साम्राज्य विस्तार (सैन्य अभियान)

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?अलाउद्दीन की आकांक्षाएं साम्राज्यवादी थी, अत्यधिक स्वतंत्र राज्यों को अपने अधीन करना उसके साम्राज्यवादी नीति का लक्ष्य था
?सिकंदर के समान वह अपनी विजय पताका दूर दूर तक फैल आना चाहता था, उसने सिकंदर द्वितीय की उपाधि धारण की
?यहां तक कि अपने सिक्कों और सार्वजनिक प्रार्थनाओं में भी स्वयं को दूसरा सिकंदर घोषित किया
?वह कहता था कि भगवान ने मेरे चार मित्र दिए हैं–उलूग खां ,नुसरत खां जफर खां और अलप खां  जिन्होंने मेरे ऐश्वर्या के प्रभाव से राजाओं की सी शक्ति और गौरव प्राप्त किया है
?यदि मैं चाहूं तो इन चारों मित्रों की सहायता से एक नए धर्म की नींव  डाल सकता हूं और मेरी तलवार और मेरे मित्रों के नाम पैगंबर और उसके मित्रों के नाम की तरह अंतिम दिन तक बना रहेगा
?मेरे पास असीमित धन, हाथी और सैनिक है ,मैं चाहता हूं कि दिल्ली का शासन भार  अपने प्रतिनिधि शासक को सौंप दू और स्वयं विजय प्राप्त करने के लिए संसार में भ्रमण करूं और इस प्रकार संसार को अपने अधीन कर लूं
?लेकिन अपने विश्वास पात्र मित्र  अलाउलमुल्क के परामर्श से उसने विश्व विजय की आकांक्षा त्याग दी और स्वतंत्र भारतीय राज्यों को अपने अधीन करने हेतु सैन्य अभियान जारी किया
?अपने 20 वर्षीय शासनकाल में अलाउद्दीन खिलजी ने उत्तर और दक्षिण भारत के अनेक राज्यों को विजित  किया
?लेकिन इन क्षेत्रों के प्रति उसकी नीति एक समान नहीं थी ,उत्तर भारत के राज्य को विजित  करने के पश्चात उन्हें अपने सूबेदारों के माध्यम से सीधे नियंत्रण में रखा
?जबकि दक्षिण राज्य के प्रति उसका लक्ष्य सीधे प्रशासनिक नियंत्रण में रख केवल धन प्राप्त करना था

?विंध्याचल पर्वत को पार करने वाला प्रथम तुर्क विजेता अलाउद्दीन खिलजी ही था
?उसने अपनी विजयों से एक विस्तृत साम्राज्य की स्थापना की थी उत्तर पश्चिम में सिंधु नदी उसके राज्य की सीमा थी पूर्व में उसका राज्य अवध तक था
?उत्तर में कश्मीर उसके अधीन नहीं था उड़ीसा और संभवत: बंगाल और बिहार उसके राज्य में नहीं थे
?दक्षिण में पाण्ड्य  राज्य के अतिरिक्त अन्य राज्यों  ने उस की अधीनता स्वीकार कर ली थी


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 ??उत्तर भारत??
?उत्तर भारतीय राज्यों के प्रति अलाउद्दीन की नीति विस्तारवादी थी इस नीति के अंतर्गत उसने इन राज्यों को विजित कर उन्हें अपने अधीन बनाया
?अलाउद्दीन की उत्तर भारत की विजय में उसके दो सेनापतियों उलूग खां और नुसरत खां ने मुख्य रुप से भाग लिया
?अलाउद्दीन द्वारा उत्तर भारतीय राज्यों पर आक्रमण करने का क्रम इस प्रकार है—
1-गुजरात 1297 ईस्वी
2-रणथंबोर 1301ईस्वी
3-चित्तौड़ 1303 ईस्वी
4-मालवा 1305 ईस्वीी
5-सिवाना 1308 ईस्वी
6-जालौर 1311ईस्वी

