क्रांतिकारी आंदोलन का दूसरा चरण

महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के असफल होने और देश में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि के अभाव में बहुत से क्षमतावान राष्ट्रवादी युवाओं का मोहभंग हो गया

  • यह गांधीजी के नेतृत्व में और अहिंसात्मक संघर्ष की रणनीति से भी असंतुष्ट थे
  • रूस चीन आयरलैंड तुर्की मिस्त्र आदि में कहीं भी होने वाले क्रांतिकारी आंदोलनों और विद्रोह से अनुप्राणित होकर हिंसात्मक माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए प्रयासरत थे
  • असहयोग आंदोलन के पूर्णता सफल होने से आतंकवाद में उग्रता आई
  • बंगाल में  पुरानी युगांतर और अनुशीलन समिति आदि पुरानी क्रांतिकारी समितियों का प्रादुर्भाव हुआ
  • नए क्रांतिकारी आतंकवादी ही नेताओं जिनका प्रादुर्भाव उत्साही और निराश असहयोगियों के समूह द्वारा हुआ था ने कुछ नए क्रांतिकारी और आतंकवादी संगठनों की स्थापना की
  • यह संगठन संयुक्त प्रांत दिल्ली पंजाब और बंगाल आदि केंद्रों में बनाए गए हैं
  • लेकिन प्रमुख बात यह थी कि अब यह  समझा गया कि एक अखिल भारतीय संगठन होने तथा अधिक उत्तम तालमेल होने से अधिकतम परिणाम निकल सकते हैं

निम्न क्रांतिकारी और आतंकवादी संगठनों का वर्णन निम्न प्रकार है

🥀🍃हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन🍃🥀

🍁स्थापना- 1924 ई. मे
🍁स्थान-कानपुर
🍁संस्थापक- शचिंद्र नाथ सान्याल,योगेश चटर्जी आदि

  • अक्टूबर 1924 में समस्त क्रांतिकारी दलों का कानपुर में एक सम्मेलन बुलाया गया
  • जिसमें शचिंद्र नाथ सान्याल, योगेश चटर्जी, राम प्रसाद बिस्मिल जैसे पुराने क्रांतिकारी नेताओं और भगत सिंह, शिव शर्मा, सुखदेव, भगवती चरण बोहरा ,चंद्रशेखर आजाद जैसे तरुण क्रांतिकारी नेताओं ने भाग लिया
  • इसके फलस्वरुप 1924ई. में भारत गणतंत्र समिति अथवा सेना का जन्म कानपुर में हुआ
  • बंगाल ,बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और मद्रास जैसे प्रांतों में इसकी शाखाएं स्थापित की गई


इस दल के निम्नलिखित तीन प्रमुख आदर्श थे
1. भारतीय जनता में गांधीजी की अहिंसा वादी की नीतियों की निरर्थकता के प्रति जागृति उत्पन्न करना 

2. पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए प्रत्यक्ष कार्यवाही और क्रांति की आवश्यकता का प्रदर्शन करना
3. अंग्रेजी साम्राज्यवाद के स्थान पर समाजवादी विचारधारा से प्रेरित भारत में संघीय गणतंत्र की स्थापना करना
उन्होंने अपने कार्यों के लिए धन एकत्रित करने हेतु निजी व्यक्तियों को न लूट कर सरकारी कोषों को अपना निशाना बनाने का निश्चय किया
⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜
🥀🍃काकोरी कांड (9 अगस्त 1925)🍃🥀
⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜

  • हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों ने सहारनपुर लखनऊ लाइन पर काकोरी जाने वाली 8 मालगाड़ी को सफलतापूर्वक लूटा
  •  इस संबंध में 29 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर उन पर काकोरी षड्यंत्र कांड में मुकदमा चलाया गया  17 लोगों को लंबी सजाएं, चार लोगों को आजीवन कारावास, और 4 क्रांतिकारियों रामप्रसाद बिस्मिल ,अशफाक उल्ला खां, रोशनलाल और राजेंद्र लाहिरी को क्रमशः गोरखपुर, फैजाबाद, नैनी (इलाहाबाद) और गोंडा में फांसी की सजा दी गई
  • इस काकोरी कांड के अभियोग में जनता ने बहुत ही सहानुभूति का प्रदर्शन किया विधान परिषद में भी प्रस्ताव रखे गए
  • इनके नेता राम प्रसाद बिस्मिल यह कहते हुए की मैं अंग्रेजी राज्य के पतन की इच्छा करता हूं प्रसन्नतापूर्वक फांसी पर लटक गए रोशन लाल वंदे मातरम गाते हुए शहीद हो गए


⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜
🥀🍃हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन🍃🥀
⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜

*🍁स्थापना-*10 सितंबर 1928
🍁स्थान-दिल्ली का फिरोजशाह कोटला मैदान
🍁संस्थापक-चंद्रशेखर आजाद

  • हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन को काकोरी कांड से धक्का लगा
  • काकोरी षड्यंत्र कांड में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के अधिकांश नेताओं के गिरफ्तार हो जाने और बाद में होने वाले पुलिस दमन से हिंदुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन का क्रांतिकारी संगठन के रूप में अस्तित्व कुछ समय के लिए समाप्त सा हो गया था
  • लेकिन नौजवानों ने उसे पुन: मजबूत बनाने के लिए प्रयास किया
  • काकोरी षड्यंत्र कांड के एकमात्र बचे हुए फरार व्यक्ति चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में क्रांतिकारियों के एक नए दल की बैठक 9-10 सितंबर 1928 को फिरोजशाह कोटला के मैदान में  आयोजित हुई
  • जिसमें हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया गया इसका उद्देश्य भारत में समाजवादी गणतंत्र वादी राज्य की स्थापना करना था
  • यह लोकतांत्रिक संगठन था इसमें सब लोग बहुमत के निर्णय को मानने के लिए बाध्य थे ​
  • हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के अन्य नेताओं में उत्तर प्रदेश के विजय कुमार सिन्हा शिव वर्मा जयदेव कपूर और पंजाब के भगत सिंह भगवती चरण बोहरा और सुखदेव थे

