महाजनपद काल

1. आधुनिक इतिहासकार मगध के किस शासक के लिए उग्रवादी शब्द का प्रयोग करते हैं – अजातशत्रु
2. मगध के किस शासक की तुलना विश्वामित्र ऋषि से की जाती हैं – महापदमनन्द
3. मगध के किस शासक ने महात्मा बुद्ध को सेना की कमान संभालने का प्रस्ताव दिया था – बिम्बसार
4. किस बौद्ध ग्रन्थ में सबसे पहले राजत्व का सिद्धांत मिलता हैं – दीर्घनिकाय
5. राजत्व की उत्पत्ति का प्राचीनतम साक्ष्य किस ग्रन्थ में मिलता हैं – ऐतरेय ब्रहामण
6. मानवीय प्रयास निष्प्रभावी  होते हैं यह किस संप्रदाय का घोषवाक्य हैं – आजीवक संप्रदाय
7. गांगेय संस्कृति का पहला महानगर होने का गौरव किस नगर को प्राप्त हैं – राजगृह
8. जीवकरामवन तथा घोषितराम विहार किसने तथा कहाँ बनवाये थे – जीवकरामवन – जीवक – राजगृह, घोषितराम विहार – घोषित – कौशाम्बी
9. पाणिनि किस महाजनपद के निवासी थे – गांधार
10. बुद्ध का अंतिम संस्कार किस संघ के लोगो ने किया था – मल्ल      


छठी शताब्दी ईसा पूर्व में कुछ साम्राज्यों के विकास में वृद्धि हुयी थी जो बाद में प्रमुख साम्राज्य बन गये और इन्हें महाजनपद या महान देश के नाम से जाना जाने लगा था। इन्होंने उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी बिहार तक तथा हिमालय के पहाड़ी क्षेत्रों से दक्षिण में गोदावरी नदी तक अपना विस्तार किया। आर्य यहां की सबसे प्रभावशाली जनजाति थी जिन्हें ‘जनस’ कहा जाता था। इससे जनपद शब्द की उतपत्ति हुयी थी जहां जन का अर्थ “लोग” और पद का अर्थ “पैर” होता था। जनपद वैदिक भारत के प्रमुख साम्राज्य थे। महाजनपदों में एक नये प्रकार का सामाजिक-राजनीतिक विकास हुआ था। महाजनपद विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित थे। 600 ईसा पूर्व से 300 ईसा पूर्व के दौरान भारतीय उप-महाद्वीपों में सोलह महाजनपद थे।            


Q1. छठी शताब्दी ईसा पूर्व को एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल क्यों माना जाता है?
उतर. छठी शताब्दी ईसापूर्व को एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल इसलिए माना जाता है क्योंकि इस काल में आरंभिक राज्य नगरों लोहे के बढ़ते प्रयोग और सिक्कों का अभूतपूर्व विकास हुआ था इसी काल में बौद्ध और जैन सहित विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं का उद्भव हुआ था साथ ही 16 महाजनपदों का उदय भी इसी काल की देन मानी जाती है।

👉 प्राचीन भारत में 16 महाजनपद थे
👉 इन का उल्लेख बौध्द  ग्रन्थ के अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रन्थ के भगवती सूत्र से प्राप्त होता हे
👉 कोशल राज्य की उतरी राजधानी कोशल और  दक्षिणी राजधानी सिराबस्ति थी

🌍 प्रमुख महाजनपद व् उनकी राजधानियाँ🌍
1.अंग महाजनपद की राजधानी चंपा
2.मगध महाजनपद की राजधानी राजगृह
3.काशी की राजधानी वाराणसी
4.वत्स की राजधानी कौशांबी
5.वज्जि की राजधानी वैशाली
6.कौशल की राजधानी श्रावस्ती
7.अवंती की राजधानी उज्जैन
8.मल्ल की राजधानी कुशावती
9.पंचाल की राजधानी अहिछत्र
10.चेदि की राजधानी शक्तिमती
11.कुरू की राजधानी इंद्रप्रस्थ
12.मत्स्य की राजधानी विराटनगर
13.कंबोज की राजधानी हाटक
14.शूरसेन की राजधानी मथुरा
15.अशमक की राजधानी पोतन
16.गांधार की राजधानी तक्षशिला       

