महमूद ग़ज़नवी

?जन्म- 1 नवंबर 971
?जन्म स्थान-  गजनी(अफगानिस्तान)
?उपनाम- जबुली का महमूद
?उपाधियां-भारत का पहला सुल्तान, यमीन-उद- दौला,अमीन-उल-मिल्लत

?पिता का नाम- सुबुक्तगीन
?भाई का नाम- इस्माइल
? धर्म-सुन्नी मुसलमान
?शासकाध्यक्ष- 998
?राजतिलक-*6 1002  ईस्वी में
?सुल्तान की उपाधि धारण करने वाला-महमूद पहला शासक

?भारत पर आक्रमण किए- कुल 17 आक्रमण
?भारत पर आक्रमण का मुख्य उद्देश्य-भारत की धन संपदा को लूटना
?खलीफा से सम्मान उपाधि प्राप्त करने के बाद शपथ ली-भारत पर प्रत्येक वर्ष आक्रमण करने की

?महमूद ग़ज़नवी का दरबारी इतिहासकार-उत्बी
?महमूद ग़ज़नवी का प्रथम आक्रमण-*1000ईस्वी में सीमावर्ती नगरों पर
?महमूद ग़ज़नवी का अंतिम आक्रमण-जाटों और खोखरों को दंड देने हेतु
?महमूद गजनबी की मृत्यु- 30 अप्रैल 1030 ईस्वी को
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???महमूद ग़ज़नवी ???
☘ सुबुक्तगीन जो कि अलप्तगीन का दास था भारत पर आक्रमण करने वाला प्रथम तुर्की शासक था
☘  सुबुक्तगीन के दो पुत्र थे महमूद और इस्माइल इसमें महमूद बड़ा और इस्माइल छोटा पुत्र था शुरू से ही सुबुक्तगीन का अपने छोटे पुत्र इस्माइल के प्रति ज्यादा स्नेह था इस कारण उसने अपना उत्तराधिकारी अपने छोटे पुत्र इस्माइल को घोषित किया
☘ महमूद यह सब सहन  करने के लिए तैयार नहीं था उसने इस्माइल को गजनी देकर और बल्ख  अपने पास रखकर राज्य का विभाजन करने का सुझाव दिया लेकिन इस्माइल इससे सहमत नहीं हुआ अंत में महमूद ने इस्माइल को एक युद्ध में परास्त कर बंदी बना लिया और अपने पिता के राज्य पर अधिकार कर लिया
☘ महमूद ग़ज़नवी का जन्म 1 नवंबर 971 ईसवी में हुआ था उसकी माता गजनी के पास जो  जुबलिस्तान की एक धनवान की कन्या थी इसलिए महमूद को जबुली का महमूद भी कहा आ जाता है
☘ 27 वर्ष की अवस्था में वह अपने पिता के राज्य का स्वामी बना । वह अजाम का प्रथम सुल्तान माना जाता है

?तारीख-ए-गुजीदा के अनुसार➖ सीस्तान के राजा खल्फ-बिन-अहमद को हराने के बाद महमूद ने सुल्तान की पदवी धारण की
?इतिहासकारों ने महमूद को सुल्तान की उपाधि धारण करने वाला पहला शासक माना है
☘यद्यपि उसके सिक्के के ऊपर केवल अमीर महमूद अंकित था
☘उसने  हिरात, बल्ख, बस्त,और खुरासान को विजित किया।
☘बगदाद के खलीफा अलकादिर बिल्लाह ने इन प्रदेशों पर उसके अधिकार को स्वीकार कर उसे “”यमीन उद दौला”” (साम्राज्य का दक्षिण भुना- दाहिना हाथ) और “”अमीन-उल-मिल्लत””( धर्म का रक्षक- मुसलमानों का संरक्षक )की उपाधि से विभूषित किया कहा जाता है कि इस अवसर पर महमूद ने भारत पर प्रत्येक वर्ष आक्रमण करने की शपथ ली

