महादेवी वर्मा काम संस्मरण गिल्लू

महादेवी वर्मा 1907-1987
👉 कृतियां-नीहार, रश्मि,नीरजा,दीपशिखा,यामा,स्मृति की रेखाएं,अतित के चल चित्र।

👉”आज उस लघुप्राण की खोज है” महादेवी वर्मा ने लघु प्राण बताया है -गिल्लु को ।

👉कौवे का आह्वान किया जाता है — श्राद्ध पक्ष में ।

👉लेखिका ने गिल्लु की जान बचाई — रूई की बाती से दूध व पानी पिलाकर ।

👉गिलहरियो का झुंड का नेता था – गिल्लु ।

👉उसकी समझदारीऔर कार्यकलाप पर से सबको आश्चर्य होता था” यह कथन किसके बारे मे कहा गया है – गिल्लु के बारे में ।

👉गिल्लु को मुक्त करने की आवश्यकता क्यो हुई– जब वह खिडकी की जाली से बाहर झांक कर गिलहरियो को देखता रहता था ।

👉सोनजुही में लगा पीली कली को देख कर लेखिका को स्मरण हो आया —गिल्लु का ।

👉एक गमले के चारो ओर चोंचो से छुआ-छुओवल का खेल कौन खेल रहे थे –दो कौवे ।

👉गिल्लु  लेखिका के घर में कितने वर्ष रहा —दो वर्ष ।

👉गिल्लु भूख लगने पर सूचना देता था–चिक चिक शब्द करने से.

👉अस्पताल से लौटकर जब लेखिका ने गिल्लु को झुले की सफाई की , तो क्या मिले —काजू ।

👉लेखिका को किस रूप मे गिल्लु के पुन: मिल जाने का विश्वास हो रहा था – सोनजुही के पीले फूल के रूप मे ।

👉लेखिका ने किस पक्षी को विचित्र बताया — कौवे को ।

👉गिल्लु ने गरमी से बचने का उपाय किया —सुराही के पास लेटना ।

👉” मेरे काक पुराण के विवेचन मे अचानक बाधा आ पडी ” पंक्ति का आशय — कौवे से गिल्लु को बचाना ।

👉गिल्लु का प्रिय खाद्य था – —काजू ।
👉गिलहरियो की जीवन अवधि होती है — दो वर्ष ।

👉महादेवी वर्मा ने गिल्लु संस्मरण मे किसके बारे में यह लिखा है कि यह अति सम्मानित भी है व अति अवमानित भी–कौवा ।

👉महादेवी वर्मा को किस उपनाम से जाना जाता है– आधुनिक काल की मीरां।

👉दुर्घटना के कारण किसे अस्पताल मे रहना पडा़– महादेवी वर्मा को।

👉” हमारे पुरखे न गरूड़ रूप आ सकते हैं न मयुर के , न हंस के,।उन्हे पितृ पक्ष मे हम से कुछ पाने के लिए काक बन ही अवतीर्ण होना पड़ता है, वाक्य की शैली है — हास्य व्यंग्य शैली ।

👉महादेवी वर्मा का कौनसा संस्मरण पालतु दीनो के मनोविज्ञान से गहरा परिचय कराता है — गिल्लु ।

👉महादेवी वर्मा के अनुसार किसको अपनी मृत्यु का समय निकट होने का आभास हो जाता है — जीव जन्तुओ को ।