प्रजामंडल आंदोलन के प्रभाव

♻?प्रजा मंडल आंदोलन के सामाजिक -आर्थिक प्रभाव♻? 
?देसी रियासतों में नागरिक अधिकारों की बहाली, उत्तरदायी शासन की स्थापना और राजनीतिक आंदोलनको संबंधित रूप देने के लिए अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद के प्रांतीय शाखाओंके रूप में रियासतों में जो राजनीतिक संगठन स्थापित हुए प्रजामंडल कहलाए
?इसके द्वारा संचालित आंदोलन प्रजामंडल आंदोलनकहलाये
?इन प्रजामंडल आंदोलनो ने राजनीतिक आंदोलन के साथ-साथ सामाजिक सुधार के क्षेत्र में अत्यंत सराहनीय कार्यकिए गए
?इन आंदोलनों के माध्यम से महिलाओं को आगे बढ़नेका मौका दिया गया
?दलित उत्थान और आदिवासी उत्थान के कार्य किए गए
?शिक्षा का प्रसार किया गया
?बेगार और बलेठ प्रथाउन्मूलन का कार्य,
?सामाजिक सुधार जैसे- दहेज प्रथा डाकन-प्रथा, छुआछूत, ऊंच नीच ,बाल विवाह प्रथा, प् मृत्यु भोजआदि कुरूतियों पर इस आंदोलन के द्वारा रोक लगाई थी

♻?प्रजामंडल आंदोलन के द्वारा किए गए सामाजिक आर्थिक सुधार?♻   
 

??आदिवासी उत्थान कार्य?? 
?दक्षिण अरावली क्षेत्र में ठक्कर बापा की प्रेरणा से अमृत लाल पायक मैं प्रतापगढ़ में जनजातियों में जन जागृति के लिए विशेष कार्य किया था
?अलवर मे पण्डित हरिनारायण शर्मा ने आदिवासी संघ द्वारा,
?भोगीलाल पण्डया व उनके सहयोगियो ने बागड सेवा संघद्वारा,
?वर्मा जी ने मेवाड प्रजामंडल द्वारा
?अन्य प्रजामंडलों ने भी भील  सेवा कार्य, आदिवासी छात्रावास स्थापना,दापा,मद्यपान,सागडी प्रथा कि रोकके लिए कानून बनवाएं और शिक्षा प्रसार एवं जनजागृति पैदा कर आदिवासियों में राष्ट्रीय चेतना विकसित की

?दलितोत्थान कार्य?? 
?प्रजामंडल के दौरान सभी जगह छुआछूत, ऊंच-नीच आदि के भेदभाव को मिटाया गया
?दलितों को भी आंदोलन में सक्रिय रुप से सम्मिलित किया गया
?अलवर में पंडित हरि नारायण में अस्पृश्यता निवारण संघ, वाल्मीकि संघ
?गोकुल भाई भट्ट ने हरिजन सेवा संघ
?भोगीलाल पांड्या ने हरिजन समिति
?वर्मा जी ने मेवाड़ हरिजन सेवा संघ
?रामनारायण चौधरी ने राजपूताना हरिजन संघआदि अनेक दलितोत्थान संस्थान स्थापित कि
?इंहोने दलितों में मद्यनिषेद, शिक्षा प्रसार ,जन जागरण, मंदिर प्रवेश ,गरीबी उन्मूलन  सम्बन्धित आदि कार्य किये
?इन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने का सराहनीयसराहनीय प्रयास किये गये

??महिलाओं को आंदोलन से जोड़ना??  

?राजस्थान की नारियो ने प्रजामंडल में सक्रिय रुप से भाग लिया
?बांसवाड़ा में श्रीमती जिया बहिन,मारवाड़ में महिमा देवी कींकर ,रमा देवी, कृष्णा कुमारी जयपुर में दुर्गा देवी शर्मा,मेवाड़ में नारायणी देवी और उनकी पुत्री आदि के नेतृत्व में जगह-जगह महिला मंडल बने
?महिलाओं ने भारत छोड़ो आंदोलन, सामाजिक सुधारों ,धरना,प्रदर्शन करने आदि में बढ़ चढ़करभाग लिया
?बड़े स्तर पर गिरफ्तारीयॉ दी गई
?इस आंदोलन की यह सबसे बड़ी उपलब्धि रही महिलाओं को चार दिवारी से बाहर निकालकर पुरुषों के साथ कंधे से कंधामिला कर खड़ा करदिया गया
? जेल जाने वाली महिलाओं का नेतृत्व करने वाली अंजना देवी (पत्नी रामनारायण चौधरी) नारायणी देवी (पत्नी माणिक्य लाल वर्मा )और रत्ना शास्त्री (पत्नी हीरालाल शास्त्री) प्रमुख थी
?प्रजामंडल आंदोलन में प्रमुख महिला एक 12 वर्षीय भील बालिका कालीबाईथी
?जिसने सेंगा भाई को बचाने के लिए खुद पुलिस की गोली का शिकार हुई *
?अजमेर में प्रकाशवती सिन्हा* का नाम भी राजस्थान की इस श्रेणी की महिलाओं में आता है
?  महइन आंदोलनों के माध्यम स महिलाओं ने भी अपने अधिकारों के प्रति लड़ने की जागरूकता उत्पन्न हुई
? महिलाएं भी अपने अधिकारों के लिए आंदोलन के माध्यम से खुलकर सामने आई

