बुद्धकाल में राज्य और वर्ण-समाज-SOCIAL AND VARNA SOCITY IN BUDHA PERIOD QUIZ

बुद्धकाल में राज्य और वर्ण-समाज-


SOCIAL AND VARNA SOCITY IN BUDHA PERIOD QUIZ


प्रश्न 1:- छठी सदी ईसा-पूर्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. यह उत्तरी काला पॉलिशदार मृद्भांड का आरंभ काल है।
2. यह भारत का द्वितीय नगरीकरण काल कहलाता है।
उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (c)
व्याख्याः उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं।
#पुरातत्त्व के अनुसार छठी सदी ईसा-पूर्व में उत्तरी काला पॉलिशदार मृद्भांड अवस्था का आरम्भ काल है। इसकी बनावट उत्कृष्ट कोटि की थी तथा यह बहुत चिकना और चमकीला होता था।
इस समय में ही गंगा के मैदानों में नगरीकरण की शुरुआत हुई। यह भारत का द्वितीय नगरीकरण कहलाता है।

प्रश्न 2:- छठी सदी ईसा-पूर्व में व्यापार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. इस काल में वाणिकों ने श्रेणियों का निर्माण आरम्भ कर दिया था।
2. वाराणसी मुख्य व्यापारिक केंद्र था।
3. इस काल में धातु के सिक्कों का प्रचलन आरंभ हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?
A) केवल 1 और 2
B) केवल 2
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
#इसकाल में शिल्पी और वाणिक दोनों अपने-अपने प्रमुखों के नेतृत्व में श्रेणियाँ बनाकर संगठित हो गए थे। इस काल की अठारह श्रेणियों का उल्लेख मिलता है, लेकिन विशेष रूप में उल्लेख केवल लुहारों, बढ़इयों, चर्मकारों और रंगकारों की श्रेणियों का हुआ है।
वाराणसी इस काल का महान व्यापार-केंद्र था। व्यापार मार्ग श्रावस्ती से पूर्व और दक्षिण की ओर निकलकर कपिलवस्तु और कुशीनगर होते हुए वाराणसी तक गया था।
इस काल में सबसे पहले धातु के सिक्कों का चलन आरंभ हुआ था। आरंभ में ये मुख्यतः सिक्के चांदी के होते थे।

प्रश्न 3:- छठी सदी ईसा-पूर्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में  से कौन-सा असत्य है?
A) किसान अपनी उपज का छठा भाग कर के रूप में चुकाते थे।
B) पालि ग्रंथों में गाँव तीन प्रकार के बताए गए हैं।
C) ‘भोजक’ गाँव का मुखिया कहलाता था।
D) ‘शतमान’ इस काल का प्रसिद्ध ग्रंथ है।

उत्तरः (d)
व्याख्याः
#वैदिकग्रंथों में आए शतमान और निष्क शब्द मुद्रा के नाम माने जाते हैं। अतः कथन (d) असत्य है, जबकि  अन्य तीनों कथन सत्य हैं।
पालि ग्रंथों में गाँव के तीन प्रकार बताए गए हैं-पहले प्रकार में सामान्य गाँव है जिनमें विविध वर्णों और जातियों का निवास रहता था। ऐसे गाँवों की संख्या सबसे अधिक थी। दूसरे, प्रकार में उपनगरीय गाँव थे जिन्हें शिल्पी-ग्राम कहते थे, ये गाँवों को नगरों से जोड़ते थे। तीसरे प्रकार में सीमांत ग्राम आते थे, जो जंगल से संलग्न देहातों की सीमा पर बसे थे।
‘भोजक’ पहले प्रकार के गाँव का मुखिया कहलाता था।
किसान अपनी उपज का छठा भाग कर या राजांश के रूप में देते थे। कर की वसूली सीधे राजा के कर्मचारी करते थे।

