भारतीय रियासती विभाग का गठन

Please support us by sharing on
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

 देसी रियासतों के मसले को हल करने के लिए 25 जून 1947 को भारत की अंतरिम सरकार ने निर्णय लिया कि एक नये रियासती विभाग का गठनकिया जाए
इस निर्णय के अनुसार 5 जुलाई 1947 को सरदार वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में रियासती विभाग गठित किया गया
इस रियासती विभाग के सलाहकार व सचिव वी पी मेनन को नियुक्त किया गया
वी पी मेनन को देशी नरेशोंके बारे में जानकारी थी

वह उस समय माउंट बेटन के संवैधानिक सलाहकार के पद पर कार्यरत थे
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने राजाओं के नाम एक वक्तव्य प्रकाशित करवाया
जिसमें उन्होंने देसी राज्यों को नये संघ शासन में सम्मिलित होकर एकताको बनाए रखने की अपील की
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा कि वह 15 अगस्त 1945 से पूर्व भारत संघमें शामिल हो जाए
बीकानेर नरेश शार्दुल सिंह सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस घोषणाका तुरंत स्वागत किया

अपने बंधु राजाओं से अनुरोध किया कि वे इस प्रकार आगे बढ़ाए गये मित्रता के हाथको थाम ले

दूसरी और जोधपुर के राजा हनुवंतसिंह ने पाकिस्तान के गवर्नर जनरल मोहम्मद अली जिन्ना व नरेंद्र मंडल के अध्यक्ष भोपाल के नवाब श्री हमीदुल्ला खां से मिलकर अपनी रियासत को एक स्वतंत्र इकाईरखना चाहता था

लेकिन इस षड्यंत्र का पता चलते ही वी०पी०मेनन व लार्ड माउंटबेटन ने बड़ी चतुराई व कूटनीति से उन्हें भारत में सम्मिलित होने के लिए राजी कर लिया और 10 अगस्त 1947 को जोधपुर के राजा हनुवंतसिह से विलिनीकरणके दस्तावेज पर हस्ताक्षर करा लिए गए

प्रारंभ में धौलपुर व जैसलमेर महाराजा भी महाराजा हनुमत सिंह के साथ थे
लेकिन बाद में वह भारत संघ में ही मिल गए
इस प्रकार वी०पी०मेनन व सरदार वल्लभ भाई पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति योग्यता दूरदर्शिताव चतुराई के बल पर 15 अगस्त 1947 तक सभी देसी रियासतों का एकीकरणहुआ व अखंड भारत का स्वरूपसामने आया

 नरेंद्र मंडल सम्मेलन दिल्ली ,25 जुलाई 1947(लॉर्ड माउंटबेटन)  

लार्ड माउंटबेटन ने देसी  रियासत के लिए दो प्रकारके प्रपत्र तैयार करवाए़

पहला प्रपत्र इंस्ट्रमेंट ऑफ एक्सेशनथा
यह एक प्रकार का मिलाप पत्र था
जिस पर हस्ताक्षर कर के कोई भी राजा भारतीय संघ में शामिलहो सकता था और अपना आधिपत्य केंद्र सरकार को समर्पितकर सकता था

द्वितीय पत्र स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट था

यह एक प्रकार से यथास्थिति के लिए सहमति पत्रथा

25 जुलाई 1947 को वॉइस राय ने दिल्ली में नरेंद्र मंडल का एक पूर्ण अधिवेशन बुलाया

वॉइस राय ने राजाओं को न केवल इस बात के लिए हतोत्साहित किया कि वह अपने राज्य को स्वाधीन इकाई के रूप में रखे बल्कि उन्होंने हिंदू बहुल क्षेत्रों के राजाओं को सलाह दी थी कि

वह अपने राज्यो का विलय भारतमें ही करें

उनमें से अधिकांश को समझ में आने लगा था कि या तो अत्यंत असम्मानजनक तरीके से हमेशा के लिए मिट जाओ या फिर किसी तरह सम्मानजनक तरीके से अपनी खुद संपत्ति तथा कुछ अधिकारों को बचा लो

लॉर्ड माउंटबेटन ने भारतीय नरेशो से दोनों दस्तावेजों इंस्ट्रमेंट ऑफ एजुकेशन और स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने का परामर्श दिया

15 अगस्त 1947 के पश्चात सिर्फ जूनागढ़ हैदराबाद और कश्मीर के राज्य तथा पुर्तगाली और फ्रांसीसी उपनिवेशोंका भारत में सम्मिलित होना शेष था

बाकी सभी रियासतों में विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए थे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *