खलीफा इतिहास | हजरत मोहम्मद साहब का उत्तराधिकारी

63 वर्ष की आयु में 632  ईसवी में हजरत मोहम्मद साहब का निधन हो गया था और हजरत मोहम्मद साहब ने अपनी मृत्यु के बाद अपना कोई उत्तराधिकारी नियुक्त नहीं किया था इस कारण मदीना के वासियों ने अपना एक शासक चुनने का निर्णय किया जिसे खलीफा कहा गया खलीफा शब्द का उपयोग हजरत मोहम्मद साहब के उत्तराधिकारी के रूप में किया जाता है

कुरान में खलीफा शब्द प्रतिनिधि के लिए प्रयुक्त होती। यहॉ खलीफा को पृथ्वी पर खुदा का प्रतिनिधि माना गया है यही उपाधि पैगंबर के उत्तराधिकारी के लिए उपयुक्त मान ली गई खलीफा का अधिकार एक सुव्यवस्थित शासन पर आधारित था उसे न्याय और समानता के सिद्धांतों के अनुसार शासन करने का अधिकार था यदि खलीफा अल्लाह के हुक्म को नहीं मानता है तो लोगों को उसके विरुद्ध आंदोलन करने का अधिकार था

इस्लाम मे सर्वप्रथम खलीफा का चुनाव

इस्लामिक कानून बादशाहों को राजनीतिक संस्था के रुप में स्वीकार नहीं करता और इसी कारण उत्तराधिकार के कानून को भी स्वीकार नहीं करता है मोहम्मद साहब की मृत्यु के बाद मदीना के वासियों ने अपना एक शासक चुनने का निर्णय किया। खजराज जनजाति का साद पुत्र उबैदा उनका भावी उम्मीदवार था।

उधर कुरैशी जनजाति के प्रतिनिधि अबूब्रक, उमर और अबू उबैदा जर्राह खलीफा की पदवी अपने पास रखना चाहते थे अथार्थ  मोहम्मद साहब का उत्तराधिकारी बनना चाहते थे काफी वादविवाद के बाद अबूब्रक को खलीफा चुना गया इस प्रकार मोहम्मद साहब के उत्तराधिकारी के रूप में इस्लाम के चार प्रमुख खलीफा बने- अबूब्रक, उमर, उस्मान व अली जिनमें पहले खलीफा अबूब्रक थे

पहले चार खलीफाओ (अबूब्रक,उमर, उस्मान और अली ) के काल में इस्लाम धर्म संसार के विभिन्न भागों में फैला, मोहम्मद साहब की मृत्यु के सो वर्षों के अंदर मुसलमानों ने दो शक्तिशाली साम्राज्य (सासानिद और बिजेण्टाइन) को पराजित किया उन्होंने सिरिया, इराक और मेसोपोटामिया पर विजय प्राप्त की मुस्लिम साम्राज्य अत्यधिक विस्तृत हो गया अतः खलीफाओं को अपनी राजधानी मदीना से हटाकर दश्मिक बनानी पड़ी

  • इस्लाम धर्म का इतिहास | History of Islam Religion

इस्लाम के चार प्रमुख खलीफा

खलीफा शब्द का उपयोग मोहम्मद साहब के उत्तराधिकारी के रूप में किया गया इस्लाम धर्म के चार प्रमुख खलीफा थे | इसमें से इस्लाम धर्म के सबसे पहले खलीफा अबूब्रक बने जो की कुरैशी जन जाति के थे

1. अबूब्रक (632-634 ईस्वी)

अबूब्रक इस्लाम धर्म के सबसे आरंभिक अनुयाई थे उन्होंने संपूर्ण भारत और उसके पड़ोसी राज्यों को जीतने का प्रयत्न किया इस उद्देश्य से उन्होंने 11 सैनिक दल का गठन किया, 1 वर्ष में समस्त अरब देश में एक निर्विरोध केंद्रीय सत्ता द्वारा शांति स्थापित कर दी गई उनके शासन के दूसरे काल में अरब सेनाओं ने चेल्डिया (इराक )और सीरिया पर आक्रमण किया | उन्होंने  बिजेण्टाइन  राज्य के विरुद्ध सेना का नेतृत्व किया और सासानिद के विरुद्ध विजय प्राप्त की । इन सफलताओं के कारण अबूब्रक को विश्वास और सम्मान मिला। 13 अगस्त 634 को अबूब्रक की मृत्यु हो गई अपने अंतिम दिनों में उन्होंने उमर को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था

