मध्य प्रदेश का आधुनिक इतिहास(Modern History of Madhya Pradesh)

मध्य प्रदेश का आधुनिक इतिहास

(Modern History of Madhya Pradesh)

मध्य प्रदेश में इतिहास के नए युग का प्रारंभ मराठी के उत्तर और ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन के साथ हुआ आधुनिक युग में सिंधिया वंश का महत्वपूर्ण योगदान रहा !

1. मराठा काल
मुगल सम्राट फर्रुखसियर 1713 ई. के विरुद्ध सैयद बंधुओं ने मराठो से सहायता मांगी गौर खानदेश व गोंडवाना साहु को सोप दीये !
1722 ई. में बाजीराव प्रथम ने मालवा पर पहली बार आक्रमण किया !
दूसरी बार 1774 ईस्वी में इस क्षेत्र में चोथ के लिए युद्ध किया !
तीसरी बार 1728 ई.  में आक्रमण किया तब भोपाल के निजाम की हार हुई !
बाजीराव प्रथम और निजाम के बीच 1738 ई. में एक संधि हुई जो दुराई की संधि के नाम से जानी जाती है जिसमें संपूर्ण मालवा और चंबल तथा नर्मदा के बीच की भूमि बाजीराव प्रथम को दी गई पर इसे मुगल बादशाह मोहम्मद शाह ने स्वीकार नहीं किया तब जय सिंह के सहयोग से 1741 में हुई संधि के अनुसार मालवा पेशवा को दे दिया गया पहली बार मालवा पर मराठों का अधिकार हुआ !

1728 ईस्वी में छत्रसाल बुंदेलखंड ने अफगान शासक मोहम्मद साह बंगल के विरुद्ध बाजीराव प्रथम से सहायता मांगी फलस्वरूप 1729 ईस्वी में बुंदेलखंड का आधा भाग कालपी झांसी सागर हृदय नगर बाजीराव मिला!
पानीपत की तीसरी लड़ाई में अहमद शाह अब्दाली ने मराठों को हराया!इसके बाद सिंधिया और होलकरो को उत्तर भारत में स्वतंत्र रूप से अधिकार मिल गया !
इसी समय छत्रसाल की मुगलों से लड़ाई में बाजीराव में प्रधान छत्रसाल की मदद की फल स्वरुप सागर दमोह जबलपुर धामोनी गुना गवालियर क्षेत्र मिल गये!
पेशवा बाजीराव ने सागर दमोह में गोविंद खेल को प्रतिनिधि नियुक्त किया और जबलपुर में बीसा जी गोविंद को !
सारंगपुर में पेशवा नारायण राव और मालवा सूबेदार गिरधर बहादुर के बीच युद्ध हुआ और मराठों को जीत हुई !
मालवा का क्षेत्र उदासी पवार और मल्हार राव होलकर में बंट गया !
बुरहानपुर से ग्वालियर तक का बहुत परेशानी सिंधिया को दे दिया उज्जैन और मंदसौर को समझाने अपने आधीन कर लिया ईश्वर ने 1737 दिल्ली में भोपाल निजाम को हराकर सिहोर और होशंगाबाद का क्षेत्र अपने अधीन कर लिया !
रायसेन में मराठों ने मजबूत किला बनवाया गढ़ा मंडला के गोंड राजा नरहरि साह को बाबा साहेब मोरो और बाबूजी नारायण ने हराया

2. होल्कर वंश
मुगल साम्राज्य के पतन के बाद मालवा मे  मराठा राज्य स्थापित हुआ!
1727 ई.मे  मल्हार राव होलकर को मालवा के पांच महलों की सनद प्राप्त हुई!
अक्टूबर 1730 में मल्हार राव होलकर मालवा के शासक बने वह होल्कर वंश की स्थापना की 1736 में मालवा 34 दाभोलकर पवार और सिंधिया में बांट दिया !

17 सितंबर 30 मई में मालवा में पहुंच मराठा राज्य की नींव पड़ी
A. होल्कर वंश (इंदौर)
B. जीवाजीराव वंश (देवास छोटी पाती)
C. आनंद राव पवार (धार)
D. सिंधिया (ग्वालियर)
E. तुकोजीराव पवार ( देवास बड़ी पाती)

मल्हारराव की पत्नी गोलमा भाई थी 1766 ईस्वी में मल्हार राव की मृत्यु आलमपुर में हुई!

