जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान ( Jim Corbett National Park )

Jim Corbett National Park ( जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान )

 

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय पार्क हैइस राष्ट्रीय पार्क को 1936 में विलुप्त होने वाले बंगाल बाघ की रक्षा के लिए स्थापित किया गया था  इसे सबसे पहलें हेली नेशनल पार्कके रूप में स्थापित किया गया था यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है

इस राष्ट्रीय उद्यान का नाम जिम कार्बेट के नाम पर रखा गया है जिसने इसकी स्थापना में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था  देश में बाघ परियोजना की शुरुआत पहली बार इसी पार्क में की गई थी अथार्थ बाघ परियोजना की पहल करने वाला यह पहला पार्क था जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान पर्यटक और वन्यजीव प्रेमियोंके लिए लंबे समय तक आकर्षण का केंद्रबना रहा  जिम कार्बेट राष्ट्रीय पार्क में पर्यटको के भ्रमण का समय नवंबर से मई माह तक होता है

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का दूसरा नाम रामगंगा नेशनल पार्क रखा गया  स्वतंत्रता के बाद इस पार्क का नाम जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान रखा है जिम कार्बेट एक प्रसिद्ध शिकारी था  जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान दिल्ली से 240 किलोमीटर दूर उत्तर पूर्व दिशा में स्थित है इस राष्ट्रीय उद्यान के नजदीक रामनगर शहर पड़ता है

उपनाम 

यह राष्ट्रीय उद्यान देश का ही नहीं एशिया का पहला राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभ्यारण है जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान को बाघो का स्वर्ग भी कहते हैं जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान को बाघो का स्वर्ग इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां बाघों की आबादी बहुत ज्यादा है

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास ( History of Jim Corbett National Park )

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास काफी विकसित और समृद्ध था पूर्व में यह पार्क टिहरी गढ़वाल के शासकों की निजी संपत्ति हुआ करता था  गोरखा आंदोलन के दौरान 1820 के आसपास राज्य के इस हिस्से को ब्रिटिश शासकों को उसके सहयोग के लिए सौंप दिया गया था
इसके अतिरिक्त कहा जाता है कि अंग्रेजों ने 1820 में ही इस बिहड जंगलकी खोज की थी उस समय यहां खूंखार जंगली जानवरों का आधिपत्य था  ब्रिटिश शासन ने सर्वप्रथम यहां शाल वृक्षों का रोपण करवाया हम कह सकते हैं कि जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास ब्रिटिश कालसे जुड़ा हुआ था

अंग्रेजों ने इस पार्क का उपयोग लकड़ी के लिए काफी किया अंग्रेजों ने इस पार्क से लकड़ियां लेकर रेलगाड़ियों की सीटों का निर्माण  किया गया रेलगाड़ी की सीटों के लिए टीक के पेड़ोंको भारी संख्या में काटा गया

इस पार्क के संरक्षण के लिए पहली बार मेंजर रेमसई ने एक योजनातैयार की थी 1879 में वन विभाग ने इस पार्क को अपने कब्जे में ले लिया और संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का प्रथम नामकरण ( Jim Corbett National Park First Name )

1934 में संयुक्त प्रांत के गवर्नर मैलकम हैली ने संरक्षित वन को जैविक उद्यान घोषित कर दिया इस कारण इस पार्क को 1936 में मैलकम हैली के नाम पर हैली नेशनल पार्क नाम दिया गया यह भारत का पहला राष्ट्रीय पार्क और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पार्कबना है

नामकरण

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का नाम तीन बार रखा गया है

  • प्रथम नाम-हैली नेशनल पार्क( स्वतंत्रता से पहले 1936) 
  • दूसरा नाम-रामगंगा राष्ट्रीय उद्यान (स्वतंत्रता प्राप्ति के समय)
  • तीसरा नाम-जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान( स्वतंत्रता के पश्चात 1957)​

प्रथम नाम (1936)

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का प्रथम नाम संयुक्त प्रांत के गवर्नर मेलकम हैलीके नाम पर रखा गया था 1934 में संयुक्त प्रांत के गवर्नर मेलकम हेली ने इस संरक्षित वन को जैविक उद्यान घोषित किया था इस कारण इस पार्क का नाम 1936 हेली नेशनल पार्क रखा गया

