Economy of Rajasthan Questions-3

Economy of Rajasthan Questions-3

राजस्थान की अर्थव्यवस्था

Economy Questions for  IAS, IPS, SSC CGL, IBPS, RRB NTPC, Bank, Insurance, RBI, MPSC, RAS Pre and Mains Exam, NET, B.ED, CTET, AIRFORCE, RAILWAY, POLICE, High Court, Ras, Reet, Teacher, UPPSC, MPPSC, RPSC, DSSSB, IES/ ISS exams.

 

प्र 1. राजस्थान में आर्थिक विकास की गति को तीव्र करने के लिए तीन प्रमुख आधार बताइए ?

उत्तर- 1. इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे-बिजली, सड़क,जलापूर्ति पर अधिक ध्यान

2. खनन विकास

3. पशुधन और डेयरी विकास

प्र 2. “RUDF”

उत्तर- राज्य में “राजस्थान अरबन डेवलपमेंट फंड” की स्थापना 400 करोड रुपए से शहरी स्थानीय निकायों के लिए की गई थी इसमें 150 करोड रुपए का अंशदान राज्य सरकार ने दिया था और 250 करोड रुपए शहरी स्थानीय निकाय ने स्वयं अर्जित किए थे।

प्र 3. सहस्त्राब्दि विकास के क्या क्या लक्ष्य हैं ?

उत्तर-

  1. लैंगिक समानता को बढ़ाना और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य को प्राप्त करना
  2. शिशु मृत्यु दर में कमी एवं मातृत्व स्वास्थ्य में सुधार।
  3. गरीबी और भूखमरी को समाप्त करना।
  4. विकास के लिए वैश्विक साझेदारी की धारणा को अपनाना।

प्र 4. राजस्थान में संचालित 5 फ्लैगशिप कार्यक्रमों के नाम बताइए ?

उत्तर- 1. मुख्यमंत्री पशुधन निशुल्क दवा योजना

2. मुख्यमंत्री अन्न सुरक्षा योजना

3. राजस्थान जननी शिशु सुरक्षा योजना

4. मुख्यमंत्री शहरी बीपीएल आवास योजना

5. मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना

प्र 5. आर्थिक संवृद्धि दर किसे कहते हैं ?

उत्तर- आर्थिक संवृद्धि दर- शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद में परिवर्तन की दर “आर्थिक संवृद्धि दर” कहलाती है। इसको राष्ट्रीय आय की वृद्धि दर भी कहा जाता है।

लघूतरात्मक ( 50 से 60 शब्द )

प्र.6 ग्रामीण विकास के कार्यक्रम कौन-कौन से हैं

उत्तर- 1. मनरेगा

2. इंदिरा गांधी आवास योजना

3. मेवात क्षेत्र विकास कार्यक्रम

4. मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम

5. राजस्थान ग्रामीण आजीविका प्रोजेक्ट

6. मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम पंचायत योजना

7. प्रधानमंत्री आवास योजना

प्र 7. “MNREGA”

उत्तर-MNREGA-महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट

ग्रामीण बेरोजगारी,भूख और गरीबी से निजात दिलाने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना “(नरेगा)” का शुभारंभ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2 फरवरी 2006 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से किया। केंद्र सरकार ने इस योजना का नाम “नरेगा” से “मनरेगा” कर दिया है। यह फैसला केंद्र सरकार ने 2 अक्टूबर 2009 को गांधी जयंती के शुभ अवसर पर लिया।

इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को वर्ष में कम से कम 100 दिन रोजगार की गारंटी दी गई। इस योजना के पहले चरण में देश के 27 राज्यों के 200 चुनिंदा जिलों को चुना गया। बाद में 1 अप्रैल 2008 से इस योजना को संपूर्ण देश में लागू कर दिया गया।

प्र 8. राज्य की 12वी पंचवर्षीय योजना के समक्ष कौन-कौन सी चुनौतियां थी ? विश्लेषण कीजिए। ( निबंधात्मक )

