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🌲🍂  राजस्थान का ह्रदय -अजमेर🍂🌲


🔷 परिचय🔷
🌷🌾 अजमेर शहर का नाम अजयमेरू के नाम पर पड़ा हैं। जिसकी स्थापना राजा अजयपाल चौहान ने की थी अजमेर से 10 किलोमीटर दूर स्थित अजयपाल का मंदिर आज भी अजमेर के संस्थापक की याद दिलाता हैं 12 वीं शताब्दी में गुर्जर राजा अजयराज चौहान के समय यह एक महत्त्वपूर्ण नगर बन गया था उसी ने अजमेर में तारागढ़ का एक मजबूत किला बनवाया था
राजा अजय पाल ने 1113 ईस्वी में इस नगर की स्थापना की थी स्वतंत्रता के पश्चात 1 नवंबर 1956 को अजमेर को राजस्थान में मिला दिया गया और इसी के साथ राजस्थान का एकीकरण पूरा हुआ था

🌷🌾 भौगोलिक स्थिति🌾🌷
🌷🌾 अजमेर जिले के पूर्व में जयपुर एवं टोंक जिले पश्चिम में पाली उत्तर में नागौर एवं दक्षिण में भीलवाड़ा जिले की सीमाएं हैं नगर के पश्चिम में लगभग 5 किलोमीटर की दूरी है भारत के पश्चिम में स्थित राजस्थान के मध्य में 25°38 से 26°50 उत्तरी अक्षांश तथा 73°54 से 75°22 देशांतर के बीच स्थित है इसका क्षेत्रफल  8481 वर्ग किलोमीटर है
🌷🌾अजमेर नगर जिस पठारी भाग पर स्थित हैं व भारत का सर्वोच्च मैदान हिस्सा है यह संसार की प्राचीनतम मोड़दार अरावली पर्वत श्रेणी के बीच स्थित तारागढ़ पर्वत की तलहटी में बसा हुआ है अजमेर जिले के रामसर में बकरी विकास एवं चारा उत्पादन अनुसंधान केंद्र स्थित है मुर्गी पालन प्रशिक्षण केंद्र अजमेर में ही स्थित है गिरि वन के पशु अजमेर में अजमेरा के नाम से विख्यात है

🔷 महत्वपूर्ण स्थल🔷
🌷🍂 अढाई दिन का झोपड़ा🍂🌷
दरगाह के निकट ही अढ़ाई दिन का झोपड़ा है जिसे मोहम्मद गौरी के निर्देशन में कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे तुडवा कर इसी के स्थान पर ढाई दिन का झोपड़ा बनवाया परिवर्तन के समय सात मेहरा बनाएं गए तीन केंद्रीय मेहराबों पर 3 पंक्तियों में लिखावट है पत्थरों पर खुदी हुई अरबी नागरी या सूफी लिपि में है एक मुसलमान फकीर पंजाब शाह का उर्स यहा लगने से अड़ाई दिन का झोपड़ा कहलाने लगा

🌷🍂 अजयमेरु दुर्ग तारागढ़ ( गढबीठली दुर्ग)🍂🌷
राजा अजयराज चौहान द्वारा 2855 फीट ऊंची पहाड़ी पर निर्मित इस ऐतिहासिक दुर्ग मे ना जाने कितनी लड़ाइयां एवं शासकों का उत्थान पतन का काल देखा है यह किला पहले अजयमेरु दुर्ग के नाम से विख्यात था इसका विस्तार 2 मील के घेरे में हे एवम छोटे बड़े दो दरवाजें हैं सत्रहवीं शताब्दी में शाहजहां की एक सेनापति गौड़ राजपूत विट्ठल दास द्वारा इस किले की मरम्मत कराई गई थी किले के अंदर पानी के पांच कुंड एवं बाहर की ओर एक जालरा बना हुआ है घर में सबसे ऊंचे स्थान पर निर्मित मीर साहब की दरगाह दर्शनीय है यह दरगाह तारागढ़ के प्रथम गवर्नर मीर सैयद हुसैन खिंगसवार की है

