Bharatpur Prajamandal Andolan in Rajasthan | Bharatpur Praja Parishad

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भरतपुर प्रजामंडल का इतिहास ( History of Bharatpur Praja Mandal )

Bharatpur Prajamandal Andolan

 

भरतपुर में स्वतंत्रता आंदोलन का श्रीगणेश जगन्नाथदास अधिकारी व गंगा प्रसाद शास्त्री ने किया था इन्होने 1912 में हिंदी साहित्य समिति की स्थापना करी थी 1921 के महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से ही रियासती जनता के हृदय में आजादी की भावना जागृत हुई भरतपुर के कई युवकों ने अंग्रेजी भारत में जाकर असहयोग आंदोलन में सक्रिय भाग लिया जिनमें श्री निरंजन शर्मा और श्रीशंकर लाल प्रमुख थे इन युवकों ने भरतपुर में भी चेतना जागृत कर दी थी यह चेतना कही सेवा समिति, कहीं सी हिंदी साहित्य समिति और कहीं आर्य समाज जैसी प्रगतिशील संस्थाओं में योग देकर बढ़ती रही Bharatpur Prajamandal के नेता श्री जुगल किशोर चतुर्वेदी को जनता दूसरा जवाहर लाल नेहरू तथा गोकुल जी वर्मा को शेर ए भरतपुर कहा जाता था Bharatpur Prajamandal की स्थापना राजपूताना से बाहर रेवाड़ी हरियाणा में हुई थी

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सेवा समिति का निर्माण

1923-24 में सेवा समिति का निर्माण हुआ जिसके आरंभकर्ता पंडित सांवलसिंह जी व गया प्रसाद जी थे भरतपुर के किसान भी भारी करो से दबे होने के कारण राजा के विरोधी हो रहे थे 1924 में वहां के किसानों ने अपने नरेश के किशनसिंह से करो में कमी करने का अनुरोध किया इसके विपरीत किशन सिंह ने किसानों के विरुद्ध दमन कि नीति अपनाई जिसके फलस्वरूप भरतपुर का किसान आंदोलन उग्र हो गया 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 1927 के मध्य भरतपुर में वहां के नरेश किशन सिंह के विरुद्ध अनेक सभाओं का आयोजन किया इन सब के मध्य भाग्य वर्ष भरतपुर में हिंदी साहित्य का सम्मेलन हुआ जिस कारण भरतपुर नरेश किशन सिंह ने उत्तरदायी शासन की मांग को स्वीकार किया व जन जागृति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया  इस कारण भरतपुर के महाराजा किशन सिंह सबसे अधिक प्रगतिशील शासक माना जाता था भरतपुर में जनजागृती मे महाराज किशन सिह के उदार शासन का महत्वपूर्ण योगदान रहा इन्होंने हिंदी को प्रोत्साहित किया और उत्तरदायी शासन की मांग को स्वीकार किया भरतपुर के महाराजा किशन सिंह ने यह घोषणा 15 सितंबर 1927 को कि थी

हिंदी साहित्य का 17 वां अधिवेशन

भरतपुर में 1927 में गौरीशंकर हीराचंद ओझा की अध्यक्षता में हिंदी साहित्य का 17 वां अधिवेशन आयोजित किया गया था इस सम्मेलन में विश्व कवि रविंद्र नाथ टैगोर, महामना मदन मोहन मालवीय व सेठ जमनालाल बजाज भी सम्मिलित हुए थे भरतपुर नरेश किशन सिंह जी ने इन सभी को अपना मेहमान बनाया था किशन सिह के इस कार्य से एक तरफ ब्रिटिश सरकार नाराज हो गई थी वही दूसरी तरफ भरतपुर के किसान नेता और राष्ट्रीय जागरण में रुचि रखने वाले व्यक्तियों को देश के नेताओं से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ भरतपुर नरेश किशनसिंह ने जनता को शासन में भागीदार बनाना स्वीकार कर लिया