2. उमर (634-644 ईस्वी)

उमर खलीफा की उपाधि के साथ-साथ आमिर उल मुमिनीन (अनुयायियों का सेनानी) का विरुद धारण किया, अबूब्रक की भांति उन्होंने भी विस्तारवादी नीतियों का अनुसरण किया उन्होंने सीरिया और सासानिद राज्य पर विजय प्राप्त की और मिश्र को भी इस्लामी गणराज्य में मिलाया । सुव्यवस्थित शासन व्यवस्था स्थापित करने के लिए प्रत्येक देश को प्रांतों में बांटा गया और जमीन का बंदोबस्त और जनगणना की गई । उमर के बाद तीसरे खलीफा उस्मान बने

3. उस्मान (644 से 656 ईसवी)

उस्मान तीसरे खलीफा बने थे जिस समय वह खलीफा नियुक्त हुए उस समय उनकी आयु 70 वर्ष थी । इन के समय में इस्लाम के अनुयायियों में पक्षपात ईर्ष्या और स्वार्थ की भावना प्रबल हो गई फलस्वरुप चारों और अशांति हो गई । उस्मान के विरुद्ध यह आरोप लगाया गया कि वह अपने ही कबीले के व्यक्ति की नियुक्ति करते हैं और मोहम्मद साहब के कबीले बनीहाशिम के अधिकारियों की उपेक्षा करते हैं इन कारणों से उस्मान ने जनता के स्नेह और सम्मान को खो दिया । 17 जून 654 में कुछ विद्रोहियों द्वारा कुरान पढ़ते समय उनकी हत्या कर दी गई उस्मान के पश्चात चौथे खलीफा अली बने थे

4. अली खलीफा (656 से 661 ईसवी )

उस्मान के बाद अली चौथे खलीफा बने थे अली का खिलाफत अधिकांशत: युद्धो का युग रहा, चुकी मदीना खिलाफत के साम्राज्य में संपन्न प्रदेशों से बहुत दूर स्थित था इसलिए अली ने कूफा को अपनी राजधानी बनाने का निर्णय किया, खलीफा उस्मान के समय में मुसलमानों में प्रारंभ हुई ईर्ष्या, पक्षपात व विरोध अली के समय में चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया था । 25 जनवरी 661 ईसवी को अली की मृत्यु हो गई अली की मृत्यु के बाद अली के जेष्ट पुत्र हसन को खलीफा चुना गया किंतु उन्होंने मुआवियों के पक्ष में खिलाफत की पदवी छोड़कर मदीना चले गए

मुआविया द्वारा उमय्या के खलिफा/खिलाफत की शुरुआत

मुआविया ने उमय्या के खिलाफ पद की नींव डाली मुआविया ने खलीफा को एक प्रकार की बादशाहत का रूप दिया जिससे उसका धार्मिक नेतृत्व क्षीण होने लगा, मुआविया ने यजिद को अपना उत्तराधिकारी बनाया मक्का-मदीना के सभी प्रमुख व्यक्तियों ने मजीद के प्रति राज भक्ति की शपथ ग्रहण की लेकिन कूफा की जनता ने हुसेन (मोहम्मद साहब की पुत्री फात्म का पुत्र ) को खलीफा बनाने के लिए आमंत्रित किया हुसैन व यजिद के मध्य युद्ध आश्यम्भावी हो गया, कूफा से 25 मील दूर कर्बला के मैदान में यजिद और हुसैन के बीच युद्ध हुआ जिसमें हुसैन शहीद हुए यजिद ने लगभग 3 वर्ष तक शासन किया। यजिद का पुत्र मुहाविया द्वितीय क्षयग्रस्त था जिसकी 3 माह बाद मृत्यु हो गई, लोगों ने मरवान पुत्र हकम को अगला खलीफा चुना। उसी समय अब्दुल्ला के पुत्र जुबेर ने खिलाफत का दावा किया उन्होंने लगभग 9 वर्ष तक संघर्ष किया

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