?सर हेनरी इलियट के अनुसार➖महमूद गजनबी ने 1000 से लेकर 1027 के मध्य भारत पर लगभग 17 बार आक्रमण किए
☘भारत पर आक्रमण का मुख्य उद्देश्य भारत की धन संपदा को लूटना था महमूद गजनवी ने भारत पर अपना 16 वां और सर्वाधिक महत्वपूर्ण आक्रमण 1025 में किया इस दौरान उसने सोमनाथ मंदिर को निशाना बनाया
☘महमूद के आक्रमण के समय सिंध और मुलतान पर मुस्लिम शासन था। मुल्तान पर अब्दुल फतह दाऊद नामक करमाथी शिया संप्रदाय के अनुयाई का शासन था
☘महमूद ने मुल्तान पर 1004-05 में आक्रमण किया जो भारत का चौथा आक्रमण था
☘महमूद के आक्रमण के समय कश्मीर में रानी दिद्दा व कन्नौज में  प्रतिहार शासक राज्यपाल का शासन था
☘बंगाल में पाल शासक महिपाल था चंदेल शासक विद्याधर था जिस पर 1019-20 ई में महमूद ने आक्रमण किया किंतु उसे परास्त नहीं कर सका
☘1027 में महमुद गजनवी ने जाटों व खोखरों  को दंड देने के लिए 1027 ईस्वी में भारत पर 17 और अंतिम आक्रमण किया था
☘महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रभाव भारत की राजनीतिक और सैनिक दुर्बलता का उजागर होना था
☘1030 ईस्वी में महमूद गजनवी की मृत्यु हो गई

???महमूद ग़ज़नवी के भारत पर आक्रमण करने के मुख्य उद्देश्य???
☘महमूद ग़ज़नवी का भारत पर आक्रमण करने का केवल और केवल एक ही मुख्य उद्देश्य था धन संपदा को लूटना ना कि धर्म का प्रचार करना था
☘महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के उद्देश्य के बारे में विद्वानों में मतभेद है निम्न विद्वानों ने महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के उद्देश्य के बारे में अपने मत दिए जो निम्न है

?♦मोहम्मद हबीब ♦?
?मोहम्मद हबीब के अनुसार महमूद ने गजनी का सिंहासन उत्तराधिकार के युद्ध के पश्चात प्राप्त किया था अतः वह अपनी स्थिति सुदृढ़ करने के लिए खलीफा से सुल्तान के रूप में मान्यता प्राप्त करना चाहता था
?इसीलिए उसने खलीफा से सम्मान प्राप्त करने के बाद भारत पर प्रत्येक वर्ष आक्रमण करने की शपथ ली थी
?मध्य एशिया में अपना साम्राज्य स्थापित करने के लिए वहां के मुसलमानों के बीच अपनी लोकप्रियता में वृद्धि करना चाहता था इसलिए धर्मांध मुसलमानों का सहयोग प्राप्त  करने के लिए उसने भारतीय अभियानों को धार्मिक रूप प्रदान किया
?प्रोफेसर हबीब के अनुसार महमूद के आक्रमण को धर्म युद्ध करना एक  बुनियादी भुल  होगी
?इन अभियानों के पीछे केवल धन प्राप्ति का लक्ष्य था
?प्रोफेसर हबीब और निजामी ने पुष्ट प्रमाणों से यह सिद्ध किया है कि इस्लामी कानून में ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है जो विध्वंस के कार्य को उचित समझे या बढ़ावा दे

?♦इतिहासकार जाफर♦?
?जाफर के अनुसार  महमूद का उद्देश्य भारत में इस्लाम का प्रचार नहीं बल्की धन लूटना था उसने हिंदू मंदिरों पर  इसलिए आक्रमण किया क्योंकि वहां धन सिंचित था

