Tughluq Creative Function ( मोहम्मद बिन तुगलक के सृजनात्मक कार्य )

🌹 Creative Function of Mohammad bin Tughluq ( मोहम्मद बिन तुगलक के सृजनात्मक कार्य )🌹

📦मोहम्मद बिन तुगलक एक मौलिक प्रतिभा संपन्न और प्रयोगधर्मी सुल्तान था

📦यद्यपि कि उस के शासनकाल में सर्वाधिक विद्रोह हुए और अपना अत्याधिक समय इन विद्रोह को दबाने में व्यतीत किया फिर भी उसने कुछ सृजनात्मक कार्य भी किए

📦मंगोलों के साथ मैत्री संबंध स्थापित कर उसने जलालुद्दीन खिलजी की मंगोलो की सेवा में रखने की नीति पुनर्जीवित किया उसने एशियाई और अफ्रीकी देशों से सांस्कृतिक संबंधों के एक नए युग का आगाज किया

📦खुरासान, इराक,सीस्तान , हिरात ,मिश्र, ट्रांसआक्सियान,तांजीर आदि देशों से लोग इस के दरबार में आए।जिनसे सुल्तान ने उन देशो में साहित्यिक और सांस्कृतिक विकास की जानकारी प्राप्त की

📦मोहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में 1341 में चीन के मंगोल सम्राट तोमर तिगून का एक शिष्टमंडल हिमाचल प्रदेश में कुछ बौद्ध मंदिरो को देखने के लिए आया था

📦सुलतान ने एक राजाज्ञा द्वारा भारत में आने वाले सभी विदेशियों को अजिज की उपाधि दी थी

🌹🌹शिक्षा एवं साहित्य का विकास🌹🌹

📦मोहम्मद तुगलक स्वयं एक विद्वान था और विद्वानों को संरक्षण और प्रोत्साहन प्रदान करता था

📦जियाउद्दीन बरनी 17 वर्षों तक उसके आश्रय में रहा जिसने “”तारीख ए फिरोजशाही”” और “”फतवा ए जहांदारी”” की रचना की

📦मोहम्मद बिन तुगलक के दरबार में “”बद्र ए-चाच””( बदरुद्दीन) नामक एक कवि था। जिसने सुल्तान की प्रशंसा में कसीदों की रचना की इसकी रचनाओं में दीवान ए चाच और शाहनामा प्रमुख थी

📦””शाहनामा”” मोहम्मद बिन तुगलक को समर्पित है मोहम्मद तुगलक ने उच्च शिक्षा प्राप्त की थी और शिक्षा में उसकी अभिरुचि थी

📦1346 में उसने दिल्ली में एक मदरसा बनवाया सुल्तान के पास एक अच्छा पुस्तकालय भी था जिसमें कांगड़ा विजय से प्राप्त अनेक पुस्तकों का संग्रह था।

🌹🌹स्थापत्य संगीत और चित्रकला🌹🌹

📦अदलाबाद नामक किले का निर्माण मोहम्मद बिन तुगलक ने करवाया था

📦उसने दिल्ली में किला राय पिथौरा और सिरी नगर के मध्य जहांपनाह नामक नगर (चौथा नगर )बसाया

📦मोहम्मद बिन तुगलक को विभिन्न ललित कलाओं विशेषकर संगीत से प्रेम था उस के दरबार में 1200 गायक थे जो गाने के साथ ही गायन की शिक्षा भी देते थे

📦ईरानी चित्रकार शाहपुर ने मोहम्मद बिन तुगलक के दरबार की एक संगीत गोष्टी का चित्रण किया

📦सुल्तान ने एक वस्त्र निर्माणशाला के स्थापना की, जहां रेशमी कपड़े बुनने वाले 400 जुलाहे काम करते थे

🌹🌹मोहम्मद बिन तुगलक के बारे मैं अन्य तथ्य🌹🌹

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📦मोहम्मद जोना मोहम्मद बिन तुगलक के बचपन का नाम ,मोहम्मद गयासुद्दीन तुगलक का पुत्र था

📦दिल्ली के सुल्तानों में सबसे अधिक विशाल साम्राज्य मोहम्मद बिन तुगलक का था

📦दिल्ली का यह प्रथम सुल्तान था जिसके बारे में हिंदुओं के त्योहार होली में भाग लेने का स्पष्ट प्रमाण मिलता है

📦मोहम्मद बिन तुगलक प्रथम सुल्तान था जिसने मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दर्शन किए

📦मोहम्मद बिन तुगलक ने मंगोल ढंग से सेना को दशमलव प्रणाली के आधार पर संगठित करने का प्रयास किया

🌹एडवर्ड थॉमस ने मोहम्मद बिन तुगलक को धनवानों का राजकुमार कहा

📦मोहम्मद बिन तुगलक ने उश्र व जकात को छोड़कर शेष सभी कर समाप्त कर दिए

📦बलबन की भांति मोहम्मद बिन तुगलक भी सुल्तान को जिल्ले इलाही (ईश्वर की छाया )मानता था उसके सिक्कों पर अल सुल्तान जिल्ले इलाही अंकित है

📦मोहम्मद बिन तुगलक ने दास प्रथा को प्रश्रय नहीं दिया

📦1337 में नगरकोट पर आक्रमण के समय उसने ज्वालामुखी मंदिर को नष्ट नहीं किया, उसने हिंदुओं को उच्च पदों पर नियुक्त किया

📦1340 में खलीफा के उत्तराधिकारी ग्यासुद्दीन मोहम्मद को मिस्र से दिल्ली बुलाकर सम्मानित किया वह मिश्र में भिखारी की भाती जीवन जी रहा था

📦मोहम्मद बिन तुगलक जैन विद्वान जिन प्रभ सूरी और राजशेखर का सम्मान कर धार्मिक उदारता का प्रमाण दिया

📦रतन नामक हिंदू को उसने सिंध का राजस्व अधिकारी नियुक्त किया , रतन के अतिरिक्त मोहम्मद बिन तुगलक ने एक हिंदू मंत्री साईं राज को धारा का नायक वजीर और बाजरान इंद्री को गुलबर्गा का वजीर बनाया मिरन राय भी एक हिंदू पदाधिकारी था

🌹बरनी के अनुसार मोहम्मद बिन तुगलक का साम्राज्य 12 मुख्य भागों में बटा हुआ था लेकिन वास्तव में तुगलक साम्राज्य 23 प्रांतों में बटा था

📦1342 में इब्नबतूता को मोहम्मद बिन तुगलक ने अपना राजदूत बनाकर चीनी सम्राट तोमर तिगुर के दरबार में भेजा

🌹इब्नबतूता ने इस काल की घटनाओं का वर्णन अपनी पुस्तक रेहला में किया है