प्रश्न 4:- सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये तथा नीचे दिये गए कूट से सही उत्तर चुनियेः
सूची-I(पद) सूची-II(समाज में स्थिति)
A. भोजक 1. उच्च कोटि के अधिकारी
B. गहपति 2. भंडारगृह का अध्यक्ष
C. महामात्र 3. गाँव का मुखिया
D. भांडागारिक 4. धनी किसान
कूटः
A    B      C     D
A)
3 4 1 2
B)
3 1 4 2
C)
4 3 1 2
D)
2 1 3 4

उत्तरः (a)
व्याख्याः विकल्प में दिये गए पद नाम एवं उनकी समाज में #स्थिति का सुमेलन निम्नानुसार हैं:
सूची-I  (पद) सूची-II  (समाज में स्थिति)
A. भोजक 1. गाँव का मुखिया
B. गहपति 2. धनी किसान
C. महामात्र 3. उच्च कोटि के अधिकारी
D. भांडागारिक 4. भंडारगृह का अध्यक्ष

प्रश्न 5:- छठी सदी ईसा-पूर्व अधिकारी वर्ग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?
1. ‘महामात्र’ इस काल में उच्च कोटि के अधिकारी होते थे।
2. ‘शुल्काध्यक्ष’ इस काल में कर वसूल करते थे।
3. ‘बलिसाधक’ चुंगी वसूल करने वाले अधिकारी होते थे।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनियेः
A) केवल 1 और 2
B) केवल 1
C) केवल 2 और 3
D) 1, 2 और 3

उत्तरः (b)
व्याख्याः
इस काल में ‘#महामात्र’ उच्च कोटि के अधिकारी कहलाते थे। वे कई तरह के कार्य करते थे, जैसे-मंत्री, सेनानायक, न्यायाधिकारी आदि। अतः कथन (1) सत्य है।
शौल्किक या शुल्काध्यक्ष चुंगी वसूल करने वाला अधिकारी होता था वह व्यापारियों से उनके माल पर चुंगी वसूल करता था, अतः कथन (2) असत्य है।
बलिसाधक वे अधिकारी होते थे जो किसानों से फसल का अनिवार्य रूप से देय हिस्सा वसूलते थे। अतः कथन (3) असत्य है।

प्रश्न 6:- प्रश्ननिम्नलिखित में से किसे ‘गहपति’ कहा जाता था।
A) महालेखाकार
B) कबीले का प्रधान
C) धनी किसान
D) कर अधिकारी

उत्तरः (c)
व्याख्याः
‘#गहपति’ एक पालि शब्द है जो धनी किसान के लिये प्रयोग होता था। ये लोग वैश्यों की श्रेणी में आते थे।

प्रश्न 7:- बुद्धकाल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. महात्मा बुद्ध ब्राह्मणों, क्षत्रियों की सभा के साथ-साथ शूद्रों की सभा में भी जाते थे।
2. ‘दीघनिकाय’ प्राचीन बौद्ध पालिग्रंथ है।
उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (b)
व्याख्याः
#गौतम बुद्ध ब्राह्मणों, क्षत्रियों और गृहपतियों की सभा में गए, परंतु शूद्रों की सभा में उनके जाने का कोई उल्लेख नहीं मिलता है।अतःकथन (1)असत्य है|
दीघनिकाय प्राचीन बौद्ध पालिग्रंथ है।अतः कथन (2)सत्य है|

प्रश्न 8:- बुद्ध के काल में व्यापार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. इस काल में शिल्पी और वणिक दोनों अपने-अपने नगरों में नियत स्थान पर रहते थे।
2. इस काल में व्यापार मुख्यतः मुद्रा के माध्यम से होता था।
3. वणिक व्यापार के लिये मथुरा होते हुए उत्तर की ओर तक्षशिला तक जाते थे।
4. वे मथुरा से दक्षिण और पश्चिम की ओर होते हुए उज्जैन और गुजरात के समुद्रतटीय प्रदेश तक जाते थे।
उपर्युक्त कथनों में कौन-से सत्य हैं?
A) केवल 1 और 2
B) केवल 2 और 4
C) केवल 1, 2 और 3
D) 1, 2, 3 और 4