द्वितीय नाम

जिम कार्बेट राष्ट्रीय पार्क का दूसरा नाम रामगंगानदी के ऊपर रखा गया था  जिम कार्बेट राष्ट्रीय पार्क का दूसरा नाम आजादी के समय रखा गया था  इस पार्क से रामगंगा नदी बहती है जिसके कारण इसका नाम रामगंगा राष्ट्रीय पार्करखा गया था

तृतीय नाम (1957)

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का तीसरा नाम स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1957 में रखा गया था  जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का यह नाम एक शिकारी के नाम पर दिया गया था  जिम कार्बेट नाम का एक शिकारी था जिसने इस पार्क को विकसित करने में अपना काफी सहयोग दिया था अत उनके कार्यों को सच्ची श्रद्धांजलि देने के रूपमें इस पार्क का नाम जिम कार्बेट राष्ट्रीय पार्क ,जिम कार्बेट की मृत्यु(1955)के पश्चात रखा गया

जिम कार्बेट ( शिकारी ) जीवन परिचय ( Jim Corbett )

जिम कार्बेट एक अंग्रेज शिकारी थे जिनके नाम पर इस राष्ट्रीय उद्यानका नाम रखा गया है जिम कार्बेट का पूरा नाम जेम्स एडवर्ड कार्बेट था इनका जन्म 25 जुलाई 1875 में नैनीताल के कालाढूंगी नामक स्थान  में हुआ था जिम कार्बेट बचपन से ही बहुत मेहनती ,निडर थे जिम कार्बेट  आयरिश मूल के भारतीय लेखक व दार्शनिक थे  उन्होंने कहीं काम जैसे ड्राइवरी ,स्टेशन मास्टरी और सेना जैसे कार्य किए साथ ही यह ट्रांसपोर्ट अधिकारी तक बन चुके थे

लेकिन यह वन्य पशुओं के प्रेम की  ओर आकर्षित रहते थे इन्होंने मानवीय अधिकारों के लिए संघर्षकिया और संरक्षित वनों के आंदोलनका भी प्रारंभ किया जब भी इन्हें समय मिलता था यह कुमाऊं के वनोंमें घूमने निकल जाते थे जिम कार्बेट ने अपना निवास स्थल कालाढूंगीमें बनाया

जिम कार्बेट ने कालाढूंगी के आदमखोर बाघ का शिकार करके इस इलाके के लोगों को डर से मुक्त किया यहां के स्थानीय लोग इन्हें “”गोरा साधू””करते थे 

जिम कार्बेट म्यूजियम ( Jim Corbett museum )

कालाढूंगी में छोटी हलदानी नाम के स्थान पर अब इनके शीतकालीन प्रवास के घर को एक शानदार म्यूजियम के रूप में बना दिया गया है  जिसमें जिम कार्बेट की चित्,र उनकी किताबें ,शेरों के साथ उनकी तस्वीर, हथियार, बंदूक और वन्य जीवन से संबंधित कई प्रकार की पठनीय सामग्री देखने को मिलती है

यह सभी वस्तुएं जिम कार्वेट के जीवन का ज्ञान कराती है जो न केवल एक शिकारी था बल्कि एक संरक्षक, चमड़े का कार्य करने वाला ,जंगली जानवरों का फोटो खींचने वाला और एक बढई था इसी संग्रहालय  के पास जिम के प्रिय कुत्ते की कब्र भी है ?जिम कार्बेट ने उत्तराखंड के गढ़वाल जिले में बहुत सारे आदमखोर बाघोको मारा था जिनमें से रुद्रप्रयाग का आदमखोर तेंदुआभी शामिल है

जिम कार्वेट आजीवन अविवाहित रहे इनकी बहन थी उन्होंने भी शादी नहीं की थी  कुमाऊं और गढ़वाल में जब भी कोई आदमखोर शेर आ जाता था तो जिम कार्बेट को बुलायाजाता था  जिम कार्वेट वहां पहुंचकर आदमखोर शेर को मार कर सब की रक्षा करते थे

जिम कार्बेट अच्छे शिकारी होने के साथ-साथ कुशल लेखक भी थे जिम कार्बेट द्वारा लिखी गई पुस्तक “”भाई इंडिया”” बहुत चर्चित रही

जिम कार्बेट की मृत्यु ( Jim Corbett’s death )

जिम कार्बेट 1947 में अपनी बहन के साथ केन्या चले गए वहीं पर 19 अप्रैल 1955 को इनकी मृत्युहो गई इनकी मृत्यु के पश्चात रामगंगा राष्ट्रीय उद्यान का नाम बदलकर 1957 में जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यानरखा गया

