उमय्या वंश & अब्बासी वंश | Umiya Dynasty and Abbasi Dynasty

उमय्या वंश (661-750) 

कुरेश दो विरोधी शाखाओं में विभाजित थे। उमय्या और उनके संवर्गी जिनके पास राजसत्ता और उच्च पदों का एकाधिकार था और उनके सगोत्र हाशमी जिन पर संभावित प्रतिद्धंदी होने के कारण अत्याचार किया जाता था। उमय्या वंश में कुल 14 शासक हुए थे जिन्होंने लगभग 90 वर्ष तक शासन किया। उमय्या वंश के शासक राजनीति में विश्वास करते थे सामान्यतः उमय्या शासक व्यक्तिगत दृष्टि से सौम्य, दयालु और उदार चित्त थे वे स्वयं प्रधानमंत्री थे उन्होंने सारी समस्याओं का व्यवहारिक समाधान ढूंढने की कोशिश की और एक प्रकार से प्राधिधर्माध्ययन समाज की स्थापना की ।

उमय्या वंश के पतन के कारण

उमय्या साम्राज्य भाषा व जाति की समानता और भेदभाव रहित संस्कृति पर आधारित था। किन्तु गृह युद्ध के बाद उनके राज्य का पतन शुरु हो गया ऐसी स्थिति में सरकार बनाने के लिए शासकों के पास केवल दो रास्ते थे, प्रारंभिक इस्लाम के प्रजातांत्रिक रूप को स्वीकार करना या सर्वाधिक केंद्रित राज्य बनान। उन्होंने एक केंद्रीकृत राज्य स्थापित करने का मार्ग अपनाय। उमय्या युग का अभिशाप संप्रदायिक विद्रोह या व्यक्तिगत महत्वकांक्षाएं थी। जो धार्मिक आडंबरों के वेश में थी।

फलस्वरुप हज्जाज की भांति उमय्या अधिकारियों के लिए यह विद्रोह कठोरतापूर्वक कुचलने के अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं था यही कारण था कि उमय्या सम्राट अन्य राज्यों की तुलना में अधिक निरंकुश समझे जाते थे आठवीं शताब्दी के मध्य में खुरासान में आंदोलन प्रारंभ हुआ इस आंदोलन का नेतृत्व मुस्लिम खुरासानी ने किया था और हेरात और मर्व में अब्बासी खलीफा की काली पताकाएं फहराई । उमय्यादों के अंतिम व्यक्ति मरवान द्वितीय की मिश्र की एक गिरजा घर में हत्या के साथ उसके वंश का अंत कर दिया गया और एक नया राजवंश का जन्म हुआ जो कि अब्बासी वंश कहलाया और इस प्रकार अब्बासी वंश की स्थापना हुई

अब्बासी वंश

अब्बास के वंशजों ने बड़ी चतुराई के साथ ईरानीयों और शियाओं के सहयोग से उमय्या वंश का नाश कर स्वयं खलीफा का पद प्राप्त किया इस्लामिक इतिहास में अब्बासीयों का शासनकाल सभी राजवंशो में लंबा रहा है। इस वंश के 33 राजवंशों ने 500 वर्षों तक शासन किया इन में प्रथम 8 जिन्हें खलीफा कहा जा सकता है जो इस प्रकार हैं –

  1. अबुल अब्बास सफ्फाह (749 से 54 ईसवी तक )
  2. अबू जफर मंसूर (754 से 75 ईसवी तक)
  3. महदी (775 से 85 ईसवी तक)
  4. हादी( 785-86 )
  5. हारुन रशीद( 786 से 809)
  6. अमीन (808 से 13)
  7. मामून (808 से 830 )
  8. मोतसिम (833 से 42)

अब्बासी खलीफाओं की उपलब्धियां

अब्बासी खलीफाओं ने बगदाद को अपनी राजधानी बनाया अब्बासी खलीफाओं के शासन काल के दो महत्वपूर्ण उपलब्धियां थी

  1. उच्च पदों पर अरबों का एकाधिकार समाप्त हो गया और गैर अरबों जैसे ईसाई और यहूदी और ईरानियों को प्रशासन में शामिल किया गया
  2. धर्मनिरपेक्ष संस्कृतियों की विभिन्न शाखाओं का विकास था उन्होंने दृढ़ता और चतुराई से शासन किया और एक ऐसे राज्य स्थापित करने का प्रयत्न किया जिसमें अरबों और ईरानियों के समान अधिकार हो

हरुन के शासनकाल में राजकीय वैभव का अत्यधिक विकास हुआ अनेक भागों से विद्वान कलाकार और कवि बगदाद आए हरून के समय में ही इमामअबू यूसुफ ने सरकार के सिद्धांत बनाए यह सिद्धांत “किताब उल खिराज” नामक पुस्तक में संकलित है यह पुस्तक जमीन और कर के मामले में एक प्रकार की नियमावली है विज्ञान और ज्योतिष संबंधी संस्कृत ग्रंथों का भी अनुवाद किया गया “सिंद-हिंद” नामक एक ग्रंथ का उल्लेख मिलता है जो संभवत है ब्रह्म सिद्धांत का अनुवाद था। 9वीं शताब्दी के अंत में अब्बासी खलीफाओ का पतन प्रारंभ हो गया। एक के बाद दूसरा प्रांत उनके यहां से निकलता गया और अंत में बगदाद और उसका निकटवर्ती अस्थिर प्रदेश ही शेष रह गया अब्बासियों के आठवे खलीफा मोतसिम के साथ उसके वंश और राष्ट्र का गौरव समाप्त हो गया |

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