बलबन के कार्य

? बलबन योग्य साहसी और दूरदर्शी  था उसने दृढ़तापूर्वक किन कठिनाइयों का सामना किया और सफलता प्राप्त की
? राज्य के  कठिनाइयों को दूर करने के लिए उसने साम्राज्य विस्तार के स्थान पर आंतरिक संगठन पर बल दिया

 1. ??राजस्व के सिद्धांत और सुल्तान की प्रतिष्ठा की स्थापना??
?  बलवंत दिल्ली का प्रथम सुल्तान था जिसने राजत्व संबंधी सिद्धांतों की स्थापना की और राजत्व अपने इन विचारों का विस्तारपूर्वक विवेचन किया
?  उस के राजत्व सिद्धांत का स्वरूप और सार  फारसी राजत्व (इरान के सासानी शासकों )से लिया गया है
? बलवंत सुल्तान को पृथ्वी पर अल्लाह का प्रतिनिधि- नियामतें -खुदाई मानता था
? उसके अनुसार सुल्तान का स्थान पैगंबर के बाद आता है सुल्तान जिल्ले अल्लाह  अर्थात ईश्वर का प्रतिबिंब है वह अल्लाह के निर्देशानुसार ही शासन करता है
? बलबन के अनुसार सुल्तान पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि( नियामत-ए- खुदाई) है ।उसका स्थान केबल पैगंबर के पश्चात है ।सुल्तान को कार्य करने की प्रेरणा और शक्ति ईश्वर  से प्राप्त होती है
? इस कारण जनसाधारण या सरदारों को उसके कार्यों की आलोचना करने का अधिकार नहीं है बलवन यह मानता था कि  “राजा का हृदय ईश्वर कृपा का विशेष भंडार है और इस संबंध में मानव जाति में कोई उसके समान नहीं है।”
? राजत्व के संबंध में बलबन ने यह भी कहा था कि– एक अनुग्रही राजा सदा  ईश्वर के संरक्षण के क्षेत्र से रक्षित होना चाहिए

?बलवन के राजत्व सिद्धांत के विषय में के.ए. निजामी ने कहा है कि– बलबन एक उत्तम अभिनेता था और अपने दर्शकों को आधुनिक फिल्मी सितारों की भांति मंत्रमुग्ध रखता था

? राजस्व के सिद्धांत की दूसरी विशेषता निरंकुशता थी।बलवन निर्कुश शासन में विश्वास रखता था
? उसका यह मानना था कि केवल निर्कुश शासक ही अपनी प्रजा का आज्ञा पालन प्राप्त कर सकता है
? उसने अपने पुत्र बुगरा खॉ  से कहा था,”सुल्तान का पद निरंकुशत्ता का सजीव प्रतीक है
? लेकिन बलबन का यह भी कहना था कि–“”ईश्वर एक व्यक्ति को सुल्तान का पद इसलिए प्रदान करता है कि ताकि वह प्रजा के कल्याण के लिए कार्य करें और अपने कर्तव्य के प्रति सदा सजग रहे
? बलबन के राजत्व की पूरी जानकारी इतिहासकार बरनी द्वारा संकलित उसके वसाया में मिलती है
? वसाया के प्रथम भाग में सुल्तान के कर्तव्यों का वर्णन है और दूसरे भाग में बलबन ने अपने पुत्रों को राजत्व के संबंध में निर्देश दिया है
? प्रसिद्ध शासकों और राजनीतिज्ञों के वसाया (वसीयत) को संकलित करना मध्यकालीन फारस  की एक लोकप्रिय परंपरा थी

? दिल्ली के सुल्तान बलबन के वसाया को बरनी ने संकलित किया

? बलबन ने दिखावटी मान मर्यादा और प्रतिष्ठा को राजत्व  के लिए आवश्यक समझा
?  उसने राजा के पद को जीवित रखने के लिए कुछ मूलभूत तत्व को आवश्यक समझा जैसे—-
1-राजकीय प्रतिष्ठा
2-सम्मान
3-वैभव
4-मान मर्यादा और
5-आचार व्यवहार

