बाड़मेर जिला दर्शन | थार नगरी का इतिहास और भूगोल

बाड़मेर जिला दर्शन

राजस्थान की पश्चिमी सीमा का प्रहरी बाड़मेर जिला हमेशा शांतिप्रिय रहा है इसका इतिहास एवं कला संस्कृति अपने आप में अनूठी हैं बाड़मेर राजस्थान के पश्चिम क्षेत्र में स्थित वर्तमान में तेल एवं प्राकृतिक गैस संपदा का धनी जिला है बाड़मेर के इतिहास, भूगोल, कला एवं संस्कृति, कृषि एवं पशुपालन, प्रमुख पुरातात्विक स्थल, दुर्ग तथा भूगर्भीक संसाधनों के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।

बाड़मेर जिला का इतिहास

बाड़मेर की स्थापना बाहड़ देव द्वारा 1552 ईस्वी में की गई| बाड़मेर को जिले का दर्जा 30 मार्च 1949 को दिया गया। बाड़मेर के इतिहास में वीर दुर्गादास राठौड़ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

वीर दुर्गादास राठौड़

इनका जन्म बाड़मेर के सालवा गांव में हुआ था, इनके पिता का नाम श्री आसकरण था। वीर दुर्गादास राठौड़ को राठौड़ों का यूलीसिज, राजपूताने का गैरीबाल्डी तथा मारवाड़ का अण बींदिया मोती आदि उपनामों से जाना जाता है। वीर दुर्गादास राठौड़ जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह प्रथम के सेनापति थे, तथा अजीत सिंह के संरक्षक रहे। वीर दुर्गादास राठौड़ ने औरंगजेब के पोते बुलंद अख्तर एवं पुत्री सुफिया निस्सान का जूना बाड़मेर में पालन पोषण किया था। इनकी समाधि वर्तमान में शिप्रा नदी के किनारे उज्जैन मध्य प्रदेश में स्थित हैं ।

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मल्लिनाथ जी

मल्लिनाथ जी का जन्म 1358 ईस्वी में हुआ। मल्लिनाथ जी के पिता सलखा जी राठौड़ तथा माता रानी जाणी दे था। मल्लिनाथ जी का निवास स्थान “खेड़( बाड़मेर)” था। इनका वास्तविक नाम “माला राठौड़” था। इनकी छतरी तिलवाड़ा बाड़मेर में स्थित है। मल्लिनाथ जी ने खेड़ बाड़मेर पर शासन किया, तथा 1378 ईस्वी में फिरोज शाह तुगलक को पराजित किया। इन्होंने कुंडा संप्रदाय की स्थापना की, मल्लिनाथ जी ने धारू मेघवाल से दीक्षा ग्रहण की। रूपादे और चंद्रावल मल्लिनाथ जी की पत्नियां थी। बाड़मेर का मालाणी नामकरण मल्लिनाथ जी के नाम पर हुआ। रानी रूपादे मल्लिनाथ जी की पत्नी थी इनका मंदिर मालाजाल, तिलवाड़ा (बाड़मेर) में स्थित है।

बाड़मेर के दुर्ग

सिवाना दुर्ग:

इसका निर्माण वीर नारायण पंवार द्वारा 10 वीं शताब्दी में करवाया गया। इस दुर्ग को कूमट दुर्ग, जालौर की कुंजी, गढ़ अणखलौ, मारवाड़ के राठौड़ों की शरण स्थली, मारवाड़ की संकटकालीन राजधानी आदि उपनामों से जाना जाता है। सिवाना का दुर्ग छप्पन की पहाड़ियां पर स्थित है। छप्पन की पहाड़ियों को हल्देश्वर की पहाड़ियां भी कहा जाता है। सिवाना दुर्ग के परकोटे का निर्माण राव मालदेव द्वारा करवाया गया था। सिवाना को बाड़मेर का कश्मीर कहते हैं। यहां पर सावन मेला लगता है। सिवाना का दुर्ग गिरी दुर्ग तथा वन दुर्ग की श्रेणी में आता है। सिवाना दुर्ग के दो साके प्रसिद्ध हैं