कुमाऊं की धरती पर स्थापित पार्क उनके द्वारा किए गए कार्यों के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलिथी

कार्बेट फॉल ( Corbett fall )

जिम कार्बेट के कालाढूंगी के ही पास नया गांव में एक खूबसूरत झरना बहता है जो कि एक दर्शनीय स्थल है इस झरने को कॉर्बेट फॉल नाम दिया गया है

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का निर्माण ( Construction of Jim Corbett National Park )

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के निर्माण के कई कारण थे जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड के नैनीताल जिले के कुमाऊं और गढ़वाल के बीच में रामगंगा नदी के किनारे स्थित है  राष्ट्रीय उद्यान से पूर्व यह क्षेत्र घना बिहड कहलाता था जिसकी खोज का श्रेय अंग्रेजों को दियागया था अंग्रेजों द्वारा इसकी खोज 1820में की गई थी अंग्रेजों ने इस क्षेत्र का उपयोग लकड़ी के दोहन में बहुत ज्यादा किया

बाघों की स्वर्ग स्थली विभिन्न जैव विविधता वाले स्थान जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व की स्थापना 8 अगस्त 1936 को हेली नेशनल पार्क के नाम से हुई थी

पहली बार 1958 में और उसके बाद कुमाऊं के कमिश्नर मेजर हेनरी रैम्जे ने यहॉ के वनो को सुरक्षित रखने के लिए व्यवस्थित योजना बनाई थी इसी क्रम में 1861-62 में ढिकाला और बोक्साड के चौडो मैं खेती ,मवेशियों को चराने और लकड़ी काटने पर रोक लगा दी गई थी 

1868 में इन वनों की देखभाल का जिम्मा वन विभाग को सौंपा गया जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना का शुभारंभ मेजर रेम्जे की ही संरक्षण की योजना से होता है

पहली बार मेजर रेम्जे ने ही इसके संरक्षण की एक व्यापक योजना बनाई थी जिसके तहत 1879 में वन विभाग ने इसे अपने अधिकार क्षेत्रमें ले लिया था और संरक्षित क्षेत्र घोषितकर दिया गया  वर्ष 1907 में सर माइकल कीन ने इन वनों को  वन्य प्राणी अभ्यारण बनाने का प्रस्ताव रखा

लेकिन सर जॉन हिवेट ने इस प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया था इसके पश्चात 1934 में तत्कालीन संयुक्त प्रांत के गवर्नर सर मेलकम हेलीने इस स्थान को अभ्यारण बनाने की योजना बनाई इसी दौरान लंदन में संपन्न संगोष्ठी में संयुक्त प्रांत के पर्यवेक्षक स्टूवर्ड के प्रयासों से इस संरक्षित क्षेत्र के राष्ट्रीय उद्यान का प्रस्तावुस्वीकार कर लिया गया था

1934 में संयुक्त प्रांत के गवर्नर मैल्कम हेली ने संरक्षित वन को जैविक उद्यान घोषित किया गया 1935 में सरकार ने वन्य जीवन (संरक्षण )अधिनियमके तहत देश भर में राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के नेटवर्क में वन्यजीवों के आवास का संरक्षण किया और इस तरह वर्ष 1936 में इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना हुई

इस पार्क का नाम 1936 में गवर्नर मेलकम हैली के नामपर रखा गया था  इस प्रकार से जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभहुई थी  यह भारत का पहला राष्ट्रीय पार्क है और भारत में स्थापित पहला पार्कभी है

स्वतंत्रता के समय इस पार्क का नाम *रामगंगा नेशनल पार्क और इसके पश्चात 1957 में इस पार्क का नाम जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यानरखा गया

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में सीमांकन और इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण और क्षेत्रीय लोगों को आदमखोर बाघो को मार कर भयमुक्त करने वाले मशहूर अंग्रेज शिकारी व पर्यावरण प्रेमी जिम कार्बेट के निधन के पश्चात श्रद्धांजलि स्वरुप इसका नाम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान रखा गया

बाघ परियोजना का प्रारंभ ( Tiger project )

एक समय था जब यह  राष्ट्रीय पार्क  बाघों की संख्या से भरपूर था  इस क्षेत्र में बाघों की कमी होने के कारण इसे टाइगर प्रोजेक्ट के अधिन लिया गया भारत के सबसे महत्वपूर्ण टाइगर प्रोजेक्ट के अधीन आने वाला यह पार्क देश का पहला राष्ट्रीय पार्क है

