Master साहित्य समाज का दर्पण है पर निबंध
Join thousands of students accessing our vast collection of expertly curated tests, daily quizzes, and topic-wise practice materials for comprehensive exam preparation.
.1nk8s0hgo-y3u.png)
Join thousands of students accessing our vast collection of expertly curated tests, daily quizzes, and topic-wise practice materials for comprehensive exam preparation.
जो साहित्य मनुष्य को उसकी समस्त आशा-आकांक्षाओं के साथ उसकी सभी सफलताओं और दुर्बलताओं के साथ हमारे सामने प्रत्यक्ष ले आकर खड़ा कर देता है, वही महान् साहित्य है। - डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी
प्रस्तावना
साहित्य समाज का दर्पण है क्योंकि किसी देश की स्थिति कैसी है, यह वहां के साहित्य से पता चलती है। जिस प्रकार देश में प्रचलित गीत कविताएं, दोहे, शायरी आदि में समाज प्रकृति की मानवीय झलक देखने को मिलती है।
वैसे ही….. ऐ मेरे वतन के लोगों गीत से लेकर ........बारिश की जाए तक के गीतों में साहित्य को गीत के माध्यम से प्रकट किया गया है। कविता लेखन साहित्य को समाज से जोड़कर अपने अनुभव व्यक्त करते हैं।
कवि व लेखक समाज के मस्तिष्क भी है और मुख भी। साहित्यकार समाज के भाव को व्यक्त कर सजीव व शक्तिशाली बना देते हैं।
नहिं मधुर मधु नहिं, विकास इहि काल। अली कली ही सो बंध्यो, आगे कौन हवाल।।
साहित्य का लक्ष्यसाहित्य की विजय शाश्वत होती है और शस्त्र की विजय क्षणिक। हिंदी को आगे बढ़ाना है। उन्नति की राह ले जाना है, केवल 1 दिन ही नहीं हमने नित्य हिंदी दिवस मनाना है। साहित्य का लक्ष्य सीमित नहीं विस्तृत है। कवि, लेखक, गायक आदि गीत- काव्य के माध्यम से साहित्य का दर्पण प्रस्तुत करते है।
उपसंहार
अंत में कह सकते हैं कि समाज और साहित्य में आत्मा और शरीर जैसा संबंध हैं। समाज और साहित्य को एक दूसरे के पूरक हैं इन्हें एक -दूसरे से अलग करना संभव नहीं है। अतः साहित्यकार सामाजिक कल्याण को ही अपना लक्ष्य बनाकर साहित्य का सृजन करते रहै।