🐾बंगाल विभाजन के बाद उत्पन्न परिस्थितियों का एक प्रत्यक्ष परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस के अंदर नरम और गरम दल के मध्य विरोध और बढ़ गया
🐾जिसके कारण 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस दो भागोंमें विभाजित हो गई 

🐾यह अधिवेशन पहले नागपुर में होनाथा
🐾1905 में कांग्रेस का अधिवेशन बनारस में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में हुआ था
🐾अधिवेशन में बंग भंग की आलोचना की गई और स्वदेशी तथा बहिष्कार आंदोलन का समर्थन किया गया
🐾इस अधिवेशन मे प्रथम मतभेद प्रिंस ऑफ वेल्स के स्वागत प्रस्ताव पर हुआ था

🐾नरमपंथी प्रिंस ऑफ वेल्स का स्वागत करना चाहते थे ,जबकि इसके विपरीत राष्ट्रवादियों ने इसका विरोध किया,लेकिन यह प्रस्ताव पारित हो गया
🐾1905 में लाला लाजपत राय ने अपने भाषण में सत्याग्रह को अपनाने का सुझाव दिया था

🐾कांग्रेस के मंच से सत्याग्रह का सुझाव पहली बार दिया गया था
🐾इन *दोनों दलों के बीच दरार1906 के कांग्रेस अधिवेशनमें और बढ़ गई 🐾राष्ट्रवादी तिलक का सुझाव था कि लाला लाजपत राय को कांग्रेस का अध्यक्षबनाया जाए

🐾लेकिन नरमपंथीयों द्वारा राष्ट्रवादियों को कांग्रेस के अध्यक्ष पद से दूर रखने के लिए इन्होंने वयोवृद्ध नेता दादा भाई नौरोजी को कांग्रेस का अध्यक्षबनाया

🐾कोलकाता के इस अधिवेशन में दादा भाई नौरोजी ने घोषणा की थी कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का लक्ष्य स्वराज्य प्राप्त करना है
🐾कलकत्ता अधिवेशन में राष्ट्रवादी चाहते थे कि बहिष्कार आंदोलन सारे भारतमें चलाया जाए,लेकिन इसके विपरीत नरमपंथी इसे कांग्रेस तक ही सीमित रखना चाहते थे
🐾इसको लेकर इन दोनों दलों में विरोध बढ़गया और कोलकाता अधिवेशनके बाद अगले अधिवेशन में कब्जे के लिए दोनों के मध्य खुलेआम प्रतियोगिता प्रारंभ हो गई है
🐾सूरत अधिवेशन में राष्ट्रवादी लाला लाजपत राय को अध्यक्षबनाना चाहते थे,लेकिन नरम दल वालों ने रास बिहारी घोष को अध्यक्ष के पद के प्रत्याशी के रुप में प्रस्तुत कर दिया
🐾बाल गंगाधर तिलक रासबिहारी घोष के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए तैयार हो गए थे
🐾लेकिन इन्होने दो शर्ते रखीथी
1⃣कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में जो प्रस्ताव स्वराज्य स्वदेशी बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के बारे में पास किया गया था उन्हें फिर से पासकिया जाए
2⃣रास बिहारी घोष के भाषण में जिस अंश में राष्ट्रवादी की आलोचनाआलोचना की गई है, उसे हटा दिया जाए
🐾लेकिन नरम पंथी किसी प्रकार के समझोतेके लिए तैयार नहीं थे
🐾इस कारण कारण लाला लाजपत राय  के नाम वापस लेने के कारण रास बिहारी घोष अध्यक्ष बन गए
🐾इसके बाद जब बाल गंगाधर तिलक अपना प्रस्ताव पेशकरने के लिए मंच पर आए तो दोनों पक्षों में मारामारी मच गई थे
🐾इस कारण अधिवेशन को स्थगित कर दिया गया
🐾मोतीलाल घोष ने कांग्रेस की एकता बचाने और दोनों पक्षों में समझौता करने का प्रयास किया
🐾लेकिन यह प्रयास असफल रहा
🐾बाल गंगाधर तिलक द्वारा सारा दोष अपने ऊपर लेने के बाद भी नरमपंथी नहींमाने
🐾इस कारण कांग्रेस दो भागों में विभाजित हो गई
🐾नरमपंथी अपने आपको भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसकहते रहे, जबकि राष्ट्रवादी अपने आप को  नेशनलिस्ट पार्टीकहने लगे थे
🐾1908 मे इलाहाबाद मेएक सम्मेलन कर कांग्रेसियों ने बैठकों  को आयोजित करने की एक नियामवलीबनाई
🐾इसके द्वारा गरम दल वालों के लिए कांग्रेस के द्वार बंदकर दिए गए
🐾कांग्रेस का का सूरत अधिवेशन स्थगित हो गया
🐾इसी अधिवेशन को दुबारा मद्रास में आयोजित किया गया

🐾मद्रास अधिवेशन में भी रास बिहारी घोष अध्यक्षबने थे

🐾अधिवेशन में इलाहाबाद में बनाई गई नियमावली का अनुमोदन कर दिया गया था

🐾अगले 6 वर्ष तक कांग्रेस महत्वहीन रही