चंद्रशेखर आजाद और यशपाल का क्रांतिकारी आंदोलन

  • काकोरी षड्यंत्र में चंद्रशेखर आजाद भी शामिल हुए थे लेकिन वह फरार हो गए थे
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  • लाहौर षड्यंत्र कांड में भी उन्हें फरार घोषित कर दिया गया था
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  • चंद्रशेखर आजाद एक बार फिर से भूमिगत होकर अपनी गतिविधियों का संचालन करने लगे
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  • भगत सिंह को जेल से मुक्त कराने के लिए चंद्रशेखर आजाद ने एक योजना बनाई थी लेकिन वह सफल नहीं हो पाई
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  • भगत सिंह के बाद चंद्रशेखर आजाद ने पंजाब के क्रांतिकारी दल के संगठन की जिम्मेदारी यशपाल और भगवती चरण बोहरा को सौंप दी थी
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  • श्री भगवती चरण वोहरा की धर्मपत्नी श्रीमती दुर्गा देवी ने भी क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेना प्रारंभ कर दिया था
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  • श्रीमती सुशीला देवी,श्रीमती प्रेम देवी और प्रकाशवती कपूर भी क्रांतिकारी आंदोलन की बड़ी भारी कार्यकर्ता थे
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  • चंद्रशेखर आजाद और यशपाल ने 23 दिसंबर 1929 को वायसराय लार्ड इरविन की ट्रेन को उड़ाने के लिए एक योजना बनाई  थी गाड़ी के तीन डिब्बे टूट-फूट गए थे लेकिन वाइसराय लार्ड इरविन  बाल बाल बच गए
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  • 23 दिसंबर 1930 को पंजाब के गवर्नर को मारने की कोशिश की गई जब गवर्नर पंजाब यूनिवर्सिटी का दीक्षांत भाषण पढ़ने के लिए आए थे
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  • हरिकिशन ने गवर्नर पर गोली चला दी थी गवर्नर घायल हो गया लेकिन मेरा नहीं था 9 जून 1931 को हरी किशन को फांसी की सजा दे दी गई थी
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  • 27 फरवरी 1931 को चंद्रशेखर आजाद ,यशपाल और सुरेंद्र पांडे इलाहाबाद आए थे चंद्रशेखर आजाद यशपाल को रूस भेजना चाहता था ताकि वहां से भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष में किसी प्रकार की सहायता मिल सके
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  • इलाहाबाद में अल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर आजाद एक अन्य क्रांतिकारी सुखदेव राज बड़ी गंभीरता पूर्वक कुछ सोच रहे थे कि इतने में वहां पुलिस आ जाती है और पुलिस का सामना करते हुए दोनों वीरगति को प्राप्त होते हैं
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  • चंद्रशेखर की मृत्यु से क्रांतिकारी दल को इतनी अधिक हानि पहुंचे कि वह पूरी नहीं की जा सकी
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  • चंद्रशेखर आजाद की मृत्यु के बाद हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी ने यशपाल को अपना नेता चुना यशपाल ने बिखरे हुए दल को पुनः संगठित किया
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  • 23 जनवरी 1932 को यशपाल किसी से मिलने के लिए इलाहाबाद गए थे उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और यशपाल को 14 वर्ष की सजा दी गई थी
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  • लेकिन 1935 में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस मंत्रिमंडल स्थापित हो गया और मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने 2 मार्च 1938 को जेल से बिना किसी शर्त के यशपाल को छोड़ दिया
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  • जेल से छूटने के बाद यशपाल ने कहीं उपन्यास लिखें

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