दांडी मार्च (12 मार्च 1930 से 6 अप्रैल 1930)

  • 1928 में गांधीजी पुन: राजनीति में आ गए थे गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रारंभ नमक कानून को तोड़कर किया 
  • इस उद्देश्य से महात्मा गांधी ने 12 मार्च 1930 को अपने 78( सीता रमैया के अनुसार 79 सी और सुमित सरकार के अनुसार 71) चुने हुए अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम (अहमदाबाद) से अपना ऐतिहासिक दांडी( नौसारी जिला गुजरात)मार्च प्रारंभ किया
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  • 5 अप्रैल 1930 को 241 मैं लंबी पदयात्रा के बाद  दांडी पहुंचे और 6 अप्रैल 1930 को महात्मा गांधी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर दांडी समुद्र पर जाकर अवैध नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा
  • इसके बाद संपूर्ण देश में यह आंदोलन व्यापक रूप से फैल गया
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  • महात्मा गांधी जी की दांडी यात्रा के बारे में सुभाष बोस ने लिखा कि महात्मा जी के इस अभियान की तुलना नेपोलियन के एलबा से पेरिस की ओर किए जाने वाले अभियान से और राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने के लिए मुसोलिनी के रोम मार्च से की जा सकती है
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  • एक अंग्रेज समाचार संवाददाता ने इसकी खिल्ली उड़ाई और कहा कि क्या एक सम्राट को एक केतली में पानी उबालने से हराया जा सकता है
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  • कलकत्ते के प्रसिद्ध समाचार पत्र स्टेटसमैंन ने व्यंग से कहा, गांधी महोदय समुद्री जल को तब तक उबाल सकते हैं जब तक कि डोमिनियन स्टेटस नहीं मिल जाता
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  • लेकिन इन साम्राज्यवादियों ने इस अवज्ञा आंदोलन के नैतिक प्रभाव का ठीक मुल्य नहीं आंका
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  • शीघ्र ही अवज्ञा आंदोलन में 60,000 से भी अधिक स्वयंसेवको ने भाग लिया

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