धार्मिक नीति (मोहम्मद बिन तुगलक और हिंदू धर्म)

📦मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी बहु संख्यक हिंदू प्रजा के साथ सहिष्णुता का व्यवहार किया

🚨वह दिल्ली सल्तनत का प्रथम सुल्तान था जिसने योग्यता के आधार पर पद देना आरंभ किया

📦उसने हिंदुओं को भी उच्च पद पर नियुक्त किया ,साईं राज उसका एक हिंदू मंत्री था ,दक्षिण का नायब वजीर धारा भी हिंदू था।

📦रतन नामक एक हिंदू को उसने सेहवान( सिंध) का राज्यपाल बनाकर उसे अजीम-उस- सिंध की उपाधि दी,वह हिंदुओं के धार्मिक समारोह और उत्सव में भी भाग लेता था

🚨मुहम्मद बिन तुगलक होली के त्योहार में भाग लेने वाला दिल्ली का प्रथम शासक था

📦उस के समय में योगी स्वतंत्रतापूर्वक भ्रमण करते थे, साधु को ठहरने के लिए उसने धर्मशाला और गौशाला के निर्माण के लिए आदेश और अनुदान दिया

📦वह योगीयो से वाद-विवाद करता था,अपने गुजरात प्रवास के दौरान मुहम्मद बिन तुगलक ने अनेक जैन मंदिरों और जैन संतों को भी अनुदान दिया

📦जैन विद्वान जिनप्रभा सूरी से आधी रात तक बात की और उन्हें अन्य उपहारों के साथ 1000 गाएं दान में दी

📦इस प्रकार जैन विद्वान जंबू जी के साथ भी वाद विवाद के बाद उन्हें धन आदि भेंट स्वरूप दिया, एक अन्य जैन विद्वान राजशेखर को भी उसने संरक्षण प्रदान किया था

📦सुल्तान पालिताना (पालीथाना )स्थित शत्रुंजय मंदिर भी गया

🌟💠🌟मुहम्मद बिन तुगलक और सूफी संत🌟💠🌟

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📦यद्यपि मुहम्मद बिन तुगलक सूफीवाद में विश्वास नहीं करता था,लेकिन सूफी संतों का बहुत आदर करता था

📦वह शेख अलाउद्दीन का शिष्य था

🚨मुहम्मद बिन तुगलक दिल्ली सल्तनत का प्रथम शासक था जिसने अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और बहराइच में सलार मसूद गाजी के मकबरे का दर्शन किया

📦सुल्तान ने बदायूं में मिरम मुलहीम, दिल्ली में शेख निजामुद्दीन औलिया ,मुल्तान में शेख रुकनुद्दीन ,अजोधन में शेख अलाउद्दीन आदि संतों की कब्र और मकबरे बनवाए

📦शेख नसीरुद्दीन चिराग ए दिल्ली सुल्तान के विरोधियों में से एक थे

📦सुल्तान के इस उदार धार्मिक नीति के कारण उलेमा वर्ग ने उसका विरोध किया

📦इसामी और बरनी ने सुल्तान को अधर्मी घोषित किया

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