?♦प्रोफेसर नाजिम♦?
?प्रोफेसर नाजिम के अनुसार यदि उसने हिंदू राजाओं को तंग किया तो उसने इरानी और ट्रांस-आक्सियाना  के मुस्लिम शासकों को भी नहीं छोड़ा
?जो लूट मार उसने गंगा के मैदान में की वैसी ही उसने ओक्सन नदी के किनारे पर भी की थी

?♦उत्बी महमूद ग़ज़नवी का दरबारी इतिहासकार♦?
?जबकि दूसरी ओर महमूद ग़ज़नवी का दरबारी इतिहासकार उत्बी ने उसके आक्रमणों को जिहाद माना है
?उसके अनुसारं महमूद  के आक्रमण का मुख्य उद्देश्य इस्लाम का प्रसार और बुतपरस्ती को समाप्त करना था
?उत्बी एकमात्र इतिहासकार था जिसने महमूद के भारत पर आक्रमण का वर्णन किया लेकिन उत्बी  महमूद ग़ज़नवी के अभियानों में उसके साथ भारत नहीं आया था

☘इस प्रकार अधिकतर  इतिहासकारों के मत से स्पष्ट होता है कि महमूद गजनवी के भारत आक्रमण का मुख्य उद्देश्य धन की लूट थी
☘ईरान  और मध्य एशिया क्षेत्र में बिखरे छोटे बड़े राज्यों को जीतना महमूद ग़ज़नवी का लक्ष्य था
☘इसके सैनिक बल अनिवार्य थे,। जिसके लिए धन की आवश्यकता थी इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु महमूद ने उत्तर भारत की ओर रुख किया क्योंकि उत्तरी भारत के राज्य अत्यंत संपन्न और समृद्ध थे
☘आरंभ में महमूद गजनवी का संघर्ष सीमावर्ती हिंदूशाही साम्राज्य के साथ हुआ इन युद्ध में भारतीय शासकों की आर्थिक संपन्नता और सैनिक दुर्बलता दोनों ही की पोल खोल दी
☘अतः महमूद गजनबी ने अपने भारतीय अभियानों को विस्तृत किया और लूट से धन एकत्र किया इसी धन से उसने एक मजबूत सेना का गठन किया और मध्य एशिया व  ईरान में साम्राज्य निर्माण की प्रक्रिया को सफल ढंग से संपन्न किया
☘इस प्रकार महमूद के भारतीय हमले का मुख्य उद्देश्य धन की प्राप्ति था जिसका उद्देश्य मध्य एशिया में तुर्की फौज की स्थापना था

 ???महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के समय भारत की स्थिति???
☘किसी भी देश पर आक्रमण करने से पूर्व उसकी राजनीतिक ,आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त होना अति आवश्यक है क्योंकि बिना इन सब की जानकारी के किसी भी देश पर आक्रमण करना मूर्खतापूर्ण कार्य होता है
☘कोई भी शत्रु सेना अपने आप को कमजोर साबित नहीं करना चाहती इसलिए महमूद ग़ज़नवी ने भी भारत की संपूर्ण स्थिति को भली-भांति समझ लिया था और उसने धन प्राप्ति के लिए भारत पर आक्रमण करना उचित समझा

