Mohammad bin Tugalak ke samay samrajya vistar ( मोहम्मद तुगलक के समय साम्राज्य विस्तार )

Image result for Muhammad bin Tughlaq ke samay samrajya

📦दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों में मोहम्मद तुगलक के समय साम्राज्य सर्वाधिक विस्तृत था उसके साम्राज्य में 23 प्रांत थे जिनकी संख्या इस प्रकार है–

📦दिल्ली, देवगिरी, मुल्तान, कुहराम , समाना ,सिविस्तान, हांसी ,सिरसा, माबर , तेलंगाना, गुजरात, बदायूं,अवध, कन्नौज, लखनौती ,बिहार, कड़ा, मालवा, लाहौर ,कलानौर, जाजनगर और द्वारसमुद्र।

📦गयासुद्दीन तुगलक की भांति मोहम्मद बिन तुगलक ने भी विजित राज्यों को दिल्ली सल्तनत में सम्मिलित करने की नीति अपनाई उसके समय में दिल्ली सल्तनत का सर्वाधिक विस्तार हुआ था, उसके समय में ही संपूर्ण दक्षिण भारत को जीता गया और दक्षिण भारत स्वतंत्र भी हो गया

🏕खुरासान अभियान Khorasan campaign) 🏕

🥌खुरासान की सही भौगोलिक स्थिति के संदर्भ में मतभेद है बरनी ने ईरान और फरिश्ता ने इरान तूरान के रूप में की है

🥌कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह स्थान मध्य एशिया का ट्रांसआँक्सियाना क्षेत्र था यह अभियान तरमाशरीन और सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक के मैत्री का परिणाम था

🥌मद्धेशिया की राजनीति में एक स्थिरता आ गई थी इसका लाभ मोहम्मद बिन तुगलक उठाना चाहता था और मोहम्मद बिन तुगलक खुरासान को जीतना चाहता था

🥌इस योजना की पूर्ति के लिए मोहम्मद बिन तुगलक ने एक विशाल सेना संगठित की जिसमें लगभग 370000 सैनिक थे इस सेना में दोआब के राजपूत और कुछ मंगोलों को सम्मिलित किया गया था

🥌सेना को 1 वर्ष की अग्रिम वेतन दिया गया था लेकिन सेना के कुछ करने से पहले ही मद्धेशिया की राजनीति में परिवर्तन हो गया। तरमाशरीन अभ्यस्त कर दिया गया और मिश्र और इरान में संधि हो गई

🥌फलस्वरुप मोहम्मद बिन तुगलक को अपनी योजना त्यागनी पड़ी अधिकतर सेना भंग कर दी गई सेना के कुछ भाग को उत्तर भारत की पर्वत श्रंखला में सीमाओं को दृढ़ करने के लिए भेजा गया ,इस विशाल सेना पर काफी धन खर्च किया गया

🥌इससे सेना की आर्थिक स्थिति दुर्बल हो गई सेना से निकाले गए सैनिकों ने भी असंतोष का वातावरण उत्पन्न किया अतः सुल्तान की योजना भी असफल रही इससे उसके प्रसिद्धि में कमी आई

🏕⛰नगरकोट की विजय-1337⛰🏕

🥌नगरकोट का किला पंजाब के कांगड़ा जिले में एक पहाड़ी पर स्थित था जो एक हिंदू राजा के अधीन था किसी मुसलमान शासक ने इस पर विजय नहीं किया था मोहम्मद बिन तुगलक ने उस पर विजय प्राप्त की राजा द्वारा सुल्तान की अधीनता स्वीकार करने के बाद किला उसे वापस कर दिया गया

🏕⛰कराचिल अभियान ( Karachil campaign )-1337-38⛰🏕

🥌कराचिल का क्षेत्र हिमालय की तराई में स्थित आधुनिक कुमायूं जिले में था कराचिल अभियान का लक्ष्य सीमित था

🥌सुल्तान पहाड़ी शासकों का दमन और सीमावर्ती क्षेत्रों पर अपना प्रभाव सुदृढ़ करना चाहता था । कराचील का क्षेत्र सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था क्योंकि यह सल्तनत और चीनी साम्राज्य के बीच का क्षेत्र था