??शिक्षा प्रसार का कार्य?? 
प्रजामंडल आंदोलन का एक सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य जन सामान्य की शिक्षा का प्रचार-प्रसार रहा है
?उनके द्वारा जगह-जगह रात्रि पाठशाला खोली गई
?गांव गांव व शहर में अनेक पाठशाला , दलितों के लिए कबीर पाठशाला खोली गई
?लड़कियों की शिक्षा के लिए पुत्री पाठशाला  स्थापित की गई
?प्रजामंडलो ने सभी नगरों ओर कस्बों में पुस्तकालय, वाचनालय स्थापित कर संचालित किए गए
?हीरालाल शास्त्री ने वनस्थली विद्यापीठ की स्थापना कर बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन दिया
?हरिभाई किंकर ने महिला शिक्षा सदन (हटूंडी)स्थापित कर महिला शिक्षा के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान दिया गया

 ??सामाजिक सुधार कार्य?? 
?प्रजामंडल के सभी नेताओं एंव कार्यकर्ताओंने गॉव-गॉव,शहर-शहर जा कर
?सक्रिय रूप से बाल विवाह, कन्या-वध,पर्दा प्रथा मृत्यु-भोज,बहुविवाह-प्रथा,दहेज-प्रथा,डाकन-प्रथा,छुआछूत, ऊँच-नीच का भेदभावआदि सभी कुरीतियो का पुरजोर विरोध किया
?विधवा पुनर्विवाह महिला शिक्षा, विवाह की अधिक आयु आदि का  पुरजोर समर्थन ही नही किया,
?बल्कि इस सन्दर्भ मे जनजागृति भी पैदा की
? इसी प्रकार शराबबंदी आंदोलन,नशीली वस्तुओं का प्रचार रोकना ,मजदूरो के हितो के लिए कानून बनवाना
?प्रजा की भलाई के कार्य करना,चर्खा एंव खादी उत्पादन केन्द्र स्थापित करना, बाढ व अकाल राहत कार्यो मे जन सहयोग जैसे अनेक कार्य हाथ में लेकर जनता को अपने साथ मिला लिया

??सामाजिक सौहार्द्र एंव एकता की स्थापना?? 
?प्रजामंडल आंदोलनों के सामाजिक प्रभावों ने जातीय एंव धार्मिक वैमनस्यको मिटाया
?सभी को समानता एंव भाईचारें का पक्का पाठ पढाया,
?क्योकि सभी की एक समान समस्या थी निरंकुश सामन्तशाही
?इसलिए इस आंदोलन में हिन्दू-मुस्लिम एंव सभी वर्गो व जातियों ने एक साथ बढ-चढकर भाग लिया

??बेगार और बलेठ प्रथा उन्मूलन का कार्य??
? मेवाड प्रजामंडल ने बेगार एंव बलेठ प्रथा के विरुद्ध अभियान  चलाकर इनके लिए विशेष कानून बनवाये
?मारवाड़  में जयनारायण व्यास ,हाडोती में पं.नयनूराम शर्मा,बागड मे भोगीलाल पण्डया,गोकुल भट्टजैसे सभी नेताओं ने बलेठ एंव बेगार प्रथा के विरुद्ध आंदोलन चलाकर
?इसे  समाप्त करने का प्रयास किया
?इसी के फलस्वरूप जगह-जगह कृषक,आदिवासी आंदोलन उठ खडे हुए

??प्रजामंडल आंदोलन का राजनीतिक महत्व?? 
☀जन जागृति एवं राष्ट्रीय चेतना सामाजिक एवं रचनात्मक उत्तरदायी शासन की स्थापना के लिए
☀अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद की स्थानीय निकायों के रूप में जो राजनीतिक संगठन स्थापित किए गए
☀उन के माध्यम से राज्य में कहीं परिवर्तनआए
☀यह संगठन प्रजामंडलथे
☀इन के माध्यम से राज्य में स्वतंत्रता के लिए प्रजामंडल आंदोलनचलाए गए
☀इन प्रजामंडल आंदोलनो का राज्य में काफी महत्व था
☀राज्य के लिए प्रजामंडल आंदोलन के महत्व निम्न प्रकार से मुख्य था