बाघों की घटती हुई संख्या पर रोक लगाने के उद्देश्य से 1973 में इसे प्रोजेक्ट टाईगर के अधीन लाया गया 1973 में देश में वैज्ञानिक आर्थिक सौंदर्यपरक ,सांस्कृतिक और पारिस्थितिकीय मूल्यों की दृष्टि से वन्यजीवों की व्यावहारिक संख्या बनाए रखने के साथ लोगों के लाभ, शिक्षा और मनोरंजन के लिए राष्ट्रीय विरासत के रूप में जैविक महत्व के ऐसे स्थानों को हमेशा के लिए सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से बाघ परियोजनाओंकी शुरुआत की गई

बाघ परियोजना की शुरुआत के समय देश के 14 राज्यों में पहले 23 और बाद में दो और मिलाकर कुल 25 आरक्षित वन क्षेत्रमे शामिल किया गया  1973 में जिम कार्बेट पार्क को भी इस योजना के तहत शामिल किया गया था

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का क्षेत्रफल, विस्तार और वातावरण ( Area, expansions and environments of Jim Corbett National Park )

क्षेत्रफल ( Area )

शुरुआत में जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व 323.50 वर्ग किलोमीटरमें फैला हुआ था लेकिन वन्य जंतुओं की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 1916 में इसमें 197.07 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रऔर मिलाया गया  इस प्रकार इस का क्षेत्रफल बढ़कर 520.82 किलोमीटर हो गया

1 अप्रैल 1973 को जिम कार्बेट उद्यान को प्रोजेक्ट टाइगर परियोजना में शामिल किया गया इस कारण 1991 में फिर से इसके विस्तार करने की जरूरत पड़ी  इस में सोना नदी वन्य जंतु विहार और कालागढ़ आरक्षित वन क्षेत्र को मिलाकर इसका क्षेत्रफल बढ़ा कर लगभग 1300 वर्ग किलोमीटर हो गया

यह राष्ट्रीय उद्यान रामगंगा की पातलीदून घाटी में 1318.54 वर्ग किलोमीटरमें बसा हुआ है जिसके अंतर्गत 821.99 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र जिम कार्बेट बाघ संरक्षित क्षेत्र है

विस्तार ( Expansions )

यह राष्ट्रीय उद्यान उत्तरांचल राज्य के  नैनीताल जिले में रामनगर शहर के निकट एक विशाल क्षेत्र को घेरकर बनाया गया है  यह उत्तर पूर्व में दिशा में स्थित है कुमाऊं और गढ़वाल के मध्य रामगंगा नदी के किनारेस्थित है

जिम कार्बेट नेशनल पार्क में 520. 8 वर्ग किलोमीटर में पहाड़ी नदी के बेल्ट, दलदली गड्ढे ,घास के मैदान और एक बड़ी झील आती है  उत्तराखंड राज्य की तलहटी में समुंद्र सतह से ऊंचाई लगभग 1300 से 4000 फीटतक होती है

वातावरण ( Environment )

यहां शीतकालीन रात्रि ठंडी होती है लेकिन दिन,धूपदार और गरमहोते हैं  इस जगह पर जुलाई से सितंबर तक बारिश होती है  इस पार्क मुख्यालय राम नगर में है

जब पर्यटक पूर्वी द्वार से उद्यान में प्रवेश करते हैं तो छोटे-छोटे नदी नाले ,साल के छायादार वृक्ष और फूल पौधों की एक अनजानी सी सुगंध उनका मन मोह लेती है  पर्यटक इस प्राकृतिक सुंदरता मे सम्मोहित करता है

विशेषताएं ( Features )

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की सबसे प्रमुख विशेषता यहां के रॉयल बंगाल टाइगर है कुदरत ने यहां खूब दिल खोलकर अपना वैभव, छटा बिखेरी है हरी-भरी पहाड़ियां ,कल कल बहती नदी नाले ,विचरण करते हिरण के झुंड ,कई प्रकार के पक्षी, मगरमच्छ ,घड़ियाल ,हाथियों के समूह आदि देखने लायक मनोरम दृश्यहैं

