मोहम्मद गोरी का जीवन परिचय | गोर वंश की स्थापना

गोर वंश की स्थापना अलाउद्दीन हुसैन के द्वारा की गई थी। अलाउद्दीन हुसैन शंसबानी वंश का था, जो गोर वंश की प्रधान शाखा थी। गजनी वंश का अंत 1149 ई. में ही हो चुका था, लेकिन इसका अंतिम शासक बहराम शाह का पुत्र खुसरो मलिक था जिसको मोहम्मद गोरी ने 1192 ई. में मरवा दिया था और पूरी तरीके से गजनी वंश का अंत कर दिया। अलाउद्दीन हुसैन के दो भतीजे थे गियासुद्दीन और मोहम्मद गोरी। अलाउद्दीन हुसैन ने गयासुद्दीन को कैद करके रखा हुआ था, लेकिन उसकी मृत्यु के पश्चात सैफुद्दीन जो कि अलाउद्दीन हुसैन का पुत्र था ने गयासुद्दीन को आजाद कर दिया और सैफुद्दीन की मृत्यु के बाद गौर वंश की गद्दी पर गयासुद्दीन बैठा, उसने गजनी को अंतिम रुप से जीतकर अपने भाई शहाबुद्दीन मोहम्मद गोरी को सौंप दिया था और मोहम्मद गोरी ने अपने भाई को सौंपी गई सत्ता का बेहतर तरीके से विस्तार किया।

मोहम्मद गोरी का संक्षिप्त जीवन परिचय

इसका जन्म 1149 ईस्वी में अफगानिस्तान के गौर नामक स्थान पर हुआ था इनका वास्तविक नाम सहाबुद्दीन था और पूरा नाम मुइजूद्दीन मोहम्मद गौरी था| मोहम्मद गौरी अलाउद्दीन हुसैन के भतीजे थे| इनका संबंध शंसबानी वंश से था| गोरी साम्राज्य का केंद्र उत्तरी-पश्चिमी अफगानिस्तान था। तुर्क साम्राज्य (Turkish empire) का संस्थापक मोहम्मद गोरी था। मोहम्मद गौरी ने 1175 ई में सबसे पहले मुल्तान पर आक्रमण किया था1178 मे गुजरात पर आक्रमण किया। मोहम्मद गौरी की भारत में पहली पराजय 1178 में मूलराज द्वितीय के हाथों Mount Abu के युद्ध में हुई थीराजस्थान के राजा पृथ्वीराज चौहान तृतीय 1191 और 92 से युद्ध हुआ। मोहम्मद गौरी के साथ संत Khwaja Mohiddin Chishti 1192 भारत आएगोरी साम्राज्य की 1193 में दिल्ली राजधानी बनीमोहम्मद गोरी ने इक्ता प्रथा (जिसे इल्तुतमिश ने संस्था का रुप दिया) चलाई

गोरी साम्राज्य का शासक 1202 में बना। मोहम्मद गौरी के सिक्कों में एक तरफ कलिमा और दूसरी तरफ लक्ष्मी की आकृति थी|देहलीवाल सिक्के कहलादेहली- अव्यत्मेक मोहम्मद अवतार लिखे हुए सिक्के| मोहम्मद गौरी का अंतिम अभियान 1205 में पंजाब के खोखर जातियों के विरुद्ध हुआ| 15 मार्च 1206 ईस्वी में Jhelum क्षेत्र के पास मोहम्मद गौरी की मृत्यु संध्याकालीन नवाज पढ़ते हुए हुई थी| मोहम्मद गौरी का उत्तराधिकारी उसका भतीजा महमूद था। कुतुबुद्दीन ऐबक मोहम्मद गौरी का गुलाम था। गोर वंश के बाद गुलाम वंश की स्थापना हुई