महाजनपद काल का क्या कहा जाता है- द्वितीय नगरीकरण✔
महाजनपद काल में कितने गणराज्यों का उल्लेख मिलता है – 10 गणराज्यों का✔
बुद्ध के काल में सबसे शक्तिशाली गणराज्य कौनसा था- वैसाली के लिच्छवी✔
महाजनपदों का कौनसे बौद्ध ग्रन्थों में उल्लेख मिलता है- अंगुुतर निकाय और महावंश✔
बुद्ध के काल में शक्तिशाली राजतंत्र कौनसे थे- कोशल,मगध,वत्स व अवन्ति✔   


➡ 1.अंग:- यह राज्य मगध के पश्चिम में स्थित था। इनमें आधुनिक बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिले सम्मिलित थे।  मगध वह अंग राज्यों के बीच चंपा नदी बहती थी।  चंपा इसकी राजधानी का भी नाम था। यह उस काल के व्यापार व सभ्यता का प्रसिद्ध केंद्र था। अंग और मगध के मध्य निरंतर संघर्ष हुआ करते थे। अंत में यह मगध में विलीन हो गया।

➡ 2. मगध:- इस राज्य का अधिकार क्षेत्र मोटे तौर पर आधुनिक बिहार के पटना और गया जिलों के भूप्रदेश पर था इस की प्राचीन राजधानी गिरीव्रज थी। बाद में राजगृह व् पाटलिपुत्र राजधानी बनी प्रारंभ में एक छोटा राज्य था पर इसकी शक्ति में निरंतर विकास होता गया बुद्ध के काल में यह चार शक्तिशाली राजतंत्रो में से एक था।

➡ 3. काशी:- महाजनपद काल का सर्वाधिक शक्तिशाली राज्य था इसकी राजधानी वाराणसी थी।  जो अपने वैभव ज्ञान एवं शिल्प के लिए बहुत प्रसिद्ध थी।  महाजनपद काल का अंत होते होते यह कोसल राज्य में विलीन हो गया।

➡ 4.वत्स:- यह राज्य गंगा नदी के दक्षिण में और काशी व कौशल के पश्चिम स्थित था और इसकी राजधानी कौशांबी थी जो व्यापार का एक प्रसिद्ध केंद्र थी कौशांबी इलाहाबाद से लगभग 48 किलोमीटर की दूरी पर है बुद्ध के समय यहां का राजा उदयन था जो बड़ा शक्तिशाली पराकर्मी था उसकी मृत्यु के बाद मगध ने इस राज्य को हड़प लिया। वत्स का राज्य भी बुद्ध के समय चार प्रमुख राजतंत्रो में से एक था।

➡ 5. वज्जि:- यह राज्य गंगा नदी के उत्तर में नेपाल की पहाड़ियों तक विस्तृत था। पश्चिम में गंडक नदी इसकी सीमा बनाती थी और पूर्व में संभवत इसका विस्तार कोशी और महानंदा नदियों के तटवर्ती जंगलों तक था। यह एक संघात्मक गणराज्य था जो 8 कुलो से बना था। बुद्ध और महावीर के काल में यह एक अत्यंत शक्तिशाली गणराज्य था बाद में मगध के शासक ने इसे अपने राज्य का एक प्रदेश बना दिया।

