राजस्थान निर्माण की प्रस्तावना | राजस्थान का इतिहास | Rajasthan History

राजस्थान निर्माण से पूर्व घटित हुई कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं जो राजस्थान निर्माण में अहम भूमिका का निर्वहन किया था हमने उन सभी घटनाओं को इस पोस्ट के माध्यम सम्मिलित किया है ताकि आप उन सभी की पढ़ कर सम्पूर्ण जानकारियों प्राप्त कर सकें

मजदूर दल की सरकार का गठन

जुलाई 1945 को इंग्लैंड में अनुदार दल के नेता विंस्टन चर्चिल को परास्त कर मजदूर दल की सरकार का गठन हुआ था इस दल के नेता मिस्टर एटली इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बने थे मजदूर दल को भारत की स्वतंत्रता के प्रति पहले से ही सहानुभूति थी|

अतः सत्ता में आते ही एटली ने 20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश संसद में घोषणा कर दी थी कि जून 1948 तक भारत की राज्य सत्ता जिम्मेदार भारतीयों को सौंप दी जाएगी इस घोषणा के उपरांत भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड वेवल ने 24 मार्च 1947 को अपने पद से त्याग पत्र दे दिया

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लार्ड माउंटबेटन

लार्ड वेवल के स्थान पर लार्ड माउंटबेटन को गवर्नर बना दिया गया लॉर्ड वेवेल को इंग्लैंड वापस बुला लिया गया था लॉर्ड माउंटबेटन ने सांप्रदायिक उन्माद से देश को बचाने के उद्देश्य से सत्ता के हस्तांतरण का कार्य शीघ्रातिशीघ्र करने का फैसला किया लार्ड माउंटबेटन की नियुक्ति पर लार्ड इस्मेने कहा था कि माउंटबेटन ऐसे समय जहाज का संचालन संभाल रहे हैं जबकि जहाज समुंदर के बीच में है उसमें बारुद बढ़ा हुआ है और उसके ऊपर आग लगी हुई है|

परंतु लॉर्ड माउंटबेटन ने अपने को एक योग्य और सफल नाविक सिद्ध किया| धीरे धीरे जहाज को उस पार तक पहुंचाने में जो दुष्कर कठिनाइयां सामने आ रही थी| उनका हृदय से सच्चा समाधान करते हुए भारतीय जहाज को स्वतंत्रता की मंजिल पर पहुंचा दिया

ब्रिटिश संसद ने वायसराय का तत्संबंधी प्रस्ताव 3 जून 1947 को भारत के स्वतंत्रता विधेयक को स्वीकृति प्रदान कर दी| ब्रिटिश सरकार की पुष्टि होते ही लॉर्ड माउंटबेटन ने 4 जून 1947 को भारत के विभाजन की घोषणा की जिससे यह प्रावधान किया गया कि ब्रिटिश सरकार 15 अगस्त 1947 को सत्ता हस्तांतरित कर देगी

देसी रियासतों का यह अधिकार सुरक्षित रखा गया कि वह भारत संघ में विलय हो या पाकिस्तान में मिले अथवा स्वयं को स्वतंत्र घोषित कर दे इसी बीच 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हो गया निसंदेह है इस महान कार्य का श्रेय राष्ट्रीय कांग्रेस को और राजस्थान के राज्य में गठित प्रजा मंडलों को जाता है

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आजादी के समय भारत की स्थिति

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद अवश्य हो गया था, लेकिन अखंड भारत के रूप में ना की खंडित भारत के रूप में आजाद हुआ था भारत के ही कुछ प्रांतों को भारत से विलग कर पाकिस्तान नाम का एक नवीन राष्ट्र गठित कर दिया गया इसके अलावा इस स्वतंत्रता अधिनियम के अंतर्गत केवल प्रत्यक्ष रुप से ब्रिटिश शासित प्रांतों को ही स्वतंत्रता मिली थी|