भरतपुर राज्य प्रजा संघ

सरकार ने महाराजा की गतिविधियों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें गद्दी छोड़ने पर विवश कर दिया उनके स्थान पर अल्प व्यस्क ब्रजेंद्र सिह को गद्दी पर बैठाया व प्रशासन के लिए एक अंग्रेज अधिकारी (मेकेंजी 1928) की नियुक्ति की गई जिसमें जगन्नाथदास अधिकारी को निर्वासित कर दिया और सार्वजनिक सभा व प्रकाशनों पर प्रतिबंधलगा दिया दीवान मेकेंजी ने जुलूसों प्रदर्शन और भाषणों पर प्रतिबंध लगा कर प्रशासन के सचिव ठाकुर देशराज, अध्यक्ष गोपी लाल यादव और अन्य कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया 1928 में भरतपुर राज्य प्रजा संघ की स्थापना हुई मेकेंजी कि दमनकारी नीति पुलिस अत्याचार एवं मौलिक अधिकारों पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में 1928 में भरतपुर राज्य प्रजा संघ की स्थापना की गई

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भरतपुर राज्य में राजनीतिक जागृति

भरतपुर राज्य में राजनीतिक जागृति का ठोस प्रयास हरिपुरा कांग्रेस के बाद सन 1938 में हुआ था श्री किशन लाल जोशी ने इस कार्य में पहल करी थी श्री किशन लाल जोशी सन 1930 के देशव्यापी नमक सत्याग्रह में भाग लेने के कारण अजमेर में 4 माह शेखावाटी आंदोलन के संबंध में 13 माह की सजा काट चुके थे अंग्रेजी दीवान मेकेंजी ने सार्वजनिक कार्यकर्ताओं को भरतपुर से निकाल दिया और राज्य के 4 उच्च अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में पदच्युत कर दिया दीवान के इस कार्य से राज्य में तनावपूर्ण स्थिति हो गई थी 1929-30 के समय तक राज्य के विद्रोही अथवा राष्ट्रीय भावना वाले लोगों से बाहर जाने से रह गए, उनमें से गोकुल जी वर्मा राज्य से टक्कर लेने वालों में सर्वप्रथम थे

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प्रजा परिषद संस्था

1930 में ठाकुर देशराज के साथ किशन लाल जोशी ने राजनीतिक जागृति का कार्य प्रारंभ किया इस राजनीतिक जागृति को आगे बढ़ाने में गोकुल चंद दिक्षित, मास्टर आदित्येंद्र, मदन मोहन लाल और श्री गौरीशंकर मित्तल प्रमुख थे 1929-30 में प्रजा परिषद नाम की एक संस्था स्थापित की गई थी इस संस्था के तत्वाधान में भरतपुर राज्य के संस्थापक महाराजा सूरजमल की जयंती मनाई गई राव गोपी लाल यादव इस संस्था के अध्यक्ष और ठाकुर देशराज इसके सचिव है इसका अधिवेशन भरतपुर में होना ही था ब्रिटिश दीवान मैकेंसी को यह बुरा लगा इस पर देशराज को उनके गांव जुरेहा में बंदी बना लिया गया यहां से भरतपुर तक 45 मील भूखे पेट पैदल चलाने को बाध्य किया

एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपी लाल यादव की गिरफ्तारी के वारंट जारी कर दिए गए गया प्रसाद चौधरी व लाला गंगा सहाय के मकानों की तलाशी ली गई लोगों को भाषण देने के कारण इसे अपराध मानकर बंदी बना लिया गया लेकिन दिवान मेकेंजी की दमन नीति के कारण भरतपुर की जनता उसको मत भरतपुर से निकालने को आमादा हो गई 1930 में जगन्नाथ कक्कड़ ,गोकुल वर्मा और मास्टर फकीरचंद आदि ने भरतपुर कांग्रेस मंडल की नींव डाली सितंबर 1937 को एक प्रतिनिधिमंडल जवाहरलाल नेहरु से मिलने भरतपुर रेलवे स्टेशन गया जवाहर लाल नेहरू की प्रेरणा से सितंबर 1937 में गोकुल चंद वर्मा, गोरी शंकर मित्तल आदि ने मिलकर भरतपुर कांग्रेस मंडल की स्थापना की