भारत पर आक्रमण करने का कारण

1. प्रथम कारण

गजनी पर शंसबानी वंश का अधिकार हो गया था लेकिन ख्वारिज्मो की शक्ति का विरोध करना मोहम्मद गौरी के लिए संभव नहीं था। ख्वारिज्म शासकों ने गोर वंश के पश्चिम की ओर राज्य विस्तार को रोक दिया था। ख्वारिज्म के शाह ने खुरासान (पूर्वी ईरान) को जीत लिया जो गौरों और ख्वारिज्मों के बीच झगड़े की जड़ था। फल स्वरुप गोरियों को भारत की ओर प्रसार करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा। इसके अतिरिक्त पश्चिम की ओर राज्य विस्तार करने का उत्तरदायित्व मोहम्मद गोरी के बड़े भाई गयासुद्दीन का था, जो गोर का शासक था अत: मोहम्मद गोरी ने साम्राज्य विस्तार के लिए उत्तर भारत का क्षेत्र चुना।

 2. दूसरा कारण

मोहम्मद गोरी के आक्रमण का दूसरा कारण पंजाब पर अधिकार करना था, उस समय पंजाब में ग़ज़नवी वंश का राज्य था जो लाहौर पर शासन कर रहे थे गज़नवी और गोर वंश में वंशानुगत शत्रुता थी। इसीलिए लाहौर पर अधिकार करना और गजनवी वंश के शासकों का विनाश करना मोहम्मद गौरी का उद्देश्य था। इसके अतिरिक्त वह मुल्तान पर भी अधिकार करना चाहता था क्योंकि मुल्तान और पंजाब पर नियंत्रण किए बिना उत्तर भारत में साम्राज्य विस्तार करना संभव नहीं था।

भारत में मुस्लिम सत्ता का वास्तविक संस्थापक

शहाबुद्दीन मोहम्मद गोरी भारत में मुस्लिम सत्ता का वास्तविक संस्थापक था, हालांकि इससे पूर्व 712 ईस्वी में भारत पर आक्रमण करने वाला पहला आक्रमणकारी मोहम्मद बिन कासिम था। उसने भारतीय राज्य को विजित भी किया था लेकिन शीघ्र ही उसकी मृत्यु हो जाने के कारण भारत में एक स्थाई साम्राज्य स्थापित नहीं कर सका इसके बाद में महमूद गजनबी ने भारत पर आक्रमण किया लेकिन अपनी सत्ता स्थापित करने में वह भी असफल रहा क्योंकि उस का मुख्य उद्देश्य केवल और केवल धन अर्जित करना था ना की सत्ता स्थापित करना। महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण का एक मात्र स्थाई प्रभाव पंजाब की विजय थी।

दिल्ली संतलत की शुरुआत

गोर मुख्यतः एक कृषि प्रधान क्षेत्र था, इसका पहाड़ी क्षेत्र गजनी और हिरात के बीच में स्थित था। इसका मध्य भाग आधुनिक अफगानिस्तान है। अतः गौरी साम्राज्य का आधार उत्तर-पश्चिमी अफगानिस्तान था गोर में जो वंश प्रधान था उसका नाम शंसबाानी था। यह तुर्कों की एक शाखा थी जो पूर्वी ईरान से आकर गोर प्रदेश में बस गई थी। महमूद ग़ज़नवी पहला सुल्तान था जिसने गोर को विजय कर वहां के निवासियों को इस्लाम धर्म में परिवर्तित किया इससे पहले गोर के निवासी बौद्ध मतावलंबी थे।

मोहम्मद गोरी ने शंसबानी वंश को शक्तिशाली बनाना और उसे गजनी में प्रतिष्ठित किया। गजनी को अपना मुख्य स्थान बनाकर मोहम्मद गोरी ने भारत पर कई आक्रमण किए और दिल्ली सल्तनत का मार्ग प्रशस्त किया। मोहम्मद गौरी को भारत में तुर्क साम्राज्य का संस्थापक माना जाता है मोहम्मद गोरी के कोई संतान नहीं थी इसलिए इसके बाद इसके एक गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत में एक नए राजवंश की नींव डाली जिसे गुलाम वंश कहा जाता है और 1206 ईस्वी से ही दिल्ली संतलत की शुरुआत हुई।