1⃣?♦राजनीतिक स्थिति♦?
?राजनीतिक दृष्टि से भारत विभिन्न राज्यों में बटा था इन राज्यों के शासक आपसी ईर्ष्या  और कलह में फंसे थे
?मुल्तान और सिंध दो मुस्लिम राज्य थे हिंदू शाही राज्य की सीमाएं चिनाव नदी से हिंदूकुश पर्वत तक विस्तृत थी उनकी राजधानी उद्भांडपुर  थी
?जयपाल इस वंश का साहसी  शासक था हिंदू शाही राजवंश ने ही सर्वप्रथम महमूद के आक्रमणों का दृढ़तापूर्वक मुकाबला किया
?कश्मीर का राज्य मुख्य राज्यों में से था यहां भी ब्राह्मण वंश का राज्य था
?कन्नौज में प्रतिहार वंश का राज्य था । दक्षिण के राष्ट्रकूट शासको और उत्तर के पड़ोसी राज्य से निरंतर संघर्ष के कारण 11 वीं सदी के आरंभ तक यह राज्य दुर्बल हो गया था
?बुंदेलखंड के चंदेल, मालवा के परमार और गुजरात के चालुक्य जो प्रतिहारों के सामंत थे उसके आधिपत्य से मुक्त हो गए थे
?राजेंद्र चोल के आक्रमण ने बंगाल में पाल वंश के शासकों की शक्ति को क्षीण कर दिया था इस वंश का शासक महिपाल महमूद ग़ज़नवी का समकालीन था
?दक्षिण भारत में परवर्ती चालुक्य चोल वंश काफी शक्तिशाली थे किंतु वें आपसी संघर्ष में फंसे थे जिस से उत्तर भारत की राजनीति में रुचि नहीं ले सके
?यह स्पष्ट है कि उस समय भारतीय शासक काफी शक्तिशाली थे उनमें एकता का अभाव था आपसी संघर्ष के कारण उनकी शक्ति इतनी दुर्बल हो गई थी कि वे तुर्को के आक्रमण को रोकने में असफल रहे

2⃣?♦सामाजिक स्थिति♦?
☘सामाजिक दृष्टि से भारत दुर्बल था। समाज जाति-पाति और भेदभाव की भावना से प्रेरित था समाज में प्रचलित अनेक जटिलताओं ने बंधुत्व की भावना को संकीर्ण कर दिया था
☘समाज छोटे-छोटे वर्गों में विभाजित था उच्च जाति के लोगों ने बड़ी संख्या में निम्न वर्गों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया था
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?♦अलबरूनी के अनुसार समाज के 4 वर्ग ♦?
?””तारीख ए हिंद””के लेखक अलबरूनी ने लिखा है कि भारतीय समाज मुख्यतः चार वर्गों में विभक्त था जो जन्म पर आधारित  थे
1-इस में ब्राह्मण
2-क्षत्रिय
3-वैश्य
4-शूद्र


?अपनी सामाजिक स्थिति के अनुसार थे ब्राह्मणों को समाज में उचित स्थान प्राप्त था इसके बाद क्षत्रियों का स्थान था
?””कृत्यकल्पतरु और ग्रहस्थ रत्नाकर”” नामक पुस्तक को से क्षत्रिय के अधिकार और कर्तव्य के बारे में जानकारी मिलती है
?वैश्य और शूद्र को वर्ण व्यवस्था में नीचे स्थान प्राप्त था इंहें ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त करने का अधिकार नहीं था
?वैश्य का कर्तव्य पशु पालन, खेती और व्यापार था शुद्र उपरोक्त तीनों वर्णो की सेवा करते थे
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?♦अंत्यज (8वर्ग)समुह♦?
?इन चारों वर्णों के नीचे मानव का एक विशेष समुदाय था जिसे अलबरूनी अंत्यज  कहता है इनकी किसी भी जाति में गणना नहीं होती थी और समाज के कोई स्थान प्राप्त नहीं थे यह किसी विशेष व्यवसाय या कला का अनुसरण करने वाले हुआ करते थे
?इन के आठ वर्ग या संघ थे धोबी,मोची,जादूगर ,डलिया या ढाल  बनाने वाला, नाविक,  मछुआरा, बहेलिय,(व्याक) और जुलाहा थे

?♦लुहार वर्ग♦?
?8 वर्ग में लुहार शामिल नहीं थे यह लोग गांव के बाहर रहते थे इन्हें गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं थी केवल सूचना देकर गांव में प्रवेश कर सकते थे
?अलबरूनी ने लिखा है कि यदि कोई कारीगर अपने कार्य को छोड़कर दूसरे कार्य अपनाना चाहता था जिससे उसे अधिक सम्मान मिल सके तो उसका कार्य पापा समझा जाता थ