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पूर्वी राजपूताना राज्य परिषद समिति

भरतपुर के एक सम्मेलन में पूर्वी राजपूताना राज्य परिषद समिति बनाने का निर्णय किया गया इसमें भरतपुर, अलवर, धौलपुर, और करौली राज्य को सम्मिलित किया गया समिति का मुख्य ध्येय इन चारो राज्य में उत्तरदायी शासन की स्थापना करना था राज्य परिषद समिति का कार्यालय आगरा में स्थापित किया गया था 1937 में नेहरूजी की प्रेरणा से भरतपुर में कांग्रेस मंडल की स्थापना की गई थी कांग्रेस मंडल की गतिविधियों को प्रतिबंधित करने के लिए राज्य सरकार ने जाब्ता फौजदारी संशोधन कानून 1937 पारित किया इस कानून को काला कानून कहा गया

भरतपुर में प्रजामंडल की स्थापना का निर्णय

श्री किशन लाल जोशी, ठाकुर देशराज के साथ रेवाड़ी आए वहां जुबली ब्रेन अहीर हाई स्कूल में अध्यापन कार्यरत भरतपुर के राष्ट्रीय विचारों के कार्यकर्ता सर्वश्री गोपी लाल यादव, मास्टर आदित्येंद्र और जुगल किशोर चतुर्वेदी से मिले इनसे मिलते ही तत्काल ही भरतपुर में प्रजामंडल की स्थापना का निर्णय लिया गया प्रमुख कार्यकर्ता का सत्याग्रह करते हुए गिरफ्तार कर लिए जाने के बाद मा.आदित्येन्द्र जुगल किशोर चतुर्वेदी पर सत्याग्रह के संचालन की जिम्मेदारी दी गई इन्होने रेवती शरण शर्मा जगपत सिह, दौलत शर्माआदि साथियों के साथ अछनेरा उत्तर प्रदेश में शिविर लगाया इसके पश्चात इन्होने मथुरा से सत्याग्रह का संचालन किया यह आंदोलन लगभग 8 माह चला जिसमें 600 से अधिक सत्याग्रही गिरफ्तार हुए

इसी वर्ष Bharatpur Prajamandal ने फतेहपुर सीकरी में पूर्वी राजस्थान की जनता का राजनीतिक सम्मेलन किया था जिसकी अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साम्य वादी नेता एमएन राय ने की थी  जेल में जब स्त्री सत्याग्रहियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उनके बच्चो को जेल अधिकारियो ने उनसे छीन लिया विरोधस्वरूप स्त्री और पुरुष बंदियो ने भूख हड़ताल कर दी 21 सितंबर 1939 को मास्टर आदित्येंद्र की पत्नी जब महिलाओं के जुलूस का नेतृत्व कर रही थी  पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, उनके साथ उनकी सवा साल की पुत्री कांता भी थी इसके अलावा रेवती शरन की पत्नी राजेश्वरी देवी और राव गोपी लाल यादव की पत्नी धर्मवती को भी गिरफ्तार किया गया

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भरतपुर प्रजामंडल का गठन

हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन के पश्चात और भरतपुर राज्य के महाराजा की छत्रछाया में लोकतांत्रिक प्रशासन की स्थापना के उद्देश्य से 1938 में श्री किशन लाल जोशी, गोपी लाल यादव, मास्टर आदित्येंद्र और युगल किशोर चतुर्वेदी के प्रयासों से Bharatpur Prajamandal ( भरतपुर राज्य प्रजामंडल ) की स्थापना की गई गोपी लाल यादव को प्रजा मंडल का अध्यक्ष बनाया गया ठाकुर देशराज और पंडित रेवतीशरण शर्मा को उपाध्यक्ष बनाया गया किशन लाल जोशी को महामंत्री बनाया गया इसी बीच भरतपुर प्रजामंडल के कार्यकर्ता अपनी सरकार से प्रजामंडल को मान्यता प्रदान करने का अनुरोध करते रहे

