महात्मा गांधी का जीवन परिचय

महात्मा गांधी जिन्है लोग प्यार से बापू राष्ट्रपिता कहते हैं भारतीय राजनीतिक मंच पर 1919 से 1948 तक इस प्रकार छाए रहे कि इस युग को भारतीय इतिहास का गांधी युग कहा जाता है शांति और अहिंसा  के दूत गांधी का संदेश समस्त विश्व के लिए है और उससे मानव जाति प्रभावित हुई है
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात प्रांत के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था इनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था पुतलीबाई करमचंद गांधी की चौथी पत्नी थी जिन का अंतिम पुत्र मोहनदास अथार्थ महात्मा गांधी जी थे उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था उनके माता पिता कट्टर हिंदू थे इनके पिता करमचंद (कबा गांधी) पहले पोरबंदर रियासत के दीवान थे और बाद में क्रमशः राजकोट (काठियावाड़)और वाकानेर मे दीवान रहे मोहनदास करमचंद गांधी जब केवल 13 वर्ष के थे और स्कूल में पढ़ते थे तब उनका विवाह पोरबंदर के एक व्यापारी की पुत्री कस्तूर बाई कस्तूरबा से कर दिया गया था इस समय दोनों ही सम्मान उनके थे इन दोनों ने 62 वर्षों तक विवाहिक जीवन साथ बिताया 1944 में पुणे की ब्रिटिश जेल में कस्तूरबा गांधी का स्वर्गवास हो गया था गांधी जी 18 वर्ष की आयु में ही 1 पुत्र के पिता बन गए थे और इसके अगले वर्ष ही वह इंग्लैंड चले गए जहां उन्होंने 3 वर्षों 1889 से 91 तक वहा रह कर उन्होंने बैरिस्टरी पास की थी
भारत लौटने पर इन्होंने पहले राजकोट में और फिर मुंबई में वकालत शुरु की थी किंतु इसमें इन्हें विशेष सफलता नहीं मिली

