🎍पूना समझौते का समय-*26 सितंबर 1932
🎍पूना समझौता-महात्मा गांधी और भीमराव अंबेडकर के मध्य
🎍पूना समझौते का उद्देश्य- निम्न जाति को उच्च जाति के समान सम्मान देना
🎍प्रांतीय विधानमंडल में दलित वर्ग के लिए सीटें-*71 से बढ़ाकर 147(148)
🎍अस्पष्टता विरोधी लीग की स्थापना-सितंबर 1932
🎍हरिजन पत्रिका का प्रकाशन- जनवरी 1933

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  • सांप्रदायिक निर्णय के समय गांधीजी पूना के यरवदा जेल में थे
  • गांधी जी ने इस घोषणा का प्रबल विरोध किया और अपनी मांगे मनवाने के लिए 20 सितंबर 1932 से जेल में आमरण अनशन पर बैठ गए,अनशन के कारण उनका स्वास्थ्य खराब होने लगा
  • मदन मोहन मालवीय, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, पुरुषोत्तम दास और राजगोपालाचारी के प्रयासों से गांधी जी और अंबेडकर के मध्य 26 सितंबर 1932 को एक समझौता हुआ
  • जिसे पूना समझौता के नाम से जाना जाता है

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पूना समझौते के अंतर्गत निम्न प्रावधान रखे गए थे 
🌿दलित वर्गो के पृथक निर्वाचक मंडल समाप्त कर दिए गए लेकिन प्रांतीय विधान मंडलों में दलित वर्गों के लिए सुरक्षित सीटों की संख्या 71 से बढ़ाकर 147 कर दी गई
🌿केंद्रीय विधान मंडल में हरिजनों के लिए सुरक्षित सीटों की संख्या में 18 प्रतिशत की वृद्धि की गई
🌿हरिजनों की शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई
🌿 सरकारी नौकरी मे उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर  उचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की गई

बाद में यही पूना पैक्ट स्वतंत्र भारत के संविधान में दलित वर्ग के लिए आरक्षण पद्धति के लिए आधार बना था
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🌿🥀गांधीजी और हरिजनोंत्थान अथवा हरिजन अभियान🥀🌿

  • पूना समझौते के बाद सितंबर 1932 में गांधी जी ने हरिजन कलयाण हेतु अखिल भारतीय समाज विरोधी लीग अथवा अस्पृश्यता विरोधी लीग की स्थापना की
  • जनवरी 1933 में हरिजन नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन किया
  • अक्टूबर 1934 को गांधी जी ने अपने को सपने राजनीति से अलग कर हरिजनोंत्थान से जोड़ लिया था