अलवर जिला : राजस्थान जिला दर्शन | Essay on Alwar District

अलवर जिला

राजस्थान का सिंहद्वार कहलाने वाले अलवर जिले की स्थापना राव राजा प्रताप सिंह ने 18वीं सदी में की। उससे पहले यह मेवात क्षेत्र के नाम से मशहूर था । अलवर का क्षेत्र अजमेर के चौहानों के अंतर्गत आता था यह जिला राजस्थान ही नहीं अपितु पूरे भारत में अपना अहम स्थान रखता है । प्राचीन काल के महाकाव्य महाभारत में भी अलवर जिले का वर्णन हुआ है। अलवर जिला अपनी ऐतिहासिक, प्राकृतिक, स्थापत्य कला, औद्योगिक परिवेश, स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारी गतिविधियों आदि के कारण वर्चस्व रहा है। ये भी पढ़े राजस्थान निर्माण के विभिन्न चरण

अलवर का प्राकृतिक सौंदर्य के रूप में

अलवर जिला प्राकृतिक सौंदर्य रूप से भी अपनी अलग ही छवि प्रदर्शित करता है ।सबसे प्राचीन अरावली पर्वतमाला के उत्तर में बसे इस जिले में अनेक प्राकृतिक दर्शनीय स्थल हैं ।कहीं पहाड़, कहीं मैदान, कहीं अरावली की पहाड़ी में बहती हुई नदियां अभ्यारण महाभारत महाकाव्य के अवशेष यहां पर राजस्थान का नंदन कानन कहलाने वाली जयसमंद झील ,मोती झील, सिलीसेढ़, सरिस्का अभ्यारण जो बाघ के लिए जाने जाते हैं ।ताल वृक्ष जहां पर गर्म व ठंडे पानी का बहाव आज तक भी सुचारू रूप से देखने को मिलता है।जो कि ये ठंडे-गर्म पानी की जलधारा प्रकृति प्रदत्त हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अगर हम अलवर जिले को ऐतिहासिक रूप में देखे तो भी यहां भी पहचान बनाने में आगे रहा है। औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को कांकणवाड़ी के किले में बंद रखा था इस जिले की अरावली पर्वतमाला की छटंकी की पहाड़ी पर स्थित बाला किला है । जहां पर बाबर एक रात के लिए ठहरा था बाबर व राणा सांगा के मध्य होने वाले खानवा के मैदान के संग्राम में अलवर के शासक हसन खाँ मेवाती ने साथ दिया जो की इतिहास प्रसिद्ध युद्ध है बताया जाता है कि इस युद्ध में राणा सांगा के चौरासी घाव हो गए थे । हसन खाँ मेवाती एकमात्र मुस्लिम शासक थे, जिन्होंने राणा सांगा का साथ दिया।

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स्थापत्य कला के रूप में अलवर

इस जिले में राजस्थान के प्रसिद्ध किले – महल स्थित है बाला किला जो कुंवारा किला भी कहलाता है क्योंकि इस किले को अभी तक कोई भी शासक जीत नहीं पाया ना ही कोई अपने अधीन कर पाए। अजबगढ़ -भानगढ़ का किला जिसको कि प्रसिद्ध फिल्म करण अर्जुन में दिखाया जाता है वह भी अलवर में ही स्थित है। इसको भूतों का किला भी कहा जाता है। अन्य किले-महल जैसे मोती डूंगरी महल, विजय मंदिर महल, फतेह गुंबद आदि राजस्थान के अलवर जिले में ही स्थित है।

स्वतंत्रता आंदोलन में अलवर की भूमिका

अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति, प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी अलवर जिले का नाम आता है ।अलवर जिले के बानसूर तहसील के कराणा-निमूचाणा गांव जागीरदारों, सेठ -साहूकारों का ठिकाने माने जाते हैं। तत्कालीन महाराजा जयसिंह ने जमीदारों पर अनेक कर व लाग बाग लगा दिए थे। जिस को बंद कराने के लिए निमूचाणा ग्राम में किसानों की महापंचायत हो रही थी जिस पर महाराजा जयसिंह ने सैनिकों को आदेश देकर गोलियां चलवा दी ।जो राजस्थान का जलियांवाला हत्याकांड कहलाता है अलवर रियासत में मेव आंदोलन भी चला जिसमें जंगली सुअरों को खड़ी फसल पर खुला छोड़ दिया।इसका मुस्लिम लोगों ने विरोध किया। कुछ दिनों बाद राजा ने इनकी समस्या समाधान करके इस आंदोलन को रुकवाया। उनको विश्वास दिलाया कि अब आपकी फसल को नष्ट नहीं किया जाएगा। तब मुस्लिम लोगों ने आंदोलन को वापस ले लिया।

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औद्योगिक करण के रूप में

राजस्थान के अलवर जिले का कुछ भाग राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह जिला पहले मत्स्य नगर के नाम से जाना जाता है तो यहां पर चलने वाले कारखाने का नाम भी मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध है जहां पर अशोक लीलैंड कंपनी स्थित है । वर्तमान में औद्योगिक दृष्टि से अलवर जिला बहुत आगे हैं ।मुख्य रूप से टपूकड़ा ,भिवाड़ी ,खुशखेड़ा, बहरोड़ ,नीमराणा आदि जगह पर अनेक औद्योगिक इकाइयां कार्यरत है तथा नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र में विदेशी जॉन भी संचालित है । जापानी जॉन नीमराणा में स्थित है। अलवर के भिवाड़ी में नोटों की स्याही बनाने का कारखाना है।

उपसंहार

राजस्थान के स्कॉटलैंड के नाम से जाने जाने वाले जिले अलवर का उपरोक्त लेखन से स्पृश्यता दिखाई देती है कि यह जिला प्रत्येक क्षेत्र में सदा अग्रणी रहा है जो केवल सीमित न होकर प्रदेश के विकास में भी अपना अमूल्य योगदान प्रदान करता है। अतः मेंरे लिए बहुत गर्व की बात है कि मैं अलवर जिले के निवासी हूँ तथा शुभकामना करता हूँ कि हमारा अलवर जिला सदा ही अग्रणी रहे।

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Specially thanks to – जयप्रकाश चौहान, जिंदोली, अलवर (राजस्थान)

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