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इसी समय Bharatpur Prajamandal ने फतेहपुर सीकरी में पूर्व राजस्थान की जनता का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसकी अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साम्य वादी नेता श्री एम एन राय ने की थी Bharatpur Prajamandal को मान्यता नहीं मिलने के कारण भरतपुर रियासत द्वारा इसे गैरकानूनी घोषित कर दिया गया जब कार्यकर्ताओं को प्रजामंडल के पंजीकरण में सफलता नहीं मिली तो 1939 में ठाकुर देशराज की धर्मपत्नी श्रीमती त्रिवेणी देवी और गोरी शंकर मित्तल की धर्मपत्नी श्रीमती भगवती देवी के नेतृत्व में सरकार को अल्टीमेटम दिया गया अगर सरकार एक माह में प्रजामंडल को मान्यता प्रदान नहीं करती है तो वह संघर्ष के लिए तैयार हो जाए

भरतपुर में सत्याग्रह

सरकार द्वारा इस चुनौती पर ध्यान नहीं देने के कारण 21 अप्रैल 1939 में भरतपुर में सत्याग्रह का श्रीगणेश किया गया भरतपुर के विभिन्न नगरो में सभाएं आयोजित की गई और नेताओं के ओजस्वी भाषण हुए सरकार की दमन नीति फिर से चालू हुई और करीब 473 व्यक्ति बंदी बना लिए गए इनमें ठाकुर देशराज, बाबा दूधाधारी, गौरी शंकर मित्तल, पंडित हुकमचंद, जगन्नाथ कक्कड़ और घनश्याम आदि कार्यकर्ता प्रमुख थे इस सत्याग्रह में गिरफ्तारी देने वालों में 32 महिलाएं भी थी प्रमुख कार्यकर्ताओं के बंदी हो जाने पर मास्टर आदित्येंद्र और जुगल किशोर चतुर्वेदी ने मथुरा में रहकर इस आंदोलन का संचालन किया

22 अप्रैल 1939 को सभा के दौरान गौर नंद जाट ने एक कविता पढ़ी थी जिसमें राज्य परिषद के गृह सदस्य और राजस्व सदस्य की आलोचना की गई श्रीमती त्रिवेणी देवी द्वारा इस सभा में एक गीत गाया गया इस गीत के माध्यम से भरतपुर वासियों से आग्रह किया गया कि वह जागे और अपने अधिकारों के लिए सत्याग्रह करें उत्तरदायी शासन की स्थापना की मांग स्वीकार करने पर भरतपुर महाराजा किशन सिह को गद्दी छोड़ने के लिए बाध्य किया गया 1939 के अंत में फकीरचंद कपूर ने जमीदार किसान सभा नामक एक नई संस्था स्थापित की गई थी यह भरतपुर  सरकार की समर्थित संस्था थी

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Bharatpur Praja Parishad

दिसंबर 1939 में महाराजा ब्रजेंद्र सिंह के राजसिंहासन ग्रहण करने के बाद ही शीघ्र प्रजामंडल और राज्य सरकार के बीच समझौता हो गया इस समझौते के तहत Bharatpur Prajamandal का पंजीकरण भरतपुर प्रजा परिषद के नाम से कर दिया गया भरतपुर प्रजा परिषद के अध्यक्ष मास्टर आदित्येंद्र को बनाया गया इस समझौते के तहत सभी राजनीतिक बंदियों को रिहाकर दिया गया भरतपुर प्रजा परिषद का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक समस्याओं को प्रस्तुत करना प्रशासनिक सुधारों पर बल देना और शिक्षा का प्रसार करना था भरतपुर प्रजा परिषद ने 27 अगस्त से 2 सितंबर 1940 को  राष्ट्रीय सप्ताह मनाया गया जिसमें अनेक प्रस्ताव पारित हूंए उनमे से एक भरतपुर में उत्तरदायी शासन स्थापित करने का प्रस्ताव था इन पारित प्रस्ताव को राज्य के प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया लेकिन सरकार ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया

