Chief Minister ( मुख्यमंत्री )

Chief Minister ( मुख्यमंत्री )

 

भारतीय में संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया गया। जिस प्रकार केंद्र में प्रधानमंत्री होता है ठीक उसी प्रकार राज्य में मुख्यमंत्री होता है।भारत के संविधान में मुख्यमंत्री के पद का प्रावधान किया गया है और यह भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री राज्य सरकार का वास्तविक संवैधानिक प्रमुख होगा।

मुख्यमंत्री को “राज्य के प्रवक्ता” की संज्ञा दी जाती है।

अनुच्छेद 163 के अंतर्गत राज्यपाल को उसकी स्वविवेकी कार्यों को छोड़कर अन्य कार्यों में सहायता प्रदान करने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसका अध्यक्ष मुख्यमंत्री होगा।

अनुच्छेद 164 के अंतर्गत विधानसभा में बहुमत दल के नेता को राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया जाता तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री के परामर्श पर राज्यपाल के द्वारा की जाती है

यदि विधानसभा के आम चुनाव के पश्चात किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हुआ हो तो राज्यपाल के द्वारा अपने विवेक का प्रयोग करते हुए विधानसभा में सबसे बड़े दल के नेता को मुख्यमंत्री के रुप में नियुक्त किया जाता है उसे बहुमत सिद्ध करने का मौका प्रदान किया जाता है।

आंध्र प्रदेश तेलंगाना बिहार उत्तर प्रदेश कर्नाटक महाराष्ट्र जम्मू कश्मीर राज्यों में द्विसदनात्मक विधानमंडल है वहां पर मुख्यमंत्री विधान परिषद से भी नियुक्त किए जा सकते हैं परंतु उसके दल को विधानसभा में बहुमत होना चाहिए

91वें संविधान संशोधन 2003 के माध्यम से राज्य में भी मंत्री परिषद के आकार को परिसीमित कर दिया गया। अब यह निर्धारित किया गया, कि राज्य विधानसभा में अधिकतम मंत्री विधानसभा का 15% तथा न्यूनतम 12 सदस्य होंगे।

राजस्थान में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 30 हैं। मुख्यमंत्री का काल सामान्यतः 5 वर्ष होता है परंतु वास्तव में विधानसभा के बहुमत प्राप्ति तक

मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को राज्यपाल द्वारा शपथ दिलाई जाती है। अपना त्यागपत्र भी राज्यपाल को ही सौंपते हैं। यदि एक भी मंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है तो समूची मंत्रिपरिषद को त्याग देना होगा

राज्य में कोई भी व्यक्ति बिना विधानमंडल का सदस्य रहे 6 माह तक मंत्री पद को धारण कर सकता है लेकिन छः माह के भीतर उसे विधानमंडल की सदस्यता को प्राप्त करना होगा।

मुख्यमंत्री की भूमिका ( Role of chief Minister )

राज्य का मुख्यमंत्री राज्य का वास्तविक शासक होता है, वह राज्य की जनता, प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक होता है।

राज्य का मुख्यमंत्री निम्नलिखित भूमिकाओं का निर्वहन करता है।

1. मंत्री परिषद के रूप में➖ मुख्यमंत्री के द्वारा ही मंत्रिपरिषद का गठन किया जाता है उसमें विभागों का वितरण और फेरबदल किया जाता है। मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है, यदि मुख्यमंत्री ने त्यागपत्र दे दिया अथवा मुख्यमंत्री के पद के दौरान मृत्यु हो गई तो समूची मंत्रिपरिषद का अंत हो जाता है। मंत्री परिषद के निर्माण गठन तथा उसकी मृत्यु में मुख्यमंत्री सबसे अहम भूमिका का निर्वहन करता है।

2. बहुमत प्राप्त दल के नेता के रूप में➖ मुख्यमंत्री अपने दल का सर्वमान्य होता है इसी कारण दल में अनुशासन बनाए रखने तथा शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होती है।

3. राज्यपाल और मंत्रिपरिषद के मध्य कड़ी के रुप में➖ मुख्यमंत्री राज्यपाल तथा मंत्रिपरिषद के बीच मध्यस्थ की भूमिका अदा करता है तथा राज्यपाल को सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियों में परामर्श प्रदान करता है। अनुच्छेद 164 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह समस्त प्रशासन संबंधी सूचना राज्यपाल को प्रदान कराएं यदि किसी मंत्री ने किसी भी विषय पर निर्णय लिया है तथा मंत्रिपरिषद के द्वारा उस पर विचार विमर्श नहीं किया है तो राज्यपाल के द्वारा अपेक्षा किए जाने पर मुख्यमंत्री उसे मंत्रिपरिषद के समक्ष रखता है

