Budget – Business Administration : बजट

Budget – Business Administration 

व्यावसायिक प्रशासन – बजट व उनके मूल सिद्धांत, बजटीय नियंत्रण

बजटिंग का अर्थ ( Meaning of budgeting )

बजट शब्द की उत्पत्ति फ्रांसीसी शब्द ‘बौजेटी या बौगेटी’ (Bouegettee) से हुई है। बजट में अर्थव्यवस्था की वस्तुस्थिति की झलक एवं उसे सुदृढ़ करने के उपाय सन्निहित होते हैं। बजट वह प्रबंधकीय उपकरण है जिसके माध्यम से उपलब्ध संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग करते हुए एक समन्वित योजना बनाई जाती है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में इसे वार्षिक वित्तीय विवरण के नाम से उल्लेखित किया गया है। साधारणतया बजट किसी एक वित्तीय वर्ष में सरकार की अनुमानित आय एवं व्यय का विवरण होता है जिसे विधायिका में प्रस्तुत एवं विधायक का द्वारा स्वीकृत कर वैधानिक दस्तावेज का रूप दिया जाता है।

बजटिंग में न केवल बजट निर्माण को सम्मिलित किया जाता है बल्कि इसमे बजट के क्रियान्वयन एवं मूल्यांकन को भी यथोचित स्थान दिया जाता है।

बजटिंग के प्रकार ( Types of budgeting )

1. निष्पादन बजट ( Performance budget ) –  निष्पादन बजट की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई। यह परंपरागत बजटिंग के खर्चों की मात्रा पर अत्यधिक जोर देने की प्रतिक्रिया के स्वरूप हुई। जहां परंपरागत बजटिंग बजट में खर्चों की वृद्धि पर ध्यान देती है वही निष्पादन बजट इन खर्चों के बजाय उनसे प्राप्त होने वाले उद्देश्यों पर जोर देती है।

निष्पादन बजट में किसी भी कार्य या उद्देश्य को कार्य, कार्यक्रम, क्रियाकलाप, योजना के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। निष्पादन बजट कार्यों, क्रियाओं एवं परियोजनाओं पर आधारित वह बजट होता है जो कार्य निष्पादन के साधनों जैसे कार्मिक,आपूर्ति, संयंत्र आदि के स्थान पर निष्पत्ति एवं दी जाने वाली सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करता है।

निष्पादन बजट को कार्यक्रम सह निष्पादन बजट, कार्यक्रम बजट, नियोजन एवं निष्पादन बजट पद्धति के नाम से भी जाना जाता है।

भारत में निष्पादन बजटिंग की सर्वप्रथम सिफारिश संसद की आकलन समिति ने 1950 में की थी। वास्तव में भारत में निष्पादन बजटिंग को श्री मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में गठित प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग की सिफारिश पर 1958 में लागू किया गया था।

प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग के अनुसार निष्पादन बजटिंग के निम्नलिखित लाभ होते हैं –

  1. यह धन खर्च करने के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है।
  2. बजटिंग की यह प्रणाली बजट निर्माण में भी आसान है।
  3. यह बजटिंग विधायिका की वित्तीय साक्षरता में वृद्धि करती है क्योंकि विधायिका के सदस्यों के लिए इसे समझना आसान होता है।
  4. निष्पादन बजटिंग लेखा परीक्षा को अधिक सक्षम एवं आसान बनाती है।
  5. बजटिंग इस प्रणाली में उत्तरदायित्व का विकेन्द्रित ढाँचा निर्मित होता है जो की संगठन के विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रमों एवं गतिविधियों के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उत्तरदायी होता है।
  6. यह प्रणाली ‘उद्देश्य द्वारा प्रबंध’ सिद्धांत पर आधारित है।

प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग ने अपने प्रतिवेदन में कहा था कि ऐसे विभागों को जो विकास कार्यक्रमों के प्रत्यक्ष रूप से प्रभारी होते हैं, निष्पादन बजटन को लागू करना चाहिए। ऐसा केंद्र एवं राज्य दोनों जगह पर किया जाना चाहिए।

2. शून्य आधारित बजट ( Zero based budget )-  शून्य आधारित बजटिंग का आशय ऐसी बजटिंग प्रणाली है जिसमें किसी भी मद पर किए जाने वाले खर्चों को व्यापक आलोचना के बाद ही सम्मिलित किया जाता है।

