भारत में आम चुनाव दिसंबर 1945(General elections in India December 1945)

 भारत में आम चुनाव दिसंबर 1945

(General elections in India December 1945)

  • शिमला सम्मेलन के विफल होने से भारत में बहुत निराशा हुई
  • लेकिन शीघ्र ही आशा की एक किरण दिखाई दी 10जुलाई 1945 को ब्रिटेन में आम चुनाव हुए
  • जिसमें विस्टन चर्चिल की कंजरवेटिव पार्टी चुनाव हार गई और क्लीमेंट एटली की अध्यक्षता वाली लेबर पार्टी पर्याप्त बहुमत के साथ सत्ता में आई
  • इस प्रकार श्रमिक दल की सरकार ने इंग्लैंड की राज सत्ता संभाल ली और भारत के पुराने मित्र भारत के राज्य सचिव बने ,भारत के प्रति

अंग्रेजी रुख भी बदल गया इसके कई कारण थे 

15 अगस्त 1945 को जापान के आत्मसमर्पण के साथ द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो गया
द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात अंतरराष्ट्रीय जटिलता उत्पन्न हुई और दिल्ली के लाल किले में सुभाष चंद्र बोस की भारतीय राष्ट्रीय सेना के तीन अफसरों के विरुद्ध कोर्ट मार्शल में मुकदमा चले
कांग्रेस ने इन अफसरों का पक्ष लिया और इन अफसरों के आदर्शों और उद्देश्यों का पूर्णरूपेण समर्थन किया

लेबर पार्टी की सरकार बनने के पश्चात लार्ड वैवल को पुनः इंग्लैंड विचार-विमर्श के लिए बुलाया गया और

साथ में यह भी घोषणा की गई कि भारत में केंद्रीय और प्रांतीय चुनाव करा जाएं व लार्ड वेवेल लंदन जाएंगे

19 सितंबर 1945 को यह भी कहा गया कि चुनाव के तुरंत पश्चात भारत का संविधान बनाने के लिए भिन्न भिन्न राजनीतिक दलों की सहायता से एक सभा गठित की जाएगी उसने यह भी आशा व्यक्त की कि नेता लोग मंत्रियों का उत्तरदायित्व स्वीकार कर लेंगे

19 सितंबर 1945 को ही अंग्रेजी संसद में प्रधानमंत्री एटली ने घोषणा कि कि 1942 के प्रस्ताव अभी भी विद्यमान है और अंग्रेज सरकार उंहें के अनुसार सब कार्य कर रही है

इसके पश्चात 4 दिसंबर को लार्ड पेथिक लॉरेंस ने लॉर्डस सभा में एक वक्तव्य दिया जिसमें कहा कि प्रस्ताव के पूर्ण महत्त्व को समझा नहीं गया और अंग्रेज सरकार से संविधान सभा के गठन को बहुत महत्व देती है

उन्होंने भारत में साम्राज्य संसदीय शिष्टमंडल  के तत्वाधान में एक संसदीय शिष्टमंडल भेजने का सुझाव दिया,लेकिन पुन:यह स्पष्ट कर दिया कि इस शिष्टमंडल को अंग्रेजों को किसी नीति विशेष का अनुसरण करने पर बाध्य करने का अधिकार नहीं होगा

इन सभी के तहत एटली सरकार द्वारा प्रथम कार्यवाही के अंतर्गत भारत में आम चुनाव करवाना था जो कि 1936 में नहीं हुए थे

दिसंबर 1945 में केंद्रीय और प्रांतीय चुनाव हुए

इन चुनाव परिणामों में केंद्रीय विधानसभा और प्रांतीय विधान मंडलों में कांग्रेस को प्रयाप्त बहुमत मिला

केंद्रीय विधानसभा में कांग्रेस को सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों में 91.3 प्रतिशत मत मिले

मुस्लिम लीग ने सभी मुस्लिम सीटें जीती

प्रांतीय विधान मंडल में कांग्रेस को बंबई, मद्रास ,संयुक्त प्रांत ,बिहार, उड़ीसा और मध्य प्रांत में पूर्ण बहुमत मिला

उत्तर पश्चिमी सीमा प्रांत में कांग्रेस ने 30 सीटें जीती जिसमें 19 मुस्लिम सीटें भी सम्मिलित थी जबकि मुस्लिम लीग को केवल 17 सीटें मिली

पंजाब में यद्यपि मुस्लिम लीग सबसे बड़े दल के रूप में आगे आई परंतु पंजाब में कांग्रेस अकालियों और यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार बनी

मुस्लिम लीग को बंगाल और सिंध में ही बहुमत प्राप्त हो सका यदपि मुस्लिम लीग ने इस चुनाव में मुसलमानों के अत्याधिक स्थान जीते थे फिर भी केवल सिंझ और बंगाल में ही मंत्रिमंडल बना सकें

लॉर्ड वेवेल ने 10 दिसंबर 1945 को कोलकाता में संयुक्त व्यापार मंडल की वार्षिक सभा में यह कहा था कि भारत छोड़ो एक जादू नहीं अपितु सद्भाव सहकारिता और धैर्य की आवश्यकता है

शिष्टमंडल 1946 की जनवरी में भारत आया जब चुनाव हो रहे थे और उसने राजनीतिक स्थिति का अध्ययन किया

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