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 1. ☘गुजरात  आक्रमण (अभियान)☘
 ?अलाउद्दीन का पहला सैन्य अभियान 1297 ईस्वी में गुजरात पर हुआ उस समय वहां का शासक बघेला राजपूत रायकर्ण  द्वितीय था जिसकी राजधानी अन्हिलवाड़ा( पाटन) थी
?इस समय गुजरात की गणना भारत की शक्तिशाली और समृद्ध राज्य में की जाती थी, यह भारत का प्रमुख व्यापारिक केंद्र था
?इसका व्यापारिक संबंध ईरान और अरब देशों से था जो समुद्री मार्ग द्वारा संपन्न होता था
?एक विवरण के अनुसार राय करण द्वितीय के प्रधानमंत्री ने अलाउद्दीन खिलजी को गुजरात पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था, क्योंकि राय कर्ण ने उसकी अनुपस्थिति में उसकी पत्नी को अपने नियंत्रण में ले लिया था
?अलाउद्दीन खिलजी ने अपने दो योग्य सेनापतियों उलूग खां और नुसरत खां को गुजरात के विरुद्ध एक अभियान का नेतृत्व करने का आदेश दिया
?उ?उलूग खॉ ने सिंध  से प्रस्थान किया और मार्ग में जैसलमेर को लूटा और उस पर विजय की
?अहमदाबाद के निकट राजा राय कर्ण ने उस का मुकाबला किया लेकिन पराजित हुआ, वह अपनी पुत्री देवल देवी के साथ भागकर देवगिरी के शासक राम चंद्र देव के यहां शरण ली
?राजा राय कर्ण की पत्नी कमला देवी को बंदी बना लिया गया उसे दिल्ली लाया गया जहां अलाउद्दीन से विवाह कर उसकी प्रिय पत्नी बन गई
?आक्रमणकारियों ने सूरत समेत गुजरात के अन्य कई प्रमुख नगरों और सोमनाथ मंदिर जिसका कुमार पाल ने जीर्णोद्वार किया था को लूटा
?राजधानी अन्हिलवाडा पर आक्रमण किया और खंभात में हिंदू और मुसलमान जनता को भी नहीं बख्शा गया


    ?मलिक काफूर?
?खंभात बंदरगाह के आक्रमण के दौरान ही नुसरत खॉ  एक हिंदू हिजडा दास के रुप में प्राप्त हुआ जिसका नाम मलिक काफूर रखा गया
?इसे 1000 स्वर्ण दिनारों में खरीदा गया था इसलिए यह हजार दिनारी भी कहा जाता था
?मलिक काफूर ने  अलाउद्दीन के दक्षिण अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी मलिक काफूर दक्षिण अभियान में अलाउद्दीन का सेनापति था
? मलिक काफूर गुजरात (कैंबे )का रहने वाला था मलिक काफूर को अलाउद्दीन ने अपना मलिक नायब  और वजीर नियुक्त किया था
?मलिक काफूर को “ताज-उल-मुल्क काफूरी” की उपाधि प्राप्त थी

?गुजरात को जीतने के बाद इसे दिल्ली सल्तनत का प्रांत बना दिया गया और अलप  खां  को यहां का सूबेदार नियुक्त किया गया
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 2. ☘रणथंबोर अभियान(1301)☘
? अलाउद्दीन के रणथंबोर आक्रमण का उल्लेख जोधराज के हम्मीर रासो और नयन चंद्र सूरी रचित हंबीर महाकाव्य में मिलता है
?रणथंबोर राजपूतों का सुदृढ़  गढ़ था यद्यपि कुतुबुद्दीन ऐबक और इल्तुतमिश ने इसे जीत लिया था लेकिन पून: राजपूतों ने अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित कर ली थी
?अलाउद्दीन के आक्रमण के समय रणथंबोर पर चौहान वंशी राजा हम्मीर देव का शासन था
?अलाउद्दीन द्वारा रणथंबोर पर आक्रमण करने का प्रमुख कारण हम्मीर देव द्वारा अलाउद्दीन के विरोधी नव मुस्लिमों (मंगोल सेनापति मुहम्मद शाह और केहब्रु)कोअपने यहां शरण देना था
?1299 ईस्वी में अलाउद्दीन ने उलूग खॉ  और नुसरत खां के नेतृत्व में एक सैन्य अभियान  भेजा गया
?झायन पर अधिकार करने के पश्चात उन्होंने रणथंबोर के निकट अपना शिविर लगाया किले की घेराबंदी की गतिविधियों के निरीक्षण के दौरान गोफन द्वारा फेंके गए एक पत्थर से नुसरत खां की मृत्यु हो गई थी
?इस घटना के बाद तुर्क सेना में खलबली मच गई स्थिति का लाभ उठाते हुए हम्मीर देव ने उलूग खॉ पर आक्रमण किया जिसमें  उलूग खॉ पराजित हुआ
?तत्पश्चात अलाउद्दीन ने 1300 ईसवीं ने रणथंबोर के दुर्ग का घेरा डाला, लंबे समय तक घेरा डालने के बावजूद भी सुल्तान इस पर अधिकार नहीं कर सका
?अंत में उसने हम्मीर देव के एक मंत्री रणमल को प्रलोभन देकर अपनी और मिला लिया इस प्रकार रणमल  और रतिपाल की धृष्टता के कारण अलाउद्दीन खिलजी 1301 में रणथंबोर के किले पर अधिकार कर लिया
?हम्मीर देव और उसके शरण में आए नव मुसलमानों की हत्या कर दी गई, इस युद्ध में नव मुस्लिम मंगोलों ने हम्मीर देव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अल्लाउद्दीन के विरुद्ध युद्ध लड़े और वीरगति को प्राप्त हुए
?राजपूत स्त्रियों ने हम्मीर देव की पटरानी रंग देवी के नेतृत्व में जल जोहर कर दिया