?♦समाज का सबसे निम्नतम वर्ग♦?
?समाज का सबसे निम्नतम वर्ग जो अत्यंज से भी नीचे थे जिसमें हाथी,डोम,Chandaal, बड़हातू आदि शामिल थे
?इन को गंदा काम सौंपा गया था।जैसे गांव भर की मल मूत्र की सफाई आदि। यह अवैध संतान भी समझे जाते थे और इनके साथ समाज में बहिष्कृत व्यक्ति की भांति व्यवहार किया जाता था जो लोग द्विज न  थे उन्हें ज्ञान प्राप्त करने का अधिकार नहीं था

?♦ब्राह्मण की स्थिति ♦?
?अलबरूनी ने लिखा है कि प्रत्येक कार्य में ब्राह्मण का अधिकार है जैसे स्तुति करना, वेदों का पाठ करना ,अग्नि को बलि देना आदि यह कार्य और कोई नहीं कर सकता था
?अगर यह ज्ञात हो जाता था कि  शूद्र या वैश्य ने वेदों के पाठ करने की कोशिश की है तो उसे दोषी ठहरा कर उसकी जीभ  काट दी जाती थी
?मोक्ष प्राप्त करने का अधिकार केवल ब्राह्मणों को था ब्राह्मणों को कर का भुगतान नहीं करना पड़ता था

?♦जाति प्रथा का प्रभाव ♦?
?जाति प्रथा ने समाज को खोखला बना दिया। छुआछूत की भावना के कारण समाज की दशा सोचनीय हो गई थी
?जाति प्रथा कठोर थी जिसके कारण जाति परिवर्तन, खान-पान और अंतर जाति विवाह संभव नहीं थे

?♦स्त्रियों की स्थिति ♦?
?स्त्रियों की दशा सोचनीय थी ।महिलाएं केवल पुरुष के भोग विलास के साधन समझी जाती थी।
?उच्च वर्णो में बहुविवा,  बाल विवाह और सती प्रथा का प्रचलन था विधवा विवाह प्रचलन में नहीं था
?अलबरूनी ने लिखा है की विधवाओं का मुंडन कर दिया जाता था अलबरूनी ने हिंदू वर्ण विभाजन के वर्ग(तबाकत)और जाति का जन्म विभाजन (नसब) का उल्लेख किया है

?♦धार्मिक स्थिति♦?
?इस समय धर्म का चतुर्दिक पतन प्रारंभ हो गया था धर्म की मूल भावना समाप्त होकर उसका स्थान कर्मकांडों ने ले लिया था
?मठ जो पहले ज्ञान प्राप्ति के स्थान पर अब विलासिता और निष्क्रियता के केंद्र बन गए थे
?बौद्ध और शाक्त धर्म के सम्मिश्रण के रूप में वाममार्गी संप्रदाय लोकप्रिय हो गया था जो मुख्यतः बंगाल और कश्मीर में था
?सुरापान मांस का प्रयोग और व्यभिचार वाममार्गी अनुयायियों की धार्मिक क्रियाओं का अंग था मंदिरों में देवदासी प्रथा व्याप्त थी जो भ्रष्टाचार का मुख्य कारण बन गई थी
?शैव और वैष्णव धर्म सामान्य जनता और अर्ध  हिंदुओं के धर्म थे
?कौल संप्रदाय के अनुयाई बिना किसी प्रतिबंध के मांस मदिरा और नारी का आनंद में विश्वास करते थे
?10 वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि “”राजशेखर की कपूर मंजरी”” में सहयोगी भैरवानंद के सिद्धांतों का उल्लेख है जिसमें वह कहता है कि मदिरा और नारी के सेवन से हम बलवान बनते हैं
?””नीलपट अथवा नीलवस्तु”” का भी एक संप्रदाय था वह सदा स्त्रियों के साथ आलिंगन किए रहते थे और खुलेआम उनके साथ मैथुन करते थे

