एड्स दिवस 01 दिसंबर(AIDS Day December 01)

एड्स के बारे में कुछ विशेष तथ्य
[1] पहली बार एड्स के लक्षण एक जानवर चिंपैंजी में पाए गए थे
[2] पहली बार विश्व एड्स दिवस 1 दिसंबर 1988 को मनाया गया था
[3]  भारत में प्रतिवर्ष 1 दिसंबर को एड्स दिवस मनाया जाता है
[4] यह एक वायरस जनित बीमारी है इस बीमारी से व्यक्ति के शरीर के रोगों से लड़ने की जो भी शक्ति है वह खत्म हो जाती है
[5]  1991 को एचआईवी एड्स का इंटरनेशनल सिंबल लाल रिबन को अपनाया गया था
[6]  एड्स अर्थ है वह बीमारी जो आपके शरीर की खुद की रक्षा करने की क्षमता को कम* कर देती है
[7]  HIVका अर्थ है *वह विषाणु जो शरीर के अंदर उसकी रक्षा करने की शक्ति को कम* करता है
[8]  HIV विषाणु अफ्रीका के सहारा क्षैत्र मे पाया गया था
[9] HIV विषाणु कमरे के तापमान पर भी सूखे खून में 10 से 15 दिन तक जीवित रह सकते हैं
[10]  HIV विषाणु समुंद्र के पानी में ज्यादा देर तक जिंदा नहीं रह सकते हैं
[11]  एचआईवी एड्स विषाणु के अब तक दो प्रकार सामने आए हैं एचआईवी-1चिंपांजी की प्रजाति से hiv-2मैंगेबी बंदर की प्रजाति से
[12]  HIV-1आसानी से फैलता है और ज्यादा खतरनाक होता है
[13]  एचआईवी से संबंधित सबसे सरल सिद्धांत को हंटर थ्योरी कहते हैं
[14]  हंटर थ्योरी के अनुसार 1930 के दशक में अफ्रीका में किसी व्यक्ति को पीड़ित बंदर ने काट लिया हो या फिर एक बंदर का मांस खा लिया हो तो उसे HIVरोग हो जाता है
[15]  AIDS सबसे ज्यादा रिसर्च करने वाली बीमारी है
[16]  पहला एचआईवी संक्रमित व्यक्ति 1959 में कांगो में पाया गया था
[17]  1981 में समलैंगिक में एड्स की पहचान की गई थी समलैगिक में एड्स के लक्षण पाए जाने के कारण इसे सबसे पहले गे रिलेटिेड इम्यून डेफिशिएंसी नाम दिया गया था
[18]  1982 में इसे एक्वायर्ड इम्यून डैफिशिएंसी वायरस नाम दिया गया
[19]  1985 में फ्रांस के लुक मोंटेगनियर व फ्रांसोआ सीनूसी ने एल वी वायरसकी खोज की थी इसके लिए इन दोनों को 1985 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था
[20]  1986 में इस बीमारी को ह्यूमन इम्यून डेफिशिएंसी वायरस नाम दिया गया
[21]  1987 में एड्स नामक बीमारी की दवा खोजी गई लेकिन यह दवा किस बीमारी में ज्यादा कारगर साबित नहीं हो पाई

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