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान की सबसे खास बात यह है कि यहां देश के सबसे ज्यादा टाइगर (160)है जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में उप- हिमालयन बेल्ट की भौगोलिक और पारिस्थितिक विशेषताएं हैंयह एक पर्यटक स्थल भी है

यहां पौधों की 486 प्रजातियां और जीवो की एक विविधता पाई जाती है इस पार्क में घने नम पर्णपाती वन जिन में मुख्य रूप से साल, हल्दू, पीपल ,रोहिणी और आम के वृक्षपाए जाते हैं यह सभी वृक्ष जंगल का लगभग 70% हिस्सा घेरते हैं जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में 10% घास के मैदान होते हैं

यहां पर 110 पेड़ की प्रजातियां पाई जाती है जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में 580 पक्षी प्रजातियां और 25 सरीसर्प प्रजातियां का विस्तार मिलता है जिम कार्बेट नेशनल पार्क में भारतीय हाथी ,शेर, भालू ,बाग, सूअर ,हिरण ,चीतल, सांभर, पांडा, काकड़, नीलगाय और चीता वन्यप्राणीअधिक संख्या में मिलते हैं

वन्य पशु विहार में अनेक प्रकार के जंतु पाए जाते हैं जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में लगभग 600प्रजातिया पक्षियों की पायी गई है  जिम कार्बेट रा्ट्रीय उद्यान देश का एक ऐसा अभ्यारण है जिसमें वन्य जंतुओं की अनेक जातियां-प्रजातियो के साथ पक्षियों का भी आधिक्यरहता है

वर्तमान समय का जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान अत्याधिक समृद्ध उद्यान है जिम कार्बेट राष्ट्रीय पार्क से रामगंगा नदी बहती है ऐसी नदी के नाम पर स्वतंत्रता के समय इस पार्क का नाम रामगंगा नेशनल पार्करखा गया था जिम कार्बेट राष्ट्रीय अभ्यारण की विशेषता है कि इस अभ्यारण में भ्रमण केवल हाथी पर सवार होकर ही किया जा सकता है इस उद्यान में हाथियों के झुंड घूमतेहैं

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में देखने लायक तथ्य ( Factual facts to see in the Jim Corbett National Park )

वनस्पति ( Vegetation )

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान प्रकृति की अपार धन-संपदाको अपने में समेटे हुए हैं जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व तराई भावर के मैदानों से लेकर पहाड़ों और नदियों के बीच बसा हुआ है  यहां निचले क्षेत्रों से लेकर ऊपर के हिस्सों तक पेड़ पौधों में कई प्रकार की विविधता पाई जाती है

यहां साल,शीशम,खेर,ढाक, सेमल,बेर चिर,अनौरी,बकली, तेंदु और कचनारा आदि वृक्षों की उपलब्धता इस अभ्यारण में अधिक संख्या में है जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के पार्क में कुछ जगह पर बासं भी देखे जा सकते हैं

पक्षी ( Bird )

जिम कार्बेट पार्क में बगुला डार्टर,पनकोवा, टिटहरी,पेराडाइज फ्लाई कैचर,मुनिया, वीवर बर्ड्स, फिशिंग ईगल, सर्पेन्ट ईगल, जंगली मुर्गा,मैना,बुलबुल, कोयल, मोर बार्बेट, किंगफिशर,बतख,गीज, सैंडपाइपर, नाइटजार,पेराकिट्स, उल्लू ,कुक्कू,कठफोड़वा चील सुरखाब जैसे लगभग 600 प्रकार के रंग बिरंगे पक्षियों की प्रजातियां यहां देखने को मिलती है

जीव-जन्तु ( ANIMAL )

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान का सबसे आकर्षण का केंद्र यहां का पशु पशु बाघ-रॉयल बंगाल टाइगर हैं। जो कि भारत देश में सर्वाधिकयहां ही मिलते हैं साथ ही यहां रामगंगा के इर्द-गिर्ग फैले घास के पठारों से ‘चौडों’ यानी मैदानों और ‘मंझाड़े’ (जल के मध्य स्थित जंगल), में सैंकडों की तादाद में हिरनों जिनमे खासकर स्पॉटेड डियर यानी चीतलों के झुंड सहजता से नजर आ जाते हैं।

