Financial Statement Analysis : वित्तीय विवरण विश्लेषण

Management : Financial Statement Analysis

प्रबंधन :

Lekhashashtra … – Philoid

वित्तीय विवरण एक संस्था के ऐसे किसी भी पर प्रलेख को कहा जाता है जिसमें संस्था से संबंधित आवश्यक वित्तीय सूचनाओं का वर्णन किया गया हो।

आधुनिक समय में लेखांकन की प्रविधियों में पर्याप्त शोध एवं विकास का कार्य हुआ है। वर्तमान कुछ दशकों से कंपनियां आर्थिक चिट्ठा एवं लाभ हानि खाते के अतिरिक्त कोष प्रवाह विवरण, रोकड़ प्रवाह विवरण, मानव संसाधन लेखांकन, चालू लागत लेखांकन, मूल्य संवर्धन विवरण, सामाजिक चिट्ठा एवं सामाजिक लाभ हानि विवरण, लाभदायकता विवरण तथा शक्ति उपयोग एवं क्षमता उपयोग से संबंधित विवरण भी तैयार करती है। इन सभी को वित्तीय विवरणों का एक भाग ही माना जाता है।

वित्तीय विवरणों के महत्व को स्पष्ट करते हुए हेनरी फेयोल लिखा है कि वित्तीय विवरण किसी भी उपक्रम की आंखें होती है।

प्रमुख वित्तीय विवरण  ( Key Financial Statements )

  1. स्थिति विवरण अथवा चिट्ठा
  2. आय विवरण अथवा लाभ हानि खाता
  3. कोष प्रवाह विवरण
  4. रोकड़ प्रवाह विवरण
  5. मूल्य संवर्द्धन विवरण
  6. मानव संसाधन लेखांकन
  7. सामाजिक चिट्ठा
  8. सामाजिक आय विवरण अथवा सामाजिक लागत एवं आय विवरण

स्थिति विवरण अथवा चिट्ठा ( Status report ) –  स्थिति विवरण को आर्थिक चिट्ठा, वित्तीय स्थिति का विवरण, संपत्ति एवं दायित्वों का विवरण, साधनों एवं दायित्वों का विवरण, संपत्तियों, दायित्वों एवं पूंजी का विवरण इत्यादि नामों से जाना जाता है। यह विवरण यह बताता है कि एक निश्चित समय बिंदु पर व्यवसाय की आर्थिक स्थिति क्या है?

लाभ हानि खाता या आय विवरण ( Profit loss account or income statement )  –  लाभ हानि खाता एक निश्चित अवधि की क्रियाओं या व्यवहारों का एक ऐसा सारांश होता है इसमें उस अवधि से संबंधित आगमों, व्ययों एवं शुद्ध आय को लेखाकर्म के सिद्धांतों के आधार पर प्रदर्शित किया जाता है। इस खाते के नाम पक्ष की ओर व्यापार के सभी व्ययों तथा हानियों को तथा जमा पक्ष की ओर सभी आगमों तथा लाभों को प्रदर्शित किया जाता है। दोनों पक्षों का अंतर लाभ या हानि कहलाता है।

कोष प्रवाह विवरण ( Fund flow statement ) – कोष प्रवाह विवरण एक निश्चित समय के अंतर्गत व्यवसाय में प्रयुक्त कार्यशील पूंजी के परिवर्तनों को दर्शाता है। इसके अंतर्गत कार्यशील पूंजी के विभिन्न स्रोतों एवं उपयोग का वर्णन किया जाता है।

रोकड़ प्रवाह विवरण ( Cash flow statement ) –  रोकड़ प्रवाह विवरण एक निश्चित समय के अंतर्गत व्यवसाय में प्रयुक्त रोकड़ या नकद पूंजी के परिवर्तनों को दर्शाता है। इसके अंतर्गत नकद के विभिन्न स्रोतों एवं उपयोगों विश्लेषण किया जाता है। यह विवरण किन्ही दो अवधियों के मध्य व्यवसाय के नकद शेष में हुए परिवर्तन के कारणों की व्याख्या करता है।

