भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में प्रथम विश्वयुद्ध का महत्व दो कारणों से मुख्य है पहला विश्व युद्ध काल में भारत के क्रांतिकारियों ने अपनी सक्रियता को बढ़ाया दूसरा देश के अंदर होमरूल आंदोलन विकसित हो रहा था 

होमरूल आयरलैंड का शब्द है सर्वप्रथम आयरलैंड में आयरिश नेता रेड मांड के नेतृत्व में होम रूल लीग की स्थापना हुई थी होमरूल आंदोलन को जन्म देने का श्रेय मुलत:श्रीमती एनी बेसेंट को जाता है एनी बेसेंट 1893 में थियोसोफी के प्रचार हेतु भारत आई थी उनका मानना था कि मानवता को आध्यात्मिकता का पाठ पढ़ाना भारत का मिशन है लेकिन इस मिशन को एक परतंत्र भारत पूरा नहीं कर सकता था इस कारण आवश्यक है कि भारत स्वशासी हो एनी बेसेंट ने निश्चय किया कि आयरलैंड के होम रूल आंदोलन की तर्ज पर भारत में भी आंदोलन चलाया जाए ऐसा आंदोलन चलाने के लिए एक औरत वह कांग्रेस के नरम दल और तिलक के साथियों में एकता का प्रचार करने लगी दूसरी और होमवर्क के विचार का प्रचार करने के लिए उन्होंने 1915 में न्यू इंडिया तथा कॉमन विल नामक अखबारों को हथियार के रूप में प्रयोग किया उन्होंने प्रचार किया कि उपनिवेशों में वहां की जनता को अपनी सरकार चलाने का अधिकार है उसी तरह भारत की सरकार चलाने का अधिकार भारतीयों को मिलना ही चाहिए होमरूल आंदोलन का मुख्य उद्देश्य था कि ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहते हुए संवैधानिक तरीके से स्वशासन को प्राप्त किया जाए                   


⚜♻⚜तिलक का होम रूल लीग⚜♻⚜ 

1914 में 6 वर्ष की सजा काटकर बाल गंगाधर तिलक मांडले जेल से वापस आए जेल से वापस आकर बाल गंगाधर तिलक ने भी एक और तो कांग्रेस के अंदर एकता का प्रयास किया दूसरी तरफ अपने लक्ष्य को अधिक व्यवहारिक बनाते हुए उन्होंने घोषणा की कि मैं साफ साफ कहता हूं कि हम लोग हिंदुस्तान में प्रशासन व्यवस्था का सुधार चाहते हैं जैसा कि आयरलैंड में वहां के आंदोलनकारी मांग रहे कर रहे हैं
दिसंबर 1915 के कांग्रेस अधिवेशन में तिलक और एनी बेसेंट को कांग्रेस के अंदर एकता स्थापित करने में सफलता मिल गई लेकिन उनका जो दूसरा उद्देश्य था कि कांग्रेस होमरूल लीग का गठन आंदोलन चलाने के उद्देश्य से करें वह पूरा नहीं हो सका इस कारण बाल गंगाधर तिलक व एनी बेसेंट ने कांग्रेस द्वारा होमरूल आंदोलन की दिशा में पहल करने हेतु निजी प्रयासों पर ही बल देना उचित समझा 1916 के प्रारंभ तक परिस्थितियां भी एक जन आंदोलन के अनुकूल हो रही थी 1914 में प्रथम विश्व युद्ध आरंभ हुआ तो इंग्लैंड और उसके मित्र ने घोषणा की थी कि यह युद्ध प्रजातंत्र की रक्षा के लिए है राष्ट्रों के आत्मनिर्णय के सिद्धांत का भी उल्लेख किया गया था भारतीयों ने आशा की थी कि इन सिद्धांतों को भारत पर भी लागू किया जाएगा और इसी आशा से भारत के राष्ट्रीय नेतृत्व में प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटेन का पूर्ण रुप से साथ दिया था लेकिन युद्ध को चलते 2 वर्ष हो गए और अपना धन और खून बहाकर भी भारतीय साम्राज्यवादी शासन से कुछ प्राप्त नहीं किया इस कारण भारतीयों की आशा का स्थान आक्रोश और बेचैनी ने ले लिया था जनता के इसी असंतोष को संघर्ष की दिशा में प्रवाहित करना ऐनी बिसेन्ट और तिलक का उद्देश्य था इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर तिलक ने अप्रैल 1916 में होम रूल लीग की स्थापना की घोषणा कर दी थी

