राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम और प्रजामंडल आंदोलन

प्रजामंडल का अर्थ     

राजस्थान में जन जागृति पैदा कर रियासती कुशासन को समाप्त करने उस में व्याप्त बुराइयोंको दूर करने और नागरिकों को उनके मौलिक अधिकार दिलवाने की लड़ाई वाले राजस्थान संगठनों को प्रजामंडल कहा जाता है अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद के प्रांतीय इकाईद्वारा चलाए गए आंदोलन प्रजा मंडल/प्रजा परिषद/लोक परिषद आंदोलनों के नाम से जाने जाते हैं प्रजामंडल आंदोलन देसी रियासतों में देशी राजाओं के विरुद्धचलाए गए थे

प्रजा मंडल स्थापना के उद्देश्य
रियासती कुशासनउस में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करना
नागरिकों के मौलिक अधिकारोंकी रक्षा करना
राजा के संरक्षण में रियासतों में उत्तरदायी शासन की स्थापना करना राजा के संरक्षण में

राजस्थान में राष्ट्रीय चेतना और जनजागृति के विकास के विभिन्न चरण
राजस्थान में राष्ट्रीय चेतना और जन जागृतिका विकास ब्रिटिश आधिपत्य के बाद ही हो गया था
लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो पाया था
राजस्थान में राष्ट्रीय चेतना और जन जागृति के विकासमें राज्य कई महत्वपूर्ण परिस्थितियों ,घटनाओं, और कारणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी

1857के  संग्राम की पृष्ठभूमि
यह सीमित जनाक्रोश का पहला विस्पोट था
जिसमें भावी लोक चेतना की एक ऐसी पृष्ठभूमितैयार करी थी
जिसने आगे चलकर राष्ट्रीय चेतना और जन जागृतिकी प्रेरणा दी

सामाजिक एवं धार्मिक सुधारको का योगदान
आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद सरस्वती में राजस्थान में स्थान स्थान पर घूमकर अपने विचारोंसे स्वर्धम, स्वदेश ,स्वभाषा,स्वराजपर जोर दिया
जिससे सामाजिक धार्मिक सुधारों के साथ ही राष्ट्रीय नवचेतना और जन जागृति का संचार हुआ
इसी प्रकार स्वामी विवेकानंद,साधू निश्चलदास सन्यासी, आत्माराम ,गुरु गोविंद आदि के सतत प्रयासों से राजस्थान में राष्ट्रीय चेतनाउत्पन्न हुई

पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव
ब्रिटिश आधिपत्य के बाद राजस्थान में अंग्रेजी शिक्षा का प्रारंभ हुआ
इसके प्रभाव से महत्वपूर्ण राजनीतिक मामलों पर विचार-विमर्शहोने लगे
शासकों में पारस्परिक एकता की भावना बढी
स्वतंत्रता ,समानता ,उदारता बंधुत्व, देश प्रेम आदि पाश्चात्य विचारों से जनता प्रभावित होकर अपने देश की मुक्ति और अधिकारोंके प्रति सजग होने लगी

समाचार पत्रों और साहित्य की भूमिका
ब्रिटिश एवं रियासती सरकारों की दमनकारी नीति के बावजूद
राजस्थान केसरी,लोकवाणी, सज्जन कीर्ति सुधाकर जैसे अनेक समाचारपत्रों के माध्यम से जन जाग्रति पैदा की गयी
सूर्यमल मिश्रण से लेकर केसरिया बारहठऔर आगे के अनेक कवियों का जनजागृति में महत्वपूर्ण योगदान रहा
इन्होने अपने लेखों के माध्यम से निरंकुश शासन के दोष देशप्रेम और उसकी मुक्तिके प्रयास किए गए
जनकल्याण एक प्रजातांत्रिक संस्थाओंके निर्माण की आवश्यकता का प्रचार-प्रसार कर राष्ट्रीय विचारधाराएव जन जागृति उत्पन्न की गई

यातायात संचार के साधनों की भूमिका
अंग्रेजों ने रेल-सड़क डाक आदि का विकास साम्राज्यवादी हितोंके लिए किया था
लेकिन इसके माध्यम से सभी व्यक्ति और राज्यों का संबंधआपस में बढ़ा
भारत के विभिन्न क्षेत्रों से संपर्क और एकता स्थापितहोने लगी
इससे जनसामान्य के विचारोंका आदान प्रदान हुआ
जिस कारण लोगों में राष्ट्रीय चेतनाका विकास हुआ

जनता की शोचनीय आर्थिक दशा
जनता अपनी दुर्बल आर्थिक दशा का कारण निरंकुश एवं अत्याचारी राजशाही एव उसकी भोगविलास की प्रवृत्ति और अंग्रेजी शासनको मानने लगी
इसका उनमूलन सामूहिक रुप से ही हो सकता है ऐसे विचारलोगों में पनपने लगे

प्रथम विश्व युद्ध का प्रभाव
प्रथम विश्व युद्ध में राजस्थान के सैनिक विदेशोंमें भेजे गए थे
वहां से वे स्वतंत्रता, समानता ,प्रजातंत्,र देश प्रेमआदि विचार अपने साथ लेकर आए
जिससे यहां की जनता को अवगत कराया और उनमें राजनीतिक जागृति उत्पन्नकी गई
अनेक अवसरों पर सैनिकों ने राजशाही के आदेशों की अवहेलना कर जनता पर गोली नहींचलाई
यह परिवर्तन-घटनाएक नए युग की सूचक थी

शासकों में अंग्रेज विरोधी भावना का पनपना
मेवाड़ अलवर भरतपुर आदि के ब्रिटिश विरोधी शासकों को जब ब्रिटिश सरकार ने हटाकर उनके पुत्रों को शासक बनाया
इन घटनाओं ने जनता को उद्वेलित कर दिया
इस घटना ने लोगों को अंग्रेज विरोधी बना दिया
जिससे राजनीतिक चेतनाको बढ़ावा दिया गया

क्रांतिकारियों का योगदान
बीसवीं सदी के प्रारंभ में देश में सशस्त्र क्रांतिके द्वारा अंग्रेजी राज्य के उन्मूलन की योजना बनाई गई
इस योजना में राजस्थान के अनेक क्रांतिकारी शहीदहुए
इन्होने राजस्थान के सोये हुए पौरूष को जगा कर राष्ट्रवाद की भावना की पैदा की
आदिवासी क्षेत्रों में किसान और जनजातीय आंदोलन में राजनीतिक चेतना जागृत करने की दिशा में असाधारण भूमिका का निर्वाह किया

विभिन्न राजनीतिक संगठनों कानिर्माण
उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशक और बीसवी सदी के प्रथमार्द्ध में सम्य सभा (1883),सेवा समिति (1915 ),अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (1927) आदि ने राजस्थान की जनता के विचारों को मूर्त रूप दे दिया
राजनीतिक चेतनाका संचार कर दिया
जिसकी पूर्णाहुति प्रजामंडल आंदोलन के द्वारा हुई
यह सभी कारण ,घटनाएं प्रजामंडल आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम की जननीबने

 

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