🌷🍂 दरगाह🍂🌷
दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह, ख्वाजा साहब और गरीब नवाज के नाम से विश्व विख्यात है ख्वाजा भारत में चिश्ती सिलसिला के संस्थापक थे
यह दरगाह एक धार्मिक स्थल है जहाँ मुस्लिमों के साथ साथ अन्य सभी धर्मों के लोग अपनी हाजिरी देने आते हैं
दरगाह अजमेर शरीफ का भारत में बड़ा महत्व है खास बात यह भी है कि ख्वाजा पर हर धर्म के लोगों का विश्वास है। यहाँ आने वाले जायरीन चाहे वे किसी भी मजहब के क्यों न हों, ख्वाजा के दर पर दस्तक देने के बाद उनके जहन में सिर्फ अकीदा ही बाकी रहता है
👉 कहते हैं कि👇👇👇👇
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इरादे रोज बनते हैं, मगर फिर टूट जाते हैं,
वही अजमेर जाते हैं, जिन्‍हें ख्‍वाजा बुलाते हैं
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🌷🍂 चश्मा ए नूर🍂🌷
तारागढ़ के पश्चिम की तरफ घाटी के एक रमणीक स्थल का नाम चश्मा ए नूर है बादशाह जहांगीर ने अपने नाम नुरूद्दीन जहांगीर पर इसका नामकरण चश्मा ए नूर रखा
इस चश्मे का पानी अत्यंत मीठाहै


🔷 प्रमुख झीलें🔷
🌷🍂 पुष्कर झील 🍂🌷
🌷राजस्थान में विख्यात तीर्थस्थान है जहाँ प्रतिवर्ष प्रसिद्ध पुष्कर मेला लगता है। यह राजस्थान के अजमेर जिले में है। यहाँ ब्रह्मा का एक मन्दिर है
🌷पुष्कर को तीर्थों का मुख माना जाता है। जिस प्रकार प्रयाग को तीर्थराज कहा जाता है, उसी प्रकार से इस तीर्थ को “पुष्करराज” कहा जाता है। पुष्कर की गणना पंचतीर्थों व पंच सरोवरों में की जाती है। पुष्कर सरोवर तीन हैं –
👉ज्येष्ठ (प्रधान) पुष्कर
👉मध्य (बूढ़ा) पुष्कर
👉कनिष्क पुष्कर
ज्येष्ठ पुष्कर के देवता ब्रह्माजी, मध्य पुष्कर के देवता भगवान विष्णु और कनिष्क पुष्कर के देवता रुद्र हैं पुष्कर का मुख्य मन्दिर ब्रह्माजी का मन्दिर है। जो कि पुष्कर सरोवर से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है  मन्दिर में चतुर्मुख ब्रह्मा जी की दाहिनी ओर सावित्री एवं बायीं ओर गायत्री का मन्दिर है। पास में ही एक और सनकादि की मूर्तियाँ हैं, तो एक छोटे से मन्दिर में नारद जी की मूर्ति  एक मन्दिर में हाथी पर बैठे कुबेर तथा नारद की मूर्तियाँ हैं।
🌷तीर्थराज पुष्कर तीर्थराज पुष्कर अजमेर नगर के उत्तर-पश्चिम में अजमेर से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है मार्ग में मनमोहक व रमणीय घाटी है जो पुष्कर घाटी के नाम से विख्यात है यह तीर्थ समुद्र तल से 500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है भारत में ब्रम्हाजी एवं सावित्री का एकमात्र एवं प्राचीनतम मंदिर पुष्कर में ही है भारतीय धर्म शास्त्रों में पांच प्रमुख तीर्थ सर्वाधिक पवित्र माने गए हैं जिनमें पुष्कर मुख्य हैं चार अन्य तीर्थ में कुरुक्षेत्र गया गंगा और प्रयाग है पुष्कर झील पुष्कर झील अर्धचंद्राकार में फैली इस झील में 52 घाट बने हुए हैं उनमें वराह ब्रह्मा एवं गौ घाट सर्वाधिक पवित्र माने जाते हैं पुराने काल में गौ घाट को ही सर्वाधिक महत्व था माना जाता है कि ईसा पश्चात् 18 सालों में मराठा सरदारों ने इस का पुनर्निर्माण करवाया था यह वह स्थान है जहां गुरु गोविंद सिंह ने 1762 में गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया था अंग्रेजी शासन में महारानी मेरी तो उसने वहां महिलाओं के लिए पृथक से घाट का निर्माण कराया इसी स्थान पर महात्मा गांधी की अस्थियां प्रवाहित की गई समय से गांधी घाट भी कहा जाता है जेष्ठ कनिष्ठ धार्मिक दृष्टि से पवित्र माने जाते हैं कनिष्ठ को भी कहते हैं लोग ज्येष्ठ पुष्कर में ही स्नान और पूजा करना सर्वप्रथम पसंद करते हैं
🌷पूरे भारत में केवल एक यही ब्रह्मा का मन्दिर है। इस मन्दिर का निर्माण ग्वालियर के महाजन गोकुल प्राक् ने अजमेर में करवाया था। ब्रह्मा मन्दिर की लाट लाल रंग की है तथा इसमें ब्रह्मा के वाहन हंस की आकृतियाँ हैं। चतुर्मुखी ब्रह्मा देवी गायत्री तथा सावित्री यहाँ मूर्तिरूप में विद्यमान हैं। हिन्दुओं के लिए पुष्कर एक पवित्र तीर्थ व महान पवित्र स्थल है।
वर्तमान समय में इसकी देख–रेख की व्यवस्था सरकार ने सम्भाल रखी है। अतः तीर्थस्थल की स्वच्छता बनाए रखने में भी काफ़ी मदद मिली है। यात्रियों की आवास व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। हर तीर्थयात्री, जो यहाँ आता है, यहाँ की पवित्रता और सौंदर्य की मन में एक याद संजोए जाता है।
🌷रंगनाथ जी का मंदिर यह मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में है रंगनाथ जी का मंदिर दिव्य एवं आकर्षक है यह भारतीय वास्तुशिल्प की आधुनिक शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है यह मंदिर भगवान विष्णु लक्ष्मी और नरसिंह जी की मूर्तियां संबंधित है तथा 130 वर्ष पुराना है इस में स्थित श्याम वर भाषण से रंग नाथ जी की प्रतिमा पूर्व मुखी स्थित है ब्रह्मा जी का मंदिर पुष्कर मंदिर की पवित्र नगरी है यह मंदिर है परंतु मुख्य मंदिर ब्रह्मा जी का ही है जी का मंदिर में बीचों बीच बना हुआ है इसमें की चतुर्मुखी ब्रह्मा की मूर्ति प्रतिष्ठित है जी मंदिर में पातालेश्वर महादेव पंचमुखी महादेव नर्वदेश्वर महादेव लक्ष्मीनारायण गोरीशंकर सूर्यनारायण नारद दत्तात्रेय सप्त ऋषि और नव ग्रहों के मंदिर भी है
🌷 वराह मंदिर विष्णु के वराह अवतार की कथा से जुड़ा हुआ है इस अवतार पर ग्राहक का रूप धारण करके विष्णु ने पृथ्वी को उठा लिया था परंतु अभी जिस रुप में यह मंदिर प्रतिष्ठित है वह 11 वीं शताब्दी में निर्मित हुआ इस मंदिर का निर्माण चौहान राजा अर्णोराज ने 1133 -1150 इसी में करवाया था इसका जीर्णोद्वार महाराणा प्रताप के भाई सागर ने अकबर के शासनकाल में पूर्ण करवाया था