  1. पहला साका 1308 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हुआ, इस समय वीर सातल देव ने केसरिया किया तथा रानी मैणादे ने जोहर किया । 1308 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने इस दुर्ग पर अधिकार कर इसका नाम बदल कर खैराबाद रखा।
  2. सिवाना का दूसरा साका 1582 में मोटा राजा उदयसिंह के आक्रमण के समय हुआ था।

किलोण दुर्ग

यह बाड़मेर के सुजेश्वर पहाड़ी पर स्थित है। इसका निर्माण राव बाहड़ जी द्वारा करवाया गया। इस दुर्ग का पूर्ण निर्माण भीमोजी द्वारा करवाया गया था।

कोटड़ा का किला – यह कोटड़ा, शिव तहसील (बाड़मेर) में स्थित है।

बाड़मेर के प्रमुख मंदिर

किराडू के मंदिर

किराडू के मंदिर बाड़मेर जिले के हाथमा गांव में स्थित हैं। किराडू का प्राचीन नाम किरातकुप था। किराडू के मंदिरों को राजस्थान का खजुराहो कहते हैं। किराडू के मंदिरों का निर्माण दसवीं तथा 11 वीं शताब्दी में हुआ यहां के प्रमुख मंदिरों में सोमेश्वर का मंदिर जो नागर शैली में निर्मित है राजस्थान में गुर्जर प्रतिहार कालीन महामारु शैली में निर्मित अंतिम मंदिर समूह है।यहां भगवान शिव और विष्णु के मंदिरों का समूह है।

ब्रह्मा जी का मंदिर

ब्रह्मा जी का मंदिर आसोतरा, बालोतरा (बाड़मेर) में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण संत खेताराम जी द्वारा 1984 ईस्वी में करवाया गया यह राजपुरोहित समाज के आराध्य देव हैं ।

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पार्श्वनाथ जी का मंदिर

यह मंदिर नाकोड़ा बाड़मेर में स्थित है। यह जैन मंदिर है नाकोड़ा का प्राचीन नाम मेवानगर था। नाकोडा मंदिर भाकरिया पहाड़ी पर स्थित है। जो भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित है। पौष कृष्णा दशमी को यहां पर मेला लगता है। पार्श्वनाथ मंदिर को “जागती जोत एवं हाथ का हुजूर” कहते हैं।

हल्देश्वर महादेव मंदिर – यह पीपलूंद सिवाना बाड़मेर में स्थित हैं। इसे “राजस्थान का लघु माउंट आबू” कहते हैं।

नागणेची माता का मंदिर- यह मंदिर नागाणा बाड़मेर में स्थित हैं। यह राठौड़ वंश की कुलदेवी हैं। इसे चक्रेश्वरी देवी भी कहते हैं। इनके मंदिर का निर्माण राव सीहा के पौत्र राव धूहड़ जी द्वारा करवाया गया। नागणेची माता की मूर्ति कर्नाटक से लाई गई थी यहां पर 18 भुजाओं वाली प्रतिमा स्थापित की गई है।

विरात्रा माता का मंदिर- विरात्रा माता का मंदिर बाड़मेर जिले के चौहटन तहसील से 10 किलोमीटर दूर उत्तर पश्चिम की पहाड़ियां में स्थित हैं। विरात्रा माता को वांकल माता भी कहते हैं। यह भोपों की कुलदेवी है।

वैर माता का मंदिर- यह चौहटन में स्थित है।

राणी भटियाणी माता का मंदिर-  यह मंदिर जसोल बाड़मेर में स्थित है।

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कपालेश्वर महादेव जी का मंदिर

बाड़मेर जिले के चौहटन तहसील मैं स्थित है। इसे अर्ध कुंभ के नाम से जाना जाता है। जब भी पौष माह की सोमवती अमावस का संयोग होता है तब यहां पर सुइयां मेला भरता है ऐसा 4 वर्ष या 12 वर्ष में एक बार होता है यहां पर पांडवों ने अज्ञातवास बिताया था।

