पेड़-पौधों का महत्व | Importance of Trees Essay in Hindi

हमारे द्वारा सभी बच्चों, विद्यार्थियों एवं प्रतियोगियों के लिए पेड़-पौधों का महत्व को बहुत ही सरल भाषा मे उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है आप इस पोस्ट को अच्छे से पढ़ कर अपने ज्ञान में वृद्धि के साथ साथ अपनी परीक्षा में भी अच्छे अंक प्राप्त कर सकते है

पेड़-पौधों का महत्व

 

प्रस्तावना:-

वैश्विक वातावरण जीव जगत में पेड़ पौधे का बहुत अधिक महत्व है। ये प्रकृति के आवरण को मजबूत वह विशुद्ध बनाए रखने में सहायक हैं। ये मानव जीवन व प्रकृति के मध्य संतुलन बनाए रखते हैं । ये मानव तथा पूरे जीव -जगत को आधार प्रदान करते हैं पेड़ सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक,आदि सभी प्रकार के आयोजनों को परिपूर्ण करते हैं। सृष्टि के निर्माण में विशेष रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हैं। वेद पुराणों से लेकर आज तक इनकी महिमा का वर्णन किया जाता रहा है । जब धरा पर प्रलय हो रही थी तब भी वहाँ देवदारू वृक्ष के बारे में बताया है । जयशंकर प्रसाद की कामायनी के अनुसार मनु नामक नायक दो-चार देवदारू के वृक्षों के बारे में बताते हैं । पेड़ों का विशेष महत्व निम्नानुसार है।

पेड़-पौधों का महत्व –

पेड़ों से हमें जीवनदायिनी प्राणवायु ऑक्सीजन, विभिन्न प्रकार के फल -फूल आदि प्राप्त होते हैं। पेड़ों से कीमती इमारती लकड़ियां अनेक प्रकार के रोगों के निवारण में काम आने वाली औषधियां प्राप्त होती है। मनुष्य के जन्म से लेकर अंत तक किसी न किसी प्रकार से पौधों का उपयोग होता रहा है। बरसात कराने में पेड़ -पौधे बहुत सहायक होते हैं। जहां पर वनस्पति का घनत्व अधिक पाया जाता है, वहां पर वर्षा की स्थिति भी अच्छी होती हैं। पानी से भरे बादलों को घने वृक्ष अपनी और आकर्षित करते हैं जिससे झमाझम बारिश होती है । विभिन्न प्रकार के आयोजनों में काम आने वाले पुष्प भी हमें अनेक प्रकार के पेड़ पौधों से मिलते हैं।

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धार्मिकता में पेड़-पौधों का महत्व:-

भारत सभी धर्मों को मानने वाला देश है यहां अनेक जाति -धर्म के लोग निवास करते हैं । इसलिए भारत को पंथनिरपेक्ष गणराज्य कहा गया है प्राचीन काल से ही अनेक वृक्षों को देवी-देवताओं के रूप में पूजा जाता है विशेष त्योहारों के अवसर पर विधि विधान से संकल्प लिया जाता है । बड़- पीपल के वृक्षों को पानी का सुबह अर्ग दिया जाता है , उनके आगे ज्योति जलाई जाती है आंवला नवमी पर आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है । राज्य के राज्य वृक्ष के रूप में खेजड़ी को माना है। अशोक, केला, तुलसी का पौधा पूजनीय है।

औषधि के रूप में पेड़-पौधों का महत्व:-

वातावरण में समय-समय पर अनेक प्रकार की मौसमी या अन्य बीमारियां उत्पन्न होती रहती है उन को समाप्त करने में हरी-भरी वनस्पति सहायक होती है क्योंकि हरी-भरी वनस्पति से वातावरण स्वच्छ होता है । प्रकृति में भी कई पेड़ पौधे ऐसे होते हैं जिन की छाल, जड़ ,पत्तियां, फल, फूल आदि तत्व औषधि के रूप में काम में लिए जाते हैं ।गिलोय की बेल का रस निकालकर काढा बनाकर पिया जाता है जो शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। कोरोना महामारी में भी गिलोय का रस बहुत कारगर सिद्ध हुआ है । सिनकोना वृक्ष की छाल मलेरिया रोग को दूर करने में सक्षम है । नीम की पत्तियां का प्रयोग गर्म पानी करके नहाने से शरीर पर एलर्जी, दाद, खाज- खुजली आदि के निवारण के लिए करते हैं तथा नीम की सूखी पत्तियों को गेहूं की बोरी में डालकर गेहूं को घुन लगने से बचाते हैं।

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प्राकृतिक सौंदर्य के रूप में:-

