स्वदेशी आंदोलन से हुए लाभ

🏈बहिष्कार व स्वदेशी आंदोलन अपने तत्कालीन लक्ष्य की पूर्ति करने में असफलरहा
🏈क्योंकि इस अवसर पर बंगाल का विभाजन समाप्त नहीं किया गया था
🏈फिर भी आंदोलन के दूरस्थ लाभ अवश्य प्राप्त हुए
🏈इस आंदोलन के परिणाम स्वरुप विदेशी वस्तुओं के आयात में कमी हुई और भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिला
🏈1907-1908 के बीच आंदोलन के सभी बड़े नेता या तो गिरफ्तार कर लिए गए या उन्हें निर्वासित कर दिया गया
🏈इस प्रकार यह आंदोलन नेतृत्व विहीन हो गया
🏈जब सरकार ने बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन का दमन करने का प्रयास किया गया 🏈तब उसके परिणाम स्वरुप उग्र राष्ट्रीयता का उदय हुआ
🏈इस प्रकार स्वदेशी आंदोलन उपनिवेशवाद के खिलाफ पहला सशक्त राष्ट्रीय आंदोलन था
🏈जो भावी संघर्ष का बीज बोकर ही खत्म हुआ था
🏈1905 में कांग्रेस के बनारस अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए गोपाल कृष्ण गोखलेने भी स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को समर्थन जताया
🏈उग्रवादी दल के नेता बाल गंगाधर तिलक, विपिन चंद्र पाल, लाला लाजपत राय और अरविंद घोष ने पूरे देश में इस आंदोलन को फैलाना चाहते थे
🏈1906 में कलकत्ता मे कांग्रेस अधिवेशनकी अध्यक्षता करते हुए दादा भाई नौरोजी ने पहली बार स्वराज्य की मांग प्रस्तुत की थी
🏈बंग भंग के बाद राष्ट्रीय आंदोलन में उग्रवादी विचार के नेताओं की पकड़ मजबूतहोने लगी
🏈 जहां उदारवादी नेता हिंसा का विरोधकरते थे,वहीं उग्रवादी हिंसा के समर्थकथे
🏈कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन मैं दोनों के मध्य वैचारिक भेद उभर कर सामने आया
🏈लेकिन दादा भाई नौरोजी के प्रयासों से यह मतभेद दबा दिया गया
🏈स्वदेशी आंदोलन के चलाने के तरीके को लेकर उग्रवादी और उदारवादी नेताओं के मध्य चल रहे मतभेद के कारण 1907 में कांग्रेस के सूरत अधिवेशन में उग्रवादी नेता अपने को कांग्रेस से अलग कर लिए थे
🏈बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन ने विभाजन के विरुद्ध विशाल जनमतइकट्ठा किया
🏈इसके फलस्वरुप ब्रिटीश सरकार ने अरुंडेल के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया था

💧⚜💧अरुंडेल कमेटी 1906💧⚜💧 
‼तत्कालीन वायस राय मिंटो द्वितीय द्वारा अगस्त 1914 में अरुण्डेल कमेटी का गठन किया गया
‼इस कमेटी का गठन राजनीतिक सुधारों के विषय में सलाह लेनेके लिए किया था
‼अरुंडेल कमेटी ने विभाजित बंगाल को पुनः सयुक्तकरने की आवश्यकता पर बल दिया
‼इसके फलस्वरुप ब्रिटिश सरकार ने विवश होकर बंगाल विभाजन को 1911 में रद्दकर दिया

💧⚜💧दिल्ली दरबार 1911💧⚜💧 
‼दिसंबर 1911 में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम का दिल्ली आगमन हुआ था
‼12 दिसंबर 1911 को दिल्ली में एक राज दरबार का आयोजन किया गया था
‼यहां पर वॉयस राय हार्डिंग द्वित्तीय ने सम्राट की ओर से घोषणा की बंगाल विभाजन रद्दकिया जाएगा और
‼भारत की राजधानी कलकत्ता से हटाकर दिल्लीबनाई जाएगी
‼इस प्रकार 1912 में कलकत्ता के स्थान पर भारत की राजधानी दिल्ली बन गई थी