उत्तरः (d)
व्याख्याः उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।
#शिल्पी और वणिक दोनों अपने-अपने प्रमुखों के नेतृत्व में श्रेणियाँ बनाकर संगठित थे। दोनों नगरों में अपने-अपने नियत भागों में रहते थे। वाराणसी में वेस्स या वणिक लोगों की गली बनी हुई थी।
इस काल में व्यापार मुख्यतः मुद्रा द्वारा होता था। पालि ग्रंथों से मुद्रा के प्रचलन का संकेत मिलता है और यह भी पता चलता है वेतन और मूल्य का भुगतान सिक्कों में किया जाता था।
बुद्ध काल में वणिक व्यापार के लिए मगध से  मथुरा होते हुए उत्तर की ओर बढ़ते-बढ़ते तक्षशिला तक पहुँच जाते थे।
वणिक मथुरा से दक्षिण और पश्चिम की ओर बढ़ते-बढ़ते उज्जैन और गुजरात के समुद्रतटीय प्रदेश तक पहुँच जाते थे।

प्रश्न 9:- ईसा-पूर्व छठी सदी के गाँवों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. पालि ग्रंथों में गाँवों के तीन प्रकार बताए गए हैं।
2. शिल्पी-ग्राम तृतीय प्रकार के गाँव को कहते थे।
उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (a)
व्याख्याः
#पालिग्रंथों में गाँव के तीन भेद किये गए हैं। अतः कथन (1) सत्य है।
प्रथम कोटि में सामान्य गाँव है जिनमें विविध वर्णों और जातियों का निवास होता था।द्वितीय कोटि में उपनगरीय गाँव थे जिन्हें शिल्पी-ग्राम कह सकते हैं, अतः कथन (2) असत्य है।
उल्लेखनीय है कि तृतीय कोटि में सीमांत ग्राम आते हैं, जो जंगल से संलग्न देहातों की सीमा पर बसे होते थे।

प्रश्न 10:- ईसा-पूर्व छठी सदी में कर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. करों का निर्धारण और वसूली गाँव के मुखिया की सहायता से राजा के कर्मचारी करते थे।
2. गणतांत्रिक राज्यों में राजस्व पाने का अधिकार गण के प्रत्येक प्रधान का होता था।
उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (c)
व्याख्याः उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं।
#राजा किसानों की उपज का छठा हिस्सा कर के रूप में लेता था। इसका निर्धारण और वसूली गाँव के मुखिया की सहायता से राजा के कर्मचारी करते थे।
गणतंत्र में राजस्व पाने का अधिकार गण या गोत्र का प्रत्येक प्रधान का होता था जो राजन् कहलाता था। राजतंत्र में एकमात्र राजा राजस्व पाने का अधिकारी होता था।

प्रश्न 11:- ईसा-पूर्व छठी सदी में विधि व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजियेः
1. भारतीय विधि और न्याय-व्यवस्था का उद्भव इस काल में हुआ।
2. वर्णभेद के आधार पर ही व्यवहार-विधि और दंड-विधि निर्धारित हुई।
उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सत्य है/हैं?
A) केवल 1
B) केवल 2
C) 1 और 2 दोनों
D) न तो 1 और न ही 2

उत्तरः (c)
व्याख्याः उपर्युक्त दोनों कथन सत्य हैं।
#भारतीय विधि और न्याय-व्यवस्था का उद्भव इसी काल में हुआ। पहले कबायली कानून चलते थे, जिसमें वर्ण-भेद को कोई स्थान नहीं था।
धर्मसूत्रों में हर वर्ण के लिये अपने-अपने कर्त्तव्य तय कर दिये गए और वर्णभेद के आधार पर ही व्यवहार-विधि (सिविल लॉ) और दंडविधि (क्रिमिनल लॉ) तय हुई।

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