मूल्य संवर्द्धन विवरण ( Value addition details )- एक निश्चित समय सीमा के दौरान व्यवसाय द्वारा कच्चे माल के मूल्य में उपयोगिता वृद्धि को मूल्य संवर्द्धन के नाम से जाना जाता है। लेखांकन विचारधारा के अनुसार मूल्य संवर्द्धन से तात्पर्य विक्रय मूल्य एवं सेवाओं से प्राप्त राशियों के योग में से बाह्य साधनों से क्रय किए गए माल एवं सेवाओं की लागत घटाने से प्राप्त राशि से होता है।

सामाजिक चिट्ठा ( Social blog ) – सामाजिक चिट्ठे के अंतर्गत आर्थिक चिट्ठे की मदों के अतिरिक्त सामाजिक संपत्तियों एवं सामाजिक दायित्वों को दर्शाया जाता है। सामाजिक संपत्तियों में मानव संसाधन एवं सार्वजनिक हित हेतु प्रयुक्त सम्पत्तियों को सम्मिलित किया जाता है जबकि सामाजिक दायित्वों में संगठनात्मक समता एवं सामाजिक समता को सम्मिलित किया जाता है।

सामाजिक आय विवरण ( Social income statement ) –  सामाजिक आय विवरण में संस्था द्वारा समाज को प्रदान किए गए विभिन्न लाभों एवं सुविधाओं तथा संस्था की विद्यमानता के कारण समाज द्वारा वहन की गई विभिन्न लागतों तथा हानियों का वर्णन होता है।

वित्तीय विवरण की विशेषण तकनीकें ( Adjective Techniques of Financial Statement )

1. तुलनात्मक वित्तीय विवरण ( Comparative financial statements ) – तुलनात्मक वित्तीय विवरण किसी व्यवसाय की वित्तीय स्थिति के इस प्रकार बनाए गए विवरण होते हैं जिनकी सहायता से विभिन्न वित्तीय विवरणों में सन्निहित वित्तीय स्थिति के विभिन्न तत्वों पर विचार के लिए एकरूपता प्रदान की जा सके।

 किसी भी व्यवसायिक संस्था की वर्तमान वित्तीय स्थिति इतना महत्व नहीं रखती जितना उस संस्था का पिछला इतिहास। अतः ऐसे अध्ययन के लिए पिछले वर्षों की तुलना में वर्तमान के तत्वों को सम्मिलित करते हुए तैयार किए गए तुलनात्मक विवरण का महत्व बहुत बढ़ जाता है।

वित्तीय विश्लेषण हेतु निम्न तुलनात्मक विवरणों की रचना की जाती है -तुलनात्मक विवरण, तुलनात्मक लाभ हानि खाता, तुलनात्मक कार्यशील पूंजी का विवरण, तुलनात्मक लागत का विवरण, तुलनात्मक रोकड़ प्रवाह विवरण। व्यवहार में तुलनात्मक स्थिति विवरण तथा तुलनात्मक लाभ हानि अधिक प्रयोग होता है।

2. समानाकार वित्तीय विवरण ( Identical financial statement ) – तुलनात्मक वित्तीय विवरणों में विभिन्न मदों का कुल संपत्तियों या दायित्वों व पूंजी या शुद्ध विक्रय से संबंध तथा उन्हें प्रतिवर्ष होने वाले परिवर्तनों को नहीं दर्शाया जाता है। इस कमी के कारण एक संस्था के वित्तीय तत्वों की तुलना न तो उसी प्रकार के अन्य संस्थाओं से और नहीं संपूर्ण उद्योग से की जा सकती है।

इसी कमी को दूर करने के लिए समानाकार वित्तीय विवरणों का निर्माण किया जाता है। यदि स्थिति विवरण व आय विवरण के आंकड़ों को विश्लेषणात्मक प्रतिशतों के रूप में दर्शाया जाए अर्थात कुल संपतियों, कुल दायित्वों व स्वामियों की समता तथा कुल बिक्री के प्रतिशतों में तुलना के लिए एक समान आधार तैयार किया जाए तो इस प्रकार के प्रारूप में तैयार किए गए वित्तीय विवरणों को समानाकार वित्तीय विवरणों के नाम से जाना जाता है।

