महापुरुषों के महत्वपूर्ण कथन

✍महापुरुषों के महत्वपूर्ण कथन✍

1.महात्मा गांधी-“भारत का विभाजन मेरी लाश पर ही होगा जब तक मैं जीवित हूँ तब तक भारत का विभाजन नही होने दूंगा।”
2.बाल गंगाधर तिलक-“हमे अपने प्रयासों में कोई सफलता नही मिलेगी ,अगर हम साल में एक बार मेढक की तरह टर्राते है।”

3.सी. आर. दास-“समूचा भारत एक विशाल बन्दीगृह है।”
4.जवाहर लाल नेहरू-“मै स्वभाव से ही समाजवाद हूँ।”
5.भगत सिंह-“क्रांति की तलवार में धार वैचारिक पत्थर रगड़ने से ही होती है।”
6.राजेन्द्र प्रसाद-“पाकिस्तान का निर्माता जिन्ना या मुहम्मद इकबाल नही वरन लार्ड मिंटो था।”
7.बहादुरशाह जफर-“मुझे मरने का गम नही ,गम तो इस बात का है कि मुझे मरने के लिए हिंदुस्तान की दो गज जमीन तक नसीब न हुई।”

8.बाल गंगाधर तिलक-“अगर ईश्वर अस्पृश्यता को सहन करने लगे तो मैं ऐसे ईश्वर को भी मान्यता नही दूँगा।”
9.गोपाल कृष्ण गोखले-“हमे यह नही भूलना चाहिए कि हम देश की उन्नति के उस चरण में है, जहाँ हमारी उपलब्धियां थोड़ी होंगी और हमारी निराशाएं अधिक व कठोर।”

10.भगत सिंह-“यदि मेरा विवाह गुलाम भारत मे होना है, तो मेरी वधू केवल मौत होगी और बाराती देश के लिए मर मिटने वाले परवाने होंगे।”

11.लाला लाजपत राय-“मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के कफन में कील सिद्ध होगी।”
12.स्वामी दयानंद सरस्वती-“कोई कितना ही कहे,परंतु जो स्वदेशी राज्य होता है वह सर्वोत्तम होता है।”

13.महात्मा गाँधी-“मैं देश की बालू से  कांग्रेस से भी बड़ा आंदोलन खड़ा कर दूंगा। ”
14.टीपू सुल्तान-“शेर की तरह एक दिन जीना बेहतर है, लेकिन भेड़ की तरह लम्बी ज़िन्दगी जीना अच्छा नही।”

15.लक्ष्मी बाई-“हम अपने हाथों अपनी आज़ादी की कब्र नही खोदेंगे।”

16.स्वामी विवेकानद-“आज हमारे देश को आवश्यकता है लोहे के स्नायुओं तथा इस्पात की नाड़ियो की।”

17.महात्मा गाँधी-“मैं एक दिव्यदृष्टा नही हूँ, मैं एक व्यावहारिक आदर्शवादी होने का दावा करता हूँ।”

18.दादा भाई नॉरोजी-” यह एक लूटे हुए देश की अवस्था है, जहां लुटेरा लगातार लूट रहा है और फिर साफ बचकर निकल जाता है।”

19.मौलाना अबुल कलाम आज़ाद-“आजादी इंसान का पैदायशी हक है।गुलामी खुदा की मंशा के खिलाफ है, भारत आजाद होगा और इससे उसे  दुनिया की कोई ताकत नही रोक सकती।”

20.महादेव गोविंद रानाडे-“मृत तथा दफनाए या जलाए जा चुके लोग हमेशा के लिए मारकर दफनाए या जलाए जा चुके हैं, अतः मुर्दा अतित को पुनर्जीवित नही किया जा सकता।”

21.केशव चन्द्रसेन-“हमारा मत यह नही है कि सत्य सभी धर्मों में पाए जाते हैं, बल्कि यह है कि सभी स्थापित धर्म सत्य है।”

22.महात्मा गाँधी-“मुझे लगता है कि सत्याग्रह ही आतंकवाद को रोकने का एकमात्र उपाय है।”