उत्तर- राज्य की 12वीं पंचवर्षीय योजना में सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय व्यवस्था रही है क्योंकि उस समय भारत आर्थिक मंदी की समस्या का सामना कर रहा था इसीलिए राज्य को भी आर्थिक मंदी की समस्या का सामना करना पड़ा था

12वीं पंचवर्षीय योजना में सरकार ने अनेक विकास कार्यक्रम रखे। राज्य सरकार ने पूर्व में कृषि नीति का प्रारूप भी तैयार किया था उनको अंतिम रूप देकर उनके क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया ताकि राज्य में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाया जा सके।

12वीं पंचवर्षीय योजना की सबसे बड़ी चुनौती बेरोजगारी के रूप में उभर कर आयी। जिसका समाधान आर्थिक विकास की गति को तेज करके किया जा सकता था इसीलिए राज्य सरकार ने आर्थिक विकास की गति को तेज करने के लिए प्रबल प्रयास किए।

राज्य सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र पर अधिक बल दिया गया ताकि आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा सकें।

सरकारी तंत्र में निर्णय की प्रक्रिया को तीव्र किया जाना चाहिए था शासन और प्रशासन को चुस्त और दुरुस्त करके इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था

PPP मॉडल की कमियों में सुधार किया जाना चाहिए था ताकि विकास की गति को संबल प्राप्त हो सकें।

12वीं पंचवर्षीय योजना में राज्य सरकार ने सतत व समावेशी दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा ताकि सभी क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए जा सकें।

प्र 9. राजस्थान में आगामी वर्षों में आर्थिक उदारीकरण को सफल बनाने के लिए कौन से प्रयास किए जाने चाहिए। ( निबंधात्मक )

उत्तर- बदलती हुई परिस्थितियों के अनुसार नीतियों में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए ताकि आर्थिक विकास की गति तेज हो सके और लोगों की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।

राज्य में आर्थिक सुधारों व उदारीकरण को सफल बनाने के लिए राजस्व घाटे और राजकोषीय घाटे को कम किया जाना चाहिए।

राज्य को कृषि,पशुपालन, डेयरी विकास और जल प्रबंधन के लिए दीर्घकालीन नीतियों का क्रियान्वयन करना चाहिए।

राज्य में सार्वजनिक क्षेत्र की अधिकांश इकाइयां घाटे में चल रही है अतः उनका निजीकारण या एकीकरण करके उनकी पुनर्स्थापना करनी चाहिए। इसके लिए वित्तीय ढांचे में आवश्यक परिवर्तन किया जाना चाहिए।

उद्योग खनिज सड़क पर्यटन विद्युत जैसे क्षेत्रों के लिए एक “कोर प्लान” तैयार किया जाना चाहिए। जिसमें जिलेवार परियोजनाएं चिन्हित की जायें और उनके क्रियान्वयन के लिए संगठन और संस्थाएं निर्धारित की जानी चाहिए। राज्य सरकार ने 2015 में रिसरजेंट राजस्थान कार्यक्रम किया,जो इस दिशा में एक सार्थक कदम है। वित्तीय व्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे विश्व बैंक,एशियन डेवलपमेंट बैंक आदि को निवेश के लिए संपर्क स्थापित करना चाहिए।

राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा चिकित्सा पेयजल ग्रामीण विकास आदि में अधिक व्यय का आवंटन किया है जो उचित भी है लेकिन इन कार्यक्रमों को ओर सशक्त एवं लाभकारी बनाने की आवश्यकता है। योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन करना चाहिए ताकि समाज के कमजोर वर्ग इसका उचित ढंग से लाभ ले सकें।

राज्य सरकार को समय-समय पर आर्थिक रिपोर्ट जारी करनी चाहिए जिसमें सरकार की विभिन्न योजनाओं कार्यक्रमों नीतियों और प्रोजेक्टओं की प्रकृति का लेखा-जोखा तथा समीक्षा प्रस्तुत की जानी चाहिए इससे कौन से क्षेत्रों में सुधार हुआ है या नहीं इसका स्पष्टीकरण हो सकेगा।

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

DINESH MEENA