?♦वैष्णव संप्रदाय ♦?
?वैष्णव संप्रदाय के लोगों के आचरण में शिथिलता आ गई थी राधा और कृष्ण के प्रेम का अत्यंत आपत्तिजनक ढंग से वर्णन किया जाने लगा था जयदेव का गीत गोविंद इसका उदाहरण है
?धार्मिक मान्यताओं में विभिन्नता थी शिक्षित और अशिक्षित लोगों के विश्वास अलग अलग थे
?अलबरूनी ने अपनी पुस्तक “”किताब उल हिंद”” में तत्कालीन समाज में प्रचलित व्रत ,पूजा पाठ, दान,तीर्थ यात्रा, दैनिक यज्ञ आदि सभी का विशेष उल्लेख किया है
?धर्म और समाज में व्याप्त बुराइयों का प्रभाव कला और साहित्य पर भी स्पष्ट दिखाई पड़ता है खजुराहो, पूरी आदि के मंदिर पर बनी नग्न मूर्तियों के चित्र तत्कालीन कला की रुचि की प्रतीक थी
?कश्मीर के राजा के एक मंत्री ने कुटिट्नी मतम अथवा मध्यस्थ विचार नामक पुस्तक लिखी है
?क्षेमेन्द्र ने समय मात्रका अथवा  एक वेश्या का जीवन चरित  नामक पुस्तक लिख, जो  उस समय के साहित्य की प्रतीक मात्र थी

4⃣?♦आर्थिक स्थिति♦?
?महमूद ग़ज़नवी का भारत पर आक्रमण करने का सबसे महत्वपूर्ण कारण आर्थिक संपन्नता ही थी क्योंकि भारत उस समय धन संपदा से संपन्न राज्य था  और महमूद गज़नवी ने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए भारत पर आक्रमण करने का निश्चय किया था
?महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के समय भारत आर्थिक दृष्टि से भारत संपन्न था भूमि उपजाऊ थी विदेशी व्यापार अपनी उन्नत अवस्था में था शासक और व्यापारी वर्ग के अतिरिक्त मंदिर भी धन के खजाने थे मंदिरों में अपार मात्रा में हीरे और जवाहरात थे
?इसी अपार धन की प्राप्ति के लिए महमूद गजनवी ने भारत पर आक्रमण किया उस समय भारत का नेतृत्व कमजोर शासकों के हाथ में था अतः महमूद ग़ज़नवी को धन हथियाने में बहुत ही कम परेशानी हुई थी
?इस प्रकार वैदेशिक आक्रमण के समय भारत राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से कमजोर था इसका मुख्य कारण यह था कि भारत के लोग बाहर की दुनिया से अलग थलग बने हुए थे वह आपस में इतने संतुष्ट थे कि अपनी बाहरी सीमाओं में हो रही घटनाओं की उन्हें कोई चिंता नहीं थी
?इससे उन में निष्क्रियता की भावना पैदा हो गई और उनके विचार संकीर्ण  हो गए
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?♦अलबरूनी के अनुसार हिंदुओं के विचार♦?
?भारत के हिंदू दर्शन धर्म और संस्कृति का अध्यन करने वाला अलबरूनी ने अपनी पुस्तक “”तारीख ए हिंद”” में लिखा है कि➖हिंदुओं में यह विश्वास है कि भारत के समान और कोई देश नहीं है कोई ऐसा राष्ट्र नहीं है कोई राजा उनके राजा के समान नहीं है
?उसने लिखा है कि हिंदू यह नहीं चाहते कि जो वस्तु एक बार अपवित्र हो जाए उसे शुद्ध करके अपना बना लिया जाए
?अलबरूनी ने हिंदुओं के संकीर्ण विचार को प्रदर्शित किया हे जो उनके प्रगति के मार्ग में अवरोधक बने

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