🌺बदायूँनी और फरिश्ता ने कराचिल अभियान को चीन और हिमाचल के विरुद्ध अभियान की संज्ञा दी है

🥌मोहम्मद बिन तुगलक ने 1337 में मलिक खुसरो के नेतृत्व में एक सेना भेजी सेना ने जिदया शहर पर अधिकार कर लिया इस क्षेत्र को अपने साम्राज्य में मिलाने के निचे के प्रतीक स्वरूप सुल्तान ने एक काजी और खतीब भेजा।

🥌सुल्तान ने जिदया शहर से आगे बढ़ने के लिए सेना को मना किया। लेकिन अपनी सफलता से प्रफुल्लित हो कर मलिक खुसरो तिब्बत की ओर बढ़ा लेकिन उसी समय वर्षा रितु आ गई और सेना में बीमारी फ़ैल गई पहाड़ी निवासियों ने दिल्ली की सेना का मार्ग अवरुद्ध कर दिया शाही सेना पूर्णत: पराजित हुई

🌺बरनी के अनुसार- केवल 10 व्यक्ति जीवित बचे थे लेकिन यह अभियान पूर्णत: निष्फल नहीं रहा क्योंकि कुछ समय बाद क्षेत्र के शासक ने मोहम्मद बिन तुगलक से संधि कर ली और तराई क्षेत्रों का उपयोग करने के बदले में उसे एक निश्चित धनराशि देने के लिए सहमत हो गया

🥌उसने सुल्तान का आधिपत्य भी स्वीकार कर लिया

🏕 राजपूत राज्य ( Rajput state ) 🏕

🥌सुल्तान ने राजपूतों पर भी अपना नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया राणा हम्मीर देव संपूर्ण मेवाड़ पर अधिकार कर अपने आप को स्वतंत्र घोषित कर लिया था

🥌उसने मोहम्मद तुगलक द्वारा भेजी गई सेना को परास्त किया इस पराजय के पश्चात दिल्ली के सुल्तानों ने पुनः राजस्थान में हस्तक्षेप नहीं किए राजस्थान में मेवाड़ का राज्य सबसे अधिक प्रतिष्ठित बन गया

मोहम्मद बिन तुगलक के काल में विद्रोह ( Revolution in the time of Muhammad bin Tughluq )

📦मोहम्मद बिन तुगलक के काल में सर्वाधिक 34 विद्रोह हुए जिनमें से अधिकतर 27 विद्रोह दक्षिण भारत में हुए थे

📦विद्रोह के कारणों में सबसे महत्वपूर्ण कारण यह था कि वह आरंभिक काल में उलेमाओं के विरुद्ध निर्णय देता था

📦मोहम्मद बिन तुगलक के समय अवध के सूबेदार आइन उल मुल्क मुल्तानी का विद्रोह सर्वाधिक भयंकर था। सनतल काल के संपूर्ण इतिहास में किसी भी सुल्तान के शासन में इतने विद्रोह नहीं हुए जितना मोहम्मद बिन तुगलक के काल में हुए थे

📦दिल्ली सल्तनत के विघटन की प्रक्रिया दक्षिण भारत से प्रारंभ हुई विद्रोह होने सुल्तान की शक्ति और प्रतिष्ठा नष्ट कर दी जिससे साम्राज्य के विघटन की प्रक्रिया आरंभ हो गई

📦मोहम्मद तुगलक के काल में हुए विद्रोह के लिए 2 वर्ग उत्तरदाई थे
1-उलेमा वर्ग और
2-अमीर वर्ग

🌺अपने राज्य में होने वाले विद्रोहों के संदर्भ में मोहम्मद बिन तुगलक ने बरनी से कहा था कि➖मेरा राज्य रोग ग्रस्त है और उस रोग का कोई दवा नहीं है यदि वैद्य कमर दर्द सिर दर्द का उपचार करता है तो ज्वर बड़ जाता है,यदि वह ज्वर का उपचार करता है तो धमनियों में रुकावट आ जाती है मेरे राज्य को एक ही समय में अलग अलग बीमारियों ने जकड़ लिया है