 ?राजस्थान में प्रथम जौहर रणथंबोर के किले में हुआ जो कि जल जौहर हुआ था,  इस जोहर का पहला वर्णन फारसी साहित्य में है


?कवि अमीर खुसरो— रणथंबोर अभियान के दौरान अलाउद्दीन खिलजी के साथ था उसने अपनी एक प्रसिद्ध काव्य रचना( खजाइन -उल- फुतुह)  में रणथंबोर के किले का वर्णन किया और उस समय किए गए जोहर अनुष्ठानों का उल्लेख किया

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 3. ☘चित्तौड़ अभियान☘
 ?चित्तौड़ मेवाड़ की राजधानी थी यहां पर गुहिलोत वंश के राजपूतों का शासन था
?जनवरी 1303 ईस्वी में अलाउद्दीन ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया और किले का घेरा(8माह) डाला था उस समय वहां का शासक राणा रतनसिह था
?राणा रतन सिंह जी जैत्रसिंह के वंशज समीर सिंह का पुत्र था इनका दूसरा भाई कुंभकरण नेपाल चला गया वहां पर इस वंश की स्थापना की थी और स्वयं मेवाड़ की गद्दी पर बैठे थे
?अमीर  खुसरो अलाउद्दीन के चित्तौड़ अभियान में उसके साथ था


?चित्तौड़ के किले के बारे में अमीर खुसरो ने व्यक्त किया है कि–हिंदुओं का स्वर्ग सातवें  स्वर्ग से भी ऊंचा है
?अलाउद्दीन का चित्तौड़ अभियान उसके प्रसार वादी नीति का परिणाम था


?मलिक मुहम्मद जायसी के पद्मावत से ज्ञात होता है कि— अलाउद्दीन खिलजी ने संभवत:राणा रतन सिंह की अनुपम सुंदर पत्नी पद्मनी को प्राप्त करने के लिए यह अभियान किया था किंतु यह एक साहित्यिक सत्य हैं
?वस्तुत चित्तौड़ का सामरिक महत्व था इसीलिए अलाउद्दीन खिलजी इसे प्राप्त करना चाहता था
?अलाउद्दीन ने 1303 ईस्वी में चित्तौड़ पर आक्रमण किया और किले का घेरा डाला राजा रतन सिंह ने 7 माह तक बहादुरी से उसका मुकाबला किया अंत में अगस्त 1303  ईस्वी को किले पर अलाउद्दीन का अधिकार हो गया
?राजपूत स्त्रियों ने रानी पद्मिनी के साथ जोहर कर लिया। यह जोहर चित्तौड़ का पहला साका कहलाया
?राजपूत प्रमाणो के अनुसार राजा रतन सिंह युद्ध में लड़ता हुआ मारा गया


