नौजवान सभा

🍁स्थापना-*1926 ई. मे
🍁स्थान-पंजाब
🍁संस्थापक-भगतसिंह, छबीलदास और यशपाल

नौजवान सभा के राजनीतिक उद्देश्य निम्न प्रकार थे

1. सारे भारत में संपूर्ण स्वतंत्र मजदूरों और किसानों के राज्य की स्थापना
2. संगठित भारत राष्ट्र बनाने के लिए देश के युवकों में देशभक्ति की भावना उत्तेजित करना
3. ऐसे आर्थिक ,औद्योगिक और सामाजिक आंदोलनों के साथ सहानुभूति प्रकट करना जो सांप्रदायिकता से दूर रह कर देश को उसके उद्देश्य है अर्थात संपूर्ण आजादी और किसान और मजदूर राज्य लाने में सहायता करें
4. मजदूरों और किसानों को संगठित करना

नौजवान सभा ने अपना उद्देश्य प्राप्त करने और क्रांतिकारी विचारों का प्रचार करने के लिए के लिए कई प्रकार की कार्यवाहियां शुरू की

इनके मुख्य कार्यकर्ताओं में केदारनाथ सहगल,सरदूल सिंह कवीसर मेहता,आनंद किशोर सोढी, पिंडी दास इत्यादि मशहूर आंदोलनकारी थे

इस सभा की बैठकों में डॉक्टर भूपेंद्र नाथ दत्त ,श्रीपाद अमृत डांगे, फिलिप स्प्रैट और जवाहरलाल नेहरु जैसे महानुभाव ने भाषण दिए थे

नौजवान सभा ने भारत के युवकों को गदर के विरोध और आयरलैंड, टर्की ,जापान ,चीन आदि के स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों का अनुकरण करने का आह्वान किया

इसमें रूस के साथ मित्रता सप्ताह और काकोरी दिवस भी मनाया

जब साइमन कमीशन 20 अक्टूबर 1928 को लाहौर रेलवे स्टेशन पहुंचा तो इन्होंने साइमन कमीशन का बहिष्कार करने के लिए एक बहुत बड़े जुलूस का गठन किया

जिसमें लाला लाजपत राय पर लाठियों की बौछार की गई थी कहा जाता है कि इसी कारण एक महीने बाद में परलोक सिधार गए थे

लाला जी की मृत्यु का बदला लेने के लिए इस सभा के कुछ नेतागण भगत सिंह ,चंद्रशेखर आजाद राजगुरु और जयपाल ने स्काँट को मारने का निश्चय किया

लेकिन गलती से दिसंबर 1928 को पांडव और उनके रीडर चरण सिंह की गोली लगने से हत्या हो गई

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