अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् का गठन

?स्वतंत्रता संग्राम के  द्वितीय चरण में 1927 मैं अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषदका गठन किया गया अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद का गठन देसी रियासतों के कार्यकर्ताओंने मिलकर किया था कांग्रेस का समर्थन मिल जाने के बाद इसकी शाखाएं स्थापित की जाने लगी अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद की स्थापना के बाद राजस्थान में सक्रिय राजनीति का कालप्रारंभ हुआ 


?अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद के प्रथम अध्यक्ष बाबा रामचंद्र राव थे और श्री विजय पथिक को उपाध्यक्ष बनाया गया श्रीराम नारायण चौधरीराजपूताना और मध्य भारत के प्रांतीय सचिव बनाए गए देशी राज्य लोक परिषद् का मुख्यालय मुंबई में रखा गया था 


?1928 में राजपूताना देशी राज्य लोक परिषद के प्रांतीय सम्मेलन में रियासतों में राजाओं के संरक्षण में उत्तरदायी सरकार की स्थापना करने का प्रस्तावपारित किया गया था श्री रामनारायण चौधरी में देशी राज्य लोक परिषद का प्रांतीय अधिवेशन 1931 में अजमेर में आयोजित किया था अखिल भारतीय देशी राज्य परिषद के कराची अधिवेशन 1936 में जयनारायण व्यास को महामंत्री बनाया गया था 


?31 दिसंबर 1945 से 1 जनवरी 1946तक अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद् का सातवां अधिवेशन उदयपुर के सलोदिया मैदान में आयोजित किया गया था उदयपुर के सलोटिया मैदान में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता पंडित नेहरूने की थी यह राजपूताना”में आयोजित किया जाने वाला *लोक परिषद का प्रथम अधिवेशन था 


??राजपूताना सेंटर इंडिया छात्र एसोसिएशन??

?राजपूताना और मध्य भारत* में विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता आंदोलनमें सक्रिय रुप से भाग लिया था राज्य में इन गतिविधियों का केंद्र अजमेर था विद्यार्थियों की गतिविधियों को संगठित रूप प्रदान करने के लिए राजपूताना सेंट्रल इंडिया छात्र अधिवेशन संपन्न किया गया यह अधिवेशन 31 दिसंबर 1935 से 2 जनवरी 1938 तक ब्यावर में K.F.नारीमनकी अध्यक्षता में हुआ था

 ??तृतीय चरण 1938 प्रजामंडल आंदोलन व स्थापना?? 
?स्वतंत्रता संग्राम का तृतीय चरण राज्य में 1938 से प्रारंभ हुआ जो आजादी के बाद तक चला तृतीय चरण में प्रजामंडल आंदोलन अत्यधिक सक्रिय हुए इन आंदोलनों के परिणाम स्वरुप राज्य में प्रजामंडल की स्थापना होने लगी
?  ब्रिटिश भारत का प्रशासन ब्रिटिश सरकार द्वारा नियुक्त गवर्नर जनरल, गवर्नर अन्य अधिकारी के हाथ में था  जबकि भारत में राजाओं का निरंकुश शासन था 1857 के असफल स्वतंत्रता संग्राम ने जनमानस में स्वतंत्रता की ललक पैदा कर दी थी
?1885 में ब्रिटिश भारत में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की स्थापना के बाद स्वतंत्रता आंदोलन को एक नया स्वरूप मिला था इसमेे जनता को राष्ट्रीय कांग्रेस की धारा से नहीं जोड़ा गया था *भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और महात्मा गांधी* की यही नीति थी की रियासतों के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाए 

?रियासतों के नेता स्थानीय स्तर पर भी अपनी समस्याओं से निपटे कांग्रेस पार्टी के द्वारा नागपुर और मद्रास अधिवेशन के बाद कांग्रेस ने दृढ शब्दों में प्रस्ताव पारित किया इस प्रस्ताव के तहत देशी राजाओंको अपने राज्यों में शीघ्र प्रतिनिधि संस्थाएं और उत्तरदायी शासन स्थापित करना चाहिए
?दिसंबर 1927 में मुंबई में अखिल भारतीय देशी लोकराज्य परिषद की स्थापना की गई 


??हरिपुरा अधिवेशन?? 

1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के द्वारा हरिपुरा में अधिवेशन का आयोजन किया गया इस अधिवेशन की अध्यक्षता सुभाष चंद्र बोस ने की थी
?इस अधिवेशन के द्वारा रियासतों की जनता को अपने अपने राज्यों में उत्तरदायी शासन का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए
?स्वतंत्र संगठन बनाकर आंदोलन करने और जन जागृति फैलाने का आह्वान किया गया पंडित जवाहरलाल नेहरु अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद के अध्यक्ष बने थे इस अधिवेशन में कांग्रेस ने पहली बार निर्णय लिया कि कांग्रेस को रियासती जनता के संघर्षमें साथ देना चाहिए हरिपुरा अधिवेशन में देशी रियासतों को अपना कार्य क्षेत्र घोषित किया गया
?यह आंदोलन स्थानीय नेताओं के द्वारा स्थानीय संगठनों के माध्यम से चलाया जावेगा इन संगठनों को प्रजामंडल या प्रजा परिषद कहा गया 1938 के बाद राजस्थान की लगभग सभी रियासतों में प्रजामंडलकी स्थापना हुई
?सभी रियासतों में उत्तरदायी शासनकी मांग को लेकर आंदोलन किए जाने लगे इससे देसी राज्यों में असाधारण जागृति उत्पन्न हुई और देशी राज्य की जनता को राष्ट्र की मुख्यधारा में सम्मिलित किया गया राज्य में संचालित हो रहे आंदोलनों को इन संस्थाओं से नवीन प्रेरणा मिली
?जिससे स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देसी राज्यों के एकीकरण का कार्य संभव हो सका प्रजामंडलो की भूमिका भारत को आजाद कराने की दिशा में उल्लेखनीय थी
?कांग्रेस ने अपने त्रिपुरी अधिवेशन 1939 में देशी रियासतों की राजनीतिक संस्थाओंकी गतिविधियों के साथ अपनी अहस्तछेप नीति का परित्याग कर पूर्ण सहयोग देने की नीति का प्रस्तावपारित किया गया
?अखिल भारतीय देशी राज्य परिषद ने पंडित जवाहरलाल नेहरु की अध्यक्षता में लुधियाना अधिवेशन 19 मार्च 1939 में संकल्प पारित किया
?रियासतों की जनता द्वारा उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए संघर्ष कांग्रेस के पूर्ण सहयोग से कांग्रेस के मार्गदर्शन में शुरू होना चाहिए
?इन सभी वजह से राज्य में प्रजामंडल की स्थापना कि गआ राज्य में पहला प्रजामंडल जयपुर प्रजामंडलथा इसकी स्थापना 1931 में  की गई थी  लेकिन यह प्रजामंडल लगातार 5 वर्षों तक निष्क्रिय बना रहा
?1938 में जमनालाल बजाज और अर्जुन लाल सेठी के द्वारा जयपुर प्रजामंडल का फिर से पुनर्गठन किया गया प्रजामंडलो की मुख्य मांग रियासतो  मैं उत्तरदायी शासन की स्थापना थी