  • बाल गंगाधर तिलक द्वारा अप्रैल 1916 में पूना में होम रूल लीग की स्थापना की गई
  • बाल गंगाधर तिलक द्वारा स्थापित होम रूल लिंग के कमेटी के सदस्यों में जीएस खापर्डे बीएस मुंजे और आरपी करंडीकर चुने गए थे
  • तिलक होम रूल लिंग प्रथम अध्यक्ष जोसेफ बैपटिस्टा और एन०सी० केलकर इसके सचिव थे
  • लिग द्वारा स्थापित लीग का प्रभाव कर्नाटक महाराष्ट्र मुंबई को छोड़कर मध्य प्रांत और बरार तक फैला हुआ था
  • बाल गंगाधर तिलक नहीं नासिक में मई 1917 में लीग की पहली वर्षगांठ मनाई थी तिलक ने अपने पत्र मराठा और केसरी के माध्यम से अपने होम रुल की अवधारणा को स्पष्ट किया था
  • बाल गंगाधर तिलक के अनुसार से राज्य से उनका तात्पर्य ब्रिटिश नौकरशाही की जगह ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत भारतीय जनता के प्रति उत्तरदायी शासन था बाल गंगाधर तिलक ने पूरे देश में दोहरा करके स्वराज्य के लिए जनमत तैयार करने का प्रयास किया और नारा दिया स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा होमरूल का आंदोलन अपने अधिकारों को पाने का आंदोलन था तिलक के शब्दों में भारत उस बेटे की तरह है जो अब जवान हो चुका है समय का तकाजा है कि बाप या पालक इस बेटे को उसका वाजिद हक दे दे होमरुल की मांग के साथ उन्होंने क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा और भाषाई प्रांतों की स्थापना की मांग को भी रखा बाल गंगाधर तिलक की होम रूल लीग को शीघ्र ही सरकारी दमन का सामना करना पड़ा 23 जुलाई 1916 को तिलक को कारण बताओ नोटिस देकर पूछा गया कि उन पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगा दिया जाए सरकार की इस दमन से तिलक को प्रशंसा हुई क्योंकि जनता की सहानभूति होम रूल लीग के कार्यकर्ताओं के साथ हो गई अरब होमरूल आंदोलन जंगल में आग की तरह फैलेगा सरकारी दमन विद्रोह की आग को भड़काएगा