खंडेराव का विवाह मानकोजी शिंदे की पुत्री अहिल्याबाई से हुआ!
अहिल्याबाई ने पुत्र मालेगांव और पुत्री मुक्ताबाई को जन्म दिया !

खंडेराव 1754  में कुंभेरी की लड़ाई में मारे गए!

मुक्ताबाई का विवाह जसवंत फडसे से हुआ पुत्र जन्म के समय मुक्ताबाई का निधन हो गया

मालेराव भी पिता की तरह दुर्व्यसन था 1767  मालेगांव की मृत्यु को प्राप्त हुआ तव अजय देवगन ने 1767 ई. में शासन की बागडोर संभाली गौर तुकोजीराव को सेनापति नियुक्त किया जिनकी मृत्यु स्थान 1797 में पुना में हुई

अहिल्या माता ने देशभर में आनेक देवालयो नदी घाटी , धर्मशालाओं का निर्माण करवाया व लोक कल्याणकारी कार्य किये !
13 अगस्त 1975 को 70 वर्ष की आयु में महेश्वर में अजमेर भाई ईश्वर चरणों में लीन हुई(जन्म 1735 में चोडी गांव अहमदनगर महाराष्ट्र)

अन्य शासक  काशीराम यशवंतराव हुए!
होलकरो ने 200 वर्षों तक शासन किया!

3. सिंधिया वंश
इस वंश के संस्थापक रणोजी सिंधिया से जीने पेशवा ने मालवा का यह भाग 1731 में दिया था 1745 में राणोजी सिंधिया की मृत्यु हो गई

1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई में मराठों की हार हुई
1765 में महादजी सिंधिया गवालियर का किला वापस लेने में सफल हुए और मध्य ज्यादा उत्तरी भारत में मराठों की सत्ता पुनः स्थापित की उज्जैन को राजधानी बनाया

1794 में पुनामें महादजी का निधन हुआ ! इसके बाद दौलतराव सिंधिया उत्तराधिकारी बने और राजधानी गवालियर बनाया

18 57 के विद्रोह के समय गवालियर का शासक जयाजीराव सिंधिया था जिसने ब्रिटिश सरकार की मदद की !

1886 में जयाजीराव की मृत्यु के बाद माधवराव प्रथम शासक बनी जिंदगी वृद्धि 1925 ईस्वी में हुई तब 9 वर्षीय जीवाजीराव सिंधिया सांसक बने !

मध्य भारत के पहले राज प्रमुख के रूप में जीवाजी राव सिंधिया ने शपथ ली जीवाजी राव के पुत्र माधवराव सिंधिया गवालियर से सांसद भी रहे की हवाई दुर्घटना में मृत्यु हो गई !

माधव राव के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र सरकार में राज्यमंत्री रहे और मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं

आधुनिक काल
मराठों का उत्कर्ष और ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत अभियान से मध्यप्रदेश में कई प्रभाव लक्षित हुए

अंग्रेजों ने मराठों के साथ विचार युद्धों में पेशवा होलकर सिंधिया और भौसले को पराजित किया!

अंग्रेजो ने सिंधिया से पूर्वी निमाड़ और टिमरन छीन लिया और मध्य प्रांत में मिला लिया !
अंग्रेजों ने खोलकर को भी सीमित किया और मध्य भारत के छोटे-छोटे राजाओं को जो मराठी के आधिन  थे उन्हे  सामान राजा मान लिया और फूट डाली

मध्य भारत में सेंट्रल इंडिया एजेंसी स्थापित की गई है मालवा को की कई रियासतों में बांटकर नहीं पर नियंत्रण हेतु नीमच महू बेरागढ़ भोपाल में छावनियां स्थापित कीजिए 1804 में लार्ड वेलेजली वर्ष इंडिया के बीच सहायक संधि हुई डलहौजी की हड़प नीतिने रोष पैदा कर दिया !