🌷यहां पर कार्तिक पूर्णिमा को पुष्कर मेला लगता है, जिसमें बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक भी आते हैं। हजारों हिन्दु लोग इस मेले में आते हैं। व अपने को पवित्र करने के लिए पुष्कर झील में स्नान करते हैं। भक्तगण एवं पर्यटक श्री रंग जी एवं अन्य मंदिरों के दर्शन कर आत्मिक लाभ प्राप्त करते हैं।
🌷राज्य प्रशासन भी इस मेले को विशेष महत्व देता है। स्थानीय प्रशासन इस मेले की व्यवस्था करता है एवं कला संस्कृति तथा पर्यटन विभाग इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयाजन करते हैं।
🌷इस समय यहां पर पशु मेला भी आयोजित किया जाता है, जिसमें पशुओं से संबंधित विभिन्न कार्यक्रम भी किए जाते हैं, जिसमें श्रेष्ठ नस्ल के पशुओं को पुरस्कृत किया जाता है। इस पशु मेले का मुख्य आकर्षण होता है।

🌷🌾 फायसागर🌾🌷
🌷अकाल राहत कार्यों के तहत अजमेर नगर परिषद द्वारा दो लाख 87 हजार रुपए की लागत से इस राज्य का निर्माण करवाया गया था इसका नाम कनिष्क निर्माणकर्ता अधिशासी अभियंता सफाई के नाम पर किया गया इस जगत में बांडी नदी का जल एकत्रित होता है फाय सागर की अधिकतम गहराई 26 फीट यहां से अजमेर के लिए पर जल का वितरण किया जाता है