 ⚜♻⚜एनी बेसेंट की अखिल भारतीय होम रूल लीग⚜♻⚜

प्रथम विश्व युद्ध के समय जनता में उत्पन्न हुए आक्रोश और बेचैनी असंतोष को संघर्ष की दिशा में प्रवाहित करने के उद्देश्य से बाल गंगाधर तिलक के साथ-साथ एनी बेसेंट ने भी भारत में होम रूल लीग की स्थापना की घोषणा की थी
इस कारण ऐनी बिसेन्ट के समर्थकों ने भी होमरूल गठन का आरंभ कर दिया जमुनादास द्वारकादास शंकरलाल बैंकर तथा इंदुलाल याग्निक ने प्रचार के उद्देश्य से यंग इण्डिया का प्रकाशन आरंभ किया ऐनी बिसेन्ट ने तिलक की होम रूल लींग की स्थापना के 5 महीने बाद सितंबर 1916 में मद्रास में अखिल भारतीय होम रूल लीग की स्थापना की गयी
एनी बेसेंट द्वारा स्थापित की गई होम रूल लिंग के सहायक सचिव जॉर्ज अरुंडेल थे
होमरूल आंदोलन में सुब्रमण्यम अय्यर ने सबसे प्रमुख योगदान दिया मोतीलाल नेहरू और तेज बहादुर सप्रू जवाहरलाल नेहरू जैसेे नेता उनके होम रोल लीग में शामिल थे दो अलग-अलग नेतृत्व में गठित होम रूल लिंग पर जनता में भ्रम नहीं फैले और आपस में कोई गलतफहमी उत्पन्न ना हो इसके लिए तिलक और विषय अंत में अपनी अपने लिंग के लिए कार्य क्षेत्र निर्धारित कर लिए थे इस कारण एनी विसेंट द्वारा बाल गंगाधर तिलक के क्षेत्रों को छोड़कर देश के बाकी सभी क्षेत्रो में होमरूल आंदोलन को फैलाया गया एनी बेसेंट ने होमरूल का प्रचार अपने दैनिक पत्र न्यू इंडिया 14 जुलाई 1914 से प्रकाशित और साप्ताहिक पत्र कॉमन वील 2 जनवरी 1914 से प्रकाशित के माध्यम से किया जिसमें न्यू इंडिया का प्रमुख योगदान रहा पुस्तकालय की स्थापना की राजनीतिक कक्षाओं का आयोजन किया पर्चे बांटे और राजनीतिक सभाएं की होम रूल लीग के सर्वाधिक कार्यालय मद्रास में थे एनी बेसेंट की होम रूल लीग का आकार और विस्तार की दृष्टि से बड़ी थी लेकिन संगठन की दृष्टि से कमजोर थी होम रूल लिंग का अत्याधिक बोर्ड एनी बेसेंट जाट अरुंडेल रामास्वामी और bp वाड्या के कंधो पर था बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने अपनी अपनी लीग का एक दूसरे के साथ विलय नहीं किया इसका कारण एनी बेसेंट ने कहा उनके कुछ समर्थक मुझे पसंद नहीं करते मेरे कुछ समर्थक उन्है नापसंद करते थे लेकिन मेरे और उनके बीच किसी तरह का कोई झगड़ा नहीं था 1917 के आरंभ से ही होमरूल आंदोलन में तेजी आयी और नरमपंथी कांग्रेसियों का एक हिस्सा आंदोलन में सम्मिलित हो गया विपिनचन्द्र के अनुसार नरमपंथियों का होम रूल लीग को समर्थन देना कोई अचरज की बात नहीं थी क्योंकि लीग नरम पंथियों की राजनीतिक प्रचार व शैक्षणिक कार्यक्रम को ही अमलीजामा पहना रही थी आंदोलन के बढ़ते प्रभाव ने सरकार को चिंता में डाल दिया सरकार ने इस आंदोलन का भी दमन करना प्रारंभ कर दिया एनी बेसेंट के बरार व मध्य प्रांत में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया मद्रास सरकार ने छात्रों के राजनीतिक सभाओं में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया एनी बेसेंट वाडिया और अरुंडेल को नजर बंद कर दिया और ब्रिटिश सरकार ने 1917 में एनी बेसेंट को गिरफ्तार कर लिया गया एनी बेसेंट की गिरफ्तारी के विरोध में लिंग ने सत्याग्रह करना चाहा इन सभी कार्यों की तीखी प्रतिक्रिया हुई और सर एस०सुब्रह्मण्यम ने अपनी उपाधि को त्याग दिया और मालवीय जिन्ना और सुरेंद्र नाथ बनर्जी जैसे नेता लीग के सदस्य बनकर सक्रिय हो गये इसी के साथ बाल गंगाधर तिलक ने कांग्रेस का आह्वान किया कि वह असहयोग आंदोलन चलाने को तैयार हो जाएं और स्वराज्य की मांग पर किसानो और मजदूरों का समर्थन प्राप्त करने के लिए कार्य प्रारंभ हो गया अपने कार्यों की इस्तिथि प्रतिक्रिया ने अंग्रेज सरकार को चिंतित कर दिया इस कारण अंग्रेज सरकार ने जन आक्रोश को शांत करने हेतु सुविधा देने की नीति का अनुसरण करने का निश्चय किया इस कारण चारों ओर से दबाव महसूस कर भारत सचिव मोंटेग्यू ने 20 अगस्त 1917 को ब्रिटिश संसद में इस आशय से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें भारत सरकार को उत्तरदायी शासन प्रदान करने की बात कही गई थी भारत सचिव मोंटेग्यू ने घोषणा की ब्रिटिश शासन की मशीन है की भारत के प्रशासन में भारतीय जनता को भागीदार बनाया जाय और स्वशासन के लिए विभिन्न संस्थाओं का क्रमिक विकास किया जाए जिससे भारत में ब्रिटिश साम्राज्य से जुड़ी कोई उत्तरदाई सरकार स्थापित की जा सके मोंटेग्यू की इस नीति के तहत सितंबर 1917 में श्रीमती एनी बेसेंट को रिहा कर दिया गया था

भारत सचिव मोंटेग्यू की नीति के तहत एनी बेसेंट ने 20 अगस्त 1917 को होम रूल लिंग को समाप्त करने की घोषणा कर दी थी सरकार की इस नई नीति ने होमरूल आंदोलन को कमजोर करने के अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया था क्योंकि होम रूल लीग की समाप्ति की घोषणा और ऐनी बिसेन्ट की रिहाई के बाद लोगों को लगा कि अब आंदोलन की जरूरत नहीं है यह सभी निष्क्रिय हो गए
1918 में सुधार योजना की घोषणा ने स्वयं एनी बेसेंट को निष्क्रिय बना दिया और अंत में वह सुधार का समर्थन करके आंदोलन से अलग हो गई होम रुल आंदोलन का राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में दो कारणों से महत्व है पहला आंदोलन ने सरकार को अगस्त 1917 की घोषणा करवाना दूसरा 1918-19 में सुधार योजना देने के लिए बाध्य करना विपिन चंद्र ने लिखा है होम रूल आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने भावी आंदोलन के लिए जुझांरू योद्धा तैयार किए हैं साथ ही होमरूल आंदोलन ने उत्तर प्रदेश गुजरात हिंद मद्रास मध्य प्रांत और बरार जैसे अनेक क्षेत्रों को राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल किया होमरूल आंदोलन से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में एक नई शक्ति और चेतना का संचार हुआ था इस आंदोलन के राजनीतिक क्षेत्र में उदारवादी के प्रभाव का लगभग सूर्यास्त हो गया था इसकी व्यापक सफलता के परिणाम स्वरुप कांग्रेस में उग्रवादियों का पुनः प्रवेश हुआ 1917 में एनी बेसेंट को कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने घोषणा की कि भारत अब अनुग्रहो के लिए अपने घुटनों पर नहीं बल्कि अधिकारों के लिए अपने पैरों पर खड़ा है