राजस्थान की मिट्टी से संबंधित कुछ तथ्य

राजस्थान की मिट्टी से संबंधित कुछ तथ्य

 जिस मृदा का  ph मान  परिसर  6.5-7.5  होता है यह मृदा  सामान्य मृदा कहलाती है  इसमें पादप पोषक सुलभता एवं सूक्ष्मजीव क्रियाशीलता अधिक होती है
 जिस मिट्टी में चूने की मात्रा कम होती है उसे अम्लीय मिट्टी कहते हैं  अम्लीय मिट्टी (Acidic soil) का पीएच मान 7से कम होता है  अम्लीय मिट्टियों कोें चूना पत्थर गंधक का अम्ल पायराइट्स (pyrites) आदि रसायनों का उपयोग कर के सुधारा जा सकता है
 लवणीय मिट्टियों ( Saline soils) में चुकंदर आलू कपास जौ गेंहू जैसी लवण रोधी फसल उगाना लाभदायक रहता है
राज्य का सर्वाधिक 19.41 प्रतिशत भूभाग वायु अपरदन से ग्रस्त है
राजस्व की दृष्टि से सिंचित भूमि को चाही और असिंचित भूमि को बारानी कहते हैं
 वर्ष  1952 में जोधपुर में  मरुस्थल वृक्षारोपण एवं अनुसंधान केंद्र ( Research centre)खोला गया था
 हनुमानगढ़ जिले का बडोपल गांव सेम की समस्या के लिए जाना जाता है
 किन्ही कारणों से रेगिस्तान का आगे बढ़ना रेगिस्तान का मार्च कहलाता है