भरतपुर प्रजा परिषद का प्रथम अधिवेशन

यह अधिवेशन 30 दिसंबर 1940 को जय नारायण व्यास की अध्यक्षता में आयोजित किया गया इस अधिवेशन में भी उत्तरदायी शासन की मांग पर बल दिया गया सरकार की तरफ से इसका पुरस्कार यह मिला की परिषद के नेता बंदी बना लिए गये थे 28 से 30 सितंबर 1941 को भरतपुर परिषद का विशेष अधिवेशन हुआ हीरा लाल शास्त्री ने इस विशेष अधिनेशन मे भाग लिया था भरतपुर मे उत्तरदायी शासन की स्थापना के उद्देश्य से 1941 में नगरपालिका के चुनाव हुए मास्टर आदित्येंद्र, बाबू राजबहादुर, अमर सिंह चतुर्वेदी, और जुगल किशोर चतुर्वेदी भरतपुर प्रजा परिषद के सदस्य चुने गए थे भरतपुर प्रजा परिषद के सम्मेलन के दौरान 21 मार्च को महिला सभा भी हुई थी जिसकी अध्यक्ष सरस्वती बोहरा ने की थी इस सभा में उनके अतिरिक्त जगत गोपाल की पत्नी ब्रजरानी और पुत्री राम रानी ने भी भाषण दिए थे भाषण में महिलाओं को अपने घर और बच्चों को साफ सुथरा रखने, चरखा कातने और देशसेवा की सलाह दी गई थी सभा में लगभग 15 से 20 महिलाओं ने भाग लिया था

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1942 के भारत छोडो आंदोलन में भरतपुर प्रजा परिषद् की भूमिका 

1942  भारत छोड़ो आंदोलन में भरतपुर प्रजा परिषद पीछे नहीं रहा भरतपुर प्रजा परिषद ने बड़ी तेजी से आंदोलन में भाग लिया भारत छोड़ो आंदोलन प्रारंभ होने के बाद 10 अप्रैल 1942 को भरतपुर में हड़ताल रखी गई जिसके फलस्वरुप बहुत से नेता और कार्यकर्ताओं को बंदी बना लिया गया इनमें से मास्टर आदित्येंद्र चौधरी, जुगल किशोर चतुर्वेदी, पंडित रेवती शरन, पंडित सांवल प्रसाद चतुर्वेदी और श्री गौरीशंकर मित्तल आदि प्रमुख थे महिला सत्याग्रह का नेतृत्व श्रीमती सरस्वती बोहरा कर रही थी इनको भी जो आंदोलन की केंद्र बिंदु बन चुकी थी, इन्हे भी गिरफ्तार कर लिया गया

19 अगस्त को गुरु दयाल के नेतृत्व में सत्याग्रह जोरहेेर से भरतपुर के लिए रवाना हुआ था सितंबर 1942 में राज्य में भयंकर बाढ़ आई थी बाढ़ और मलेरिया के प्रकोप के कारण भरतपुर प्रजा परिषद ने यह आंदोलन समाप्त कर दिया 19 अक्टूबर 1942 को महाराजा ने श्री ब्रज प्रजा प्रतिनिधि समिति नामक जन व्यवस्थापिका सभा के गठन की घोषणा की थी इसके बाद दीवान के.पी.एस.मेनन और प्रजा परिषद के बीच 29 अक्टूबर 1942 को एक समझौता संपन्न हुआ जिसके तहत राजनीतिक बंदियों को रिहा किया गया सरकार ने निर्वाचित सदस्य की बहुमत वाली विधानसभा बनाना स्वीकार कर लिया मार्च 1943 में श्री ब्रज प्रजा प्रतिनिधि समिति के चुनाव हुए जिसमें भरतपुर प्रजा परिषद को 23 व महाराजा द्वारा समर्थित किसान सभा को 14 स्थान प्राप्त है सरकार की असहयोग नीति के कारण प्रजा परिषद के सदस्य ने अप्रैल 1945 में अपना त्यागपत्र दे दिए

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भरतपुर प्रजा परिषद का दूसरा अधिवेशन