?किंतु इसामी और अमीर खुसरो ने लिखा है कि–राणा रतन सिंह ने अपनी पराजय के पश्चात आत्म समर्पण कर दिया और अलाउद्दीन की शरण में चला गया
?अमीर खुसरो जो इस अभियान में अलाउद्दीन के साथ था चित्तौड़ की घेराबंदी का विस्तार से वर्णन किया है, उसके अनुसार अलाउद्दीन के आदेश से किले में शरण लिए हुए 30000 किसानों का संहार कर दिया गया
?चित्तौड़ विजय के बाद अलाउद्दीन ने यहां का शासन प्रबंध अपने ज्येष्ठ पुत्र खिज्र खॉ को सौंप दिया और उसके नाम पर चित्तौड़ का नाम खिज्राबाद कर दिया
?लेकिन राजपूतों के दबाव के कारण 1311 में खिज्र खां को चित्तौड़ छोड़ने पर विवश होना पड़ा ऐसी स्थिति में अलाउद्दीन ने अपने एक मित्र जालौर का कान्हड़ देव का भाई राजपूत सरदार मुछाला मालदेव को चित्तौड़ का प्रतिनिधि शासक नियुक्त किया
?लेकिन राजपूतों ने मालदेव को अपने शासक के रूप में स्वीकार नहीं किया रतन सिंह के वंशज हम्मीर देव ने मालदेव को निरंतर परेशान किया
?मालदेव ने उसे संतुष्ट करने के लिए अपनी एक पुत्री का विवाह उसके साथ किया इसके बाद भी हम्मीर देव का चित्तौड़ जीतने का प्रयास जारी रहा
?अंत में 1321 में मालदेव की मृत्यु के पश्चात उसने चित्तौड़ और संपूर्ण मेवाड़ पर अधिकार कर लिया
?अलाउद्दीन की मृत्यु के पश्चात चित्तौड़ स्वतंत्र हो गया अलाउद्दीन के समय में ही चित्तौड़ के किले का पहले जौहर का वर्णन मिलता है
?पद्मिनी की कहानी का पहला वर्णन मलिक मोहम्मद जायसी ने अपने ग्रंथ पद्मावत में किया है
?चित्तौड़गढ़ के किले को अलाउद्दीन से पहले कभी किसी सुल्तान ने नहीं जीता था अलाउद्दीन ने चित्तौड़ घेरे को लगभग 8 माह तक बनाए रखा था

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 ??रानी पद्मिनी की कथा??
?पद्मनी की कथा का मुख्य आधार 1540 ईस्वी में मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा लिखित काव्य ग्रंथ पद्मावत है
?पद्मिनी सिंहल द्वीप के राजा गंधर्व सेन की पुत्री  और राणा रतन सिंह की अत्यंत सुंदर पत्नी थी
?रानी पद्मिनी के पास हीरामन नामक एक तोता था जो मानव की भाषा में बोलता था
?इसी तोते ने रतन सिंह  को पद्मिनी की सुंदरता का बखान किया था और 12 वर्ष के इंतजार के बाद पद्मिनी से विवाह किया
?पद्मावती के अनुसार अलाउद्दीन का चित्तौड़ पर आक्रमण करने का प्रमुख कारण पद्मिनी को प्राप्त करना था
?अलाउद्दीन खिलजी को  लंका की राजकुमारी पद्मिनी की सुंदरता का बखान राघव चेतन ने किया था
? राघव चेतन जादू टोने को जानने वाला एक ब्राह्मण था जिसे  रतन सिंह के द्वारा दरबार से निकाल दिया गया था
?जब अलाउद्दीन ने चित्तौड़ के किले का  घेरा डाला था तब उसने यह शर्त रखी कि यदि वह पद्मिनी की एक झलक देख लेगा तो वह वापस चला जाएगा
?राणा रतन सिंह ने यह शर्त स्वीकार कर ली, अलाउद्दीन को किले में लाया गया और एक दर्पण के द्वारा उसे रानी पद्मिनी की झलक दिखाई गई
?पद्मिनी की झलक देखकर अलाउद्दीन को उसे पाने की इच्छा और बढ़ गई जब राणा रतन सिंह और  उसके सैनिक अलाउद्दीन को किले के बाद छोड़ने आए तो अलाउद्दीन के सैनिकों द्वारा उन्हें बंदी बना लिया गया
?अलाउद्दीन राणा रतन सिंह को छोड़ने के बदले में रानी पद्मिनी का हाथ मांगा
?राजपूतों ने भी अलाउद्दीन के छल का प्रयुक्तर छल से देने का निश्चय किया
?पद्मनी ने यह संदेश भेजा कि वह अपने सेवकों के साथ आ रही है 700 पालकियॉ जिनमे वीर राजपूत सैनिक बैठे हुए थे सुल्तान के शिविर में पहुंचे और यह बताया गया कि उनमें रानी के पहरेदार है
?अलाउद्दीन धोखा खा गया ,राजपूत सैनिक अचानक  आक्रमण कर राणा रतन सिंह और रानी पद्मिनी को लेकर चित्तौड़ पहुंच गए
?गोरा और बादल ने चित्तौड़ दुर्ग के द्वार पर आक्रांताओं का सामना किया लेकिन दिल्ली की सेनाओं के विरुद्ध अधिक समय तक नहीं टिक सके
?गोरा और बादल राणा रतन सिंह के दो प्रसिद्ध सेनानायक थे
?इसके पश्चात राणा रतन सिंह ने कुंभलगढ़ के शासक देवपाल पर आक्रमण किया जिसने उसकी अनुपस्थिति में पद्मिनी को प्राप्त करने का प्रयत्न किया था
?इस युद्ध में देवपाल मारा गया लेकिन राणा रतन सिंह घायल हो गया और कुछ समय पश्चात उसकी मृत्यु हो गई,उसकी चिता के साथ रानी पद्मिनी ने भी   सोलह सौ महिलाओं  के साथ मिलकर जोहर कर लिया
?पद्मिनी की कहानी के विषय में विद्वानों में मतभेद है डॉक्टर गौरीशंकर ओझा, डॉक्टर बी.पी.सक्सेना और डॉक्टर के.एस.लाल इस कहानी की सत्यता में विश्वास नहीं करते हैं

