य)

👉🏻 अगर कोई जुमला “नोई ऐतबार” से ज्यदा गुना बराबरी की हेशियत रखता हो तो वो “हम रतब” जुमला कहलाता है I
💁🏻‍♂ जबकी जो जुमले मुकाबले में बराबर की हेशीयत ना रखता हो बल्के दूसरे के तहत होतो वो जुमला ताबह कहलायेगा I

▫ इस तरह मरकब जुमले दो किस्में होती है I ▫
▪(1) हमरतब जुमले
▪(2) तबह जुमले

♻ऊर्दू में दुनीया और जबानों की तरह जुमले के असल जज(भाग/अंग) दो है ♻
▪(1) मबतदा(उद्धेश्य)
▪(2)खबर (विधेय)

▪(1) मबतदा/ मसनद- वो सह या शक्श जिस का जिकर किया जाये I
▪ (2) ख़बर/मसन्द- जो कुछ इस शक्स या शह की निस्बत जिकर किया जाए I
▫ जैसे- ▫ अख्तर आया
▫ माजिद पढ़ रहा है
इन में जिकर अख़्तर और माजिद  मबतदा है
आया और पढ़ निसबत/खबर है

♻ मायने के एतबार से जुमले की दो किश्मे होती है ♻
▪ (1) जुमला इनशाया- वो जुमला जिस में कोई खबर या इतला ना हो, बल्के किसी तरह का हकुम, मुखालिफत, ताहजुब, सवालात या फिर हरफ फबाईया में से कोई एक पाया जाये I
▫ जैसे- ▫ किताब खोलो
▫ काश तुम आते
▫ वो कौन है.?

▪ जुमला ख़बरया-  वो जुमला जिस में मतकम के जरिये किसी खबर की इतला दी जाती हो,
▫ जैसे- अमर खूबसूरत है
▫ अमरूद मीठा है
▫ इस में अमर और अमरूद की ख़बर पाई जाती है

♻ ख़बर जुमलों की भी दो किश्मे होती है ♻
▪(1) जुमला असमया खबर
▪ (2) जुमला फहालया खबर

✴ ज़माना (काल) ✴
🌟 जमाने तीन है 🌟
🌹(1) माजी(भूतकाल)-  जो गुज़र गया है I
⚡जैसे- वसीम ने क़िताब पढ़ी थी I
–  वो वतन पर मरने के लिए निकलें थे I (EXM.-REET-2015 Level 1st)
⚡ पहचान- था,थी,थे चुका,चुकी,चुके I

🌹(2) हाल(वर्तमान)- मौजूदा वक्त जो अभी चल रहा है I
⚡ जैसे- ज़ावेद खाना खा रहा है I
– वो वतन पर मरने के लिए जा रहे है I
⚡ पहचान- रहा है, रही है,  रहे है I

🌹(3)- मुस्तक़बिल(आने वाला)- जो अब आयेगा इस को मुस्तक़बिल कहते है I
जैसे- हम जाएंगे I
– वो वतन पर मरने के लिए निकलेंगे I

हर फ़ेल(काम) के लिए ये जरूरी है के इन तीनों ज़मानो में से किसी एक ज़माने में वाक्या(कोई बात) हो I
🌟 जमाने के लिहाज़ फ़ेल के अक्साम 🌟
(1) फ़ेल माजी-वो काम जो गुजरे हुवे ज़माने में किया गया हो I
⚡जैसे- हामिद आया I
– इस ने ख़त लिखा I

(2) फ़ेल हाल- वो फ़ेल जो मौजूदा ज़माने में किया जा रहा हो I
⚡ जैसे- आफ़ताब पढ़ता है या पढ़ रहा है I

(3) फ़ेल मुस्तक़बिल- वो फ़ेल जो के आने वाले जमाने में किया जाए गा I
⚡ जैसे-  कलीम कल आयेगा

(4) फ़ेल मदारी- इस में दो ज़मानो के हाल और मुस्तक़बिल की झलक पाई जाती है लेकिन दोनों जमानों के लिए जाना जाता है
⚡ जैसे- वो आया तो में जायूँगा
-तलबा(विद्याथी) पढ़ेगे तो कामयाब होंगे
इस में आया, जायूँगा वगेरा “फ़ेल मदारी” है

(5) फ़ेल अमद- हुकुम के मायने में है जिस में किसी हुकुम के बारे में बात कहि हों (REET-2017 Level 1st)
⚡ जैसे- दरवाज़ा खोलो
– पानी पिलाओ

(6) फ़ेल नही- जिस में किसी काम के लिए मना कहा गया हो और इस में फ़ेल के साथ “मना” या फिर “ना”  आता हो
⚡ जैसे- मत जाओ
– धुप में ना खेलों वगेरा

 🏆 फ़ेल माज़ी की किश्मे 🏆
♻ (1) माज़ी मतालक- वो ज़माना है जिस में सिर्फ़ ये मालूम हो के गुजरे हुवे ज़माने में कोई काम हुवा है I
🎗 जैसे- वो गया I
– ईस ने किताब पढ़ी I

♻ (2) माज़ी क़रीब- वो जमाना है जिस में क़रीब का गुजरा हुवा ज़माना पाया जाये I
🎗 जैसे- वो भी आया I
– अगर में भी घर गया I

♻ (3) माज़ी बाद- माज़ी तमाम वो ज़माना है जिस में दूर का गुज़रा हुवा ज़माना पाया जाए I
🎗 जैसे – इस ने ख़त लिखा था I
– वो बाजार गया था I

♻ (4) माज़ी शर्त या तमना- जिस में गजश्ता ज़माने कोई शर्त पाई जाए, या वो जमाना जिस में गुजरे हुवे जमाने में किसी काम के होने की तमना का होना पाया जाए I
🎗 जैसे- वो पढ़ता है, काश में पढा होता तो क़ामयाब होता

♻ (5) माज़ी शक़/ अहतमाई- वो जमाना है जिस में गुजरे हुवे जमाने में किसी काम के होने में शक पाया जाता है
🎗जैसे- इस ने ख़त पढ़ा होगा I      – वो इस्कूल गया होगा I
–  राशिद क्रिकेट खेल रहा होगा I

♻ (6) माज़ी एस्तमदारी- वो गुजरा हुवा ज़माना जिस में किसी काम का लगातार होना पाया जाए
🎗 जैसे- वो रोज पढ़ता था
-ईस्लाम रोज़ इस्कूल जाता था