? उसने राजा के पद को एक ऐसी संस्था का रूप दिया जिसका जनसाधारण के साथ निकट संपर्क नहीं था
? वह साधारण व्यक्ति से बात नहीं करता था केवल वजीर ही उससे बात कर सकता था
? अपने विचारों को बलबन ने व्यवहार में परिणित किया।व  वंशावली महत्व पर अत्यधिक बल दिया
? उसने स्वयं को फिरदौसी के शाहनामा में वर्णित अफरासियाब के वंश से संबंधित बताया
? सुल्तान की प्रतिष्ठा के अनुकूल अपने व्यवहार को अत्यंत गंभीर और एकांकी बनाय।,  शराब पीन,  विनोदप्रिय व्यक्ति के साथ बैठना और छोटे अमीरों से मिलना बंद कर दिया
? इसके अतिरिक्त उसने सामाजिक सभाओं में होने वाले नृत्य, संगीत ,मद्यपान पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया
? दरबार में वह न तो स्वयं  हंसता था और ना किसी को उसकी छूट देता थ।  दरबार में केवल वजीर ही उसे वार्तालाप कर सकता था
? ईरानी परंपरा के अनुरूप बलबन ने दरबार के लिए नियम बनाया और उसने कठोरता से लागू किया। उसने फारसी पद्धति पर अपने दरबार का गठन किया

गैर इस्लामी प्रथाओं की  शुरुआत
? बलवंत दिल्ली का प्रथम सुल्तान था जिसने दरबार में गैर इस्लामी प्रथाओं का प्रचलन किया
? उसने दरबार में दो प्रथाएं प्रारंभ की
1-प्रथम–सिजदा–घुटने पर बैठ कर सिर झुकाना और
2-द्वितीय–पायबोस–सुल्तान का चरण चुंबन

? दरबार में उसने प्रत्येक वर्ष की ईरानी त्योहार नौरोज बनाने की प्रथा आरंभ की
? अपने व्यक्तिगत जीवन में भी फारस  के रीति रिवाजों का अनुकरण किया। अपने पुत्रों के नाम भी भारत के सम्राटों की भांति कैकुबाद ,केखुसरो और कैकास रखा।
? बलवंत कुलीन और अकुलीन परिवार के व्यक्तियों में अंतर करता था और अकुलीन व्यक्तियों से वह न कोई संपर्क रखता था और ना ही उन्हें कोई पद देता था
? उसने अपने लगभग 30 अधिकारियों को पदच्युत कर दिया था क्योंकि वह अकुलीन अथवा उच्च कुल के नहीं थे

?बरनी ने लिखा है कि–एक भारतीय व्यापारी “फरब्र- ए-बावनी”के लाख प्रयत्नों के बावजूद बलबन ने उससे मिलने से मना कर दिया

?इस संबंध में उसका कहना था कि जब मैं किसी तुच्छ परिवार के व्यक्ति को देखता हूं तो मेरे शरीर की नाड़ी क्रोध से उत्तेजित हो जाती है
?वह स्वयं संपूर्ण राज्य से वैभव और उपकरणों के साथ ही दरबार में उपस्थित होता था, दरबारियों को भी विशेष वस्त्र धारण करके ही दरबार में आने की अनुमति दी गई थी
?ख्वारिज्म व सस्मानी शासकों की भांति बलबन ने भी उच्च वेतन प्राप्त करने वाले और भय जागृत करने वाले अंग रक्षकों को नियुक्त किया जो नंगी तलवारें लेकर सिंहासन के चारों ओर खड़े रहते थे
?जब बलबन दरबार से बाहर निकलता था तो यह भयावह अंगरक्षक नंगी तलवार लेकर बिस्मिल्ला- बिस्मिल्ला करते हुए उसके साथ चलते थे
?बलवन खलीफा की राजनीतिक सत्ता को मान्यता देता था अपनी राजनीतिक शक्ति के प्रयोग के लिए वह खलीफा की अनुमति प्राप्त करने की चर्चा करता है
?उसने अपने सिक्कों पर खलीफा का नाम अंकित किया और खुत्बे में उनका नाम शामिल किया
?इस प्रकार अपने सिद्धांतों द्वारा बलवन के राजत्व के आधार को मजबूत किया और जनहित को शासन का व्यवहारिक आदर्श बनाया
?उसका राजत्व सिद्धांत शक्ति, प्रतिष्ठा और न्याय पर आधारित था