रणछोड़राय मंदिर – यह खेड़ बाड़मेर में स्थित है। यह भगवान श्री कृष्ण का मंदिर है। इसका निर्माण राव सीहा के उत्तराधिकारी राव आसकरण द्वारा करवाया गया यह राईका /रेबारी जाति का मुख्य पूजा स्थल हैं।

चंडिका माता का मंदिर-  यह मंदिर बिसूकला शिव (बाड़मेर) में स्थित है।

चारभुजा मंदिर:- बाड़मेर में स्थित है।

संत पीपा का मंदिर:-  समदड़ी बाड़मेर में स्थित है।

गरीब नाथ जी का मंदिर :- बाड़मेर जिले के शिव तहसील में स्थित है।

सूर्य मंदिर:- यह देवका बाड़मेर में स्थित है।

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बाड़मेर के प्रमुख धार्मिक मेले 

बाबा रामदेव जी का मेला:- बाबा रामदेव जी का जन्म बाड़मेर जिले के शिव तहसील के काश्मीर गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम अजमाल जी तथा माता का नाम मेणादे था। बाबा रामदेव जी को रामसा पीर, कृष्ण के अवतार, कुष्ठ रोग के निवारक देवता, सांप्रदायिक सद्भावना के देवता, कवि लोक देवता, दलितों के देव आदि उपनामों से जाना जाता है। इन्होंने “चौबीस बानियां” नामक ग्रंथ लिखा था इनका प्रमुख मेला रामदेवरा, पोकरण (जैसलमेर) में लगता है।

आलम जी का मेला:- यह धोरीमना, बाड़मेर में लगता है।

खेमा बाबा का मेला:- यह मेला बायतु तहसील बाड़मेर मेंबाड़मेर में लगता है खेमा बाबा जाट समाज के आराध्य देव है।

बाड़मेर के प्रमुख पशु मेले :- यह मेला तिलवाड़ा, बालोतरा (बाड़मेर) में लूनी नदी के तट पर भरता है यह राज्य का सबसे प्राचीन पशुमेला है। पशुधन की संख्या के आधार पर राज्य का सबसे बड़ा पशु मेला है। यह मालाणी नस्ल के घोड़ा के लिए प्रसिद्ध हैं।

बजरंग पशु मेला:- यह मेला बाड़मेर जिले के सिणधरी तहसील में भरता है।

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बाड़मेर के प्रमुख कवि

ईश्वर दास जी बारहठ –  इनका जन्म भादरेस, बाड़मेर में हुआ था। इनका उपनाम ईसरा परमेश्वरा है। इन के प्रमुख ग्रंथ हालां- झालां री कुंडलिया गुण भागवत, हरि पुराण गुण हंस, देवयाण आदि।

आशा जी बारहठ:-  इनका जन्म भादरेस बाड़मेर में हुआ था। ईश्वर दास जी के भतीजे थे आशा जी बारहठ मालदेव के दरबारी कवि थे इनकी कुछ पंक्तियां प्रसिद्ध हैं जो इस प्रकार हैं – “मान रखै तो पीव तज,पीव रखै तज मान। दो गयन न बंधेगी, एक खंभे ठाण ।।”।

बांकीदास:-  इनका जन्म भाण्डियावास, पचपदरा (बाड़मेर) में हुआ था। जोधपुर के महाराजा मानसिंह के काव्य गुरु थे। इनका प्रमुख ग्रंथ “बांकी दास री ख्यात” हैं “आयो अंग्रेज मुल्क रे ऊपर” बांकी दास का प्रमुख गीत था जिसे “चेतावनी रा गीत” कहते हैं।

प्रमुख पुरातात्विक स्थल

तिलवाड़ा :- यह मध्य पाषाण कालीन पुरातत्व स्थल है जो लूनी नदी के किनारे बाड़मेर जिले के बालोतरा में स्थित है। बोरदा:– यह बाड़मेर जिले में स्थित है।

बाड़मेर जिले के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल

बाटाडू का कुंआ:- ये बायतु बाड़मेर में स्थित है। इसे “रेगिस्तान का जल महल” कहा जाता है। इसका निर्माण सिणधरी के रावल गुलाब सिंह द्वारा करवाया गया था।