🌺इसी संबंध में सुल्तान ने बरनी से कहा कि–मैं जो प्रयास करता हूं असफल हो जाता है विद्रोही विरोधी अवज्ञाकारी और बुरा चाहने वालों का उपचार है तलवार में तब तक अपनी तलवार चलाकर सजा देता रहूंगा जब तक की वह काट नहीं देती या चूक नहीं जाती लोग जितना मेरा विरोध करेंगे मेरी सजा उतनी ही ज्यादा होगी

🏕बहाउद्दीन गुरशास्प का विद्रोह( Rebellion of Bahawaddin Guarshop) 🏕

🥌मोहम्मद बिन तुगलक के काल में पहला विद्रोह उसके चचेरे भाई बहाउद्दीन गुरशास्प ने किया। उसे दक्कन में गुलबर्गा के निकट सागर का इक्ता प्राप्त था। गुरशास्प ने धीरे-धीरे अपने आप को शक्तिशाली बना कर अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित करने का प्रयास करने लगा

🥌इसकी सूचना मिलते ही सुल्तान ने गुजरात के ख्वाजा जहां अहमद रियाज के नेतृत्व में एक सेना 1327 में उसके दमन के लिए भेजिए सुल्तान की सेना ने उसे देवगिरि के निकट परास्त किया और सागर तक उसका पीछा किया

🥌गुरशास्प वहॉ से भागकर कंपिली के शासक कंपिली देव के शरण में आया शाही सेना ने कंपिली पर आक्रमण किया कंपिली देव ने शाही सेना का मुकाबला किया लेकिन अंत में अपनी दुर्बल स्थिति को देखकर गुरशास्प को द्वार समुद्र के होयसल शासक वीरबल्लाल के पास भेज दिया और स्वयं अंत तक युद्ध करने का संकल्प लिया

🥌उसने जोहर संपन्न कर अपनी समस्त स्त्रियां संपत्ति और पुत्रियों को जला दिया और वीरता पूर्वक लड़ते हुए रणभूमि में ही वीरगति को प्राप्त हो गया बीरबल्लाल आरंभ में दिल्ली की सेना का मुकाबला किया लेकिन अंत में उसने गुरशास्प को ख्वाजा जहां को सौंप दिया सुल्तान ने उस की खाल खींचकर उसमें चोकर भरने और सारे देश में घुमाने का आदेश दिया

🏕 बहराम आएबा का विद्रोह ( Rebellion of Bahram Ayaba )1327-28 🏕

🥌इसामी के अनुसार कोंधना के सफल अभियान के बाद सुल्तान देवगिरी में विश्राम कर रहा था नहीं उसे मुल्तान में बहराम आएबा के विद्रोह की सूचना मिली ।बहराम आएबा उर्फ किश्लू खॉ, उच्छ सिंध और मुल्तान का सूबेदार था

🥌इस विद्रोह के दो कारण थे–
✨पहला कारण था–बहराम आएबा ने सुल्तान की आज्ञा के बिना गुरशास्प के शव को इस्लामिक नियमों के अनुसार दफन करा दिया था जिससे सुल्तान नाराज हो गया

🥌दूसरा कारण था–जब राजधानी परिवर्तन के समय बहराम आएबा को देवगिरी जाने की आज्ञा दी गई तो उसने आदेश का पालन नहीं किया उसके इस व्यवहार से मोहम्मद बिन तुगलक नाराज था

🥌उसने बहराम आएबा के विद्रोह को स्वयं दबाने का निश्चय किया सेना संगठित कर वह मुल्तान की ओर कुच किया । अबूहर के निकट दोनों के मध्य युद्ध हुआ जिसमें बहराम पराजित हुआ और उसका वध कर दिया गया

🏕⛰गयासुद्दीन बहादुर का विद्रोह ( Rebellion of Gahasudin Bahadur ) 🏕

🌺इब्नबतूता के अनुसार-– गयासुद्दीन बहादुर को सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक ने कैद कर दिल्ली में रखा था

✨राज्यारोहन के पश्चात मोहम्मद बिन तुगलक ने उसे कैद से मुक्त कर लखनौती (बंगाल) का शासन इस शर्त पर प्रदान– किया कि लखनौती में पढ़े जाने वाले खुत्बे और जारी सिक्कों पर सुल्तान व ग़यासुद्दीन बहादुर दोनों का नाम रहेगा

✨दूसरी शर्त यह थी कि– गयासुद्दीन बहादुर अपने एक पुत्र को बंधक के रूप में दिल्ली भेजेगा