2. ??तुर्कान- ए- चिहलगानी का दमन??
?कुत्बी और मोइज्जी  सरदारों पर अपनी निर्भरता समाप्त करने के लिए इल्तुतमिश ने अपने गुलाम सरदारों का एक गुट बनाया था। जिसे “चालीसा दल” कहा गया
?शासक बनने से पूर्व बलबन भी इस गुट का सदस्य था और स्वयं सुल्तान और सरदारों के मध्य हुए संघर्ष में सक्रिय भाग लिया था
?वह भली भांति  जानता था कि सुल्तान की प्रतिष्ठा और उसके वंश की सुरक्षा के लिए इस गुट को समाप्त करना आवश्यक है।इल्तुतमिश के उत्तराधिकारियों के संदर्भ में वह उनकी भूमिका देख चुका था
?जब वह शासक बना तो उस समय चालीसा गुट में अधिकांश सदस्य मर चुके थे बलबन ने शेष बचे सदस्य के प्रभाव को नष्ट करने का प्रयास किया
?क्योंकि वह जनता जानता था कि राज्य पद में अपने परिवार को सुरक्षित करने और निर्कुश सत्ता स्थापित करने के लिए चालीसा दल को समाप्त करना आवश्यक है
?इस उद्देश्य से सर्वप्रथम उसने अन्य तुर्को को महत्वपूर्ण पद देकर चालीसा सरदारों के समकक्ष बनाया। तत्पश्चात चालीसा गुट के सदस्यों को साधारण अपराधों के लिए कठोर दंड दिया
?बदायूं के इक्तेदार मलिक बकबक को जनसाधारण के सम्मुख कोडों से पिटवाया क्योंकि उसने एक दास को कोड़ों से पीटकर मार दिया था
?इस प्रकार अवध के इक्तेदार हैबात खां को अपने एक दास के हत्या के अपराध में 500 कोड़े लगाने की सजा दी गई
?अवध के इक्तेदार अमीन खां के बंगाल अभियान से विफल होकर आने के बाद उसे मृत्युदंड देकर अयोध्या के फाटक पर लटका दिया थ
?शेर खां  बलबन का चचेरा भाई था वह चालीसा गुट का योग्य और प्रमुख सदस्य था और बलबन का सबसे शक्तिशाली और संभावित विरोधी सरदार था
?बलबन ने उसे विष देकर मरवा डाला क्योंकि बलवंत उसकी योग्यता और महत्वकांशा को लेकर आशंकित था
?शेर खां की मृत्यु से बलबन का सबसे शक्तिशाली और संभावित विरोधी सरदार समाप्त हो गया और साथ ही चालीसा गुट पूरी तरह नष्ट हो गया

3. ?? आंतरिक विद्रोहो का दमन ??
?सम्राट पद की प्रतिष्ठा स्थापित करने और केंद्रीय प्रशासन को संगठित करने के बाद बलबन ने आंतरिक विद्रोहों की ओर ध्यान दिया
?कानून और व्यवस्था की दृष्टि से उस समय बलवंत के समक्ष चार समस्याग्रस्त क्षेत्र थे

1-पहला क्षेत्र–दिल्ली का निकटवर्ती प्रदेश जहां मेवाती उत्पात मचा रहे थे
2-दूसरा क्षेत्र–गंगा यमुना दोआब का था जो सुल्तान की सत्ता को निरंतर चुनौती दे रहे थे
3-तीसरा क्षेत्र–अवध जाने वाला व्यापारिक मार्ग था और
4चौथा क्षेत्र–कटेहर अथवा बुंदेलखंड था ।

?सर्वप्रथम बलबन ने मेवातीयों को कुचलने का निश्चय किया

मेवातीयो का दमन
?मेवाती डाकू थे जो राजधानी दिल्ली के समीपवर्ती क्षेत्र के जंगलों में निवास करते थे दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में उनका आतंक था
?वह नगर के आसपास के सराय लूट लेते थे और पानी भरने वाले कहारों और दासियों को सताते थे
?बलबन ने बर्बरतापूर्वक मेवो का दमन किया दिल्ली के आसपास के जंगलों को जो मेवों का निवास स्थल था कटवा दिया
?गोपाल गिरि में एक दुर्ग का निर्माण किया और अनेक थाने स्थापित कर वहां अफगान सैनिकों को नियुक्त किया
?बलबन ने मेवातीयों से लड़ने के लिए 3000 अफगानों की भर्ती की थी
?उसी समय से अफगानों उपयोग सीमा चौकियों पर चौकसी अथवा अप्रभावित क्षेत्रों को अपने अधीन करने में किया जाने लगा
?ज्ञातव्य है कि भारत में अफगानियों का महत्व सर्वप्रथम नासिरुद्दीन मुहम्मद के समय में प्रकट हुआ था