➡ 6. कोसल:- इस राज्य का विस्तार आधुनिक उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में था। रामायण में इसकी राजरानी अयोध्या बताई गई है प्राचीन काल में दिलिप,रघु, दशरथ और श्रीराम आदि सूर्यवंशी शासको ने इस पर शासन किया था बौद्ध ग्रंथ मैं इसकी राजधानी श्रावस्ती कही गई है। बुद्ध के समय यह चार शक्तिशाली राजतंत्र में से एक था।

➡ 7. अवन्ति:- इस राज्य के अंतर्गत वर्तमान उज्जैन का भू प्रदेश तथा नर्मदा घाटी का कुछ भाग जाता था। यह राज्य भी दो भागों में बंटा था। उत्तरी भाग की राजधानी उज्जैन थी और दक्षिणी भाग की राजधानी महिष्मति थी।  बुद्धकालीन चार शक्तिशाली राजतंत्र में से एक यह भी था बाद में यह मगध राज्य में सम्मिलित कर लिया गया।

➡ 8. मल्ल:- यह भी एक गणराज्य था यह दो भागों में बंटा हुआ था। एक की राजधानी कुशीनारा (वर्तमान उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में आधुनिक कुशीनगर) और दूसरे की पावा।  मल लोग अपने साहस अपने साहस व युद्ध प्रियता के लिए विख्यात थे। मल राज्य अनन्त  मगध द्वारा जीत लिया गया।

➡ 9. पांचाल:- इस महाजन पद का विस्तार आधुनिक बंदायू और फर्रुखाबाद की जिले रोहिलखंड और मध्य दोआब में था। यह दो भागों में विभक्त था-उतरी पांचाल और दक्षिण पांचाल। उतरी पांचाल की राजधानी अहिछत्र और दक्षिण पंचाल की राजधानी कापील्य थी और यहां गणतन्त्रीय व्यवस्था कायम थी।

➡ 10. चेदि:- यह राज्य आधुनिक बुंदेलखंड के पश्चिम भाग में स्थित था। इसकी राजधानी शक्तिमती थी।  इसे बौद्ध साक्ष्य में सोत्तथवती कहा गया है। चेदि लोगों का उलेख ऋग्वेद में भी मिलता है। महाभारत में यहां के राजा शिशुपाल का उल्लेख है। जिसके शासनकाल में इस राज्य ने बहुत उन्नति की। इसी समय इस वंश की एक शाखा कलिंग में स्थापित हुई।

➡ 11.कुरु:- इस राज्य में आधुनिक दिल्ली के आसपास के प्रदेश थे। इसकी राजधानी इंद्रप्रस्थ थी। जिसकी स्मृति आज भी दिल्ली के निकट इंद्रप्रस्थ गांव में सुरक्षित मिलती है। यह महाभारत काल का एक प्रसिद्ध राज्य था। हस्तिनापुर इस राज्य का एक अन्य प्रसिद्ध नगर था।

➡ 12. मत्स्य:- इस राज्य का विस्तार आधुनिक राजस्थान के अलवर जिले से चंबल नदी तक था। इसकी राजधानी विराटनगर (जयपुर से अलवर जाने वाले मार्ग पर स्थित, वर्तमान नाम बैराठ) थी। महाभारत के अनुसार पांडेय ने यहां अपना अज्ञातवास का समय बिताया था।

➡ 13. कम्बोज:- इसका उल्लेख सदैव गंधार के साथ हुआ है। अत यह महाजनपद गंधार राज्य से सटे हुए भारत की पश्चिमउत्तर भाग (कश्मीर का उतरी भाग पामीर तथा बदख्शां के प्रदेश) में स्थित रहा होगा। राजपुर और द्वारका इस राज्य के दो प्रमुख नगर थे। यह पहले एक राजतंत्र था, किंतु बाद में गणतंत्र बन गया।

➡ 14. शूरसेन:-  इस जनपद की राजधानी मथुरा थी।  महाभारत तथा पुराणो में यहां के राजवंशो को यदु अथवा यादव कहा गया है। इसी राजवंश की यादव शाखा में श्री कृष्ण उत्पन्न हुए।