 मिट्टी की क्षारीयता (soil alkalinity) की समस्या के समाधान के लिए जिप्सम का प्रयोग किया जाता है
 लवणीयता की समस्या के समाधान हेतु रॉक फॉस्फेट का उपयोग करते हैं
 राज्य में सुबबूल नामक वृक्ष लगाये जाने से है
 यह क्षारीयता सहन करता है , नाइट्रोजन बढ़ाता  है
 जल से होने वाला अपरदन रोकता  है
 पशुओं के लिए चारा व लकड़ी उपलब्ध  करवाता है
 यह सुबबूल शीघ्र बढता है
 तालाब में या बड़े गड्ड़े में पानी और दलदल सूखने पर जमी उपजाऊ मिट्टी की परत को “”पणो”” कहा*जाता है
 अनुपजाऊ या वर्षा में बिना जोती गई पड़त भूमि को “”बाझँड”” ने कहा जाता है
 चंबल क्षेत्र में सेम की समस्या के समाधान के लिए शुरु की गई परियोजना राजाड परियोजना है
 सेम का मुख्य कारण प्राकृतिक ह्वास है
 सेम की समस्या के निवारण के लिए Indo-dutch जल निकास परियोजना चलाई गई
 यह परियोजना नीदरलैंड की सहायता से चलाई गई
 नर्मदा नहर (Narmada canal)परियोजना में संपूर्ण सिंचाई फव्वारा पद्धति से की जाएगी
 देश की कुल व्यर्थ भूमि का 20% भाग राजस्थान में है
 क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य में सर्वाधिक व्यर्थ भूमि जैसलमेर से 37% जिले में है
उपलब्ध क्षेत्र के प्रतिशत की दृष्टि से राजसमंद जिला सर्वाधिक व्यर्थ पठार भूमि क्षेत्र के अंतर्गत आता है
 लवणीय परती भूमि पर सबसे अधिक क्षेत्र पाली जिले में है
 सर्वाधिक परती भूमि जोधपुर जिले में है
 सर्वाधिक बीहड़ भूमि सवाई माधोपुर व करौली जिले में है
 मूंगफली पीली मिट्टी के क्षेत्रों में अधिक बोई जाती है
 राजस्थान में सामान्य मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला व समस्याग्रस्त मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला जयपुर-जोधपुर  में
 शीत ऋतु की रात्रियों में तापमान हिमांक बिंदु तक चले जाने से फसल नष्ट हो जाती है
 इस स्थिति को पाला पड़ना कहते हैं
 ऊसर भूमि सुधारक  के रूप में  केल्सियम सल्फेट रसायन  का प्रयोग किया जाता है
 समस्याग्रस्त मृदा में फास्फोरस उर्वरक पोषक तत्व स्थिर हो जाता है मिट्टी का  घनत्व P.D.अथवा Dp में प्रदर्शित किया जाता है
 बैक्टिरिया सूक्ष्म जीवों की संख्या मृदा में अधिकतम होती है
 अधिकांश मृदाओं का घनत्व 1 से 1.8 g/cm होता है
 इलाइट मृदा खनिज में पोटाश की अधिकता होती है
 मृदा में जेव कार्बन और जैविक पदार्थ का अनुपात 1.0:1.7 होता है
 मिट्टी से जल को बांधने की प्रक्रिया अभिलाग कहलाती है
 मिट्टी के रंग की माप मन्सेल कलर चार्ट द्वारा की जाती है
 मृदा के मूल पदार्थों को रीगोलिथ कहते हैं
 मृदा का मुख्य घटक सिल्ट या दोमट होता है
 खेती की दृष्टि से सर्वोत्तम मृदा संरचना  मृदु कोणीय संरचना होती है
 जल पटल पर मृदा वायु की मात्रा शुन्य होती है
 मिट्टी में ताप प्रवाह चालन द्वारा होता है
खेती फसलों के लिए उपयुक्त मृदा संरचना कम्बी संरचना है
 सबसे अधिक सरन्ध्र मटियार मृदाओं में होते हैं
 मृदा से संबंधित कारकों को एडेफिक कहते हैं
 पीट मृदा सामान्यतः काली भारी और अम्लीय मृदा के नाम से जानी जाती है
 साधारण मृदा का स्थूल घनत्व 14 से 18gm/cc होता है
 मिट्टी में कार्बन डाई ऑक्साइड ( Carbon dioxide) की मात्रा 0.5% से कम पाई जाती है
 केंद्रीय भू संरक्षण बोर्ड का कार्यालय सीकर और जयपुर जिले में स्थित है
  पानी एवं मिट्टी के परीक्षण के लिए राज्य में जयपुर जोधपुर कोटा श्रीगंगानगर अलवर बांसवाड़ा जिलों में प्रयोगशालाएं स्थापित की गई
 कृषि विभाग राजस्थान सरकार द्वारा मिट्टीयों को उर्वरता के आधार पर 14 भागों  में बांटा गया है
 मृदा की नमी को नापने का उपकरण टेन्सियोमीटर और न्यूट्रॉन प्रोब है
 राजस्थान में सबसे प्रमुख मृदा एंटी सोल है
 राजस्थान की मिट्टियों में सामान्यतः नाइट्रोजन पोटेशियम फास्फोरस जिंक तत्व की कमी हती है
 केओलिनाइट मिट्टी में  जल संचयन क्षमता सबसे कम होती है
 हवा द्वारा मृदा कणों का सर्वाधिक स्थानांतरण एरोलियन मिट्टी का होता है
 भूमि का  स्थाई लक्षण मृदा विन्यास है
 मृदा के रंग का कारण  खनिज पदार्थ ( Minerals) अथवा कार्बनिक पदार्थ हैं
 लेटराइट मिटटी में फेरिक और एलमुनियम के हाइड्रैटेड ऑक्साइड अधिक मात्रा में और मेग्जीन तथा टाइटेनियम ऑक्साइड थोड़ी मात्रा में पाए जाते हैं
 राजस्थान में लोयस मिट्टी (Loose soil) सवाई माधोपुर करौली झुंझुनू जिले में पाई जाती है
 भारी मिट्टियों का निर्माण क्षारीय और अवसादी चट्टानों ( Sedimentary rocks) के अपक्षय से हुआ है
 अधिकांश  पौधों की वृद्धि के लिए मिट्टी में ऑक्सीजन का सांद्रण 10% से अधिक रहना चाहिए