गंगा यमुना का दोआब क्षेत्र
?मेवों के दमन के पश्चात बलबन ने दोआब की ओर ध्यान दिया
?दोआब के नगर और प्रदेश उन इक्तादारों को प्रदान किए गए जिनके पास अधिक धन था
?बलबन ने यह आदेश दिया कि जिस गांव के लोग आज्ञाकारी नहीं हैं उन्हें बिल्कुल नष्ट कर दिया जाए
?बड़े अमीर जिनके पास विशाल सेनाए थी,उन विद्रोहियों का दमन करने का निश्चय किया
?विद्रोहियों का विनाश कर जंगलों को काट डाले और दोआब की जनता को अधीनता स्वीकार करने के लिए बाध्य किया गया

अवध का व्यापारिक मार्ग
?अवध में विद्रोहियों का दमन करने के लिए बलबन ने स्वयं भाग लिया
?वह कंपिल और पटियाली पहुंचा यहां पांच छह माह तक रुक कर डाकू और विद्रोहियों का पूरी तरह से सफाया किया
?इस प्रकार अवध की ओर जाने वाला मार्ग खुल गया और व्यापारी और कारवां सुरक्षित आने जाने लगे
?भोजपुर,पटियाली ,कंपली और जलाली में चौकिया बनाई गई और वहॉ अफगान सेनाओं को नियुक्त किया गया
?नगरों के विस्तार हेतु अफगानों और अन्य मुसलमानों को कर रहित भूमि प्रदान की गई

रूहेलखंड क्षेत्र में कटेहरों का दमन
?कटेहर के विद्रोही बदायूं और अमरोहा क्षेत्र में आतंक फैलाए हुए थे
?वे इतना शक्तिशाली हो गए थे की इक्तेदारो की भी अवहेलना करने लगे थे
?बलबन ने कटेहरों के दमन का निश्चय किया, इसका दायित्व उसने शाही सेना को सौंपा
?कटेहरों का भारी संख्या में वध किया गया
?बरनी ने लिखा है कि– लाशों के ढेर प्रत्येक गांव के आगे लगाए गए और सडने वाली लाशों की दुर्गंध गंगा नदी तक पहुंची
?इस का परिणाम यह हुआ कि खिलजी वंश की स्थापना के बाद तक किसी कटेहर विद्रोही ने सिर नहीं उठाया

जूद पर्वतमाला(साल्ट रेंज)
?कटेहरों के दमन के बाद बलबन जूद पर्वतमाला (साल्ट रेंज )की ओर कूच किया और वहां के विद्रोहियों को दंडित किया
?इन सैनिक कार्यवाहियों में बलबन को इतने घोड़े प्राप्त हुए की बाजार में उसका मूल्य ही गिर गया।,30 या 40 टंकों में एक घोड़ा खरीदा जा सकता था
?इन सभी क्षेत्रों में बलबन ने सम्मान नीति अपनाई जिसका उद्देश्य विद्रोहियों को कठोर दंड देकर आतंकित करना था
?कुछ इतिहासकारों ने इस नीति को लोहा और रक्त नीति का नाम दिया यह नीति  पूर्ण रुप से सफल रही