1857 की क्रांति में मध्यप्रदेश का योगदान
मध्यप्रदेश में सर्वप्रथम नीमच छावनी से विद्रोह जब सैनिकों ने 3 जून 1857 को अंग्रेजी बंगलों में आग लगा दी तो राज्य में तात्या टोपे और नाना साहेब के प्रियतनों से सैनिकों किसानों व ग्रामीणों के मध्य क्रांति संदेश कमल को रोटी के माध्यम से पहुंचाया गया ! गवालियर के निकट मुरार छावनी के सैनिकों ने विद्रोह कर संचार व्यवस्था भंग कर दी सेठ रमजान के नेतृत्व में सागर छावनी में विद्रोहियों गढ़ा मंडला में साबिर साहब गोंड वंश ने विद्रोह किया न20 जून 1857 को शिवपुरी में विद्रोह और इसी समय महू छावनी में शहादत खान के नेतृत्व में विद्रोह वह अंग्रेजी सेना परास्त कर ली गई महाराजा होलकर विद्रोहियों की सहायता कर रहे थे !

महाराजा जयाजीराव सिंधिया ने भागकर आगरा में अंग्रेजों के यहां शरण ली

1 जुलाई 1857 को शहादत खान के नेतृत्व में होलकर नरेश की सेना ने महू छावनी में विद्रोह कर दिया!
इस समय इंदौर में मौजूद अंग्रेज अधिकारी कर्नल ड्यूरिंग स्टुअर्ट आदि सिहोर पहुंच गए भोपाल की बेगम ने अंग्रेजो को संरक्षण दिया

गढ़ मंडला के शंकर शाह रघुनाथ शाह राघवगढ़ के राजा सरजू प्रसाद ने महाकोशल क्षेत्र में विद्रोह किया 18 57 की क्रांति के फलस्वरुप ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हुआ होगा भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत आ गया

14 जून 1857 को ग्वालियर के निकट मुरार छावनी में सुनील ग्रोवर रानी दुर्गावती के वंशज साबिर साहब और उनके पुत्र में खड़ा मंडला में स्वतंत्रता के लिए विद्रोह किया सन 1857 को शिवपुरी मे विद्रोह हुआ !

1828 लिंग मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र में सर्वप्रथम अंग्रेजो के विरुद्ध शुरू हुआ था इसका नेतृत्व नागपुर के सांसक और पहुंचने द्वारा किया गया अप्पाजी मुस्लिम अरबी सैनिकों की सहायता से बेतूल के समीप अंग्रेजो से युद्ध किया किंतु पराजित हो गये !

1835 रायगड़ नरेश गिरधारी सिंह के पुत्र देवनाथ सिंह ने अंग्रेजो के विरुद्ध विद्रोह किया  1842 ई में नरसिंहपुर के जमीदार तिलहन साहब तरह हीरापुर के किरण सिंह अंग्रेजो के विरुद्ध विद्रोह किया मध्य प्रदेश के खरगोन क्षेत्र में टानटेय भील में अंग्रेजों का  विद्रोह किया !

मंडला जिले की रियासत रामगढ़ की रानी अवंती बाई ने 30 मार्च 1858 को अंग्रेजी सेनापति वार्डन के साथ युद्ध में पराजित होते देखकर अपनी अंगरक्षिका गिरधारी बाई कि कटार से आत्महत्या कर ली !

तात्या टोपे को सिंधिया के सामंत मानसिंह ने धोखे से पकड़ा दिया तात्या टोपे को शिवपुरी में फांसी दे दी गई अवंतीबाई रामगढ़ की झांसी की रानी के नाम से जानी जाती थी

मध्यप्रदेश में जबलपुर में रानी दुर्गावती की समाधि से सेठ गोविंददास एवं पंडित द्वारिका प्रसाद ने श्री के नेतृत्व में चल समारोह निकाला गया और खंडवा सीहोर जबलपुर आदि स्थानों पर नमक कानून तोड़ा गया सिवनी में दुर्गा शंकर मेहता ने गांधी चौक पर नमक बनाकर सत्याग्रह शुरू किया 8 अप्रैल 1931 को सिहोर कटनी मंडला दमोह में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ !

