देलवाड़ा/दिलवाड़ा का जैन मंदिर(Jain temple of Delwara / Dilwara)

देलवाड़ा/दिलवाड़ा का जैन मंदिर

(Jain temple of Delwara / Dilwara)

स्थिति:-माउंट आबू(सिरोही)
यह पांच मंदिरों का समूह हैं।
निर्माण:-11वीं-से13वीं. शताब्दी
निर्माता:-वास्तुपाल एवं तेजपाल दो भाई
यह शानदार मंदिर जैन धर्म के र्तीथकरों को समर्पित हैं।

दिलवाड़ा के मंदिरों में ‘विमल वासाही मंदिर’ “प्रथम 

र्तीथकर(आदिनाथ/ऋषभदेव)’ को समर्पित सर्वाधिक 

प्राचीन है जो 1031 ई. में बना था। बाईसवें र्तीथकर 

नेमीनाथ को समर्पित ‘लुन वासाही मंदिर’ भी काफी लोकप्रिय है। यह मंदिर 1231 ई. में वास्तुपाल और तेजपाल नामक दो भाईयों द्वारा बनवाया गया था।

दिलवाड़ा जैन मंदिर परिसर में पांच मंदिर संगमरमर के है। मंदिरों के लगभग 48 स्तम्भों में नृत्यांगनाओं की आकृतियां बनी हुई हैं।
दिलवाड़ा(देलवाड़ा) के मंदिर और मूर्तियां मंदिर निर्माण कला का उत्तम उदाहरण हैं।

11 वीं और 13वीं शताब्दी में बने हुए दिलवारा(देलवाड़ा) जैन मंदिर माउंट आबू के ऐसे पर्यटन स्थल हैं, पर्यटकों को जिनका भ्रमण अवश्य करना चाहिए। ये मंदिर सफेद संगमरमर की नक्काशियों से बने हैं। ये मंदिर पाँच नाज़ुक नक्काशियों वाले मंदिरों से मिलकर बने हैं और संपूर्ण राजस्थान में ये सबसे सुंदर माने जाते हैं।

सभी पाँच मंदिर एक दूसरे से भिन्न हैं जिनमें से प्रत्येक का नाम राजस्थान के एक गाँव के नाम पर रखा गया है। ये पाँच मंदिर हैं विमल वसाही मंदिर, लुना वसाही मंदिर, पीथालहर मंदिर, खरतार वसाही मंदिर और श्री महावीर स्वामी मंदिर। बड़ी संख्या में जैन भक्त यहाँ तीर्थंकरों (संत) के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने यहाँ आते हैं।

इन मंदिरों की स्थापत्यकला की उत्कृष्टता का गवाह बनने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ आते हैं।

इन मंदिरों के बारे में अधिक जानने के लिए आप किराए पर गाइड (मार्गदर्शक) की सेवा भी ले सकते हैं। दिलवारा के जैन मंदिर माउंट आबू से ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं और यहाँ तक रास्ते द्वारा पहुँचा जा सकता है।

माउंट आबू में देखने लायक स्थल
माउंट आबू | mount abu
भारत देश के पश्चिमी तट पर राजस्थान में आया हुआ एक पहाड़ी नगर है माउंट आबू गुजरात के नजदीकी है माउंट आबू भारत के अरावली पर्वत माला में आता है और सबसे बड़ा पहाड़ माउंट आबू है  माउंट आबू एक सुंदर देखने लायक हिल स्टेशन है |

माउंट आबू को ‘अर्बुदरान्य’ भी कहा जाता है | जिसका नाम नाग देवता ‘अर्बुदा’ के नाम पर पड़ा। भगवान शिव के बैल नंदी की रक्षा करने के लिए नागदेवता इस पहाड़ी के नीचे आए थे। अर्बुदारन्य का नाम बाद में बदलकर ‘अबू पर्वत’ या ‘माउंट आबू’ कर दिया गया। ऐतिहासिक रूप से यह स्थान गुर्जरों या गुज्जरों द्वारा बसाया गया है।

संत वशिष्ठ ने पृथ्वी से असुरों के विनाश के लिए यहां यज्ञ का आयोजन किया था। जैन धर्म के चौबीसवें र्तीथकर भगवान महावीर भी यहां आए थे। उसके बाद से माउंट आबू जैन अनुयायियों के लिए एक पवित्र और पूजनीय तीर्थस्थल बना हुआ है।

