दयारा बुग्याल उत्तरकाशी | उत्तराखण्ड पर्यटन स्थल

दयारा बुग्याल उत्तरकाशी

उत्तराखण्ड राज्य के उत्तरकाशी जनपद के भटवाडी ब्लॉक से 13km रैथल – नटीण तथा भटवाडी ब्लॉक से 13km बार्सू गाँव से दयारा बुग्याल का पगडंडी मार्ग जो 7/8 km का एक Adventure मार्ग है

दयारा बुग्याल की विशेषता

यहाँ छोटी छोटी घास का एक बहूताय बड़ा और सुन्दर मैदान है जहाँ से बन्दरपूँछ तथा black peek काला नाग जैसे सुन्दर चोटियों का नजारा देखने को भी मिलता है.दयारा बुग्याल की सर्वप्रथम खोज स्व0 श्री चन्दन सिंह राणा जी के सहयोग से एवरेस्ट विजेता सुश्री चन्द्रप्रभा ऐतवाल जी ने की यह बुग्याल समुद्र तल से अनुमानित 1100 से 1200 फिट की ऊंचाई पर स्थित है!

अप्रैल माह के अंत तक यहाँ बर्फ देखने को मिल जाती है तत्पश्चात मई माह से यहाँ छोटे छोटे फूल खिलने लगते हैं दयारा बुग्याल के छोटे बड़े जंगलों में अनेकों प्रकार की जडीबुटीयां भी होती है जो हमारे स्वास्थ्य के अनुकूल दवा का काम करने में सक्षम होते हैं जैसे-(चोरा, चाय में तथा दाल में गरम मसाला का काम करता है) (आर्चू) लादो. जडीबूटियों के अलावा बुग्याल की सुंदरता को और भी रंगीन दिखाता है

यहाँ आए चरवाहों के भेड़-बकरीयों का बड़ा झुंड और इनके अलावा आस पास के नजदीकी गाँव की छानीयां जो गाँव के बड़े बुजुर्गों के द्वारा घास, लकड़ी व पत्थर से बनी होती है, अप्रैल माह के अंत से लोग यहाँ अपनी मवैशीयों को 7 से 8 माह के लिए चुगांन के लिए बुग्याल मे छोड़ दिया करते हैं बुग्याल की अधिक से अधिक ऊंचाई वाले बुग्याल व पहाड़ी 15000 फिट पर ( दिव्य पुष्प ब्रहमकमल) {सोसूरिया अबवेलेटा} सितम्बर व अक्टूबर माह में बहूताय से बहूताय संख्या में पाए जाते हैं!

दयारा बुग्याल से आस पास के गाँवों को फायदा-

आस पास के गाँव के बैरोजगार युवाओं के लिए यह एक वरदान स्वरूप है 7/8km के पगडंडी मार्ग से दयारा बुग्याल तक का सफर पर्यटकों के लिए रास्ते को तय करना बहुत कठिन है किन्तु आस पास के युवाओं के सहयोग से यह काम आसान हो जाता है. As a guide, Helpers, Cook, Homestay Potter, यूवाओं को रोजगार मिल रहा है |

दयारा बुग्याल में अगस्त माह की 15/16 तारीख को एक अद्भुत मैला भी आयोजित किया जाता है, जिसमें दूध, दही, मट्ठा, मक्खन से होली खेली जाती है राधा कृष्ण के द्वारा हांडी फोडी जाती है.और सभी अपनी संस्कृति रासौ लगाते हैं, दिसम्बर से यह बुग्याल हिमाच्छादित होने पर और भी अद्भुत अविश्वसनीय हो जाता है इसकी सुन्दरता और भी बढ़ जाती है इस समय भी यहाँ पर्यटकों का आगमन बना रहता है पर्यटक यहाँ स्की जैसे खैल का लुप्त उठाते हैं

प्राकृतिक संपदा

दयारा बुग्याल उत्तराखण्ड राज्य उत्तरकाशी की पर्यटन धरोहर है यहाँ कस्तूरी मृग मौनाल तथा अनेकों जीव-जंतु देखने को मिलते हैं ब्रह्मकमल, जयाण, भूतकैश जैसे अनेकों प्रकार के पुष्प भी पर्यटकों को मनमोहक कर देते हैं

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Post-Author: Pradeep Singh Rawat.

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