पेड़-पौधों का महत्व प्राकृतिक सौंदर्य को बनाए रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कहा गया है कि धरती का श्रृंगार पेड़ है -जीवन का आधार पर है । प्रकृति के आवरण को सुंदर बनाने के लिए धरा पर चारों तरफ हरे- भरे वृक्ष लगाने से हरियाली नजर आती है जो कि बहुत मनमोहक होती है रंग बिरंगे फूल पत्तियों वाले पेड़ -पौधे की सौंदर्यता दिल को जीत लेती है । ये प्राकृतिक सौंदर्य के साथ -साथ कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण भी करते हैं ।

ये कल- कारखानों से निकलने वाली दूषित गैस व वायु को अवशोषित कर आक्सीजन प्रदान करते हैं उनको वातावरण में निष्क्रियता प्रदान करते हैं। पलाश के वृक्ष जो जंगल की आग से जाने नाम से जाने जाते हैं वे धरती पर रंग- बिरंगी छटा फैलाते हैं जो कि पृथ्वी पर लाल ही लाल दिखाई देता है। जो बहुत ही सुंदर दृश्य होता है यह मिट्टी के कटाव को भी रोकने में सहायक हैं।

साहित्य में पेड़ों का महत्व:-

पेड़- पौधे सामाजिक जीवन में ही नहीं बल्कि साहित्य में भी अपना अनूठा स्थान रखते हैं । साहित्यिक विधाओं में इनका प्रयोग उदाहरण व मानवीकरण के अनेक रूप में किया जाता है जैसे फूलों सा चेहरा, यौवन की हरियाली, खजूर-सा पेड़, नीम जैसे बोल आदि इस तरह साहित्य में पेड़ पौधों का प्रयोग किया जाता है। प्रकृति या पेड़ -पौधों को मानव का रूप दिया जाता है। मानवीकरण अलंकार इसी पर निर्भर करता है जीवन में आने वाले सुख- दुःख को बसंत-पतझड़ आदि मानते हैं। काव्य में रोचकता बढ़ाने के लिए प्रकृति को मानव रूप दिया जाता है।

कृषि में पेड़-पौधों का महत्व:-

पेड़ -पौधों से प्राप्त होने वाली लकड़ियां ,जड़े कृषि के संसाधनों में अनेक प्रकार से काम में ली जाती है । ग्रामीण अंचल में आज भी बैल व ऊँट से हल चलाते हुए हम देख सकते हैं। उनके बनने वाले हल मजबूत लकड़ी के ही बने होते हैं । किसान रात्रि के समय अपनी फसल की रक्षा करने के लिए लकड़ी का टाऊँ बनाते हैं जो एक व्यक्ति के आकार का ढाँचा होता है। जिससे रात्रि के समय नीलगाय व अन्य प्रकार के जानवर खेत में नहीं आते हैं।

दिन के समय फसल की रखवाली करने के व अपने को धूप से सुरक्षित रखने के लिए किसान सरकी बनाता है जो सरकंडों व लकड़ी की बनी होती है जिसका आधार चारपाई की तरह होता है वर्षा ऋतु में होने वाली फसल के लिए या बेल वाली फसल लौकी, टिंडा आदि के लिए टाटा बनाकर बेल उस पर बिछा दी जाती है । पेड़ पौधों से ऋतु आवागमन का भी पता लगता है बसंत ऋतु आगमन पर पेड़ -पौधों में नए फूल पत्तियां आने लग जाती है व पतझड़ के समय पत्ते पीले होकर गिरने लगते हैं

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उपसंहार:-

उपरोक्त लेखन से स्पष्ट है कि पेड़ -पौधों का किसी ना किसी प्रकार से हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है । एक पेड़ का पक्षियों के लिए आशियाने के समान होता है क्योंकि पक्षी रहन बसर करने के लिए पेड़ों पर अपना घोंसला बनाते है उसमें अंडे देकर बच्चे निकालते हैं। मवेशियों को भी पेड़ की छाया के नीचे धूप में आश्रय प्रदान किया जाता है। इसलिए पेड़- पौधे मानव जीवन के लिए ही नहीं अपितु पशु -पक्षियों के लिए भी वरदान साबित होते हैं इस प्रकार हमें पेड़ -पौधों के महत्व का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अतः इस सारगर्भित लेखन से पेड़ -पौधों का महत्व स्पष्ट है । पेड़- पौधों की रक्षा कर हमें पर्यावरण व वातावरण को स्वच्छ व सुंदर बनाना चाहिए।

लेखिका – कोमल पूर्बिया

ओगणा, तहसील-झाड़ोल, जिला-उदयपुर (राजस्थान)

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