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 4. ☘मालवा अभियान☘
?1305 ईस्वी में अलाउद्दीन ने मुल्तान के सूबेदार आईनूल-मुल्क को मालवा पर आक्रमण करने के लिए भेजा
?उस समय में मालवा का शासक महलकदेव था।हर नंद (कोका प्रधान )महलकदेव का सेनापति था जो एक योग्य राजनीतिज्ञ और कुशल योद्धा  था
?आईनुल-मुल्क ने महलकदेव को पराजित किया इसी युद्ध में उसका सेनापति हरनंद मारा गया, महलकदेव भागकर मांडू चला गया
?आईनुल-मुल्क ने मांडू पर चढ़ाई की इस युद्ध में महलकदेव मारा गया, 1305 ईस्वी में किले पर आईनुल- मुल्क का अधिकार हो गया
?तत्पश्चात उसने उज्जैन, धार और चंदेरी को जीत लिया। मालवा को दिल्ली राज्य में शामिल कर आईनुल-मुल्क को विजय क्षेत्रों का सूबेदार नियुक्त किया गया


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 5. सिवाना अभियान-1308-( जालौर)☘
?कान्हड़देव जालोर के चौहान शासकों में सर्वाधिक शक्तिशाली था
?अलाउद्दीन खिलजी की सेना के गुजरात आक्रमण के समय रास्ता देने को लेकर कान्हड़देव और अलाउद्दीन खिलजी के मध्य विरोध बढ़ गया
?1305ई. में  सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सेनानायक आईनुल मुल्क मुल्तानी को ससैन्य जालौर में भेजा था।, वह कान्हड़देव को समझा-बुझाकर दिल्ली ले आया
?दिल्ली दरबार का वातावरण उसके स्वाभिमान की विरुद्ध था
?फरिश्ता के अनुसार– सुल्तान ने हिंदू शासकों की शक्ति को चुनौती दी ,जिसे कान्हड़देव सहन नहीं कर सका और जालौर लोट  कर युद्ध की तैयारी करने लगा
?नैंसी री ख्यात ने –युद्ध का कारण कान्हणदेव के पुत्र वीरमदेव द्वारा सुल्तान की पुत्री फिरोजा से विवाह करने से इंकार करना बताया है
?1308 ईस्वी में सुल्तान ने जालौर के शक्तिशाली किले सिवाना पर अधिकार कर लिया इस समय  यहां का  शासक परमार राजपूत शीतल देव था
?एक कड़े संघर्ष के बाद शीतल देव युद्ध में पराजित हुआ और मारा गया और सिवाना दुर्ग का नाम  खैराबाद रखा और कमालुद्दीन गुर्ग को वहां का प्रतिनिधि नियुक्त किया
?सिवाना आक्रमण के समय अलाउद्दीन कि सैना लंबे संघर्ष के उपरांत पर भी इस पर अधिकार नहीं कर पायी,  तो
?अलाउद्दीन स्वयं सिवाना आया और उसने राजद्रोही भावले  की सहायता से दुर्ग के जल स्त्रोत में गौ रक्त मिलवा दिया और अंततः शीतल देव पराजित हुआ था