 इसीलिए 1892 में जब दक्षिण अफ्रीका में व्यापार करने वाले एक भारतीय मुसलमान व्यापारी दादा अब्दुल्ला भी उनके सामने मुकदमे देखने का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने उसे स्वीकार कर लिया इस तरह1893 में महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका चले गए वहां पहुंचते ही उन्हें दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के साथ किए जाने वाले कटु व्यवहार का अनुभव हुआ गांधी जी जब डरबन से प्रिटोरिया तक रेलवे द्वारा प्रथम श्रेणी के डिब्बे में यात्रा कर रहे थे तब रास्ते में मेरित्सबर्ग पर एक गोरा उनके डिब्बे में घुसा और उसने स्थानीय पुलिस की सहायता से उन्हें धक्का देकर नीचे उतार दिया क्योंकि दक्षिण अफ्रीका में किसी भी भारतीय को चाहे वह कितना ही धनी और प्रतिष्ठित क्यों न हो गोरो के साथ यात्रा करने की अनुमति नहीं थी मेरित्सबर्ग काण्ड ने गांधीजी की जीवन यात्रा को एक नई दिशा दी
दक्षिण अफ्रीका में अंग्रेज भारतीयों के प्रति रंगभेद की नीति बरता करते थे वहां प्रत्येक भारतीय को पंजीकरण प्रमाण पत्र लेना जरूरी था इसके लिए उन्हें कर देना पड़ता था और इसे हर समय अपने पास रखना पड़ता था दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने गुरुद्वारा काले अफ्रीकी और भारतीय लोगों से रंग भेद की नीति के विरूद्ध विरोध प्रकट किया गांधीजी ने 1906 में एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट और ट्रांसवाल देशांतर वार अधिनियम के विरुद्ध भी विरोध प्रकट किया और अपना अहिंसात्मक सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया गांधी जी ने अपना एक शिष्टमंडल इंग्लैंड भेजा इन सभी विरोध के कारण दक्षिणी अफ्रीका की सरकार को तरक़्क़ी आवाज सुननी पड़ी और एशियाटिक रजिस्ट्रेशन एक्ट को समाप्त करने में गांधीजी को सफलता प्राप्त हुई मैं 1894 में मत आल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की और दक्षिण अफ्रीका के लंबे आंदोलन के दौरान कई बार जेल यात्रा की अपने सहयोगी जर्मन शिल्पकार कालेनबाख की मदद से टॉलस्टॉय फॉर्म की स्थापना की और वहीं रहने लगे महात्मा गांधी जी ने श्रीमद्भगवद्गीता रस्किन और टॉलस्टॉय के ग्रंथों का गहन अध्ययन किया और उनसे प्रेरणा प्राप्त की श्रीमद्भागवत गीता की तो उन्होंने टीका भी की थी दक्षिण अफ्रीका में इंडियन ओपिनियन नामक अखबार निकाला और 1904 में फीनिक्स आश्रम की स्थापना की थी दक्षिण अफ्रीका में उनके आंदोलन के कारण दक्षिणी अफ्रीकी सरकार द्वारा 1914 में अधिकांश काले कानूनों को रद्द कर दिया गया गांधीजी और उनके अहिंसक सत्याग्रह आंदोलन को यह पहली महान सफलता प्राप्त हुई
सविनय अवज्ञा आंदोलन जिसे सप्ताह ग्रह का नाम दिया गया था इसकी शुरुआत पहली बार दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी द्वारा 1906 में की गई थी वहीं उन्होंने सत्य के दर्शन का विकास किया इसके मुख्य तत्व थे सत्य और अहिंसा सत्य के अंतर्गत ही उन्होंने अनुषा को स्थान दिया उन्होंने यह बताया कि अहिंसा पर आधारित सत्य के लिए संघर्ष ही सत्याग्रह है 1909 में लिखित अपनी पुस्तक हिंद स्वराज में स्वराज की व्याख्या की गई थी
जनवरी 1915 में महात्मा गांधी जी भारत आए यहां पर आकर उनका संपर्क गोपाल कृष्ण गोखले श्री हुआ जिन्होंने गांधीजी ने अपना राजनीतिक गुरु बनाया था इनके प्रभाव में आकर गांधी जी ने भारत की सक्रिय राजनीति से अपने को जोड़ा था गांधीजी ने लोगों को सेना में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित किया था जिसके लिए कुछ लोगों ने इनही भर्ती करने वाला सार्जेंट कहा गया 1916 में महात्मा गांधी जी ने अहमदाबाद के करीब साबरमती आश्रम की स्थापना की थी अप्रैल 1917 में बिहार में स्थित चंपारण जिले में किसानों पर किए जा रहे अत्याचार के विरोध आंदोलन चलाया गया जो चंपारण आंदोलन के नाम से मशहूर हुआ
अपनी सेवाओं की मान्यता के फल स्वरुप मोहनदास गांधी महात्मा गांधी कहलाने लगे महात्मा गांधी ने अंग्रेजो को शैतानी लोग कहा और अपनी असहयोग की नीति अपनाने लगे 1920 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया इस आंदोलन को 1930 में पुन: प्रारंभ किया गया और 1940 में निजी रूप से भी इस आंदोलन को किया गया 1942 में इन्होंने अंग्रेजों को भारत छोड़ो का सुझाव दिया था लेकिन वह तुरंत बंदी बना लिए गए

🌷☘महात्मा गांधी जी का सत्य और अहिंसा का संदेश☘🌷 

सत्य के सच्चे पुजारी के रूप में उनका विश्वास था कि सत्य ईश्वर है और ईश्वर ही सत्य है
और विश्वास प्रेम है और प्रेम ही ईश्वर है कुछ लोगों का विश्वास है कि गांधी जी की सत्य प्रियता हिंदू धर्म से है और अहिंसा बौद्ध जैन और ईसाई मत द्वारा प्रभावित थी
महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा को अपने सपनों के नवीन समाज का आधार बनाया वह समस्त संसार के लिए स्वतंत्रता मांगते थे अर्थात अहिंसा लोभ आक्रमण वासनाओं और आकांक्षाओं जिन्होंने राष्ट्र को नष्ट कर दिया है इत्यादि से भी स्वतंत्रता चाहते थे भारत की स्वतंत्रता भी पापी के प्रति अहिंसा और असहयोग द्वारा ही प्राप्त करनी होगी
महात्मा गांधी ने यंग इंडिया नामक पत्रिका में लिखा था कि जी ऋषि यों ने हिंसा के बीच अहिंसा के सिद्धांत को खोज निकाला वह न्यूटन से अधिक प्रखर बुद्धि वाले लोग थे