समानाकार विवरणों को संघटक प्रतिशत या शत-प्रतिशत विवरण के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि प्रत्येक विवरण का योग 100 हो जाता है तथा विवरण के प्रत्येक मदों को 100 के योग के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।

समानाकार वित्तीय विवरणों के निर्माण हेतु स्थिति विवरण की स्थिति में कुल संपत्तियों या कुल दायित्वों एवं स्वामी कोषों के योग को तथा आय विवरण की स्थिति में शुद्ध विक्रय को 100 मानकर उनकी विभिन्न मदों को प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है।

समानाकार वित्तीय विवरणों का प्रयोग लम्बवत तथा क्षैतिज दोनों ही प्रकार के विश्लेषण हेतु किया जाता है।लम्बवत विशेषण के अंतर्गत इसका प्रयोग एक कंपनी से दूसरी उसी प्रकार की कंपनी से तुलना या संबंधित उद्योग से तुलना में किया जाता है जबकि क्षैतिज विश्लेषण में इसका प्रयोग संघटक विश्लेषण या एक ही कंपनी के विभिन्न वर्षो में तुलना करती प्रवृत्ति अध्ययन के लिए किया जाता है।

 3. प्रवृत्ति विश्लेषण ( trend analysis ) –  व्यवसाय विशेष के संबंध में सही ज्ञान प्राप्त करने के लिए वित्तीय लेखों की एक श्रृंखला की आवश्यकता होती है जिनके आधार पर व्यवसाय की प्रवृत्ति के बारे में अनुमान लगाया जा सके। अनुपात विश्लेषण व तुलनात्मक वित्तीय विवरण, प्रवृति विश्लेषण में तो सहायक होते हैं परंतु इनके अतिरिक्त प्रवृत्ति विशेषण की कुछ अन्य निम्नलिखित विधियां भी है-

निरपेक्ष समंक चार्ट- साधारणतया व्यवसाय गृह अपने व्यवसाय की प्रवृत्ति को प्रदर्शित करने के लिए वार्षिक प्रकाशित लेखों के साथ साथ 10 वर्षीय सांख्यिकी सारांश भी प्रकाशित करते हैं। सारांश में विक्रय, लागत के विभिन्न मद, कार्यशील पूंजी, स्थाई सम्पतियां तथा स्थिति विवरण व लाभ हानि खाते से संबंधित सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं दी हुई होती है।

वित्तीय विश्लेषक इन 10 वर्षीय सांख्यिकीय सारांशों के आधार पर कंपनी के संबंध में धारणा बना सकता है तथा महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाल सकता है।

निरपेक्ष मूल्य परिवर्तन- इस विधि के अंतर्गत प्रवृत्ति अध्ययन के लिए किसी मद के मूल्यों की एक श्रृंखला प्राप्त की जाती है। मद के निरपेक्ष मूल्य की बिल्कुल पिछली अवधि के मूल्य से तुलना की जाती है तथा अंतर को धनात्मक अथवा ऋणात्मक त्मक चिन्हों के साथ दिखाया जाता है।

कमी – प्रवृत्ति विशेषण की यह विधि अत्यंत अपरिष्कृत है। विश्लेषक को इस विधि के अंतर्गत प्रवृत्ति अध्ययन के लिए ऋणात्मक व धनात्मक चिन्हों का ध्यान रखना होता है। इस विधि में प्रत्येक परिवर्तन का आधार बदलता रहता है, क्योंकि यह तुलना बिल्कुल पिछले वर्ष में की जाती है।

इस विधि में एक अन्य महत्वपूर्ण कमी यह रह जाती है कि अंतरों का सापेक्षिक महत्व स्पष्ट नहीं हो पाता है। जैसे 1000 रुपए पर ₹200 की वृद्धि तथा ₹20000 रुपये पर 200 की वृद्धि को एक जैसा ही महत्व मिलता है। अतः प्रवृत्ति विशेषण कि यह विधि अत्यंत प्रारंभिक व दोष युक्त है।