माउंट आबू में देखने लायक  अन्य स्थल
1. नक्की झील | Nakki lake
⏩प्राचीन काल में जाना जाता है कि नक्की झील को एक रसिया बालम नाम के व्यक्ति ने अपने नाखूनों से झील का निर्माण किया था | रसिया बालम प्राचीन समय में माउंटआबू में काम करने के लिए गया था और उसे वहां राजकन्या से प्यार हो गया और फिर राजकन्या के पिता ने शर्त रखी कि अपने नाखूनों से एक ही रात में झील बना सकती हो तो मैं अपनी कन्या का विवाह तुम्हारे साथ कर दूंगा और कन्या को पाने के लिए रसिया बालम ने इस झील का निर्माण किया था |

⏩आज के युग में नक्की झील एक देखने लायक और सुंदर पर्यटन स्थल है  | लोग वहां वोटिंग करने के लिए जाते हैं | वहां घूमने के लिए जाते हैं | इस झील में लोग गर्मियों के मौसम में ज्यादातर जाते हैं |

2. सनसेट पॉइंट | Sunset point
⏩सनसेट पॉइंट माउंट आबू में पर्यटकों के लिए शाम और सुबह देखने लायक कुदरती सौंदर्य का निर्माण देखने को मिलता है | इसीलिए यहां सूर्योदय और सूर्यास्त के समय लोक खास देखने के लिए जाते हैं और इसी वजह से सनसेट पॉइंट एक आकर्षक और देखने लायक जगह है |

3. टोड रोक | Tod rock
⏩मेंढक के आकार से मिलती चट्टान को देखकर यूँ प्रतीत होता है जेसे यह मेंढक अभी झील में कूद पड़ेगा । इसी के पास एक और चट्टान है जिसे नन रौक के नाम से जाना जाता है यह चट्टान घूँघट निकाले हुई स्त्री के समान दिखती है । ये दोनों चट्टानें दूर से पर्यटकों को आकर्षित करती हैं । इसीलिए ये आकर्सक और देखने लिए है |

4. म्यूजियम और आर्ट गैलरी | Museum art gallery
⏩यहां राजभवन है राजभवन में अलग-अलग तरह के आर्ट गैलरी भी है और  म्यूजियम है और आर्ट गैलरी है |

5. गुरु-शिखर | Guru shikhar
⏩अरावली पर्वतमाला का उच्चतम बिंदु है। माउंट आबू से १५ किमी.दूर गुरु शिखर अरावली पर्वत शृंखला की सबसे ऊँची चोटी है। जिसकी ऊँचाई 1722 मीटर है,पर्वत की चोटी पर बने इस मंदिर की शांति दिल को छू लेती है। गुरू दत्तात्रय मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो इस पर्वत के ऊपर स्थित है। भगवान दत्तात्रय को समर्पित है जो दिव्य त्रिमूर्ति भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। इस पर्वत पर स्थित अन्य मंदिर शिव मंदिर, मीरा मंदिर और चामुंडी मंदिर है।

6.अचलगढ़ | Achalgarh
⏩माउन्ट आबू से उत्तर दिशा में अचलगढ़ की पहाड़ियों है | और वहा भगावन शिव का मंदिर है | एक मात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर है। स्कंद पुराण के मुताबिक वाराणसी शिव की नगरी है तो माउंट आबू भगवान शंकर की उपनगरी । अचलेश्वर माहदेव मंदिर माउंट आबू से लगभग 11 किलोमीटर दूर अचलगढ़ है ।

माउंट आबू तक कैसे जाएं ( How to reach mount abu):-
हवाई अड्डा :-उदयपुर का एयरपोर्ट से 185 किलोमीटर की दूरी पर है |अहमदाबाद एयरपोर्ट 225 किलोमीटर की दूरी पर है |

ट्रेन :-समीपस्थ रेल्वे स्टेसन जो आबू से 28 किलोमीटर दूर है

रोड द्वारा :-
⏩जयपुर से माउंट आबू  [7 h  23 min (494.2 km)]
⏩उदयपुर से माउंट आबू  [2 h 48 min (163.3 km)]
⏩अहमदाबाद से माउंट आबू  [4 h 31 min (225.4 km)]
⏩मेहसाना से माउंट आबू [3 h 4 min (151.7 km)]

विशेष
दिलवाड़ा के मंदिरों से 8किलोमीटर उत्तर पूर्व में अचलगढ़ किला व मंदिर तथा १५ किलोमीटर दूर अरावली पर्वत शृंखला की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर स्थित हैं।
इसके अतिरिक्त माउंट आबू में नक्की झील, गोमुख मंदिर, माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य आदि भी दर्शनीय हैं।

रमेश डामोर 

सिरोही