शहीद स्मारक:-  गडरा रोड बाड़मेर में स्थित है। यहां प्रतिवर्ष 9 सितंबर को मेला लगता है। सन् 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय यहां रेलवे के 14 कर्मचारी शहीद हो गए इनकी स्मृति में यहां शहीद स्मारक बनाया गया है।

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बाड़मेर का भूगोल

बाड़मेर राजस्थान का सीमावर्ती जिला है। क्षेत्रफल की दृष्टि से बाड़मेर राजस्थान का दूसरा बड़ा जिला है। बाड़मेर का क्षेत्रफल 28387 वर्ग किलोमीटर हैं । बाड़मेर पाकिस्तान के साथ 228 किलोमीटर की अंतर्राष्ट्रीय सीमा बनाता हैं। बाड़मेर की गुजरात राज्य के साथ न्यूनतम सीमा लगती हैं। बाड़मेर न्यूनतम अंतर राज्य सीमा रेखा वाला जिला है। बाड़मेर के पड़ोसी जिले- जैसलमेर, जोधपुर, पाली, जालौर। बाड़मेर की जनसंख्या लगभग 26 लाख हैं।

राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि दर 32.50% बाड़मेर जिले की हैं। बाड़मेर का लिंगानुपात 902 हैं। तथा जनघनत्व 92 हैं। बाड़मेर की साक्षरता दर 56.2% है। बाड़मेर में कुल 7 विधानसभा क्षेत्र हैं। “राजस्थान का सर्वाधिक राजस्व गांवों वाला जिला” बाड़मेर हैं। यहां कुल 3109 राजस्व गांव हैं। बाड़मेर में 17 तहसीलें हैं तथा 21 पंचायत समितियां है। बाड़मेर जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 15 का नया नाम एनएच -68 हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 25 भी बाड़मेर से गुजरता है। संसदीय क्षेत्र बाड़मेर- जैसलमेर है ।बाड़मेर जिले में सर्वाधिक “अनुप्रस्थ” बालुका स्तूप पाए जाते हैं।” छप्पन की पहाड़ियां” सिवाना बाड़मेर में स्थित हैं।

पचपदरा झील: खारे पानी की झील है। जिसमें 98% सोडियम क्लोराइड पाया जाता है। तथा यहां सर्वाधिक खाने योग्य नमक प्राप्त होता है। यहां खारवाल जाति के लोग मोरली झाड़ी से नमक उत्पादन करते हैं।

लूनी नदी

लूनी नदी का उद्गम स्थल नाग पहाड़ अजमेर है। लूनी नदी का पानी बालोतरा तक मीठा और बालोतरा के बाद में खारा हो जाता है। आगे चलकर यह सिणधरी होती हुई जालौर होकर के गुजरात के कच्छ की खाड़ी में गिरती है। लूनी नदी के खारे पानी का कारण है पचपदरा झील। लूनी नदी के किनारे तिलवाड़ा स्थित है जहां मल्लीनाथ पशु मेला लगता है। पुष्कर की पहाड़ियों में जब भारी बरसात होती है तो लूनी नदी की वजह से बालोतरा में बाढ़ आ जाती है।

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बाड़मेर के प्रमुख खनिज संसाधन 

खनिज तेल:- राजस्थान में सर्वाधिक खनिज तेल का उत्पादन बाड़मेर जिले में होता है। बाड़मेर जिले में प्रमुख खनिज तेल के कुएं हैं- मंगला, ऐश्वर्या, भाग्यम, सरस्वती, विजया, शक्ति, नागाणा, बोथिया आदि। बाड़मेर में सबसे कम गहराई पर खनिज तेल मिलता है। केयर्न इंडिया लिमिटेड कंपनी बाड़मेर में तेल उत्पादन का कार्य करती हैं। जो स्कॉटलैंड की प्रमुख कंपनी है।

सलाया पाइपलाइन:- यह विश्व की सबसे लंबी हिटेड खनिज तेल पाइपलाइन है। जो नागाणा (बाड़मेर) से सलाया (गुजरात) तक बिछाई गई खनिज तेल पाइपलाइन है। इस पाइपलाइन की कुल लंबाई लगभग 600 किलोमीटर है। 4 फरवरी 2010 को इस पाइप लाइन का नामकरण शहीद तुकाराम ओंबले के नाम पर किया गया ।