4. ??बंगाल के तुगरिल खॉ का विद्रोह ??
?प्रारंभ से ही बंगाल पर दिल्ली सल्तनत का स्थाई नियंत्रण नहीं रहा
?नासिरुद्दीन महमूद के समय में ही कड़ा का इक्तेदार अर्सला ने अपने आप को स्वतंत्र घोषित कर लिया और बंगाल दिल्ली सल्तनत के प्रभुत्व से निकल गया
?जब बलबन  शासक बना तो उसमें लखनौती अर्साला के पुत्र तातार खां  के अधीन था उसने दिल्ली के आधिपत्य को स्वीकार कर लिया और बलबन को 63 हाथी भेंट स्वरूप भेजें
?तातार खां के पश्चात तुगरिल खां लखनौती का राज्यपाल बना,वह बलबन का दास था जो अपनी चतुरता, साहस, उदारता और  उल्लास के लिए प्रसिद्ध था
?1279 ईस्वी में उसने बलबन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और Sultan मुगीसुद्दीन की उपाधि धारण कर अपने नाम के सिक्के चलाए और खुत्बा भी पढ़वाया
?तुगरिल खॉ के इस विद्रोह से बलबन को बहुत धक्का लगा क्योंकि किसी सुल्तान के दास का यह प्रथम विद्रोह था
?तुगरिल खॉ के इस विद्रोह को दबाना अत्यंत आवश्यकता है क्योंकि यदि यह सफल हो जाता तो बलबन की संपूर्ण व्यवस्था नष्ट हो जाती
?विद्रोह को दबाने के लिए बलबन ने सर्वप्रथम अवध के सूबेदार अमीन खां  को एक विशाल सेना के साथ भेजा लेकिन वह असफल रहा
?बलबन ने क्रुद्ध हो कर अमीन खान का वध करवा दिया और उसकी लाश अवध के द्वार पर लटका दी गई
?बलबन ने अपने एक विश्वसनीय अधिकारी बहादुर के नेतृत्व में दूसरा अभियान भेजा लेकिन वह असफल रहा
?बलबन ने उसे (बहादुर) भी मृत्यु दंड देना चाहा लेकिन उसके मित्रों द्वारा बचाव किए जाने पर वह बच गया किंतु बलबन ने उसे दरबार से निष्काषित कर दिया
?अपने दो प्रमुख सेनानियों अमीन खा और बहादुर की पराजय से बलवन अत्यंत क्रोधित हो गया
?अत:तुगरिल के विद्रोह को स्वयं कुचलने का निश्चय किया
?1280-81ईस्वी में एक बड़ी सेना लेकर बंगाल की ओर बलवन बड़ा
?अवध में उसने(बलबन)ने अपनी सेना की संख्या में वृद्धि की। प्राय 2 लाख सैनिक और अपने पुत्र  बुगरा खां को लेकर बंगाल की ओर कुच किया
?बलबन के पहुंचते ही तुगरिल खॉ लखनौती छोड़कर जाजनगर भाग गया। बलबन ने सुनार गांव तक उसका पीछा किया लेकिन तुगरिल खां जंगलों में छिप गया
?मोहम्मद शेरंदाज ने अचानक तुगरिल के छिपने का पता लगा लिया और मात्र अपने 40 साथीयों के साथ ही तुगरिल खां पर आक्रमण कर दिया
?अचानक इस आक्रमण को तुगरिल खॉ स्वयं सुल्तान का आक्रमण समझ कर घबरा गया ,वह घोड़े की नंगी पीठ पर बैठ कर भागने का प्रयत्न किया
?मलिक मुकद्दर और अली नामक एक अधिकारी ने उसका पीछा किया ,अली ने एक छोटी सी कुल्हाड़ी से तुगरिल पर प्रहार कर उसका सिर काट दिया
?बलबन ने अली को तुगरिलकुश (तुगरिल का वध करने वाला) की उपाधि दी
?तुगरिल खॉ के हजारों सैनिकों को कैद कर लखनौती लाया गया उन्हें कठोर दंड दिया गया 


?बरनी ने लिखा है कि– “”लखनौती के मुख्य बाजार के दोनों और दो मील लम्बी तख्ता की एक कतार खडी़ की गई, और तुगरिल खॉ के समर्थकों को उन पर ठोक दिया गया, ऐसे विभत्स दृश्य को देख कर अनेक व्यक्ति मूर्छित हो गए

?बलबन ने अपने पुत्र बुगरा खॉ को बंगाल का इक्तेदार नियुक्त किया
?लौटते समय उसने बुगरा खॉ को सुल्तान के प्रति वफादार रहने की चेतावनी भी दी

?बंगाल अभियान एकमात्र ऐसा सैन्य अभियान था जिसका नेतृत्व बलबन ने दिल्ली से दूर जाकर किया

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