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 6. ☘जालौर अभियान-1311(कान्हणदेव)☘
?जालौर अभियान अलाउद्दीन का उत्तर भारत में अंतिम अभियान था
?वहां का शासक चौहानवंशीय शासक का कान्हड़देव (कृष्णदेव तृतीय) एक साहसी और महान योद्धा था
?1305 में कान्हड़देव ने अलाउद्दीन खिलजी की अधीनता स्वीकार कर ली थी
 ?नैणसी री ख्यात के अनुसार–अलाउद्दीन का जालोर पर आक्रमण करने का मुख्य कारण कान्हड़ देव के पुत्र वीरमदेव द्वारा अलाउद्दीन की पुत्री फिरोजा से प्रेम करने के बावजूद विवाह के लिए मना कर देना था
?इस कारण अलाउद्दीन ने 1308-09 में जालौर के विरुद्ध अभियान  प्रारंभ किया,इस कड़ी में पहला आक्रमण सिवाना दुर्ग पर किया गया था
?अलाउद्दीन खिलजी स्वयं जालौर पहुंचा और जालौर दुर्ग की जिम्मेदारी कमालुद्दीन को सौंपी गई
? इससे पूर्व 1311 ईस्वी में अलाउद्दीन ने अपनी दासी गुलबहिश्त से उत्पन्न पुत्र मलिक शाहीन  के नेतृत्व में कान्हणदेव के विरुद्ध एक सेना भेजी
?इस युद्ध में गुलबहीश्त भी  सेना के साथ जालौर गई लेकिन बुखार के कारण उसकी मृत्यु हो गई
?मलिक शाहीन युद्ध में पराजित हुआ और मारा गया अंत में अलाउद्दीन ने कमालुद्दीन गुर्ग के नेतृत्व में एक विशाल सेना भेजी
?कमालुद्दीन ने जालौर को जीत लिया का कान्हड़ देव और उसके सभी संबंधी मारे गए केवल उसका एक संबंधी मालदेव जीवित बचा
?जिसने अलाउद्दीन को प्रसन्न कर चित्तौड़ की सुबेदारी  प्राप्त की
?अलाउद्दीन ने जालौर को जीतकर उसका नाम बदलकर जलालाबाद कर दिया और इस आक्रमण के उपरांत अलाउद्दीन ने जालौर के किले में एक मस्जिद (अलाई तोपखाने) का निर्माण करवाया


?इस युद्ध में का कान्हण देव की पराजय का मूल कारण एक दहिया सरदार बीका के विश्वासघात को माना जाता है
?क्योंकि अलाउद्दीन को जालौर अभियान में प्रारंभ में सफलता नहीं मिली थी लेकिन दहिया सरदार बीका के विश्वासघात के कारण अलाउद्दीन ने जालौर पर अधिकार कर लिया

?इस समय जालौर में भी जोहर किया गया
?अखेयराज के शासन काल में पद्मनाभ द्वारा कान्हड़देव प्रबंध की रचना की गई थी


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 ??फिरोजा और वीरमदेव??
?मुहणोत नैंसी के ग्रंथ नैणसी री ख्यात में वर्णन आता है कि–अलाउद्दीन की अधीनता स्वीकार कर लेने के उपरांत का कान्हणदेव स्वयं दिल्ली दरबार में नहीं गया था
?उसने अपने पुत्र वीरमदेव को दिल्ली भेजा था, विरमदेव के दिल्ली प्रवास के समय अलाउद्दीन की पुत्री राजकुमारी फिरोजा वीरमदेव से प्रेम करने लगी
?सुल्तान ने पहले तो राजकुमारी को समझाया, लेकिन अंत में राजकुमारी  को वीरम से विवाह करने की अनुमति प्रदान कर दी गई
?विरमदेव ने एक मुस्लिम राजकुमारी से विवाह को धर्म विरुद्ध माना और चुपचाप जालौर लौटा आया
?जालौर विजय के उपरांत राजकुमार विरमदेव का सिर सुल्तान को पेश किया गया जिसे सुल्तान ने राजकुमारी  को भेज दिया
?राजकुमारी  फिरोजा ने  वीरमदेव के सिर के साथ यमुना में डूबकर आत्महत्या कर ली थी
?वीरमदेव अपने पिता की मृत्यु के पश्चात 3 दिन तक जालौर का शासक बना था