🥌लखनौती में सुल्तान और गयासुद्दीन बहादुर के नाम से खुतवा पढ़ा गया और संयुक्त सिक्का जारी किए गए लेकिन वह अपने पुत्र को बंधक के रूप में दिल्ली नहीं भेज सका

🥌बाद में उसने सिक्कों से सुल्तान का नाम भी हटा दिया और 1330 में अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की ।

🌺इसामी के अनुसार– सुल्तान को इस विद्रोह की सूचना मुल्तान से लौटते समय दिपालपुर के पास मिली

🥌उसने दुल्जयुत तातारी के नेतृत्व में गयासुद्दीन बहादुर के विरुद्ध एक सेना भेजी और अपने भाई बहराम खां को भी जो उस समय सुनार गांव का शासक था इस विद्रोह को दबाने की आज्ञा दी

🥌गयासुद्दीन बहादुर पकड़ा गया उसकी हत्या कर दी गई

🏕कमालपुर के विद्रोह ( Rebellion of Kamalpur ) 🏕

🥌मोहम्मद बिन तुगलक की व्यस्तता का लाभ उठाकर 1328-29 में सिंध में कमालपुर के काजी और खतीब ने विद्रोह कर दिया ख्वाजा जहां ने इस विद्रोह को दबाया

🏕⛰सेहवान विद्रोह⛰🏕
🥌1333 ईस्वी में सिंध में दूसरा विद्रोह सेहवान में हुआ यह विद्रोह वुनार (मलिक फिरोज) और कैसरे रूमी ने किया था

🥌उन्होंने सुल्तान द्वारा नियुक्त यहां के हिंदू प्रशासक का वध कर दिया और सरकारी संपत्ति लूट ली मुल्तान के राज्यपाल इमादुलमुल्क सर्तेज ने विद्रोह का दमन किया और विद्रोहियों को फांसी दी

🏕⛰बंगाल का विद्रोह ⛰🏕

🥌बैरम खां की मृत्यु उपरांत उसका एक पदाधिकारी मलिक फखरुद्दीन ने 1338 में सुनार गांव में अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दी और सुल्तान फखरुद्दीन का खिताब धारण किया इस विद्रोह को दबाने के लिए लखनौती का प्रांत पति कद्र खॉ को भेजा गया

🥌फखरुद्दीन पराजित हुआ बाद के समय में कद्र खां फखरुद्दीन से जा मिला फखरुद्दीन सुनार गांव में आरुढ़ हुआ और लखनौती में अपने एक दास मुखलिस को प्रशासक नियुक्त किया

🥌उसके पश्चात कद्र खॉ के आरिज अली मुबारक ने मुखलिस का वध कर लखनौती पर अधिकार कर लिया और सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक से लखनौती के लिए एक प्रशासनिक अधिकारी भेजने का अनुरोध किया सुल्तान ने इसे स्वीकार किया

🥌उसने दिल्ली के शाहना यूसुफ को खान की उपाधि देकर वहा भेजने का निश्चय किया लेकिन उससे पहले ही यूसुफ की मृत्यु हो गई सुल्तान इस विषय पर ध्यान नहीं दिया और इसीलिए कोई अन्य अधिकारी लखनौती नहीं भेजा जा सका

🥌अली मुबारक के पास अब कोई विकल्प नहीं था फलस्वरुप उसने अपने आप को स्वतंत्र घोषित कर दिया सुल्तान अलाउद्दीन के नाम से लखनौती में स्वतंत्र राज्य स्थापित किया कुछ समय पश्चात मलिक हाजी इलियास ने विद्रोह किया और एक षड़यंत्र द्वारा अलाउद्दीन का वध कर दिया

🥌सुल्तान, शमसुद्दीन का खिताब धारण कर सत्तारूढ़ हुआ 1340-41 में हाजी इलियास सुनार गांव के विरूद्ध कूच किया और फखरुद्दीन को बंदी बनाकर उसका वध कर दिया सुनार गांव पर शमशुद्दीन का पूर्ण अधिकार हो गया इसी के समय में बंगाल दिल्ली सल्तनत के नियंत्रण से स्वतंत्र हो गया दिल्ली सल्तनत से अलग होने वाला बंगाल पहला राज्य था