वे स्वयं वेलिंगटन से अधिक वीर योद्धा थे स्वयं हथियारों का प्रयोग करना जानते हुए भी उन्होंने इसकी व्यर्थता को अनुभव किया और उन्होंने युद्ध से दुखी संसार को बतलाया कि इसकी मुक्ति हिंसा द्वारा नहीं बल्कि अहिंसा द्वारा ही है

निर्भीकता उनके सत्याग्रह का आवश्यक अंग था वह लोगों के दिल से सरकार पुलिस सीआईडी जेल और अधिकारियों का भय निकाल देना चाहते थे
उनके अनुसार सत्याग्रह और असहयोग गरजने वाले और डींग मारने वालों के अस्त्र नहीं हैं यह तो आप की इमानदारी की कसौटी है इसमें ठोस और मुक आत्म बलिदान की आवश्यकता है अहिंसा इसका परम आवश्यक अंग था इसका अर्थ अन्याय के आगे चुपचाप झुक जाना नहीं है बल्कि अपनी आत्मा को अन्याय की इच्छा के विरूद्ध लड़ाना है उनके प्रति घृणा नहीं बनती प्रेम,अहिंसा और दया की भावना से जिससे उसकी आत्मा प्रभावित हो जाए और उसका मन ही बदल जाए वह अंग्रेजों के निजी और सामूहिक रुप से विरुद्ध नहीं थे वह थे अंग्रेजों के साम्राज्यवाद के विरुद्ध इसकी जड़ में मुख्यतः विश्वास था कि मानव प्रकृति मूलत: अच्छी है और एक अन्यायकारी का मन सत्याग्रह के आत्मबलिदान से बदल जाएगा और अंत में न्याय की ही विजय होगी

🌷🍀गांधीजी का रचनात्मक🍀🌷 

गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस ने रचनात्मक कार्यक्रम को बहुत बढ़ावा दिया था गांधीजी केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही नहीं चाहते थे बल्कि जनता की आर्थिक सामाजिक और आत्मिक उन्नति चाहते थे इसी भावना से उन्होंने ग्राम उद्योग संघ तालीमी संघ और गोरक्षा संघ बनाए उन्होंने समाज में शोषण समाप्त करने के लिए भूमि और पूंजी का समाजिकरण नहीं मांगा बल्कि आर्थिक क्षेत्र के विकेंद्रीकरण द्वारा इस प्रश्न को हल करना चाहा उन्होंने कुटीर उद्योग के प्रोत्साहन के लिए काम किया खादी उनके आर्थिक कार्यक्रम का प्रतीक थी गांधी जी ने जनता के सामाजिक सुधार के लिए भी प्रयत्न किया उन्होंने सभी प्रकार की असमानताओं जन्म जाति धर्म और धन की को समाप्त करने का प्रयास किया उन्होने अछूतों के उद्धार के लिए कार्य किया उन्हें हरिजन ईश्वर के लोग की संज्ञा दी नशाबंदी के लिए और हिंदू मुस्लिम एकता के लिए भी इन्होंने प्रयत्न किए 30 जनवरी 1948 को एक हिंदू कट्टरपंथी ने जिस ने उन्हें विभाजन के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी समझा उस व्यक्ति ने उन्हें गोली मार दी थी