🌷🌾 आना सागर🌾🌷
🌷दो पहाडियों के मध्य में पाल डालकर सम्राट पृथ्वीराज के पितामह राजा अरणोराज या आनाजी द्वारा सन् 1137 ई में निर्मित यह कृत्रिम झील शहर के अनुपम सौंदर्य में वृध्दि करती है बादशाह जहांगीर ने इस झील के किनारे शाही बाग बनवाया जिसका नाम दौलताबाग रखा गया
वर्तमान में इसका नाम सुभाष उघान है
बादशाह शाहजहां ने सन् 1627 ई में संगमरमर की पांच बारहदरिया बनवाकर इसके सौन्दर्य में चार चाँद दिये

🌷 खोबरानाथ मंदिर 
आना सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित अत्यंत प्राचीन खोबरा नाथ मंदिर और शादी देव मंदिर के नाम से विख्यात है 


🌷 अंतेड की माता 
आना सागर के उत्तर में दो छोटी पहाड़ियों के बीच अंतर माता का मंदिर स्थित है 


🌷 कोटेश्वर महादेव 
साबरमती नदी के पश्चिम किनारे पर स्थित कोटेश्वर मंदिर पृथ्वी से लगभग 50 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है जहां प्रतिवर्ष सावन सुदी तेरस को मेला लगता है 


🌷 मेयो कॉलेज
1875 ई में लॉर्ड मेयो की स्मृति में इस संस्था की स्थापना की गई 


🌷 झरणेश्वर महादेव 
तारागढ़ पहाड़ी के नीचे इंदरगढ़ नामक प्राचीन दुर्ग में स्थित शिव मंदिर झरनेश्वर महादेव कहलाता है


🌷 चामुंडा माता 
पहाड़ियों के बीच में चामुंडा माता का मंदिर स्थित है 


🌷 सैनिक विश्राम गृह
अजमेर का सैनिक विश्राम गृह राजस्थान का सबसे पुराना एवं सबसे बड़ा विश्रामगृह है 

🌷 सालार गाजी 
आनासागर से पुष्कर की तरफ जाने वाली सड़क के पास एक छोटी सी पहाड़ी पर सालार गाजी का चिल्ला बना हुआ है 


🌷 बीसलसर
बीसलसर नामक कृत्रिम झील का निर्माण 1152 ई से 1163 ई के बीच अजमेर के प्रतापी शासक द्वारा करवाया गया


 🌷 रानीजी का कुंड सरवाड़
सरवाड़ तहसील कार्यालय के पास यह कुंड 500 वर्ष पुराना है 


🌷 टो्डगढ रावली अभ्यारण
अजमेर, पाली तथा राजसमंद में स्थित यह अभ्यारण टो्डगढ क्षेत्र की अरावली पर्वत श्रृंखला में स्थित है अभ्यारण की स्थापना1983 ई में की गई 


🌷 सलेमाबाद (किशनगढ़ )
निम्बार्क सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र, प्राचीन वैष्णव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है 


🌷 नसीराबाद
इस छावनी के बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के सैनिकों ने 28मई 1857 को विद्रोह किया 


🌷 तबीजी 
देश के पहले राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है विदेशी किस्म के बीज से खेती की जाती है 


🌷 मान महल
आमेर के राजा मानसिंह के द्वारा निर्मित जो वर्तमान में होटल सरोवर के रूप में जाना जाता है 


🌷 हाथी भाटा 
जहाँगीर के द्वारा बनवाई गई पर्शियन पद्धति की एक हाथी की मूर्ति 


🌷 घोडे की मजार
तारागढ स्थित मीरा साहब की दरगाह भारत की एकमात्र मजार 


🌷 नरबड खेड़ा ब्यावर
वूलन इकाईयों को बढ़ावा देने हेतु रीको द्वारा वूलन कॉम्पलेक्स की स्थापना की गई है ब्यावर तिलपट्टी उधोग और को्टन मील के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है 


🌷 जेठाना
 एशियाई विकास बैंक के वित्तीय सहयोग से इस स्थापना की गई है इस स्थान पर 600 मेगावाट का पावर ग्रिड स्टेशन की स्थापना की गई

🌷🌾 बजरंग गढ़🌾🌷
🌷सागर के निकट पहाडी पर स्थित हनुमानजी का एक मंदिर काफी पुराना है यह मंदिर हिन्दुओं का पवित्र श्रद्धा स्थल बना हुआ है