भादरेस पावर प्लांट:-  यह राज वेस्ट कंपनी द्वारा संचालित हैं।

लिग्नाइट विद्युत परियोजना

यह गिरल (बाड़मेर) में है। जो जर्मनी की सहायता से राज्य सरकार का प्रथम प्रोजेक्ट है।

लिग्नाइट कोयला उत्पादन – राजस्थान में सर्वाधिक लिग्नाइट कोयले का उत्पादन बाड़मेर जिले के कपूरड़ी, जालीपा, बोथिया, गिरल आदि खानों से होता है। पहले बीकानेर के पलाना क्षेत्र प्रथम स्थान पर था किंतु वर्ष 2020 के बाद बाड़मेर लिग्नाइट कोयला उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।

प्राकृतिक गैस के भंडार:- बाड़मेर जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का उत्पादन होता है। यहां रागेश्वरी नामक स्थान प्राकृतिक गैस उत्पादन के क्षेत्र में प्रसिद्ध है।

मुल्तानी मिट्टी (बेंटोनाइट):- मुल्तानी मिट्टी का उत्पादन बाड़मेर जिले के आकली गांव में होता है।

जिप्सम:- जिप्सम, जिसे स्थानीय भाषा में “खडी” कहते हैं। जिप्सम का उत्पादन बाड़मेर में बहुतायत होता है। जिप्सम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र उत्तरलाई है। बाड़मेर जिले के उत्तरलाई में जिप्सम का उत्पादन “रेटहोल पद्धति” द्वारा किया जाता है। इसके अलावा चूना पत्थर का भी उत्पादन बाड़मेर में होता है।

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रिफाइनरी

यह रिफाइनरी सांभरा, पचपदरा (बाड़मेर) में स्थित हैं। देश की प्रथम रिफाइनरी जहां पेट्रोकेमिकल्स कॉन्प्लेक्स स्थापित किया जाएगा । यह रिफाइनरी bs6 प्रणाली पर आधारित हैं इसकी कुल लागत 43129 करोड़ रुपए आएगी। यह राजस्थान सरकार तथा एचपीसीएल का संयुक्त उपक्रम है जिसमें राजस्थान सरकार का 26% तथा एचपीसीएल का 74% हिस्सा है। इस रिफाइनरी का शिलान्यास प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 16 जनवरी 2018 को किया गया।

कृषि एवं पशुपालन

राजस्थान का सर्वाधिक कृषि क्षेत्रफल वाला जिला बाड़मेर है यहां की प्रमुख फसल बाजरा है जो सर्वाधिक क्षेत्रफल पर बोई जाती है। यह खरीफ की फसल है इसके अलावा मूंग, मोठ, ग्वार,तिल, जीरा, अनार, बैर, खजूर की खेती यहां की जाती है। पश्चिमी राजस्थान अब खजूर की खेती के क्षेत्र में प्रसिद्ध हो रहा है बाड़मेर जिले के धनाऊ में तथा शिव तहसील के भियाड़ में खजूर की खेती होने लगी है। बाड़मेर अनार उत्पादन की श्रेणी में अग्रणी जिला है।

कृषि विज्ञान केंद्र बाड़मेर के दांता गांव में है। नर्मदा नहर परियोजना से बाड़मेर जिले के गुडामालानी तथा धोरीमना लाभान्वित हो रहे हैं और इसे चौहटन तक पहुंचाने का लक्ष्य है इंदिरा गांधी नहर परियोजना का अंतिम बिंदु गडरा रोड बाड़मेर में स्थित हैं। सुजलाम परियोजना बाड़मेर में खारे पानी को मीठा करने हेतु। माडपुरा यहां हाल ही में भूमिगत जल के प्रमाण मिले हैं