इसमें बजट में किए जाने वाला प्रत्येक व्यय उस व्यय की तर्कसंगत या सार्थक जांच के बाद ही सम्मिलित किया जाता है। यह बजटिंग प्रणाली सभी योजनाओं को कोई आरंभिक धनराशि आवंटित न कर के प्रत्येक वर्ष उन्हें नए सिरे से चालू मानती है।

शून्य आधारित बजट में अनावश्यक खर्चों पर तुरंत ही रोक लग जाने से जनता पर करो का बोझ कम हो जाता है। शून्य आधारित बजट लागत लाभ विश्लेषण पर आधारित होती है, जिससे निम्न प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों का परित्याग कर दिया जाता है।

इस प्रणाली का अनुसरण करने पर सरकार के द्वारा चलाई जा रही अनावश्यक योजनाएं या कार्यक्रम धनराशि आवंटित ना होने के कारण अपने आप बंद हो जाती है। जिससे नए कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध हो जाती है और साथ ही इससे बजट की प्रभावशीलता या फल साधना में बढ़ोतरी होती है। इस प्रकार यह किसी सरकार के लागतों में कमी करने का एक सशक्त साधन होती है।

शून्य आधारित बजटिंग में सीमित संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग, निम्न उत्पादकता वाले कार्यक्रमों का परित्याग, औचित्यपूर्ण व्यय, उपलब्ध संसाधनों का विभिन्न विभागों या कार्यक्रमों में विवेकपूर्ण आवंटन एक साथ प्रभावी रूप से संभव होता है। साथ ही यह नियोजन, बजट प्रक्रिया और पुनरीक्षण को आपस में जोड़कर वित्तीय प्रणाली को अधिक कारगर एवं उपयोगी बनाता है।

3. जेंडर बजटिंग ( Gender Budgeting )

जब बजट के प्रावधानों में महिला सशक्तिकरण योजनाओं एवं कार्यक्रमों को अधिक महत्व दिया जाता है तो उस बजट प्रणाली को जेंडर बजटिंग कहते हैं।

4. PPBS 

इस प्रणाली में वित्त के आवंटन के क्रम में योजना, कार्यक्रम एवं प्रत्येक कार्यक्रम में लागत लाभों के संदर्भ में वित्त का आवंटन किया जाता है, जो प्रभावी लक्ष्य प्राप्ति में सहायक होता है। वस्तुतः यह निष्पादन बजट जैसी प्रणाली है।

सूर्यास्त विधान ( Sunset statement )

जब बजट में एक निश्चित समय सीमा के बाद वित्त आवंटन व्यवस्था को स्वतः ही रोकने का प्रावधान अधिनियम में कर दिया जाता है तो उसे सूर्यास्त विधान कहते हैं।

बजट पर नियंत्रण ( Budget control )

बजटरी नियंत्रण का आशय है कि बजट के माध्यम से नियंत्रण करना। बजट नियंत्रण प्रबंध का एक महत्वपूर्ण यंत्र होता है। वस्तुतः यह नियोजन का एक साधन होता है जो समन्वय के द्वारा नियंत्रण तक पहुंचता है।

बजट नियंत्रण के उद्देश्य ( Objectives of budget control )

बजट नियंत्रण का प्रमुख उद्देश्य व्यवसाय की योजना का उसके उपलब्ध साधनों से तालमेल बिठाना तथा संस्था के कार्यों को मितव्ययिता एवं कुशलता से संचालित करके योजना को सफलतापूर्वक कार्यान्वित करना होता है।

बजट नियंत्रण के उद्देश्य व्यवसाय की प्रत्येक क्रिया के लिए नियोजन करना, संस्था की गतिविधियों में तालमेल करना, संस्था के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए संबंधित कार्मिकों व विभागों के अधिकारियों का दायित्व निर्धारित करना होता है।

बजट नियंत्रण के लाभ ( Benefits of Budget Control )

  1. पूर्व नियोजन के लाभ
  2. व्यावसायिक क्रियाओं में स्थायित्व
  3. प्रशासकीय क्रियाओं में समन्वय एवं सहयोग
  4. अधिकारों, कर्तव्यों एवं दायित्वों का स्पष्ट निर्धारण
  5. उत्पादन लागत में कमी
  6. करमचारी मूल्यांकन में सहायक
  7. श्रम प्रबंध संबंधों में सामंजस्य
  8. लेखांकन विभाग की कुशलता में वृद्धि

 

Specially thanks to Post Writer ( With Regards )

P K Nagauri