23.स्वामी विवेकानंद-“जिस प्रकार सारी धाराएं जल को सागर में ले जाकर मिला देती है, उसी प्रकार मनुष्य के सारे धर्म उसे ईश्वर की ओर ले जाते हैं।”
24.नाना साहब-” अंग्रेज सरकार के अन्याय और शपथ- भंग के कार्य चारो ओर इस प्रकार दहक रहे हैं जैसे सूर्य की किरणें।”

25.महात्मा गाँधी-“गाँधी मर सकता है परंतु गाँधीवाद सदैव जीवित रहेगा।”

26.सरदार वल्लभ भाई पटेल-“जिन्ना विभाजन चाहते हैं या नहीं, अब हम स्वयं विभाजन चाहते हैं।”

27.लाला लाजपतराय-“हर मूल्य पर स्वावलम्बन।”

28.मुहम्मद इक़बाल-“नेहरू देशभक्त है और जिन्ना राजनीतिज्ञ।”

29.बाल गंगाधर तिलक-“स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा”।

30.सुभाष चंद्र बोस-“उस समय जबकि जनता का उत्साह चरम पर था,पीछे हटने का आदेश देना राष्ट्रीय दुर्भाग्य से कम न था।”

31.अशोक महान-“सम्पूर्ण प्रजा मेरी संतान है और मै उसके सुख की कामना करता हूँ।”

32.कौटिल्य-“राजा को राजकार्यो में मंत्रियो से परामर्श लेना चाहिए क्योंकि सिर्फ अकेला पहिया नही चल सकता।”

33.महात्मा बुद्ध-“सभी संस्कार व्ययधर्मा है, प्रमाद रहित होकर अपना कल्याण करो।”

34.रामानुज-“मोक्ष का उपाय ज्ञान नही,अपितु भक्ति अर्थात ईश्वर के प्रति प्रेम है।”

35.संत रज्जब-“संसार वेद है और सृष्टि कुरान।”

36.महात्मा गाँधी-“यदि मुझे अकालियों जैसे एक लाख स्वयंसेवक मिल जाये तो मैं एक वर्ष के भीतर देश के लिए स्वराज्य जीत लूँ।”

37.सुभाष चंद्र बोस-“दिल्ली चलो।”

38.सरदार वल्लभ भाई पटेल-“यदि शरीर का कोई अंग खराब हो जाये तो उसे काटकर फेंक देना ही ठीक है, ताकि शरीर के अन्य भागों में जहर न फैले।”

39.जवाहर लाल नेहरू-” जब वे (मुस्लिम लीग के लोग) हमार साथ रहने को तैयार ही नही थे,तो हम उन्हें क्यों ओर कैसे विवश कर सकते थे।”

40.अबुल कलाम आज़ाद-“युद्ध ने भारत को अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने का अवसर दिया था,हमें सिर्फ वादों पर निर्भर कर इसे खोना न होगा।”

41.लाल लाजपतराय-“इस तथ्य से आंख मूंद लेने से कोई लाभ नही ह कि हम एक क्रांतिकारी दौर से गुजर रहे हैं ।”

42.मैडम भीकाजी कामा-” शक्तिशाली जर्मनों के साथ मैत्री संबंध की स्थापना भारत की स्वतंत्रता के लक्ष्य की प्राप्ति में लाभदायक सिद्ध होगी।”

43.भूपेंद्र नाथ दत्त-“मुख्य बात यह है कि जनता की सामाजिक और आर्थिक मुक्ति हमारा लक्ष्य होगा।”

44.लाला लाजपतराय-“देश के लिये स्वराज्य परम आवश्यक है। सुधार और उत्तम राज्य इसके विकल्प नही हो सकते।”

45.सुभाष चन्द्र बोस-“जय हिंद।”

46.स्वामी दयानंद सरस्वती-” वेदों की ओर लोटो।”

47.जवाहर लाल नेहरू-” आराम हराम है।”

48.रामप्रसाद बिस्मिल-“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।”

49.भगत सिंह-“किसानों को अपने को न सिर्फ विदेशी गुलामी से, बल्कि भू-स्वामियों व पूजीपतियों की गुलामी से भी मुक्त करना होगा।”

50.भगत सिंह”इंक़लाब ज़िंदाबाद।”