भारतीय हाथी, गुलदार, जंगली बिल्ली, फिशिंग कैट्स, हिमालयन कैट्स, हिमालयन काला भालू, सुअर, तेंदुवे, गुलदार, सियार, जंगली बोर, पैंगोलिन, भेड़िए, मार्टेंस, ढोल, सिवेट, नेवला, ऊदबिलाव, खरगोश, चीतल, सांभर, हिरन, लंगूर, नीलगाय, स्लोथ बीयर, सांभर, काकड़, चिंकारा, पाड़ा, होग हिरन, गुंटजाक (बार्किग डियर) सहित कई प्रकार के हिरण, तेंदुआ बिल्ली, जंगली बिल्ली, मछली मार बिल्ली, भालू, बंदर, जंगली, कुत्ते, गीदड़, पहाड़ी बकरे (घोड़ाल) तथा हजारों की संख्या में लंगूर और बंदरों की प्रजातियां पाई

इसके अतिरिक्त यहां पर रामगंगा नदी के गहरे कुंडों में शर्मीले स्वभाव के घड़ियाल और तटों पर मगरमच्छ, ऊदबिलाव और कछुए सहित 50 से ज्यादा स्तनधारी पाए जाते हें।

रामगंगा व उसकी सहायक नदियों में “”स्पोर्टिंग फिश कही जाने वाली महासीर”” मछली पाई जाती है, इसके अतिरिक्त रोहू, ट्राउट, काली मच्छी, काला वासु और चिलवा प्रजाति की मछलिया की प्रजातियां मिलती है

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के जंगल में किंग कोबरा, वाइपर, कोबरा, किंग कोबरा, करैत, रूसलस, नागर और विशालकाय अजगर जैसे 25 प्रजाति के सरीसृप व सर्प प्रजातियांभी पायी जाती हैं, जो बताती हैं कि यह क्षेत्र सरीसृपों और स्तनपायी जानवरों की जैव विविधता के दृष्टिकोण से कितना समृद्ध है।

जिम कार्बेट राष्ट्रीय संग्रहालय ( Jim Corbett National Museum )

जिम कार्बेट के शीतकालीन आवास को संग्रहालय का रूप दिया गया है इसमें जिम कार्बेट से संबंधित वस्तुएं रखी गई है जो भी पर्यटक जिम कार्बेट अभ्यारण जाता है वह इस संग्रहालय का अवलोकन अवश्य करता है इस संग्रहालय के अवलोकन से  पर्यटको को जिम कार्बेट के जीवन का ज्ञान प्राप्त होता है

जिम कार्बेट के कुत्ते की कब्र – जिम कार्बेट संग्रहालय के पास ही जिम कार्बेट के सबसे प्रिय कुत्ते की कब्र बनाई गई है जो कि अपने आप में अद्भुत है

कार्बेट फॉल – जिम कार्बेट संग्रहालय के पास नयागांव के करीब एक खूबसूरत सा झरना बहता है जो देखने लायक स्थान है इस स्थान को कार्बेट फॉल का नाम दिया गया है

कालागढ़ बांध – कालागढ़ बांध रामगंगा नदी पर बनाया गया है जो देश का ही नहीं एशिया का सबसे अनूठा बांध है

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में जानवरों को देखने के लिए बनाए गए जोन

जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में जानवरों को देखने के लिए इस पार्क को पांच जोन में विभाजित किया गया है इन पांच को उनके नाम निम्न प्रकार है जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में इन जोनों के माध्यम से वहां विचरण करने वाले जीव जंतु ,वहां के प्राकृतिक दृश्य, शांत माहौल, बहते हुए नदी झरना आदि को देख कर मन को संतुष्टकिया जा सकता है  इन जोन के द्वारा जिम कार्बेट के मनोहारी प्राकृतिक दृश्य को देख कर मन में एक सुखद आनंद की अनुभूति होती
⚜ झिरना    ⚜ बिजलानी  ⚜ ढिकाला   ⚜ दुर्गा देवी  ⚜ सीताबानी

झिरना – झिरना जिम कार्बेट नेशनल पार्क,पर्यटन वर्ष दौर के लिए खुला रहने वाला एक महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्र है झिरना रामनगर शहर से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है

बिजरानी – यह जॉन प्राकृतिक सौंदर्य और खुले घास के मैदानों से परिपूर्ण है प्रचुर मात्रा में घास की उपलब्धि के कारण यह क्षेत्र लोकप्रिय पर्यटन केंद्र है बिजरानी जोन का प्रवेश द्वार रामनगर शहर से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है

