Rights ( अधिकार )

Political Science Concepts – Rights

( राजनीतिक विज्ञान की अवधारणाए-अधिकार )

 

13 वीं शताब्दी में ब्रिटेन में सामंतवादी व्यवस्था थी,उस समय सामंतों द्वारा राजा के विरुद्ध विद्रोह किया गया। 1215 ई. में राजा जॉन द्वारा सामंतों को कुछ अधिकार प्रदान किए गए, यह अधिकार,अधिकार पत्र(मैग्नाकार्टा) के माध्यम से प्रदान किए गए।

अधिकार महत्वपूर्ण परिभाषाएं ( Definition of rights )

बोसांके के अनुसार– “अधिकार वह मांग है, जिसे समाज स्वीकार करता है और राज्य लागू करता है।”

एल.टी.हॉबहाउस के अनुसार- अधिकार तथा कर्तव्य सामाजिक कल्याण की दशाएं हैं- समाज के प्रत्येक सदस्य का इस कल्याण के प्रति द्वैध संबंध है। उसका उसमें एक भाग है, यह उसका अधिकार है। उसको इसमें एक भाग देना है, यह उसका कर्तव्य है।”

श्रीनिवास शास्त्री के अनुसार- अधिकार, समुदाय के कानून द्वारा स्वीकृत वह व्यवस्था, नियम या रीति है जो नागरिक के सर्वोच्च नैतिक कल्याण में सहायक है।”

नॉर्मल वाइल्ड के अनुसार- अधिकार कुछ विशेष कार्यों को करने की स्वाधीनता की उचित मांग है।”

हॉलैंड के अनुसार- व्यक्ति द्वारा अन्य व्यक्तियों के कार्यों को स्वयं अपनी शक्ति से नहीं वरन समाज के बल पर प्रभावित करने की क्षमता को अधिकार कहते हैं।”

लास्की के अनुसार- अधिकार सामाजिक जीवन की वे परिस्थितियां हैं जिनके अभाव में सामान्यतः कोई भी व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का विकास नहीं कर सकता।”

लास्की के अनुसार- अधिकार मानव जीवन की ऐसी परिस्थितियां हैं जिनके बिना सामान्यत: कोई व्यक्ति अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नहीं कर सकता।”

विले के अनुसार- अधिकार स्वतंत्रता के लिए उचित दावा है जो कुछ कार्यों को करने के लिए आवश्यक है।”

सालमंड के अनुसार- सत्य के नियम द्वारा रक्षित हित का नाम ही अधिकार है।

बेंथम के अनुसार- “इन्होंने प्राकृतिक अधिकारों को निरे-निरर्थक कह कर उनकी आलोचना की। उनका मानना था कि सारे अधिकारों का स्रोत कानून है।”

  • “इन्होंने प्राकृतिक अधिकारों की को लेखन शैली की निरर्थक चातुरी भी कहा है।”
  • बेन्थम के अनुसार- “यदि कानून द्वारा प्राप्त की सुविधा या अधिकार के कारण लोगों का हित होता है तो ऐसे अधिकार प्राकृतिक नहीं बल्कि उपयोगितावादी होते है।”

मैकन के अनुसार- “अधिकार सामाजिक हित के लिए कुछ लाभदायक परिस्थितियां है जो कि नागरिक के यथार्थ विकास के लिए अनिवार्य है।”

अधिकारों के सिद्धांत ( Principles of Rights )

  • प्राकृतिक अधिकार का सिद्धांत :- इस सिद्धांत के समर्थक हैं:- हॉब्स, लॉक, स्पेंसर,थॉमस पेन, जेफरसन ।
  • सामाजिक उपयोगिता सिद्धांत :- बेंथम, लॉस्की।
  • समाज वैज्ञानिक सिद्धांत :- मैकाइवर।
  • आदर्शवादी सिद्धांत :- ग्रीन ।
  • विधिक सिद्धांत :- हॉब्स, बैंथम, ऑस्टिन।
  • मार्क्सवादी सिद्धांत :- कार्ल मार्क्स।

अधिकार व्यक्ति के सामाजिक जीवन की वे बाह्य परिस्थितिया जो समाज स्वीकृत ओर राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त हैं अधिकार मे तीन तत्व शामिल हे।

  • व्यक्ति की मांग।
  • समाज की स्वीकृति
  • राज्य द्वारा मान्यता

रोमन विचारक सिसरो को प्राकृतिक अधिकारों का प्रारंभिक व्याख्याकार माना जाता हैं 17 व 18 वि शताब्दी मे सामाजिक समजोता वादी विचारको ने प्राकृतिक अधिकारो की संककल्पना को लोकप्रिय बनाया। होब्स ने आत्मरक्षा व जीवन के अधिकारों को सबसे महत्वपूर्ण माना। लोक् तीन अधिकारों का वर्णन करता है

  • जीवन
  • स्वतंत्रता
  • संपत्ति

कानूनी अधिकार ( Legal Right )

ये सिद्धान्त य मानता है कि सभी प्रकारों के अधिकारों का स्रोत राज्य की विधि या कानून होते है अथार्त राज्य के बाहर अधिकारों का कोई अस्तित्व नही होता। कानूनी अधिकार के समर्थक थॉमस होब्स जॉन लॉक बेंथम ऑस्टिन।

थॉमस होब्स के अनुसार संपभु की आज्ञा ही कानून है

अधिकार से संबंधित तथ्य ( Rights related facts )

1993 मानवाधिकार आयोग की स्थापना

अधिकारों से संबंधित प्रमुख संकल्प पत्र

1950 मानव अधिकार संबंधी यूरोपिय अभिसमय

1966 नागरिक और राजनीतिक अधिकार संबंधी अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदा

1969 मानव अधिकार संबंधी अमेरिका अभिसमय

1975 हेलिसकी समझौते

1981 जनवादी मानव अधिकार संबंधी अफ्रीकी अधिकार पत्र

अधिकारों की रक्षा के लिए गैर सरकारी संगठन:-

  • पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज
  • पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स

एक गैर राजनीतिक संगठन :-एमनेस्टी इंटरनेशनल मुख्यालय लंदन

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

सुभिता मील, राजेन्द्र श्योराण, मुकेश पारीक ओसियाँ

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