स्त्री विमर्श कुछ पठनीय पुस्तकें

देह की राजनीति से देश की राजनीति तक – मृणाल पांडे
परिधि पर स्त्री – मृणाल पांडे
दुर्ग द्वार पर दस्तक – कात्यायनी
स्त्री का समय – क्षमा शर्मा
स्त्रीत्व का मानचित्र – अनामिका
हौवा की बेटी – दिव्या जैन
उपनिवेश में स्त्री – प्रभा खेतान
हम सभ्य औरतें – मनीषा
औरत के लिए औरत – नासिरा शर्मा
खुली खिड़कियाँ – मैत्रेयी पुष्पा
औरत के हक में – तसलीमा नसरीन
स्त्री संघर्ष का इतिहास – राधा कुमार
साम्प्रदायिक दंगे और नारी – नूतन सिन्हा
संघर्ष के बीच संघर्ष के बीज – इलीना सेन
स्त्रीवादी साहित्य विमर्श – जगदीश्वर चतुर्वेदी
अधीन ज़मीन – उपेन्द्र नाथ अश्क
रेणु की नारी दृष्टि – डॉ. अल्पना तिवारी
चुकते नहीं सवाल – मृदुला गर्ग
नारी प्रश्न – सरला माहेश्वरी
स्वागत है बेटी – विभा देवसरे
जीवन की तनी डोर ये स्त्रियाँ – नीलम कुलश्रेष्ठ
स्त्री पुरुष कुछ पुनर्विचार – राजकिशोर
स्त्री के लिए जगह – सं. राजकिशोर
स्त्रीत्ववादी विमर्श समाज और साहित्य – क्षमा शर्मा
स्त्री : मुक्ति का सपना – सं. प्रो. कमला प्रसाद, राजेन्द्र शर्मा, अतिथि सं. अरविन्द जैन व लीलाधर मंडलोई
धर्म के नाम पर – गीतेश शर्मा
स्त्री उपेक्षिता – सीमोन द बुआ
विद्रोही स्त्री – जर्मन ग्रेयर
स्त्री अधिकारों का औचित्य साधन – मेरी वोल्स्टनक्राफ्ट
औरत की कहानी – सं. सुधा अरोड़ा
गुड़िया भीतर गुड़िया – मैत्रेयी पुष्पा
एक गुमशुदा औरत की डायरी – सीमोन द बुआ
बधिया स्त्री – जर्मन ग्रीयर
अपना कमरा – वर्जीनिया वुल्फ
एक स्त्री की ज़िंदगी के चौबीस घंटे – स्टीफन ज्विग


कुछ अन्य पुस्तकें
औरत होने की सजा – अरविन्द जैन
उत्तराधिकार बनाम पुत्राधिकार – अरविन्द जैन
यौन हिंसा और न्याय की भाषा – अरविन्द जैन
न्याय क्षेत्रे अन्याय क्षेत्रे – अरविन्द जैन
बचपन से बलात्कार – अरविन्द जैन
औरत अस्तित्व और अस्मिता – अरविन्द जैन
आदमी की निगाह में औरत – राजेन्द्र यादव
अतीत होती सदी और स्त्री का भविष्य – अर्चना वर्मा
औरत उत्तरकथा – राजेन्द्र यादव
भारत में विवाह संस्था का इतिहास – विश्वनाथ काशीनाथ राजवाड़े
सामान नागरिक संहिता – सरला माहेश्वरी
नए आयामों को तलाशती नारी – दिनेश नंदिनी डालमिया
प्राचीन भारत में नारी – डॉ. उर्मिला प्रकाश मिश्र
जो मारे जायेंगे – जया मित्रा
प्राचीन भारत में न्याय व्यवस्था – नताशा अरोड़ा
इक्कीसवीं सदी की ओर – सुमन कृष्णकांत
नारी देह के विमर्श – सुधीश पचौरी
स्त्री विमर्श : कुछ पठनीय उपन्यास
पचपन खम्बे लाल दीवारें – उषा प्रियंवदा
रुकोगी नहीं राधिका – उषा प्रियंवदा
शेष यात्रा – उषा प्रियंवदा
अंतर्वंशी – उषा प्रियंवदा
अनारो – मंजुल भगत
आँखों की दहलीज – मेहरुन्निसा परवेज
उसका घर – मेहरुन्निसा परवेज
कोरजा – मेहरुन्निसा परवेज
तत्सम – राजी सेठ
रेत की मछली – कांता भारती
मेरे संधि पत्र – सूर्यबाल
उसकी पंचवटी – कुसुम अंसल
फ्रीलांसर – शुभा वर्मा
सात फेरे अधूरे – मीनाक्षी पुरी
एक ज़मीन अपनी – चित्रा मुद्गल
आवां – चित्रा मुद्गल
स्त्री विमर्श : कुछ पठनीय आत्मकथाएँ
कागजी हैं पैरहन – इस्मत चुगताई
रसीदी टिकट – अमृता प्रीतम
मेरे आका – तहमीना दुर्रानी
मेरी कहानी – कमला दास
जो कहा नहीं गया – कुसुम अंसल
लगता नहीं है दिल मेरा – कृष्णा अग्निहोत्री
बूँद बावड़ी – पद्मा सचदेव
दोहरा अभिशाप – कौशल्या बैसंत्री
खानाबदोश – अजीत कौर
नंगे पैरों का सफ़र – दिलीप कौर टिंवाडा
कुछ कही कुछ अनकही – शीला झुनझुनवाला
कस्तूरी कुंडल बसे – मैत्रेयी पुष्पा
बुरी औरत की कथा – किश्वर नाहीद
नाच री घूमा – माधवी देसाई
मेरे बचपन के दिन – तस्लीमा नसरीन
उत्ताल हवा – तस्लीमा नसरीन
द्विखंडिता – तसलीमा नसरीन
वे अँधेरे दिन – तस्लीमा नसरीन
अन्या से अनन्या – प्रभा खेतान
एक कहानी यह भी – मन्नू भण्डारी
धरती की बेटी – एलन स्मेडली