4. अनुपात विश्लेषण ( Ratio analysis ) – वर्तमान समय में वित्तीय विशेषण की तकनीकों में अनुपात विश्लेषण सर्वाधिक महत्वपूर्ण तथा सबसे अधिक प्रयुक्त तकनीक है। इसमें विभिन्न प्रकार के वित्तीय अनुपातो की गणना की जाती है। जिनके आधार पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले जाते हैं। इसके आधार पर तरलता, लाभदायकता, कुशलता आदि की जांच भी की जा सकती है।

5. कोष प्रवाह विश्लेषण ( Fund flow analysis ) –  किसी संस्था के दो स्थिति विवरणों के बीच संस्था के कोषों में परिवर्तन के अध्ययन के लिए बनाया गया विवरण कोष प्रवाह विवरण कहलाता है। कोष प्रवाह विवरण यह बताता है कि संस्था में कार्यशील पूंजी कोषों के विभिन्न स्रोत क्या रहे तथा इन कोषों का संस्था में किस प्रकार उपयोग किया गया है।

कार्यशील पूंजी कोषों की प्राप्ति व्यवसाय संचालन से लाभ, अंश पूंजी में वृद्धि, दीर्घकालीन ऋणों, स्थाई संपत्तियों व विनियोग के विक्रय से प्राप्त राशि व गैर-व्यापारिक प्राप्तियों आदि से होती है। कार्यशील पूंजी कोषों का उपयोग व्यवसाय संचालन से हानि, स्थाई संपत्तियों अथवा दीर्घकालीन विनियोगों के क्रय, स्थाई दायित्वों के भुगतान, अंश पूंजी के शोधन, लाभांश भुगतान व गैर व्यापारिक खर्चों व हानियों की पूर्ति आदि में किया जाता है।

6. रोकड़ प्रवाह विश्लेषण ( Cash flow analysis ) –  रोकड़ प्रवाह विवरण के अंतर्गत नकद के विभिन्न स्रोतों एवं उपयोगों का विश्लेषण किया जाता है। चालू सम्पत्तियों में नकद सबसे अधिक तरल संपत्ति होती है। अतः व्यवसाय प्रबंधकों यह जानकारी रखना अति आवश्यक है कि नकद कोषों के विभिन्न स्रोत क्या है तथा उनके स्रोतों का व्यवसाय में किस प्रकार उपयोग किया गया है।

रोकड़ प्रवाह विवरण एक विशिष्ट प्रकार का विवरण है जो दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, त्रैमासिक, वार्षिक या अन्य किसी निश्चित समय के अन्तर से तैयार किया जाता है। यह विवरण किन्हीं दो अवधियों के मध्य व्यवसाय के नकद शेष में हुए परिवर्तन के कारणों की व्याख्या करता है।

7. सम विच्छेद विश्लेषण ( Even severance analysis )- सम विच्छेद विश्लेषण एक अल्पकालीन अवधारणा है। इसके अंतर्गत लागतों को स्थायी और परिवर्तनशील में विभक्त किया जाता है तथा लागत, लाभ व विक्रय के मध्य संबंध स्थापित किया जाता है।

सम विच्छेद बिन्दु उस विक्रय स्तर को कहते हैं जिस पर उत्पादक को न तोलाभ होता है न हानि। सम विच्छेद विश्लेषण में सूचनाओं को इस प्रकार प्रदर्शित किया जाता है जिससे संस्था के प्रबंधकों को लाभ नियोजन, लागत नियंत्रण तथा विभिन्न प्रबंधकीय निर्णयों में सहायता मिलती है। इस तकनीक में लागत, लाभ एवं उत्पादन सूचनाओं का निर्वचन कर के प्रबंधक वस्तु के उत्पादन, मूल्य निर्धारण तथा लाभ नियोजन के संबंध में निर्णय ले सकते हैं।

 

Specially thanks to Post Writer

P K Nagauri

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