लोक प्रशासन एक विज्ञान

?लोक प्रशासन को विज्ञान मानने से पहले विज्ञान के अर्थ को समझना आवश्यक है
?विज्ञान का अर्थ व्यवस्थित अथवा क्रमबद्ध ज्ञान है
?क्रमबद्ध विज्ञान को ही विज्ञान कहते हैं
?विज्ञान की प्रमुख विशेषताएंहोती हैं➖जैसे निरिक्षण और परीक्षण की पद्धति के आधार पर निकाले गए सुनिश्चित और सार्वभौम नियम
?इन नियमों की *अपरिवर्तनशीलता और सार्वभौमिकता
?इन नियमोंके आधार पर *भविष्यवाणी करसकने की क्षमता
?विषय का वर्गीकरण और व्यवस्थित ज्ञान
? इन विशेषताओं के होने पर ही किसी विषय को विज्ञान कहाजा सकता है
?विज्ञान की इन सभी विशेषताओं के आधार पर लोक प्रशासन को विज्ञान मानने में कई मत प्रचलित हुए
?लोक प्रशासन को विज्ञान मानने के संबंध में तीन मत है
?पहला मत इसे विज्ञान नहींमानता है
?लोक प्रशासन को विज्ञान नहीं मानने वाले विचारक फाइनर मोरिस और कोहनसम्मिलित हैं
?दूसरा मत इसे आंशिक रूप से विज्ञानमानता है
?इस मत के विचारक विल्सन विलोबी और बीयर्ड जैसे विचारक हैं
?तीसरा मत इसे पूर्ण रुप से विज्ञानमानता है तीसरे मत के समर्थक विद्वान लोक प्रशासन को विज्ञान माननेके संबंध में निम्न तर्क देते हैं
?लोक प्रशासन का एक सुव्यवस्थित ज्ञान है
?पिछले कई वर्षों में विभिन्न विद्वानों ने लोक प्रशासन के विभिन्न अंगों से संबंधित ज्ञान को क्रमबद्ध और सुव्यवस्थित किया है
?विज्ञान के अध्ययनमें काम आने वाली पद्धतियां ➖अनुसंधान पर्यवेक्षण परीक्षण वर्गीकरण और समन्वय पद्धति लोक प्रशासन मे भी अपनाई जाती है
?तथ्यों का संग्रह ,संतुलन और विश्लेषणकरके पारस्परिक संबंध और समन्वयस्थापित करते हुए परिणाम नियम और सिद्धांत निकाले गए हैं
?आज लोकप्रशासन में कुछ निश्चित सिद्धांतों का विकास हुआ है जो शाश्वत और निश्चित है
?साइमन द्वारा प्रतिपादित प्रशासकीय नियमों और सिद्धांतों द्वारा पूर्व कल्पना आसानी से की जा सकती है
?फिर भी कुछ हद तक इसके निर्णय और सिद्धांत इतने सटीक नहींहोते हैं जितने की भौतिक विज्ञान और अन्य विज्ञान केहोते हैं
?इसलिए यह एक वास्तविक विज्ञान ना होकर मात्र समाज विज्ञान की तरह का एक विज्ञान है

 ??लोक प्रशासन के दर्शन की आवश्यकता??
?माशर्ल डिमॉकऐसे पहले दार्शनिक है
?जिन्होंने प्रशासन को दर्शन मानने का समर्थनकिया था
?उनकी पुस्तक प्रशासन का दर्शन की प्रस्तावना में प्रशासनिक दर्शन पर बलदिया गया था
?उन्होंने प्रशासन का दर्शन पुस्तक में इस बात पर बल दिया कि यह प्रशासकोंमें आज की अपेक्षा व्यापक व्यावसायिक चेतना और निर्देशन तथा सामाजिक औचित्य की अधिक विश्वासपूर्ण भावना का संचारकरेगा
?प्रशासन को दर्शन मानने वालों के अनुसार राज्य की नीतियों को सत्य निष्ठा लगन और कुशलता पूर्वक लागूकिया जाना चाहिए
?लोक प्रशासन को उन सभी तत्वों अथवा कानूनोंकी ओर ध्यान देना चाहिए जो प्रशासकिय  क्रिया में सम्मिलित होते हैं
?आज लोक प्रशासन समाज का पूरक बन गया है
?समाज में शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र है जिसका संबंध लोक प्रशासन से ना हो
?ऐसी स्थिति में यह आवश्यक है कि लोक प्रशासन का अपना दर्शनहो
?जिससे राज्य की नीतियों को सत्य निष्ठा और कुशलता पूर्वक लागूकिया जा सके

?डिमॉक मैं लोक प्रशासन के दर्शन के संबंध में निम्न बिंदुओं को बताया है
?प्रशासकिय कार्यों में निहित सभी तत्वों को प्रकाश में लाना चाहिए
?निहीत तत्वों को संकलित करके उंहें उचित तथा एकीकृत पद्धति के अधीन लाना चाहिए
?जहां कुछ सिद्धांत विकसित हो चुके हैं
?वहां उन्हें भावी कार्यों के लिए मार्गदर्शक स्वीकार कियाजाना चाहिए
?प्रशासन लक्ष्य तथा साधन दोनों से संबंधित है
?इन दोनों का कुशलतापूर्वक समन्वय ही प्रशासन की उत्कृष्टता की कसौटी है
?प्रशासन के दर्शनका इस ढंग से विचार किया जाना चाहिए कि वह वास्तविकता का वर्णन करें और कार्यपालिका को विश्वसनीय साधन प्रदान करें
?अच्छे प्रशासन तंत्र द्वारा चेतना और व्यापक संतोष की भावना का संचार किया जाना चाहिए