ढिकला – ढिकला पातिलदून रामगंगा की घाटी की सीमा पर स्थित है यह स्थान वन्य जीवन की दृष्टि से जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में सबसे लोकप्रिय गंतव्य है ढिकला जोन जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में सबसे बड़ा और सबसे विविध क्षेत्र है यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है इस स्थान से विदेशी जीव की दृष्टि की पेशकश उत्तम है ढिकला जोन का प्रवेश द्वार रामनगर शहर से 18 किलोमीटर दूर है

दुर्गा देवी जोन – जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में दुर्गा देवी जौन उत्तर पूर्वी सीमा पर स्थित है दुर्गा देवी जॉन उन लोगों के लिए पृथ्वी पर स्वर्ण है जो पक्षी देखने का शोक रखते है दुर्गा देवी जॉन का प्रवेश द्वार रामनगर सर से 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है

सीताबानी – सीताबानी जॉन कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आता है लेकिन प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण यह स्थान बिल्कुल शांत है जो कि हमारे जीवन में एक सुकून देता है जो व्यक्ति शांत माहौल पसंद करते हैं वह सिताबानी क्षेत्र का  आनंद उठा सकते हैं इन जोनो का भ्रमण जीप की सफारी द्वारा किया जा सकता है इसके अतिरिक्त यहां पर हाथी के द्वारा जिम कार्बेट अभ्यारण का भ्रमण अधिक किया जाता है

क्योंकि वाहनों की आवाज से जीव जंतुओं के जीवन में शोरगुल उत्पन्न होता है और उन्हें परेशानी होती है इस कारण से अधिकतर हाथी के द्वारा इन क्षेत्रों का भ्रमण किया जाता है

रामगंगा नदी ( Ramganga River )

देश का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान रामगंगा नदी के किनारे स्थित है रामगंगा नदी इस अभ्यारण में से होकर गुजरती है इस कारण स्वतंत्रता के समय किस अभ्यारण का नाम राम गंगा राष्ट्रीय उद्यानभी रखा गया था

उद्गम – रामगंगा नदी लघु हिमालय से पर्वत श्रंखलाओं से निकल,यह नदी उत्तराखंड के गढ़वाल जिले के कुमाऊं क्षेत्र मे हिमालय के दक्षिण भाग से होकर नैनीताल के निकट से होती हुई उत्तर प्रदेश में बहती है राम गंगा नदी की लंबाई 690 किलोमीटर है

बहाव क्षेत्र – रामगंगा नदी मुरादाबाद ,बरेली, बदायूं शाहजहांपुर ,फर्रुखाबाद , हरदोई, आदि जिलो से गुजरती है
मुहाना –  रामगंगा नदी 144 किलोमीटर की  पहाड़ी यात्रा करके कालागढ़ जिले के निकट बिजनौर जिले के मैदान में उतरती हैं मैदानी यात्रा के 24 किलोमीटर के पश्चात कोह नदी रामगंगा नदी में मिलती है रामगंगा नदी कन्नौज के निकट हरदोई जनपद की सवायजपुर तहसील में गंगामे मिल जाती है

विशेषताएं – रामगंगा नदी भारत की एक प्रमुख नदी है यह नदी जिम कार्बेट नेशनल पार्क में बहने वाली बारहमासी नदियों में से एक है यह नदी बारिश से जल प्राप्त करती है और उद्यान में प्रवेश लेने से पहले 100किलोमीटर का सफर बाहर करती है  जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में प्रवेश करने के पश्चात यह नदी 40 किलोमीटर कालागढ़की ओर बहती है मध्य काल के मुसलमान साहित्यकारों ने इस नदी को “राहिबा”‘ लिखा था

यह नदी वाल्मीकि रामायण अयोध्या कांड में वर्णित उत्तरंगा नदी है  इस नदी में मशीर-मछली, घड़ियाल ,मुग्गेर मगरमच्छ और कछुएपाए जाते हैं   शीत ऋतु के मौसम में यह मध्य एशिया और यूरोप से कई प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करती है जैसे फिश-ईगर,कुररी, सारस और Kingfisher आदि 

सहायक नदियां – पालिन, मंडल ,सोना नदी,कोह  इसकी सहायक नदियां हैं

महत्व – इस नदी के जल का प्रयोग सिंचाई में अधिक नहीं किया जाता है क्योंकि इस नदी के रास्ते परिवर्तनशील और अनिश्चित हैं  नदी के पानी का उपयोग सिंचाई के लिए लेने के लिए कालागढ़ में एक बांध बनाया गया है

