मोहम्मद गोरी के आक्रमण

मोहम्मद गोरी के आक्रमण

मोहम्मद गौरी का प्रथम आक्रमण(मुल्तान और सिन्ध) 
शंसबानी वंश के मोहम्मद गौरी का भारत पर प्रथम आक्रमण 1175 ईस्वी में Multan पर हुआ था
गोमल दर्रे से होकर डेरा इस्माइल खाँ होते हुए सिंध पहुंचने का मार्ग उस समय का सबसे प्रचलित मार्ग था
मोहम्मद गोरी ने इसी मार्ग से सिंध पर आक्रमण किया मोहम्मद गौरी से पहले के आक्रमण भी इसी मार्ग से हुए थे

मोहम्मद गोरी के आक्रमण के समय मुल्तान पर करमाथियों का शासन था
मोहम्मद गोरी ने सरलता से उन्हें पराजित कर मुल्तान जीत लिया मुल्तान पर अधिकार करने के बाद उसने उच्च और निचले सिंध को भी जीता था

 मोहम्मद गौरी का भारत पर दूसरा आक्रमण अन्हिलवाड़ा या नाहरवाला( पाटन)
मोहम्मद गौरी के भारत के इस आक्रमण में  मोहम्मद गौरी की भारत में पहली पराजय थी
मुल्तान और सिंधु को जीतने के बाद मोहम्मद गोरी ने 1178-79ई. में Gujarat पर आक्रमण किया
उस समय गुजरात पर Chalukya Dynasty के शासक मूलराज द्वितीय का शासन था
मोहम्मद गोरी ने दक्षिण राजपूताना होते हुए अन्हिलवाड़ा (पाटन) पर आक्रमण किया था
मूलराज द्वितीय का भाई “”भीम द्वितीय ने अपनी विधवा साहसी मॉ नायिका देवी””के नेतृत्व में आबू पर्वत के निकट कायाद्रा नामक स्थान पर मोहम्मद गौरी का सामना किया

मोहम्मद गौरी की सेना पूर्ण रूप से पराजित हुई मोहम्मद गोरी किसी प्रकार से गुजरात से अपनी पराजित सेना सहित भाग निकला
यह मोहम्मद गौरी की भारत में पहली पराजय थी
भारतीय नरेशों में मूलराज द्वितीय प्रथम शासक था जिसने सर्वप्रथम मोहम्मद गौरी को पराजित किया था

मोहम्मद गौरी का तृतीय आक्रमण पेशावर
मोहम्मद गोरी ने  मूलराज द्वितीय से पराजित होने के बाद अपने आक्रमण का मार्ग बदल दिया
मोहम्मद गोरी ने पंजाब के मार्ग से भारत में प्रवेश करने का निश्चय किया
1179 ईस्वी में उसने पेशावर जो पंजाब के शासक के अधीन था पर अपना अगला आक्रमण किया और उस पर अधिकार कर लिया

 गजनी वंश और गजनी वंश के अंतिम शासक खुसरो मलिक का अंत
 2 वर्ष बाद 1181-82 ई.  में वह लाहौर की ओर आगे उस समय वहां गजनवी वंश का अंतिम शासक खुसरव  मलिक का शासन था
खुसरव मलिक ने युद्ध के बजाए उसने बहुमूल्य भेंटें और अपने एक पुत्र को बंधक के रूप में देकर अपनी रक्षा की
1182 में मोहम्मद गोरी ने देवल के विरुद्ध कुच  किया और समस्त तटवर्ती प्रदेश पर विजय प्राप्त कर ली
सूमरा शासकों ने उस की अधीनता स्वीकार कर ली थी
1184-85 में मोहम्मद गौरी की सेना ने पुन: लाहौर  की और कुच  किया और समस्त प्रदेश नष्ट कर दिया
गजनी वापस जाते समय मोहम्मद गोरी ने सियालकोट के दुर्ग पर अधिकार कर वहाँ  रक्षक सेना की व्यवस्था करने का आदेश दिया
हुसैन  बिन खर्मेल को दुर्ग का अधिकारी नियुक्त किया गया
खुसरव मलिक अपनी राजधानी के निकट गोरियों के इस संगठन को अपने लिए खतरा समझा उसने खोखर जनजातियों से संधि कर उनकी सहायता से सियालकोट को घेर लिया।लेकिन यह घेरा  उसके लिए कठिन सिद्ध हुआ।
1186 ई.  में भारत में गजनवी सत्ता के अंतिम अवशेष नष्ट करने के लिए मोहम्मद गोरी ने लाहौर पर आक्रमण किया
जम्मू के शासक ने लाहौर पर आक्रमण करने के लिए मोहम्मद गौरी को प्रोत्साहित किया क्योंकि खुसरव  मलिक और राजा चंद्रदेव में शत्रुता थी
खुसरव मलिक बिना युद्ध किये ही संधि वार्ता करने लगा
वह मोहम्मद गौरी से भेंट  करने के लिए दुर्ग से बाहर निकला तो उसे बंधी बनाकर गर्जिस्तान में बलाखान नामक स्थान पर भेज दिया गया जहां कुछ समय पश्चात 1192 ई.  में उसकी हत्या कर दी गई

इस प्रकार लाहौर पर गोरियों की पूर्ण सत्ता स्थापित हो गई
अली कर्मज जो मोहम्मद गौरी के सिपहसालार और वली थे,लाहौर में में नियुक्त किए
न्याय का प्रबंध सिराजुद्दीन को सौंपा गया था

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