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पशु सम्पदा

राजस्थान में सर्वाधिक पशु संपदा वाला जिला बाड़मेर है। राजस्थान में सर्वाधिक बकरियां बाड़मेर में पाई जाती हैं। राजस्थान में सर्वाधिक भेड़ें बाड़मेर में पाई जाती हैं। राजस्थान में सर्वाधिक घोड़े और गधे(खच्चर) बाड़मेर में पाए जाते हैं। बाड़मेर मालाणी नस्ल के घोड़ों के लिए प्रसिद्ध है। बाड़मेर थारपारकर तथा कांकरेज नस्ल की गाय के लिए प्रसिद्ध है कांकरेज नस्ल की गाय का प्रजनन केंद्र बाड़मेर जिले के चौहटन तहसील में है। भारत में सर्वाधिक गोंद उत्पादन वाला क्षेत्रत्र चौहटन है जो कुमट के पेड़ों से प्राप्त होता है। देश की सबसे बड़ी ओरण भूमि बाड़मेर जिले के चौहटन के ढोक गांव में स्थित हैं। जहां वनस्पति काटने पर पूर्ण प्रतिबंध है।

राष्ट्रीय मरू उद्यान 

राष्ट्रीय मरू उद्यान बाड़मेर और जैसलमेर दोनों जिलों में स्थित है जिसमें से बाड़मेर में 1262 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर है । यह गोडावण पक्षी हेतु प्रसिद्ध है। जिसे शर्मीले स्वभाव का पक्षी भी कहा जाता है। यह राजस्थान का राज्य पक्षी है इसे ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भी कहा जाता है। इसके अलावा यह अभ्यारण्य जीवाश्म हेतु प्रसिद्ध है। धोरीमना यह आखेट निषिद्ध क्षेत्र है।

कर्नल हणुत सिंह – इन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इन्हें भारत सरकार द्वारा महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

रूमा देवी 

रूमा देवी राजस्थान में एक भारतीय पारंपरिक हस्तकला कारीगर है रूमा देवी को 8 मार्च 2019 को राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया रूमा देवी को 7 जनवरी 2020 को जानकीदेवी बजाज पुरस्कार 2019 से सम्मानित किया गया इसके अलावा 15- 16 जनवरी 2020 को पैनलिस्ट के रूप में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी बोस्टन( संयुक्त राज्य अमेरिका) द्वारा आमंत्रित की गई रूमा देवी ने 20 सितंबर 2019 को कौन बनेगा करोड़पति शो में भाग लिया रुमा देवी को वर्ष 2019 का टीएफआई डिज़ाइनर का खिताब प्रदान किया गया।

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बाड़मेर जिले से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • “भारतीय रेलवे प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र” पचपदरा बाड़मेर में हैं।
  • राजस्थान में नंद घर की शुरुआत बाड़मेर से हुई ।
  • बाड़मेर मरू त्रिकोण में शामिल है।
  • बाड़मेर “सीज” (सोलर एनर्जी एंटरप्राइजेज जोन ) में शामिल है।
  • उत्तरलाई बाड़मेर में भारतीय वायु सेना का हवाई अड्डा है ।
  • बाड़मेर जिले में मेडिकल कॉलेज संचालित है। परिवहन कोड आरजे 04 है।
  • बाड़मेर जिले का शुभंकर मरू लोमड़ी या लौकी की है।  बाड़मेर में आधुनिकतम वार म्यूजियम बनाने की घोषणा की गई है।
  • “देश का पहला बाजरा अनुसंधान संस्थान” बाड़मेर में खोलने की घोषणा की गई है।
  • मुनाबाव भारत और पाकिस्तान के मध्य अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन है जहां से थार एक्सप्रेस संचालित होती हैं।

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उपसंहार

बाड़मेर भौगोलिक विविधताओं का धनी जिला है। यहां के वीरों की कहानियां अद्भुत हैं। बाड़मेर के अनेक वीरों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। भारत- पाकिस्तान युद्ध 1965 और 1971 के समय बाड़मेर की आम जनता ने भारतीय सेना का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया, और अपनी मातृभूमि का मान बढ़ाया। बाड़मेर भामाशाह की धरती है बाड़मेर के भामाशाहों ने कोविड संकट में न केवल जिला प्रशासन बल्कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार को भी सहायता प्रदान की है 

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Specially thanks to Post author – तेजाराम कलवानिया, चौहटन 

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