 ??राजनीतिक जागृति उत्पन्न करना?? ➖   
☀राजस्थान की जनता राजशाही सामंती शोषण व अत्याचारों से दबी राजनीतिक चेतनाके प्रति उदासीन थी
☀प्रजामंडल की स्थापना से जन चेतना का संचारहुआ
☀लोगों का मनोबल बड़ा और जन जागृतिपैदा हुई
☀जनता शोषण व अत्याचारों के विरोध संगठित रूपसे खड़ी हो गई ☀उस में मौलिक अधिकारों के प्रति जागृतिआई

 ??उत्तरदायी शासन की स्थापना?? ➖ 
☀1938 में कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन के बाद कांग्रेस ने प्रत्येक राज्य में जन आंदोलन का उत्तरदायित्व स्थानीय नेतृत्व पर डाला
☀इन प्रजामंडल ने अपने सीमित साधनों से बहादुरी के साथ राजाओं की निरंकुश सत्ता से लोहा लिया
☀ प्रजा मंडल आंदोलन इस निरकुंश राजशाही और ब्रिटिश सत्ता का आखिर तक मुकाबला करता रहा
☀प्रजामंडल आंदोलन के माध्यम से राज्य उत्तरदायी लक्ष्य को प्राप्तकरने में सफल रहा

??महिलाओं को राजनीतिक आंदोलन से जोड़ना?? ➖
☀प्रजामंडल आंदोलन में राजस्थान की नारियों को राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय रुप से जोड़ागया
☀महिलाओं ने आंदोलन में हर कदम पर पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकरकार्य किया
☀प्रजामंडल आंदोलन से महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हुई
☀अपने अधिकारों को प्राप्तकरने के लिए विरोधी शक्तियों का डटकर सामना किया
☀ इस कार्य के लिए कहीं महिलाएं जेलमें भी गई थी
☀प्रजा मंडल आंदोलन  से महिलाओं ने अपनी शक्ति को पहचाना था
☀यह प्रजामंडल आंदोलन की एक बहुत बड़ी उपलब्धिथी

??राष्ट्रीय चेतना का विकास?? ➖  
☀प्रजामंडल आंदोलन से ब्रिटिश भारत की जनता और रियासतों की जनता में सामंजस्यस्थापित हुआ
☀ इससे रियासतों की जनता में राष्ट्रीय चेतना का विकास हुआ
☀रियासत राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल हो गई

??राष्ट्रीय आंदोलन को बल?? ➖ 
☀1938से पहले रियासतों की जनता अपने स्तर पर ही राजनीतिक आंदोलनकर रही थी
☀इसके बाद कांग्रेस ने इन आंदोलनों को सक्रिय सहयोग देने की नीति अपनाई
☀भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान यह भेद मिट गया और स्थानीय आंदोलन राष्ट्रीय आंदोलन में परिणित हो गया
☀संयुक्त आंदोलन से राजाओं की निरंकुश सत्ता डगमगानेलगी
☀अंग्रेजों का भारत में मुख्य उत्तम (शासन वर्ग)धराशाईहोने लगा
☀अंग्रेज इन राष्ट्रीय आंदोलनों से भयभीत हो गए
☀अब वह संपूर्ण देश के एक सामान्य विद्रोह का सामना नहींकर सकते थे

??देश को राजनीतिक एकता के सूत्र में बांधना?? ➖
☀स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अधिकांश राजाओं ने इन प्रजामंडल आंदोलन से भयभीत होकर भारतीय संघ में मिलना स्वीकार किया
☀जैसे जोधपुर महाराजा हनुवंत सिंह धौलपुर महाराजा उदय भान सिंह जैसे अनेक शासक पाकिस्तान में मिलना चाहते थे
☀लेकिन आंदोलन से जन्मे भारी जनमत के विरोधके कारण वे ऐसा नहीं करसके
☀इस दृष्टि से प्रजामंडल आंदोलन देश को राजनीतिक एकता के सूत्र में बांधने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ

??सामाजिक सुधार और रचनात्मक कार्य कर सामान्य जन को जोड़ना?? ➖
☀प्रजा मंडल आंदोलन ने दलित उत्थान ,आदिवासी उत्थान, शिक्षा पर जोर, शराबबंदी, नशीली वस्तुओं का प्रसार रोकना, मजदूरों के हितों में कानून निर्माण करवाना ,चरखा और खादी उत्पादन केंद्रों की स्थापना की थी
☀इन प्रजामंडलों ने बाढ़ ,अकाल राहत में कार्य, छुआछूत, ऊंच नीच और जाति-पाति के भेदभाव आदि मिटाना जैसे अनेक कार्यों को सुधारो को प्रोत्साहन दिया गया
☀दूसरी ओर कन्या वध, बाल विवाह, दहेज प्रथा, बहु विवाह ,पर्दा प्रथा, मृत्यु भोज ,बेगार और बलेठ प्रथा ,मद्यनिषेध और शिक्षा आदि का विरोध कर जन जागृति पैदा की
☀इससे आम जनता प्रजामंडल आंदोलन से जुड़ गई

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