🌷🌾 नसियांजी🌾🌷
🌷 स्वर्गीय श्री मूलचंद सोनी द्वारा इसका निर्माण प्रारंभ किया गया एवं उनके ही पुत्र स्वर्गीय सेठ टीकम चंद सोनी द्वारा 1865 में निर्माण कार्य पूरा करवाया गया यह जैन मंदिर प्रथम जैन तीर्थंकर आदिनाथ अथवा ऋषभदेव का है लाल रंग के कारण यह लाल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है

🌷🌾 राजपूताना संग्रहालय 🌾🌷
🌷अजमेर नगर के मध्य स्थित विशाल किला है इसे मैगजीन के नाम से जाना जाता है तत्कालीन राजपूताना और गुजरात क्षेत्र में युद्ध के संचालन के लिए सम्राट अकबर के शासनकाल में 1570 ईसवी में इस किले का निर्माण कराया गया था इसमें चार बड़े हैं इनको जोड़ने वाली दीवारों में कैमरे हैं इसका सबसे सुंदर भाग 84 फीट ऊंचा तथा 43 फीट चौड़ा दरवाजा है
इसे दौलत खाना भी कहते हैं

🌷🌾 दादाबाडी🌾🌷
दादाबाड़ी श्वेतांबर संप्रदाय कीर्तन संत जन वल्लभ सूरी के शिष्य श्री जिनदत्त सूरी की स्मृति में निर्मित दादाबाड़ी अजमेर रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिनदत्त दादा के नाम से जाने जाते थे इसलिए उनके समाधि स्थल को दादा बाड़ी के नाम से संबोधित किया गया सूर्य की स्मृति में आशा शुक्ला 10 और 11 को यहां वार्षिक मेला भरता है

🌷🌾 नारेली🌾🌷
🌷नारेली जैन मंदिर अजमेर में हैं, यह मंदिर श्री ज्ञानदोय तीर्थ के रूप में भी जाना जाता हैं यह अजमेर की सरहद पर जयपुर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। इस आधुनिक भवन पारंपरिक और समकालीन स्थापत्य शैलियों का एक सही मिश्रण होने के लिए मनाया जाता है। यह अपने आसपास के क्षेत्र में 24 लघु मंदिरों के जिनालय रूप में जाना जाता है


🌷🌾 केहरीगढ़ किला 🌾🌷 
किशनगढ़ की गूंदोलाव तालाब के निकट स्थित इस के लिए को अब हेरिटेज होटल बनाया गया है इसके लिए के आंतरिक भाग को जीवरक्खाकहते हैं

🌷🌾 मसुदा 🌾🌷
🌷राजस्थान का प्रथम पूर्ण साक्षर गांव है

🌷🌾 तिलोनिया 🌾🌷
🌷अजमेर जिले का यह गांव पैचवर्क के लिए चचिर्त है यहाँ समाज कार्य अनुसंधान केंद्र बीएड कॉलेज में बाल संसद स्थित है राजस्थान सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया
🌷राजस्थान की सबसे पुरानी डेयरी पदमा डेयरीइसी जिले में स्थित है
🌷 हाकीको बढ़ावा देने वाला राजस्थान का पहला एस्ट्रोटर्फ मैदान यही स्थापित है
🌷राजस्थान में पहली आयुर्वेदिक औषधि  प्रयोगशाला यही स्थापित है

🌲 केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक
🔹अढाई दिन का झोपड़ा
🔹आना सागर के किनारे संगमरमर के बरामदे तथा पुराने हमाम के अवशेष
🔹अजमेर जयपुर सड़क पर स्थित बावडी 🔹बादशाही हवेली तारागढ़ दुर्ग का द्वार
🔹दोलत बाग में स्थित सहेली बाजार की भवन 16 खंबे अब्दुल्ला खान तथा उसकी पत्नी का मकबरा बादशाही
🔹दिल्ली गेट त्रिपोलिया गेट अकबर द्वारा निर्मित कोस मीनार संख्या 1, 2, 3, 4, 7, 8,  खानपुरा की कोस मीनार चुगरा की कोस मीनार

🌲 राज्य सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक
🔹 अकबर का दुर्ग और का मुख्य द्वार
🔹संतोष बावला का मंदिर
🔹दिगंबर जैन संतों के स्मारक
🔹गोपीनाथ मंदिर
🔹 चामुंडा मंदिर

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निर्मला कुमारी

अजमेर

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