4. राज्य के प्रशासक के रूप में➖ मुख्यमंत्री राज्य का वास्तविक प्रशासक होता है वह राज्य के समस्त लोक प्रशासन की धुरी होता है। मुख्यमंत्री राज्य में शांति और व्यवस्था बनाए रखने का कार्य और विकास कार्यों को गति देता है। मुख्यमंत्री एक अच्छा प्रशासक होता है उसमें प्रशासकीय कौशल और अच्छा नेतृत्व करने की क्षमता होना अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री राज्य का बजट बनाता है राज्य की पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण करता है उनको केंद्रीय सरकार से स्वीकृत कराता है राजकोषीय संतुलन को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री कर और शुल्क लगाकर जनता से राजस्व एकत्रित करता है। कहा जाए तो राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए मुख्यमंत्री एक कुशल प्रशासक के रूप में कार्य करता है, वास्तव में मुख्यमंत्री एक प्रशासक के रूप में प्रशासन का केंद्र बिंदु होता है।

5. एक नियुक्तिकर्ता के रूप में➖ राज्य का वास्तविक शासक होने के कारण मुख्यमंत्री को राज्य के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति करने का अधिकार होता है राज्य के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों, लोकायुक्त, राज्य का महाधिवक्ता और राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति राज्यपाल मुख्यमंत्री के परामर्श और सलाह पर ही करता है।

6. राज्यपाल के परामर्शदाता के रूप में➖ मुख्यमंत्री विधानसभा का नेता होता है, इसी कारण वह राज्यपाल को विधानमंडल के अधिवेशन आहूत करने सत्रावसान तथा विधानसभा को भंग करने में सिफारिश करता है। इन सभी कार्यों का संपादन राज्यपाल मुख्यमंत्री के परामर्श से ही करता है।

7. एक पथ प्रदर्शक के रुप में➖ मुख्यमंत्री राज्य के प्रशासन के मुख्य मार्गदर्शक के रुप में कार्य करता है वह राज्य प्रशासन में समायोजन और निर्देशन करता है। मुख्यमंत्री राज्य प्रशासन का सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है, जिसके चारों और राज्य प्रशासन का पहिया घूमता है।

8. राज्य के प्रतिनिधि के रूप में➖ मुख्यमंत्री केंद्र सरकार और अन्य राज्यों के समक्ष राज्य के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित होता हैं भारत के संविधान में मुख्यमंत्री के संदर्भ में देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ संबंधों के किसी भी प्रकार की व्याख्या नहीं की गई है, लेकिन मुख्यमंत्री का यह दायित्व होता है कि वह देश के राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें। मुख्यमंत्री राज्य के प्रतिनिधि के रूप में राष्ट्रीय विकास परिषद अंतर राज्य परिषद तथा अन्य राष्ट्रीय अभिकरणों में उपस्थित होकर राज्य की सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक और प्रशासनिक समस्याओं और जनसाधारण की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को प्रस्तुत करता है।

9. राज्य के प्रवक्ता के रूप में ➖ मुख्यमंत्री राज्य के प्रशासन एवं राज्य सरकार की योजनाओं, नीतियों और उपलब्धियों का आम जनता और अन्य राजनीतिक दलों को मीडिया के माध्यम से बताता है,और जनता का विश्वास हासिल करता है।

10. लोक सेवकों पर नियंत्रण कर्ता के रूप में➖ राज्य का मुख्यमंत्री राज्य में कार्यरत लोकसेवकों पर नियंत्रण करता है मुख्यमंत्री यह नियंत्रण राज्य के कार्मिक प्रशासन के द्वारा करता है

NOTE ➖ दिल्ली के मुख्यमंत्री की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 239 ( क ) के अंतर्गत की जाती हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है वह इस्तीफा भी राष्ट्रपति के नाम ही देता है लेकिन उसे शपथ दिल्ली का उपराज्यपाल दिलाता है।

मुख्यमंत्री के संबंध में सरकारिया आयोग की रिपोर्ट के सुझाव ( Recommendations of the Sarkaria Commission Report regarding Chief Minister )

1) विधानसभा में सर्वाधिक विधायक निर्वाचित होकर आने वाली पार्टी या पार्टियों के गठबंधन को बुलाया जाए