कालागढ़ बांध ( Kalagarh dam )

स्थान – कालागढ़ बांध उत्तराखंड में स्थित रामगंगा नदी कालागढ़ स्थान पर बना हुआ है जो कि जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान से गुजराती राम गंगा नदी पर बना है यह बांध जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के दक्षिण पश्चिम में स्थित है

कालागढ़ बांध के निर्माण- रामगंगा नदी के जल को सिंचाई के लिए उपयोग में नहीं लाया जा सकता था इस कारण से कालागढ़ स्थान पर सिंचाई हेतु इस नदी पर बांध का निर्माण किया गया है रामगंगा नदी के पानी को रोकने के लिए पहाड़ियों के बीच में सीमेंट का ही नहीं बल्कि मिट्टी और पत्थर लगाए गए थे और कालागढ़ बांधबनाया गया था इस बांध पर सिंचाई के साथ साथ बिजली का उत्पादन भी किया जाता है

प्रसिद्धिं – यह बांध दुनिया के प्रसिद्ध अजूबे जैसा माना जाता है यह बांध एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बना हुआ बांध है कालागढ़ बांध एशिया के  कच्चे बांधों में सबसे बड़ा  बांध है एशिया के कच्चे बांधों में सबसे बड़ा कालागढ़ बांध जोकि मिट्टी का बना हुआ है इसकी सुरक्षा देखरेख व्यवस्था नहीं होने के बावजूद भी यह बात अभी तक व्यवस्थित है

विशेषता 

  • कालागढ़ बांध क्षेत्र में मैसूर के कावेरी नदी पर बने हुए वंदावन गार्डन की तर्ज पर एक शानदार उद्यान भी विकसित किया गया है
  • जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में वन्य प्राणियों का अवलोकन कालागढ़ बांध के प्रवेश गेट से अच्छे से किया जा सकता है
  • कालागढ़ बांध मिट्टी का होने के कारण एक दर्शनीय स्थल भी है
  • इस बांध का उपयोग सिंचाई के साथ-साथ बिजली उत्पादन में भी किया जाता है
  • कालागढ़ बांध  पक्षियों को का देखने का प्रसिद्ध स्थान है
  • कालागढ़ बांध जिम कार्बेट नेशनल पार्क को बिजली भी प्रदान करवाता है

कालागढ़ बांध पर बना उद्यान – कालागढ़ बांध पर मैसूर की कावेरी नदी की तर्ज पर एक उद्यान का निर्माणकिया गया है इस उद्यान में विकसित 450 मीटर लंबे फव्वारे में बहती पानी और उस पर पड़ती रंग बिरंगी रोशनी मन को मोह लेती है  इस उद्यान में विभिन्न प्रजातियों के पौधे और फूल भी आकर्षक का केंद्र हैं  अगर कालागढ़ बांध पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जाए तो यह एक शानदार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है

सुरंगों का जाल – इस  पार्क में एक सुरंग का निर्माण भी किया गया है जो आकर्षण का केंद्र है  यह सुरंग लगभग 70 मीटर गहरी है  इस सुरंग से राम गंगा के जल के नीचे तक पहुंचा जा सकता है  राम गंगा के जल के नीचे खड़े देखकर शरीर में एक अजीब सी  आहट होती है यही सुरंग बिजली घर तक भी जाती है कालागढ़ बांध के नीचे सुरंगों का जाल बिछा हुआ है

कालागढ़ बांध का उपयोग

  • कालागढ़ बांध का उपयोग सिंचाई के साथ साथ बिजली बनाने के लिए भी किया जाता है
  • यहां पर 66-66 मेगा वाट की तीन यूनिट लगी है तीनों मिलकर 178 मेगा वाट बिजलीबनाती है
  • कालागढ़ बांध में 365,3 मीटर पानी सिंचाई के लिए रिजर्व वाटरके रुप में रखा गया है
  • कालागढ़ बांध की देखरेख का कार्य उत्तर प्रदेश सिंचाई विभागद्वारा किया जा रहा है

अन्य तथ्य ( facts

कालागढ़ बांध पर 2-करोड़ से अधिक रुपए की बिजली का किराया बाकी है जोकी उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा इसे जमा नहीं कराया जा रहा है इस कारण से यह बात मुफ्त की बिजली से जगमगाता हुआ बांध भी कहलाता है

 

Specially thanks to Post Writer ( With Regards )

ममता शर्मा

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