1857 की क्रांति के प्रमुख विद्रोही
1. शेख रमजान  (सागर)
2. टानटेय भील (खरगोन)
3. शंकर साह (गढा मंडला)
4. राजा ठाकुर प्रसाद (राघवगढ़)
5. नारायण सिंह (रायपुर)
6. शहादत खान (महू)
7. रानी लक्ष्मीबाई ( झांसी कालपी)
8. तात्या टोपे (कानपुर झांसी ग्वालियर)
9. भीमा नायक (मंडलेश्वर (उज्जैन))
10. रानी अवंतीबाई (रामगढ़)
11. झलकारी बाई (रानी लक्ष्मीबाई की अंगरक्षक)
12. गिरधारी बाई ( अवंती बाई के अंगरक्षक)

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन
झंडा सत्याग्रह
वर्ष 1923 में जबलपुर में हुए झंडा सत्याग्रह का निर्देशन सर्वश्री देवदास काली रामगोपाल चार्य तथा डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने किया राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर पंडित सुंदरलाल को छह महा के लिए कारावास की सजा सुनाई गई थी ! 13 अप्रैल 1923 को नागपुर में शुरू हुई सत्याग्रह के साथ जबलपुर में सिन्हा सरोजिनी नायडू के नेतृत्व में झंडा सत्याग्रह का आयोजन हुआ !

मौलाना आजाद जैसी हस्तियों कि जबलपुर में उपस्थिति के मध्य बंशीलाल और काशी प्रसाद ने  टाउनहाल सर एक बार फिर तिरंगा लहरा दिया मार्च 1930 में जबलपुर में झंडा सत्याग्रह आरंभ हुआ ! जिसका नेतृत्व पंडित सुंदरलाल शर्मा ,सुभद्रा कुमारी चौहान एवं नाथूराम  मोदी ने किया था नमक सत्याग्रह की शुरुआत 1931 में हुई !

जंगल सत्याग्रह
वर्ष 1986 सिवनी टूरिया घोड़ा -डोगरी ( बेतूल )के आदिवासियों ने जंगल सत्याग्रह किया वर्ष 1931 में छतरपुर क्षेत्र में चरणपादुका ग्राम में स्वतंत्रता सेनानियों की शांतिपूर्ण बैठक हुई बैठक पर पुलिस ने अंधाधुन्द गोलियां चलाई जिस में छह सेनानी शहीद हो गए यह मध्यप्रदेश का जलियांवाला बाग हत्याकांड कहलता है गोली चलाने का आदेश करनल फिशर ने दिया था बर्ष 1939 में जबलपुर से गांधी जी ने अवज्ञा आंदोलन शुरु किया !

असहयोग आंदोलन
असहयोग आंदोलन की तैयारी के सिलसिले में पहुंचे अजमल खान व कांग्रेसियों के सम्मान में जबलपुर नगर पालिका भवन पर तिरंगा फहराने की रणनीति कांग्रेस ने बनाई प्रभाकर गंभीर आज ने मध्यप्रदेश में असहयोग आंदोलन का नेतृत्व क भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की गतिविधियों की शुरुआत मध्यप्रदेश में वर्ष 1904 मे हुई थी वर्ष 1916 में मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत हुई  थी

भोपाल आंदोलन
15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता के पश्चात सभी रियासतों का भारतीय संघ में मिला दिया गया वर्ष 1948 में दिल्ली में मध्यप्रदेश भारत के राजाओं के संगठन में जीवाजीराव सिंधिया को राज प्रमुख बनाया गया वर्ष 1948-49 के राजनीतिक आंदोलन के पश्चात भोपाल के नवाब में भोपाल रियासत को भारतीय संघ में मिलाने की घोषणा की ! 1 जून 1950 को भोपाल राज्य भारतीय संघ में शामिल किया गया भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खां मेंबर ऑफ प्रिंस प्रिंसेस के दो बार अध्यक्ष बनाए गए थे 1 नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश राज्य का गठन कर के भोपाल को राजधानी बनाया गया 1 नवंबर 2000 में मध्यप्रदेश का विभाजन किया गया !