  • चुनाव के पहले राजनीतिक दलों के गठबंधन को अवसर दिया जाना चाहिए यदि वह गठबंधन सर्वाधिक सीटें जीतकर आता है।
  • चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीतकर आने वाली सबसे बड़ी पार्टी जो अन्य राजनीतिक दलों के समर्थकों के साथ सरकार बनाने का दावा करती हैं, वह राजनीतिक दल निर्दलीय जीतकर आने वाले उम्मीदवारों का भी समर्थन प्राप्त कर सकता है।
  • चुनाव के बाद जीतकर आने वाले राजनीतिक दलों का गठबंधन जो सरकार बनाने का दावा करता है इस गठबंधन से सभी पार्टियों की मिली जुली सरकार बन सकती है।
  • जब तक बहुमत प्राप्त दल का नेता विधानसभा में बहुमत सिद्ध नहीं कर देता तब तक वह मुख्यमंत्री नहीं माना जा सकता मुख्यमंत्री को शपथ ग्रहण करने की तारीख से 30 दिन के अंदर-अंदर विश्वास मत हासिल करना आवश्यक होता है।

मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अंतर ( Difference in Council of Ministers and Cabinet )

  • मंत्रिपरिषद का आकार बड़ा होता है जबकि मंत्रिमंडल का आकार छोटा होता है।
  • मंत्रिपरिषद में कैबिनेट, राज्य मंत्री स्तर के मंत्री और संसदीय सचिव होते हैं, जबकि मंत्रिमंडल में केवल कैबिनेट स्तर के मंत्री होते हैं।
  • मंत्री परिषद का उल्लेख भारत के संविधान में किया गया है लेकिन मंत्रिमंडल शब्द का वर्णन संविधान में नहीं किया गया है।
  • मंत्री मंडल मंत्री परिषद का एक भाग होता है जबकि मंत्रिपरिषद मंत्रीमंडल का भाग नहीं होती है।
  • मंत्री परिषद में सरकार के सभी विभागों को शामिल किया जाता हैं जबकि मंत्रिमंडल में केवल महत्वपूर्ण प्रकृति के विभाग शामिल होते हैं।

शासन सचिवालय ( Governance Secretariat )

राज्य में प्रशासनिक कार्यों के सफल संचालन के लिए प्रशासन के शीर्ष स्तर पर शासन सचिवालय है,जो जयपुर में स्थित है। सचिवालय राज्य सरकार की नीतियों एवं निर्णयों के क्रियान्वयन की मुख्य इकाई है।

सचिवालय का मुख्य अधिकारी मुख्य सचिव होता है मुख्य सचिव प्रशासन में समन्वय तथा मार्गदर्शन का कार्य करता है। शासन सचिव संबंधी मंत्रियों को नीतियों और प्रशासनिक कार्यों से अवगत कराता है। तथा निर्णय लेने में आवश्यक सलाह देता है।

सफल प्रशासन के लिए प्रत्येक मुख्य विभाग का एक सचिव होता है, सचिव को कार्य में सहयोग देने के लिए विशिष्ट सचिव, उप सचिव ,सहायक सचिव तथा अनुभाग अधिकारी होते हैं।

मुख्य सचिव ( Chief Secretary )

राज्य का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी मुख्य सचिव होता है जो सचिवालय व सिविल सेवा का प्रमुख होता है। मुख्य सचिव पद का सृजन गवर्नर जनरल वायसराय लार्ड वेलेजली ने 1799 ईस्वी में किया था

सर्वप्रथम जी एस बालों को मुख्य सचिव बनाया गया। यह पद 1858 ईस्वी तक केंद्र के अधीन रहा तत्पश्चात यह राज्य सरकार का पद बन गया राजस्थान में सचिवालय की स्थापना 1951 में की गई

मुख्य सचिव की नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा इसकी वरिष्ठता सेवा अभिलेख और मुख्यमंत्री के विश्वास पात्र को ध्यान में रखकर की जाती है जो मुख्यमंत्री के नियंत्रण निर्देशन में कार्य करता है।

मुख्य सचिव मुख्यमंत्री के शासकीय कार्य में मुख्य सलाहकार और राष्ट्रपति शासन के समय राज्यपाल के सलाहकार के रूप में कार्य करता है राजस्थान के प्रथम मुख्य सचिव के. राधाकृष्णन थे। जो सर्वाधिक समय तक मुख्य सचिव रहे।

 

Specially thanks to Post writer ( With Regards )

दिनेश मीना,झालरा,टोंक

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