मोहम्मद गोरी के आक्रमण के समय भारत की स्थिति

भारत पर 3 आक्रमण हुए

  1. प्रथम आक्रमण- 712 ईस्वी में Mir Qasim द्वारा,
  2. दूसरा आक्रमण- 1027 में महमूद गजनबी द्वारा और
  3. तीसरा आक्रमण- 1175 ईस्वी में मोहम्मद गोरी द्वारा

इन आक्रमणों का कोप भंज झेलने के बाद भी भारतीय शासक कुछ भी सीखने का प्रयत्न नहीं कर पाए,  मोहम्मद गोरी के आक्रमण के समय भी भारत की वही स्थिति थी जो मीर कासिम और महमूद ग़ज़नवी के समय थी । केंद्रीय सत्ता के अभाव के कारण भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त था, जिसके शासक स्वयं में स्वतंत्र थे। उनमें राज्य विस्तार की प्रतिस्पर्धा और वंशानुगत झगड़ों के कारण युद्ध होते रहते थे। उस समय कुछ राजपूत राजवंश निश्चित रूप से शक्तिशाली थे, लेकिन वह अपनी शक्ति का उपयोग आक्रमणकारियों के बजाय एक दूसरे को नष्ट करने में लगाए हुए थे।

भारत पर मोहम्मद गोरी के आक्रमण के समय राजवंश

मुस्लिम राज्य

इसके आक्रमण के समय उत्तर-पश्चिम सीमा पर सिंध, मुल्तान और पंजाब तीन Muslim state थे

  1. सिंध में- सुम्र जाति के शिया शासकों का शासन था।
  2. मुल्तान में- करमाती जाति के शासक थे और
  3. पंजाब में- गजनबी वंश के अंतिम शासक खुसरो(खुसरव) मलिक का शासन था जिसकी राजधानी लाहौर थी।

हिन्दू राजवंश

गुजरात और काठियावाड़ में चालुक्य वंश का राज्य था, जिसकी राजधानी अन्हिलवाडा (पाटन) थी। इस समय वहां का शासक मूलराज द्वितीय था। दिल्ली और अजमेर में चौहान वंशीय पृथ्वीराज चौहान तृतीय (राय पिथौरा) का शासन था। वह सभी तत्कालीन भारतीय शासकों में सर्वाधिक शक्तिशाली था, अत्यधिक महत्वकांशी होने के कारण उसने पड़ोसी राज्यों से संघर्ष किया और सभी से शत्रुता मोल ली थी। कन्नौज में गढ़वाल वंश का शासन था जो उत्तर भारत में सबसे अधिक विस्तृत था, मोहम्मद गौरी के आक्रमण के समय वहां का शासक जयचंद था।पृथ्वीराज तृतीय (राय पिथौरा) ने जयचंद की पुत्री संयोगिता से बलपूर्वक विवाह कर इससे घोर शत्रुता मोल ली थी।

जेजाकभुक्ति (बुंदेलखंड) में चंदेल वंश का शासक था। मोहम्मद गौरी के आक्रमण के समय वहां का शासक परमार्थीदेव (1165-1202) था। कलचुरी में चेदिवंश का शासन था । चेंदि वंश के शासक कर्ण की प्रतिष्ठा को गहढ़वाल सत्ता ने अत्यधिक आगात पहुंचाया था। बंगाल में पाल और सेन वंश का शासन था जो अपनी पतनावस्था में थे। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि भारतीयों की आंतरिक स्थिति बिखरी हुई थी,
कोई भी राजवंश तुर्को को रोकने में सक्षम नहीं थे। तत्कालीन समाज में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था, महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के समय की सामाजिक स्थिति अत्यंत दयनीय थी।

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