यह अधिवेशन 23-24 मई 1945 को बयाना में हुआ देशी राज्य लोक परिषद के सचिव जयनारायण व्यास ने अपने उद्घाटन भाषण में वयस्क मताधिकार पर आधारित उत्तरदायी शासन की जिसे कानून बनाने का अधिकार हो की स्थापना पर जोर दिया कन्हैया लाल वकील और मोहनलाल सुखाड़िया ने अपने भाषणों में राज्य में व्याप्त कुशासन की कटु आलोचना की इस सभा में अनाज और कपड़ा वितरण में अनियमितता की जांच के लिए जांच आयोग का गठन किया गया बेगार और भ्रष्टाचार जांच आयोग भी स्थापित किए गए 23 मई को ही पंडित सत्यदेव विद्यालंकार की अध्यक्षता में भरतपुर राज्य छात्र सम्मेलन हुआ इस अधिवेशन मे महिला सम्मेलन भी हुआ था जिसकी अध्यक्षता गणेश लाल की पत्नी बसंती देवी ने की थी इस सम्मेलन में जुगल किशोर चतुर्वेदी की पत्नी जमुना देवी ने अपने भाषण में स्त्री शिक्षा और खादी के प्रयोग पर बल दिया सरकार द्वारा ध्यान न देने पर 12 दिसंबर 1945 को भरतपुर प्रजा परिषद में पुनः सत्याग्रह आरंभ किया गया 1945 में भारत के गवर्नर लार्ड वेवल और बीकानेर महाराजा सादुल सिंह के भरतपुर आने पर आंदोलनकारियों ने वेवल वापस जाओ के नारे लगाए थे

भरतपुर प्रजा परिषद का तीसरा अधिवेशन

यह अधिवेशन 1946 में कामा में हुआ था जिस में उत्तरदायी शासन की स्थापना और बेगार प्रथा समाप्त करने की मांग की गई थी दुर्भाग्यवश राज्य के उपद्रव्य सांप्रदायिक दंगों में बदल गए मई 1946 में भरतपुर में मंत्रिमंडल के चुनावों की घोषणा की गई भरतपुर के तीनों राजनीतिक संगठनों प्रजा परिषद, किसान सभा और अंजुमन इस्लामिया ने चुनाव के बहिष्कार का निर्णय लिया जनवरी 1947 में सरकार ने जुलूस, आम सभा और भाषणों पर प्रतिबंध लगा कर प्रजा परिषद के अधिकांश नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया 4 जनवरी 1947 में भारत का गवर्नर जनरल लॉर्ड वेवल और बिकानेर महाराजा शार्दुल सिंह पक्षी विहार में जल मुर्गियों का शिकार करने के लिए आये शिकार के लिए अनुसूचित जाति के लोगों को बेगार के लिए मजबूर किया फलस्वरुप जुलूस हड़ताल और प्रदर्शन हुए 5 जनवरी 1947 को भुसावर में रमेश स्वामी नामक कार्यकर्ता को बस से कुचलवाकर मार दिया गया अंत में 1947 के आंदोलन के बाद राज्य सरकार और प्रज्ञा परिषद में समझोता हो गया

भरतपुर का मत्स्य संघ में विलय

3 अक्टूबर 1947 को भरतपुर के लक्ष्मण मंदिर पर आयोजित सभा में महाराजा ने लोकप्रिय मंत्रीमंडल बनाकर उसमें चार मंत्रियों को शामिल करने और 11 सदस्य की संविधान निर्मात्री समिति के गठन की घोषणा की दिसंबर 1947 में भरतपुर में एक लोकप्रिय सरकार का गठन हुआ दिसंबर 1947 को प्रजा परिषद के मास्टर आदित्येंद्र और गोपी लाल यादव को हिंदू महासभा के हरिदत्त शर्मा को और जमीदार किसान सभा के ठाकुर देशराज को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया तीन माह बाद 18 मार्च 1948 को भरतपुर का मत्स्य संघ में विलय हो गया और “सामंती राजशाही शासन” का अंत हुआ

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