🥀🍃सांडर्स की हत्या (17 दिसंबर 1928)🍃🥀 
⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜⚜

  • हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का पहला क्रांतिकारी कार्य लाहौर के सहायक पुलिस अधीक्षक सांडर्स की हत्या करना था
  • इसने 30 अक्टूबर 1928ई. को पंजाबी क्रांतिकारियों मैं चंद्रशेखर के नेतृत्व में लाहौर में साइमन कमीशन विरोधी अभियान के दौरान लाला लाजपत राय पर लाठी चार्ज करवा कर उन्हें घातक रूप से घायल कर दिया था जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी
  • लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए लाहौर के सहायक पुलिस कप्तान सांडर्स की 17 दिसंबर 1928 को लाहौर रेलवे स्टेशन पर भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु ने हत्या कर दी थी
  • इस हत्याकांड के बाद क्रांतिकारी तो बच निकले लेकिन पुलिस ने जनसाधारण पर दमन चक्र चलाया और आम जनता को परेशान किया जाने लगा
  • इन सब अत्याचारों से जनता को बचाने के लिए  हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन ने पुलिस का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने और अपनी गिरफ्तारी के  लिए अगला कार्य सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली बम कांड किया था


🥀🍃सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली बम कांड (8 अप्रैल 1929)🍃🥀 
🌸प्रमुख अभियुक्त-भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त

  • हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का अगला महत्वपूर्ण कार्य दिल्ली की केंद्रीय असेंबली में बम फेंकना था
  •  सांडर्स की हत्या के बाद क्रांतिकारी भूमिगत हो गए थे लेकिन पुलिस निर्दोष जनता को आतंकित कर रही थी बलि का बकरा बनाई जा रही
  • लोगों में यह भावना सी हो गई की क्रांतिकारी तो निकल भागते हैं और जनता पिस जाती है
  • निर्दोष जनता की सहायता करने में असमर्थ और सरकार का रोष अपनी ओर केंद्रित करने के विचार से हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन ने अपने दो सदस्यों को अपराध करने और गिरफ्तारी देने के लिए भेजने का निर्णय किया
  • इस अनुसार भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधान सभा में उस समय दो बम और कुछ पर्चे फेंके जब विधानसभा में सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक और व्यापार विवाद विधेयक पर बहस चल रही थी
  • पर्ची में लिखा हुआ था बहरों को सुनाने के लिए बमों की आवश्यकता है
  • उनकी इच्छा किसी की हत्या करने की नहीं थी वह केवल फ्रांसीसी विप्लव कार्य के उस कथन को सत्य करना चाहते थे कि बधिरों को सुनाने के लिए अत्यधिक कोलाहल करना पड़ता है
  • भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को गिरफ्तार कर लिया गया और केंद्रीय असेंबली बम कांड में उन पर मुकदमा चलाया गया
  • भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को 12 जून 1929 को आजीवन कारावास का दंड दिया गया
  • चुकी विधानसभा में बम मारने के लिए फांसी नहीं दी जा सकती थी
  • लाहौर के बम बनाने के कारखाने और गुप्त केंद्र की सरकार को जानकारी हो जाने आपकी सांडर्स हत्याकांड में भगत सिंह की भूमिका के कारण सरकार ने इस कांड को सांडर्स हत्या कांड अथवा लाहौर षड्यंत्र कांड मैं 15 अन्य प्रमुख क्रांतिकारियों के साथ जोड़कर लाहौर षड्यंत्र केस चलाया गया और भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी


🥀🍃लाहौर षड्यंत्र मुकदमा 1929ई.🍃🥀

  •  भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की गिरफ़्तारी के कारण अनेक हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के कई क्रांतिकारी भी गिरफ्तार किए गए और उन पर लाहौर षड्यंत्र कांड में संयुक्त रुप से मुकदमा चलाया गया
  • जेल में रहते हुए जिन कैदियों पर मुकदमा चलाया जा रहा था मुकदमे के दौरान जेल में दुर्व्यवहार के प्रश्न पर क्रांतिकारियों द्वारा भूख हड़ताल की गई
  • उन्होंने साधारण अपराधियों के बजाए राजनीतिक बंदियों का दर्जा प्राप्त करने के लिए भूख हड़ताल की
  • भूख हड़तालियों में जतिन दास भी थे जिनका 13 सितंबर 1929 को अनशन के 64 वे दिन देहांत हो गया
  • लाहौर षड्यंत्र मुकदमे का फैसला 1930 के अंत में सुनाया गया  जिसमें से 3 (भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव) को फांसी की सजा और अन्य को कालापानी की सजा दी गई
  • लाहौर षड्यंत्र कांड में अधिकांश क्रांतिकारियों को दोषी पाया गया उनमें से 3 भगत सिंह ,सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गई थी
  • इन तीनों की फांसी से पहले फरवरी 1931 में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर पुलिस का सामना करते हुए शहीद हो गए
  • बाद में जब सूर्य सेन को उनके साथियों को बंगाल में मृत्युदंड दिया गया 12 जून 1934 दो क्रांतिकारियों के आंदोलन का एक प्रकार से अंत हो गया​
  • फांसी के तख्ते पर यह नौजवान क्रांतिकारी गाना गा रहे थे


“”दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत!
मेरी मिट्टी से भी खुशबू ए वतन आएगी “”!!

उनकी फांसी के समाचार से समूचा देश मृत्यु जैसी उदासी में डूब गया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.