➡ 15.अश्मक:- यह राज्य दक्षिण में गोदावरी नदी के तट पर स्थित था। इसकी राजधानी पोतली अथवा पोदन थी। बाद में अवन्ति ने इसे अपने राज्य मे मिला लिया।

➡ 16. गांधार:- यह राज्य (वर्तमान पाकिस्तान के पेशावर तथा राहुल पिंडी के जिले) पूर्वी अफगानिस्तान में स्थित था। इस राज्य में कश्मीर घाटी तथा प्राचीन तक्षशिला का भू प्रदेश भी आता था। इसकी राजधानी तक्षशिला थी। तक्षशिला का विश्वविद्यालय उस समय शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र था।

🌍मगध साम्राज्य🌍
मगध साम्राज्य ने 684 ईसा पूर्व से 320 ईसा पूर्व तक भारत में शासन किया।इसका उल्लेख महाभारत और रामायण में भी किया गया है।यह सोलह महाजनपदों में सबसे अधिक शक्तिशाली था।साम्राज्य की स्थापना राजा बृहदरथ द्वारा की गयी थी।राजगढ (राजगिर) मगध की राजधानी थी, लेकिन बाद में चौथी सदी ईसा पूर्व इसे पाटलिपुत्र में स्थानांतरित कर दिया गया था। यहां लोहे का इस्तेमाल उपकरणों और हथियारों का निर्माण करने के लिए किया जाता था।हाथी जंगल में पाये जाते थे जिनका इस्तेमाल सेना में किया जाता था।गंगा और उसकी सहायक नदियों के तटीय मार्गों ने संचार को सस्ता और सुविधाजनक बना दिया था।बिम्बिसार, अजातशत्रु और महापदम नंद जैसे क्रूर और महत्वाकांक्षी राजाओं की कुशल नौकरशाही द्वारा नीतियों के कार्यान्वयन से मगध समृद्ध बन गया था।मगध का पहला राजा बिम्बिसार था जो हर्यंक वंश का था।अवंती मगध का मुख्य प्रतिद्वंदी था, लेकिन बाद में एक गठबंधन में शामिल हो गया था।शादियों ने राजनीतिक गठबंधनों के निर्माण में मदद की थी और राजा बिम्बिसार ने पड़ोसी राज्यों की कई राजकुमारियों से शादी की थी।

🌍 हर्यंक राजवंश🌍
यह बृहदरथ राजवंश के बाद मगध पर शासन करने वाला यह दूसरा राजवंश था।शिशुनाग इसका उत्तराधिकारी था।राजवंश की स्थापना बिम्बिसार के पिता राजा भाट्य द्वारा की गयी थी।राजवंश ने 6 वीं शताब्दी ईसा पूर्व से 413 ईसा पूर्व तक मगध पर शासन किया था।

🌍बिम्बिसार🌍
बिम्बिसार ने मगध पर 544 ईसा पूर्व से 492 ईसा पूर्व तक, 52 वर्ष शासन किया था।उसने विस्तार की आक्रामक नीति का पालन किया और काशी, कौशल और अंग के पड़ोसी राज्यों के साथ कई युद्ध लड़े।बिम्बिसार गौतम बुद्ध और वर्द्धमान महावीर का समकालीन था।उसका धर्म बहुत स्पष्ट नहीं है। बौद्ध ग्रंथों में उल्लेख के अनुसार वह बुद्ध का एक शिष्य था, जबकि जैन शास्त्रों में उसका वर्णन महावीर के अनुयायी के रूप तथा राजगीर के राजा श्रेनीका के रूप में मिलता है।बाद में बिम्बिसार को उसके पुत्र अ़जातशत्रु द्वारा कैद कर लिया गया जिसने मगध के सिंहासन पर आधिपत्य स्थापित कर लिया था। बाद में कारावास के दौरान बिम्बिसार की मृत्यु हो गई।

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