इन 9 प्रांतों के अलावा भारत में लगभग 565 देसी रियासते और थी जो कि नरेशों द्वारा वंशानुगत अधिकार के आधार पर शासित होती थी स्वतंत्रता अधिनियम ने रियासतों पर से अंग्रेजों की सर्वोच्चता अवश्य समाप्त कर दि थी, परंतु यह नरेशो की इच्छा पर छोड़ दिया गया था कि वह चाहे भारत में मिले या पाकिस्तान में इसके अलावा उन्हें स्वतंत्र रहने की भी छूट दी गई थी

अतः स्वतंत्रता अधिनियम की आठवीं धारा ने भारतीय स्वतंत्रता को संकटग्रस्त बना दिया था, लेकिन भारत के लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी दूरदर्शिता व कूटनीति से इन रियासतों के मामले को इस प्रकार हल किया कि भारत अनेक खंडों में खंडित होने से बच गया|

सैकड़ों की संख्या में विद्यमान देसी रियासतों को मुट्ठी भर राज्यों में बदल दिया गया देसी रियासतों की आपसी गठन की कार्रवाई

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भोपाल नवाब की पाकिस्तान समर्थित कार्यवाही

नरेंद्र मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान ने राजपूताने की रियासतों को पाकिस्तान में मिलने के लिए प्रेरित किया ताकि उन रियासतों की सीमा पाकिस्तान से मिल जाए इस प्रकार से भोपाल राज्य की सीमा पाकिस्तान से जा लगेगी उसी की तरह इंदौर के महाराजा यशवंत राव होल्कर को भी कांग्रेसी नेताओं पर कोई भरोसा नहीं था

राजपूताने के बीकानेर और उदयपुर आदि देशी राज्यों ने आरंभ से ही भारत संघ में मिलने का निर्णय कर लिया और भोपाल नवाब के प्रयासों को नकार दिया गया एक और तो कांग्रेस देशी रियासतो के प्रति अपनी कठोर नीति का प्रदर्शन कर रही थी दूसरी और मुस्लिम लीग ने ठीक इसके विपरीत बड़ा ही मुलायमरवैया अपनाया

पाकिस्तान का संस्थापक और मुस्लिम लीग का अध्यक्ष मोहम्मद अली जिन्नायह प्रयास कर रहा था कि अधिक से अधिक संख्या में देशी रियासते अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर दे या फिर पाकिस्तान में शामिल हो जाए, ताकि भारतीय संघ स्थाई रूप से दुर्बल बन सके

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भोपाल का नवाब हमीदुल्ला खां

भोपाल का नवाब हमीदुल्ला खां जिन्ना की योजना में शामिल हो गया जिसके तहत राजाओं को अधिक से अधिक संख्या में या तो पाकिस्तान में मिलने के लिए प्रोत्साहित करना था या फिर उनसे यह घोषणा करवा नी थी कि वह अपने राज्य को स्वतंत्र रखेंगे भोपाल नवाब चाहता था कि उसे भोपाल से लेकर कराची तक के मार्ग में आने वाली रियासतों का एक समूह बन जाए और यह समूह पाकिस्तान में मिल जाए

इसीलिए उसने जिन्ना की सहमति से एक योजना बनाई थी बड़ौदा, इंदौर, भोपाल, उदयपुर ,जोधपुर और जैसलमेर रियासतो द्वारा शासित प्रदेश पाकिस्तान का अंग बन जाए उनकी इस योजना में सबसे बड़ी बाधा उदयपुर और बड़ौदा की ओर से उपस्थित हो सकती थी

हमीदुल्ला खा ने धोलपुर नरेश महाराज राणा उदय भान सिंह को भी इस योजना में शामिल कर लिया वास्तव में भोपाल के नवाब और धौलपुर के महाराज राणा देशी नरेशों के उस गुट के नेता थे जो किसी भी मूल्य पर अपने राज्यों को भारतीय संघ में नहीं मिलाने की घोषणा करते रहे भरतपुर और अलवर के राजाओं ने तो कांग्रेस की केंद्रीय सरकार का तख्ता पलट देने की भी साजिश की थी

Rajasthan ke Rajvansh History Questions Test Series  

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