🌷🍀गांधीजी का मूल्यांकन🍀🌷 

कुछ आलोचकों ने उन्हें एक राजनीतिक अराजकता फैलाने वाला कहा क्योंकि उन्होंने संवैधानिक प्रभुसत्ता को चुनौती दी थी लॉर्ड लिनलिथगो ने उनके ढंगों को राजनीतिक फिरोती कहा परंतु गांधी जी ने केवल सत्य का मार्ग ही अपनाया जैसा उन्होंने समझा था उन्होंने साध्य की प्राप्ति के लिए सत्य साधनों का ही प्रयोग किया उन्होंने स्पष्ट कहा कि मैं 300 वर्ष तक स्वतंत्रता की प्रतीक्षा करने को उद्यत हूं लेकिन असत्य तरीके नहीं अपनाऊगा वास्तव में यह उन्हीं के प्रयत्नों का फल था कि आतंकवाद सीमित रहा और भारत में बिना बहुत रक्त पात के स्वतंत्रता प्राप्त कर ली थी
गांधीजी के कुछ विचार आदर्शवाद में डूबे थे अत एवं यथार्थ से दूर थे उनका चरखा बेल गाड़ी और आत्मनिर्भर ग्राम आज के औद्योगिकरण से मेल नहीं खाते हैं ना ही उनका यह कहना कि पूंजीपति निर्धन के प्रन्यासी हैं आज इसे कोई शिकार करने को उधर नहीं है उनका समाजवाद और साम्यवाद आदि वादों में कोई विश्वास नहीं था इसी भारतीय उनके संवैधानिक प्राधिकरण की अवज्ञा का कोई बहुत अच्छा परिणाम नहीं हुआ बहुत से समाज विरोधी तत्वों ने इसका प्रयोग सत्याग्रह के नाम पर स्वतंत्र भारत की सरकार का विरोध करने के लिए किया
यद्यपि गांधीजी हिंदू मुस्लिम एकता के महान समर्थक थे परंतु इसी युग में दोनों संप्रदायों के बीच खाई पाटने योग्य नहीं रही गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेसी नेताओं ने हिंदू धर्म के प्रति विशेष सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाया बहुत स्वयं भी हिंदू धर्म की परंपराओं का उल्लेख करते थे अच्छे राज्य के लिए एक शब्द रामराज्य का प्रयोग किया गया यद्यपि सांप्रदायिक भावना को फैलाने का उत्तरदायित्व समकालीन मुस्लिम नेताओं और अंग्रेजों पर भी है लेकिन गांधी जी भी इस उत्तर दायित्व से बच नहीं सकते थे संभवत उन की सबसे बड़ी असफलता यद्यपि इसके चिंतन मात्र से उन्हें कपकपी हो जाती थी देश का विभाजन था संभवत उनकी शिक्षा का प्रभाव ही समाप्त हो गया था

🌷🍀गांधीजी के लिए कुछ महान व्यक्तियों के चुने हुए विचार☘🌷 

आचार्य कृपलानी जब हम ठीक होते हैं उसमें महात्मा गांधी जी उस समय भी जब वह गलत होते हैं हम से अधिक ठीक होते हैं हम में से अधिक लोग अपनी छोटी छोटी शुद्धियो में ही अपने आप को ठीक मानकर अपनी तुच्छता का प्रदर्शन करते हैं महात्मा जी बहुत ही छोटी छोटी बातों में गलत होकर भी पूर्ण योग में ठीक होते थे और असंगतियों में भी महान थे अंत में वह सदैव ठीक ही होते थे रविंद्र नाथ टैगोर गांधीजी एक राजनीतिज्ञ संगठनकर्ता मनुष्य के नेता और नैतिक सुधारक के रूप में महान हैं लेकिन वह मनुष्य के रूप में उससे भी अधिक महान है क्योंकि वह सभी पर उनकी मानवता को सीमित नहीं करते थे वास्तव में सभी को इससे शक्ति मिलती है यद्यपि वह असाध्य रूप से आदर्शवादी थे और अपने निश्चित मापदंडो द्वारा ही प्रत्येक कार्य को मापते थे फिर भी वह मानव प्रेमी हैं ना कि खोखले विचारों के प्रेमी आनर्ल्ड टाँयनबी मे जिस पीढ़ी में उत्पन्न हुआ वह पीढ़ी पश्चिम में केवल हिटलर अथवा स्टालिन की ही पीढ़ी नहीं थी बल्कि भारत में गांधीजी की पीढ़ी भी थी हम कुछ निश्चितापूर्वक यह भविष्यवाणी कर सकते हैं कि मानव इतिहास पर गांधीजी का प्रभाव हिटलर और स्टालिन के प्रभाव से अधिक चिरस्थाई होगा